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भोपाल में छठ महापर्व की तैयारियां तेज: कमला पार्क घाट पर 2100 दीपों का दीपदान, 51 किलो गुलाब की पुष्पवर्षा; इंदौर में स्थायी घाट की मांग

भोपाल छठ पूजा 2026 — सांकेतिक चित्र: सूर्यास्त के समय घाट पर अर्घ्य का सूप और जलते दीये सांकेतिक चित्र
भोपाल ब्यूरो

सार: भोपाल छठ पूजा 2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं। भोजपुरी समाज और भोजपुरी एकता मंच ने 13 से 16 नवंबर तक चलने वाले चार दिवसीय महापर्व के लिए प्रमुख घाटों पर आयोजन की रूपरेखा तय कर दी है। कमला पार्क स्थित शीतलदास की बगिया घाट पर 2100 दीपों का दीपदान और 51 किलो गुलाब की पंखुड़ियों से पुष्पवर्षा होगी, जबकि प्रेमपुरा और नीलबड़ घाट पर भी तैयारियां जोरों पर हैं।

राजधानी भोपाल में लोक आस्था के महापर्व छठ की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार पर्व 13 नवंबर को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा और 16 नवंबर को उषा अर्घ्य के बाद पारण के साथ संपन्न होगा। शहर के प्रमुख घाटों पर आयोजन की तैयारियां चल रही हैं और घाट समितियों के साथ नगर निगम भी व्यवस्थाओं में जुटा है। भोजपुरी समाज भोपाल ने चार दिवसीय पर्व का कार्यक्रम घोषित कर दिया है, जबकि भोजपुरी एकता मंच कमला पार्क घाट पर मुख्य आयोजन की तैयारी कर रहा है। दीपावली के बाद छठ का यह पर्व भोपाल में रहने वाले भोजपुरी समाज के लिए सबसे बड़ा आयोजन माना जाता है और इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

भोपाल छठ पूजा 2026: कमला पार्क घाट पर 2100 दीपों का दीपदान

कमला पार्क स्थित शीतलदास की बगिया घाट पर इस बार छठ का मुख्य आयोजन भव्य रूप से किया जाएगा। भोजपुरी एकता मंच की ओर से यहां घाट को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। पूरे घाट को पीले रंग के कपड़ों से सजाया जाएगा और जगह-जगह झंडे लगाए जाएंगे। केले के पेड़ों और आम के पत्तों से तोरण द्वार बनाए जाएंगे। आयोजन के दौरान घाट पर 2100 दीप जलाकर दीपदान किया जाएगा और 51 किलो गुलाब की पंखुड़ियों से पुष्पवर्षा होगी। पूजा के समापन पर आतिशबाजी भी की जाएगी और अर्घ्य के बाद श्रद्धालुओं के लिए आहार की व्यवस्था रहेगी। श्रद्धालुओं के लिए गाय के कच्चे दूध की व्यवस्था भी की गई है और आयोजन में नौका विहार की सुविधा भी रहेगी।

भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद ने बताया कि इस बार घाट की सजावट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव के साथ पर्व मना सकें। समिति ने कार्यक्रम में अतिथियों को आमंत्रित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। संस्था के संरक्षक चेतन सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल जिला प्रभारी मंत्री चेतन कुमार कश्यप को आमंत्रित किया है। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद के साथ विमल कुमार सिंह, मोहन जायसवाल और अरुण ओझा भी मौजूद रहे।

प्रेमपुरा और नीलबड़ घाट पर भी तैयारियां तेज

कमला पार्क के अलावा प्रेमपुरा, नीलबड़ और बड़ा तालाब की शीतलदास की बगिया सहित शहर के प्रमुख स्थानों पर आयोजन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। प्रेमपुरा स्थित छठ माई मंदिर में पूजा-अर्चना कर आयोजन के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने और सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। इस दौरान प्रेमपुरा छठ घाट समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह, सचिव चंद्रभान राय, लक्ष्मण गिरी और अर्जुन यादव सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

सांकेतिक चित्र: छठ पूजा का प्रसाद — ठेकुआ, फल, गन्ना और दीये
सांकेतिक चित्र

प्रमुख घाटों पर आयोजन को लेकर समितियां तैयारियों में जुटी हैं। घाटों की व्यवस्था, साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन के साथ भी समन्वय किया जाएगा। बड़ा तालाब स्थित शीतलदास की बगिया में भी छठ महोत्सव का आयोजन होगा और मध्य प्रदेश पर्यटन की सूची में यहां 15 और 16 नवंबर को छठ महोत्सव का उल्लेख है। भोपाल नगर निगम भी आयोजन को सफल बनाने के लिए हर तरह की तैयारी कर रहा है। आयोजन से पहले नगर निगम के सहयोग से शीतलदास की बगिया सहित शहर के विभिन्न छठ घाटों की सफाई कराई जाएगी और घाटों की मरम्मत और रंग-रोगन का काम भी जल्द शुरू होगा।

कॉलोनियों में बन रहे कुंड, महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था

इस बार प्रमुख घाटों के अलावा शहर की उन कॉलोनियों में भी श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है, जहां भोजपुरी समाज के लोग रहते हैं। कोकता बाईपास कॉलोनी में कुंड बनाने का काम चल रहा है। छठ घाट समिति के सचिव चंद्रभान राय ने बताया कि कोकता बाईपास कॉलोनी से प्रमुख घाट की दूरी अधिक है, इसलिए वहां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कुंड बनाया जा रहा है। इसी तरह अन्य कॉलोनियों में भी कुंड तैयार किए जा रहे हैं, ताकि लोगों को अर्घ्य देने के लिए दूर नहीं जाना पड़े।

भोजपुरी समाज भोपाल की बैठक में भोपाल छठ पूजा 2026 के आयोजन और तैयारियों को लेकर चर्चा की गई। समाज ने चारों दिनों के अनुष्ठान का कार्यक्रम भी घोषित कर दिया है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती उपवास रखकर छठी मैया और सूर्यदेव की उपासना करेंगे। भोपाल में प्रमुख घाटों पर आयोजन के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कॉलोनियों में भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं और घाट पर महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी।

चार दिन का कार्यक्रम: नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक

भोपाल छठ पूजा 2026 चार दिनों तक मनाई जाएगी। पहले दिन 13 नवंबर को नहाय-खाय होगा, जिसमें व्रती पवित्र स्नान के बाद घर की साफ-सफाई करते हैं और कद्दू-भात जैसे सात्विक भोजन का प्रसाद ग्रहण करते हैं। दूसरे दिन 14 नवंबर को खरना होगा, जिसमें दिन भर व्रत रखकर शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाता है और इसके बाद लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। तीसरे दिन 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा, जो पर्व का मुख्य दिन माना जाता है। इस दिन व्रती बांस की टोकरियों में ठेकुआ, गन्ना, ताजे फल और मौसमी फसलें सजाकर घाट पर पहुंचते हैं और डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। चौथे दिन 16 नवंबर को उषा अर्घ्य के साथ पर्व का समापन होगा, जिसमें उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पारण किया जाता है।

अर्घ्य सूर्यास्त और सूर्योदय के समय दिया जाता है, इसलिए श्रद्धालुओं को अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की जांच कर लेनी चाहिए। भोपाल में घाट समितियां आयोजन के समय और व्यवस्थाओं की जानकारी भी साझा कर रही हैं। चारों दिन के कार्यक्रम की जानकारी भोजपुरी समाज भोपाल की ओर से पहले ही घोषित की जा चुकी है, ताकि श्रद्धालु अपनी तैयारियां समय पर पूरी कर सकें।

छठ का महत्त्व: सूर्यदेव और छठी मैया की उपासना

छठ पूजा सूर्यदेव और छठी मैया को समर्पित है और इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें लगभग 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखा जाता है। यह पर्व बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित देश के लगभग सभी हिस्सों में मनाया जाता है। मान्यता है कि सूर्य की उपासना से परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी उम्र की कामना पूरी होती है। व्रती महिलाएं अपने परिवार के सुख और स्वास्थ्य के लिए यह कठिन व्रत रखती हैं और घाट पर लोकगीत गाकर छठी मैया से आभार व्यक्त करती हैं।

पर्व में बांस की टोकरी और सूप का विशेष महत्त्व है। इसमें ठेकुआ, गन्ना, नारियल, फल और मौसमी फसलें सजाई जाती हैं। सूर्य को अर्घ्य देते समय व्रती पानी में खड़े होकर प्रार्थना करते हैं। यह पर्व प्रकृति और सूर्य के प्रति कृतज्ञता का भी प्रतीक माना जाता है, क्योंकि सूर्य को जीवन और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। भोपाल में भी यह पर्व अब केवल भोजपुरी समाज तक सीमित नहीं रहा है और शहर के अन्य समुदायों के लोग भी इसमें शामिल होने लगे हैं।

इंदौर में स्थायी छठ घाट की मांग फिर उठी

भोपाल में तैयारियां तेज होने के बीच इंदौर में स्थायी छठ घाट की मांग फिर उठी है। पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान मध्य प्रदेश ने मुख्यमंत्री को स्मरण-पत्र भेजकर इंदौर के तालाबों पर स्थायी छठ घाट विकसित करने की मांग दोहराई है। संस्था के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 मार्च 2025 को बिहार दिवस कार्यक्रम में इंदौर के तीन तालाबों पर छठ पूजा के लिए घाट विकसित करने की घोषणा की थी। इसके बाद इंदौर विकास प्राधिकरण के बजट में सुपर कॉरिडोर के पास स्थित तिगरिया बादशाह तालाब के सौंदर्यीकरण और छठ घाट निर्माण के लिए प्रावधान भी किया गया था।

रिपोर्टों के अनुसार, घोषणा और बजट में प्रावधान के बावजूद परियोजना की मौजूदा स्थिति को लेकर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। संस्था ने 25 जून 2025 को तत्कालीन इंदौर कलेक्टर को पत्र लिखकर तिगरिया बादशाह तालाब पर स्थायी छठ घाट विकसित करने की मांग उठाई थी और अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर 17 सितंबर 2026 को सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई थी। संस्था की मांग है कि इंदौर विकास प्राधिकरण, इंदौर नगर निगम और जिला प्रशासन आपसी समन्वय से तिगरिया बादशाह, अन्नपूर्णा, पिपलियाहाना और निपानिया तालाबों पर स्थायी छठ घाट विकसित करें। संस्था का कहना है कि तिगरिया बादशाह तालाब को छठ कॉरिडोर के रूप में तैयार किया जाए, जिससे आने वाले वर्षों में यहां बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन भी हो सकें।

सांस्कृतिक कार्यक्रम: बिहार-बनारस के कलाकार देंगे प्रस्तुति

छठ पूजा के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। भोजपुरी साहित्य अकादमी के सहयोग से होने वाले कार्यक्रम में बिहार के गायक हसनाथ मिश्रा उर्फ मिठू मिश्रा और बनारस के सक्षम शर्मा अपनी प्रस्तुतियां देंगे। घाट पर नौका विहार की सुविधा रहेगी और पूजा के समापन पर आतिशबाजी भी की जाएगी। अर्घ्य के बाद श्रद्धालुओं के लिए आहार की व्यवस्था रहेगी।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भोजपुरी लोक संस्कृति को भी मंच दिया जाएगा। छठ के लोकगीत इस पर्व की पहचान माने जाते हैं और घाटों पर इन गीतों की गूंज पूरे आयोजन को विशेष बना देती है। आयोजकों का कहना है कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे और इन कार्यक्रमों के जरिए युवा पीढ़ी को भी अपनी परंपरा से जोड़ा जाएगा।

श्रद्धालुओं के लिए जरूरी जानकारी

भोपाल छठ पूजा 2026 में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को घाट समितियों की ओर से जारी कार्यक्रम की जानकारी पहले से देख लेनी चाहिए। अर्घ्य का समय सूर्यास्त और सूर्योदय से जुड़ा होता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की जांच करना सही रहेगा। घाटों पर भीड़ अधिक होने की संभावना है, इसलिए श्रद्धालुओं को समय पर पहुंचने की सलाह दी जाती है। घाट समितियां प्रशासन के साथ समन्वय कर साफ-सफाई, महिलाओं की सुविधाओं और भीड़ प्रबंधन की तैयारी कर रही हैं।

दीपावली के बाद छठ का यह पर्व भोपाल और इंदौर सहित पूरे प्रदेश में भोजपुरी समाज के लिए विशेष महत्त्व रखता है। गोवर्धन पूजा के बाद आने वाले इस पर्व की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं और घाटों पर आयोजन की रूपरेखा लगभग तय हो चुकी है। श्रद्धालु अपने-अपने क्षेत्रों के घाटों और कॉलोनियों में बनाए गए कुंडों पर अर्घ्य दे सकेंगे। आयोजन समितियों का कहना है कि पर्व को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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