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इंदौर-भोपाल बस में 5.32 करोड़ की एम्फेटामाइन जब्त: सोनकच्छ टोल पर डीआरआई ने दबोचा तस्कर, बैग से निकले 6.64 किलो नशा

सांकेतिक चित्र: सोनकच्छ टोल प्लाजा पर रुकी अंतरराज्यीय बस सांकेतिक चित्र

भोपाल ब्यूरो

सार: राजस्व आसूचना निदेशालय ने दिल्ली से भोपाल आ रही एक यात्री बस से 6.64 किलोग्राम एम्फेटामाइन जब्त की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 5.32 करोड़ रुपये आंकी गई है। इंदौर भोपाल बस एम्फेटामाइन की यह खेप गुरुवार दोपहर सोनकच्छ टोल प्लाजा पर पकड़ी गई, जहां डीआरआई की टीम ने बस को रोककर तलाशी ली। कार्रवाई में एक संदिग्ध तस्कर को गिरफ्तार किया गया है, जो पहले से बेंगलुरु के एक अन्य मामले में जमानत पर बाहर था।

खुफिया सूचना पर सोनकच्छ टोल पर घेराबंदी

डीआरआई को सूचना मिली थी कि एक तस्कर दिल्ली से बस में बैठकर भोपाल आ रहा है और उसके साथ मादक पदार्थों की बड़ी खेप है। सूचना के आधार पर डीआरआई की टीम ने इंदौर-भोपाल मार्ग पर सोनकच्छ टोल प्लाजा पर निगरानी रखी। गुरुवार दोपहर जब दिल्ली से भोपाल आ रही बस टोल प्लाजा पर पहुंची, तो अधिकारियों ने उसे रुकवाया और तलाशी शुरू की। बस में सवार संदिग्ध यात्री को पहचानकर अलग किया गया और उसके सामान की जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार पूरी कार्रवाई खुफिया सूचना के आधार पर योजनाबद्ध तरीके से की गई थी, ताकि तस्कर को भागने का मौका न मिले। टोल प्लाजा पर हुई इस कार्रवाई के दौरान बस में सवार अन्य यात्रियों को कोई परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखा गया। डीआरआई के अधिकारी ने शुक्रवार को इस कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की।

हल्के भूरे बैग से निकले चांदी के तीन पैकेट

तलाशी के दौरान संदिग्ध के पास मौजूद हल्के भूरे रंग के डफल बैग से चमकीले चांदी जैसे रंग के प्लास्टिक के तीन पैकेट मिले। इन पैकेटों में सफेद रंग का क्रिस्टलीय पदार्थ भरा था, जिसका कुल वजन 6.642 किलोग्राम निकला। मौके पर ही एनडीपीएस फील्ड टेस्ट किट से जांच की गई, जिसमें पदार्थ के एम्फेटामाइन होने की पुष्टि हुई। जब्त की गई एम्फेटामाइन की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में कीमत 5.32 करोड़ रुपये आंकी गई है। तलाशी में आरोपी के सामान से 48,400 रुपये नकद भी बरामद हुए। जांच एजेंसी का कहना है कि यह नकदी नशे के कारोबार से जुड़ी रकम बताई गई है। बरामद नकदी को भी जब्त कर लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार पैकेटों की बनावट और पैकिंग से लगता है कि खेप को लंबी दूरी तक ले जाने के लिए तैयार किया गया था।

सांकेतिक चित्र: रात में राजमार्ग पर चलती अंतरराज्यीय बस
सांकेतिक चित्र

गिरफ्तार आरोपी पहले से जमानत पर बाहर था

जांच में यह बात सामने आई है कि इंदौर भोपाल बस एम्फेटामाइन मामले में गिरफ्तार आरोपी बेंगलुरु पुलिस द्वारा दर्ज एक अन्य एनडीपीएस मामले में जमानत पर बाहर था। इस तथ्य ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि आरोपी नशे के कारोबार से पहले से जुड़ा हुआ था। आरोपी को स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है। डीआरआई की टीम अब आरोपी से पूछताछ कर रही है, ताकि खेप के स्रोत, उसके गंतव्य और इससे जुड़े नेटवर्क का पता लगाया जा सके। जांच के दायरे में यह भी है कि नकदी किससे मिली और खेप भोपाल पहुंचने के बाद कहां जानी थी। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ से तस्करी के इस रूट और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है।

बसें क्यों बन रही हैं तस्करों की पसंद

अंतरराज्यीय बसें तस्करों के लिए नशे की खेप ले जाने का एक आसान जरिया बनती जा रही हैं, क्योंकि बसों में बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं और निजी वाहनों के मुकाबले उनकी जांच कम होती है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश में डीआरआई की टीमों को पिछले कुछ समय में बसों से नशे की बड़ी खेपें मिली हैं। करीब दो सप्ताह पहले 20 अक्टूबर को भोपाल के अंतरराज्यीय बस अड्डे पर एक यात्री के पास से 7.32 करोड़ रुपये कीमत की क्रिस्टलीय मेथाम्फेटामाइन जब्त की गई थी। उससे पहले 21 सितंबर को इंदौर में तीन इमली चौराहे के पास एक महिला को पुणे जाने वाली बस में सवार होने से पहले पकड़ा गया था, जिसके बैग से 1.120 किलोग्राम एम्फेटामाइन, 296 ग्राम एम्फेटामाइन-एमडीएमए की गोलियां और 10 ग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद हुआ था, जिसकी कीमत करीब 1.19 करोड़ रुपये आंकी गई थी। एक अक्टूबर को भी इंदौर में डीआरआई और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की संयुक्त टीम ने एक एसयूवी से 7.116 किलोग्राम एम्फेटामाइन जब्त की थी, जिसकी कीमत 5.69 करोड़ रुपये थी और तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इन कार्रवाइयों से साफ है कि तस्कर दिल्ली से दक्षिण और पश्चिम भारत की ओर जाने वाले रास्तों पर बसों और निजी वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

एनडीपीएस कानून के तहत कार्रवाई और आगे का रास्ता

एम्फेटामाइन एक कृत्रिम मन:प्रभावी पदार्थ है, जिसका निर्माण और तस्करी स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के तहत गंभीर अपराध है। इस कानून के तहत मादक पदार्थों की तस्करी, भंडारण और परिवहन पर कड़ी सजा का प्रावधान है। डीआरआई देश की शीर्ष तस्करी-रोधी खुफिया एजेंसी है, जो सीमा शुल्क और राजस्व से जुड़े अपराधों के साथ-साथ मादक पदार्थों की तस्करी पर भी नजर रखती है। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद अब जांच का फोकस तीन सवालों पर है — इंदौर भोपाल बस एम्फेटामाइन की खेप कहां से आई, इसे किसे सौंपा जाना था और इसके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा है। बरामद नकदी की कड़ी भी जांच में अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे लेन-देन के रास्ते का पता चल सकता है। आरोपी की बेंगलुरु वाले मामले से जुड़ी जानकारी भी जांच एजेंसियों के साथ साझा की जा रही है, ताकि यह समझा जा सके कि क्या दोनों मामले एक ही नेटवर्क से जुड़े हैं।

त्योहारी मौसम में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

दीपावली के दौरान प्रदेशभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि त्योहारों के समय कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से कोई समझौता न हो। इसी कड़ी में प्रदेश की जेलों में भी अलर्ट जारी किया गया है और कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त कर रातभर पहरा बढ़ा दिया गया है। त्योहारी सीजन में बाजारों में भीड़, यात्रियों की आवाजाही और माल की ढुलाई बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाकर तस्कर भी सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में डीआरआई की यह कार्रवाई यह बताती है कि सुरक्षा एजेंसियां बसों और राजमार्गों पर भी नजर रख रही हैं। सोनकच्छ टोल प्लाजा जैसे अहम पड़ावों पर निगरानी से तस्करों के लिए रास्ता कठिन होता जा रहा है। आने वाले दिनों में दीपावली और उसके बाद गोवर्धन पूजा और भाई दूज तक यह सतर्कता जारी रहने की उम्मीद है।

मध्य प्रदेश में नशे के खिलाफ लगातार कार्रवाई

इंदौर भोपाल बस एम्फेटामाइन की ताजा जब्ती के साथ पिछले डेढ़ महीने में मध्य प्रदेश में डीआरआई की यह चौथी बड़ी कार्रवाई है, जिसमें बसों या वाहनों से करोड़ों रुपये की सिंथेटिक दवाएं जब्त की गई हैं। सितंबर और अक्टूबर में इंदौर और भोपाल में हुई कार्रवाइयों में कुल मिलाकर 15 किलोग्राम से अधिक एम्फेटामाइन और मेथाम्फेटामाइन जब्त हो चुकी है, जिसकी कुल कीमत 14 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इन कार्रवाइयों में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए हैं और जांच जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिंथेटिक नशे की तस्करी पर रोक के लिए खुफिया सूचना, राजमार्गों पर निगरानी और एजेंसियों के बीच समन्वय सबसे अहम हथियार हैं। सोनकच्छ टोल प्लाजा पर हुई ताजा कार्रवाई इसी कड़ी का हिस्सा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पूछताछ से इस नेटवर्क के बारे में क्या जानकारी सामने आती है और क्या इससे जुड़े अन्य लोगों तक भी जांच पहुंचती है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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