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भोपाल में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म: मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद 10 में से 8 मांगों पर सहमति, नियमितीकरण के लिए कमेटी

सांकेतिक चित्र: सुबह सड़क की सफाई करते सफाई कर्मचारी सांकेतिक चित्र
भोपाल ब्यूरो

सार: भोपाल सफाई कर्मचारी हड़ताल खत्म हो गई है — तीन दिन से ठप पड़ी सफाई व्यवस्था शनिवार सुबह से फिर पटरी पर लौट आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव से शुक्रवार देर रात हुई मुलाकात के बाद सफाई कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल खत्म करने का ऐलान कर दिया। कर्मचारियों की 10 मांगों में से 8 पर सहमति बनी है, जबकि नियमितीकरण के मुद्दे पर कमेटी गठित करने का फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने एक महीने के भीतर मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

भोपाल सफाई कर्मचारी हड़ताल खत्म: शुक्रवार देर रात मुख्यमंत्री निवास पर बनी सहमति

अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट और प्रदेश मंत्री वसी सुल्तान कर रहे थे। बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। संगठन के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और प्रमुख मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसी मुलाकात के बाद शुक्रवार देर रात हड़ताल खत्म करने का ऐलान कर दिया गया।

इससे पहले दो-तीन दिन से बातचीत का दौर चल रहा था। मंत्री कृष्णा गौर, महापौर मालती राय, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के साथ भी यूनियन प्रतिनिधियों की बैठकें हुई थीं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के अनुसार, मुख्यमंत्री से सीधी बातचीत के बाद ही मांगों पर सहमति का रास्ता खुला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनकी समस्याओं का समाधान कराया है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं हो रहा था, इसलिए उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा था।

10 मांगों में से 8 पर सहमति, नियमितीकरण पर कमेटी

बैठक में कर्मचारी संगठनों की ओर से कुल 10 मांगें रखी गई थीं। इनमें से 8 मांगों पर सहमति बन गई है। सबसे अहम और पेचीदा मुद्दा नियमितीकरण का था, जिस पर सीधे फैसला लेने के बजाय एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने का फैसला लिया गया है। कमेटी में यूनियन के पदाधिकारी भी शामिल रहेंगे, ताकि कर्मचारियों का पक्ष भी कमेटी के सामने रखा जा सके। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि कमेटी के जरिए कर्मचारियों की मांगों पर काम कराया जाएगा।

सांकेतिक चित्र: बाजार क्षेत्र में सफाई अभियान चलाते सफाई कर्मचारी
सांकेतिक चित्र

सरकार की ओर से एक महीने के भीतर चार प्रमुख मांगों पर प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया गया है। संगठन के अनुसार, नियमितीकरण की प्रक्रिया शनिवार से ही शुरू करने की बात कही गई है। यूनियन नेताओं का कहना है कि कमेटी में उनके प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना उनकी बड़ी जीत है, क्योंकि अब मांगों पर फैसला लेते समय कर्मचारियों की राय भी सुनी जाएगी। हालांकि नियमितीकरण का अंतिम फैसला कमेटी की सिफारिशों के बाद ही होगा, इसलिए इस मुद्दे पर अभी अंतिम रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता।

वेतन 10,500 से बढ़कर 18 से 20 हजार रुपये होगा

समझौते के मुताबिक, 25 दिन काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन अब 18 से 20 हजार रुपये तक होगा। संगठन के अनुसार, ऐसे कर्मचारियों को अभी हर महीने केवल 10,500 रुपये मिलते हैं। यूनियन की मांग थी कि यह राशि बढ़ाकर 25,000 रुपये की जाए, क्योंकि 10,000 रुपये के मानदेय में परिवार चलाना संभव नहीं है। सहमति के बाद वेतन में बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो गया है।

वहीं, 29 दिन काम करने वाले और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। इसके लिए भी कमेटी बनाई जाएगी और पूरी प्रक्रिया एक महीने में पूरी करने की बात कही गई है। संगठन के अनुसार, विनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी समझौते में शामिल है। जिन दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवा अवधि दस वर्ष की निर्धारित सीमा में नहीं आती है, उनके वेतन में भी बढ़ोतरी का आश्वासन दिया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन बढ़ने से उनके परिवारों को सीधी राहत मिलेगी।

शनिवार सुबह से शहर में फिर चली झाड़ू

हड़ताल खत्म होने के साथ ही कर्मचारियों ने काम संभाल लिया। शुक्रवार रात से ही शहर में रात्रिकालीन सफाई अभियान शुरू कर दिया गया था और शनिवार सुबह से सफाई का काम पूरी तरह शुरू हो गया। तीन दिन से जमा कचरे को हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। शनिवार को प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, महापौर मालती राय और निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने 10 नंबर मार्केट पहुंचकर खुद सड़कों पर झाड़ू लगाई और सफाई अभियान चलाया। प्रशासन का कहना है कि शहर की सफाई और जलापूर्ति व्यवस्था अब पूरी तरह सामान्य हो चुकी है। त्योहार के दिनों में शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए निगम की टीमों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। लोगों को भी अपील की गई है कि वे कचरा निर्धारित स्थानों पर ही डालें, ताकि सफाई व्यवस्था बनी रहे।

तीन नवंबर से कैसे शुरू हुआ था आंदोलन

सफाई कर्मचारियों का आंदोलन तीन नवंबर को शुरू हुआ था। कर्मचारियों ने नीलम पार्क में धरना देकर वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की मांग उठाई थी और चार नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी थी। इसके बाद कर्मचारी काम बंद कर हड़ताल पर चले गए। तीन दिन तक शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप रही और सड़कों पर हजारों टन कचरा जमा हो गया।

हड़ताल के दौरान शहर के कई इलाकों में कचरे के ढेर लग गए थे। त्योहार के दिनों में शहर की हालत खराब होने लगी थी, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बाजारों में भी गंदगी फैलने लगी थी। इसी बीच संगठन के नेताओं ने सरकार से बातचीत का रास्ता खुला रखा और अंत में मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद समझौता हो गया। कर्मचारियों का कहना है कि वे शहर की सफाई के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, लेकिन उनकी मांगों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

दिवाली से पहले मिली राहत, अब आगे क्या

हड़ताल ऐसे समय खत्म हुई है, जब शहर दीपावली की तैयारियों में जुटा है। त्योहार के ठीक पहले सफाई व्यवस्था ठप होना शहर के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया था। बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है और ऐसे में गंदगी से त्योहार का माहौल खराब हो रहा था। अब सफाई शुरू होने से लोगों को बड़ी राहत मिली है।

आगे की नजर कमेटी की कार्यवाही पर रहेगी। संगठन का कहना है कि एक महीने के भीतर मांगों पर कार्रवाई शुरू होनी है और कमेटी में उनके प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। यदि तय समय में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती है, तो संगठन फिर से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा सकता है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बार समझौते पर अमल होगा और उनकी लंबे समय से लंबित मांगें पूरी होंगी। सरकार की ओर से भी कहा गया है कि कमेटी निर्धारित समयसीमा में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।

क्यों अहम है यह समझौता

भोपाल नगर निगम के सफाई कर्मचारी शहर की रोजमर्रा की सफाई व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके काम बंद करते ही तीन दिन में शहर की हालत सामने आ गई थी। यह समझौता इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसमें वेतन वृद्धि के साथ-साथ नियमितीकरण जैसे लंबे समय से लटके मुद्दे पर भी कमेटी के जरिए आगे बढ़ने का रास्ता तय हुआ है।

नगर निगम एक स्वायत्त संस्था है और उसकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए वेतन और भत्तों का खर्च आंतरिक स्रोतों से वहन किए जाने की बात भी सामने आई है। जानकारों का मानना है कि दिवाली के मुहाने पर इस बड़े जन-आक्रोश को भांपते हुए सरकार ने तत्काल उच्चस्तरीय कमेटी बनाकर एक महीने में समाधान का रास्ता निकाला है। इससे नागरिकों को यह स्पष्ट संदेश मिला है कि अब शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और आगामी त्योहार साफ-सुथरे माहौल में मनाए जा सकेंगे।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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