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नीमच में तैयार एशिया के सबसे बड़े हाइड्रो पावर प्लांट में मार्च से बनेगी 2,000 मेगावाट बिजली: दिसंबर में चलेगी पहली टरबाइन

सांकेतिक चित्र: गांधी सागर बांध पर हाइड्रो पावर प्लांट सांकेतिक चित्र

इंदौर ब्यूरो

सार: मध्य प्रदेश के नीमच जिले में गांधी सागर बांध पर 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बना एशिया के सबसे बड़े हाइड्रो पावर प्लांट में से एक तैयार हो गया है। मुख्यमंत्री ने इंदौर में बताया कि दिसंबर में इसकी पहली टरबाइन चालू हो जाएगी और अगले साल मार्च तक यह प्लांट पूरी 2,000 मेगावाट क्षमता से बिजली बनाने लगेगा।

मध्य प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। नीमच जिले में गांधी सागर बांध पर 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से एशिया के सबसे बड़े हाइड्रो पावर प्लांट में से एक बनकर तैयार हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान नीमच हाइड्रो पावर प्लांट के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रदेश की ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ औद्योगिक क्षेत्र की आवश्यकताओं की पूर्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस परियोजना से मध्य प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी।

यह प्लांट पारंपरिक पनबिजली संयंत्रों से अलग तकनीक पर काम करेगा। इसमें एक ही पानी को बार-बार इस्तेमाल करके बिजली बनाई जाएगी, जिससे पानी की एक भी बूंद व्यर्थ नहीं होगी। दिन के समय जब सौर ऊर्जा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होती है, तब बड़े मोटर पंपों से निचले जलाशय का पानी 31 मीटर ऊंचे पहाड़ पर बने ऊपरी बांध में स्टोर किया जाएगा। रात में जब बिजली की मांग बढ़ती है, तब इसी पानी को छोड़कर टरबाइन चलाई जाएंगी और बिजली बनाई जाएगी। इस तरह यह प्लांट दिन की सौर ऊर्जा को रात की बिजली में बदलने का काम करेगा।

इंदौर में मुख्यमंत्री ने दी जानकारी

मुख्यमंत्री गुरुवार को इंदौर दौरे पर थे। उन्होंने इंदौर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान बताया कि नीमच जिले में एक निजी कंपनी द्वारा बनाया जा रहा जलविद्युत संयंत्र तैयार है और अगले साल मार्च से इसमें बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एशिया में अपनी तरह के सबसे बड़े संयंत्रों में से एक इस परियोजना की एक टरबाइन दिसंबर में चालू हो जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, 2,000 मेगावाट की इस परियोजना के अगले साल मार्च तक पूरी तरह से चालू हो जाने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाएगी और राज्य को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान देगी। उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग जगत के सभी सेक्टर के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का यह प्लांट महत्वपूर्ण साबित होगा। प्रदेश में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है और ऐसे में इतनी बड़ी क्षमता का संयंत्र तैयार होना राज्य के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

इंदौर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने डेली कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी मुलाकात की। यह मुलाकात करीब एक घंटे तक चली। इस मुलाकात के बारे में राज्य सरकार या संघ की ओर से कोई विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई। संघ की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक 2 से 4 नवंबर तक डेली कॉलेज में ही आयोजित हुई थी, जिसमें मोहन भागवत जी सहित संघ परिवार के करीब 400 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।

पंप स्टोरेज तकनीक: दिन में पानी स्टोर, रात में बिजली

गांधी सागर बांध पर बना नीमच हाइड्रो पावर प्लांट पंप स्टोरेज तकनीक पर आधारित है। पारंपरिक पनबिजली संयंत्रों में नदी के बहते पानी से टरबाइन चलाकर बिजली बनाई जाती है, लेकिन इस परियोजना में पानी को बार-बार री-सर्कुलेट किया जाएगा। दिन में सौर ऊर्जा से चलने वाले बड़े मोटर पंप निचले जलाशय का पानी ऊपर बने बांध तक पहुंचाएंगे। शाम और रात को जब बिजली की मांग सबसे अधिक होती है, तब ऊपरी बांध से पानी नीचे छोड़ा जाएगा और टरबाइनें बिजली बनाएंगी।

सांकेतिक चित्र: हाइड्रो पावर प्लांट की टरबाइन इकाई
सांकेतिक चित्र

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें पानी की बर्बादी नहीं होती। एक ही पानी बार-बार इस्तेमाल होता है। साथ ही, यह तकनीक सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी कमजोरी को भी दूर करती है। सौर ऊर्जा दिन में मिलती है, लेकिन बिजली की मांग शाम को सबसे अधिक होती है। पंप स्टोरेज प्लांट दिन की अतिरिक्त सौर ऊर्जा को संग्रहित करके रात की मांग पूरी करने में मदद करता है। इसीलिए ऐसे संयंत्रों को भविष्य की बिजली व्यवस्था की रीढ़ माना जा रहा है।

परियोजना में ऊपरी बांध 31 मीटर ऊंचे पहाड़ पर बनाया गया है। इतनी ऊंचाई से गिरता पानी टरबाइनों को तेज गति से घुमाता है, जिससे बड़ी मात्रा में बिजली बनती है। परियोजना की कुल क्षमता 2,000 मेगावाट है, जो इसे एशिया के सबसे बड़े पंप स्टोरेज संयंत्रों में से एक बनाती है।

दिसंबर में पहली टरबाइन, मार्च तक पूर्ण क्षमता

परियोजना के काम की समय-सीमा भी तय हो गई है। नीमच हाइड्रो पावर प्लांट की एक टरबाइन दिसंबर माह से प्रारंभ हो जाएगी। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य टरबाइनें भी चालू की जाएंगी। लगभग 2,000 मेगावाट क्षमता वाला यह हाइड्रो पावर प्लांट मार्च तक पूरी तरह शुरू हो जाएगा। मार्च से इसके पूरी गति से बिजली बनाने की उम्मीद है।

दिसंबर में पहली टरबाइन के चालू होने के साथ ही संयंत्र से बिजली उत्पादन की शुरुआत हो जाएगी। इसके बाद अगले तीन महीनों में शेष क्षमता को चरणबद्ध तरीके से जोड़ा जाएगा। मार्च तक जब प्लांट पूरी क्षमता से चलने लगेगा, तब यह मध्य प्रदेश के बिजली तंत्र को बड़ी मजबूती देगा। गर्मी के महीनों में जब बिजली की मांग सबसे अधिक होती है, तब तक यह संयंत्र पूरी तरह तैयार रहेगा।

6,000 करोड़ का निवेश और निजी कंपनी की भूमिका

इस परियोजना में 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। संयंत्र को एक निजी कंपनी द्वारा बनाया जा रहा है। इतने बड़े निवेश से बनी यह परियोजना मध्य प्रदेश में निजी क्षेत्र की भागीदारी का बड़ा उदाहरण है। ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश से न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ती है, बल्कि नई तकनीक और प्रबंधन का अनुभव भी राज्य को मिलता है।

6,000 करोड़ रुपये की यह परियोजना प्रदेश की अब तक की बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है। निजी कंपनी ने गांधी सागर बांध के पास उपलब्ध जल संसाधन और भौगोलिक स्थिति का उपयोग करके इस पंप स्टोरेज संयंत्र को तैयार किया है। परियोजना के तैयार होने से राज्य में ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश का माहौल और मजबूत होने की उम्मीद है।

मध्य प्रदेश की ऊर्जा क्षमता को नई पहचान

मध्य प्रदेश में सौर, जल और पवन ऊर्जा के जरिए अभी 5,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा 10,000 मेगावाट क्षमता के नए सरकारी और निजी प्लांट निर्माणाधीन हैं। गांधी सागर का 2,000 मेगावाट का नीमच हाइड्रो पावर प्लांट इन आंकड़ों में बड़ी बढ़ोतरी करेगा। जब यह पूरी क्षमता से चलने लगेगा, तब प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से मध्य प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी। प्रदेश पहले से ही सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। अब पंप स्टोरेज जैसी आधुनिक तकनीक के जुड़ने से राज्य की ऊर्जा व्यवस्था और मजबूत होगी। उद्योगों को निर्बाध बिजली मिलना राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए भी जरूरी है, और यह संयंत्र उस दिशा में बड़ा कदम है।

बिजली की उपलब्धता सीधे तौर पर उद्योगों, किसानों और आम उपभोक्ताओं से जुड़ी है। सिंचाई के लिए किसानों को और उत्पादन के लिए उद्योगों को पर्याप्त बिजली चाहिए। 2,000 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता से प्रदेश के बिजली तंत्र पर दबाव कम होगा और मांग के अनुसार आपूर्ति आसान होगी।

गोवर्धन पूजा पर देसी गायों की प्रतियोगिता और पुरस्कार

इंदौर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने गोवर्धन पूजा को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस वर्ष भी गोवर्धन पूजा पूरे उत्साह, श्रद्धा और धूमधाम से मनाई जाएगी। प्रदेश में बीते समय में विधानसभा क्षेत्रवार देसी नस्ल की दुधारू गौमाताओं के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं। इनमें पशुपालकों को प्रथम पुरस्कार के रूप में 1 लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपये तथा तृतीय पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 नवंबर को प्रदेशभर में गोवर्धन पूजा के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भोपाल में भी इस अवसर पर बड़ा राज्यस्तरीय आयोजन होगा। गोवर्धन पूजा के दिन गौशालाओं में विशेष आयोजन होंगे और गौपालन से जुड़े लोगों को सम्मानित किया जाएगा। सरकार की ओर से देसी नस्ल की गायों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

गोवर्धन पूजा और दीपावली के इस पर्वकाल में प्रदेशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हो रहे हैं। इंदौर में भी दीपावली की तैयारियां जोरों पर हैं, जहां बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है।

गांधी सागर क्षेत्र और चंबल अंचल के लिए महत्व

गांधी सागर बांध चंबल नदी पर बना है और यह मध्य प्रदेश के नीमच-मंदसौर क्षेत्र की पहचान है। बांध के पास बना यह हाइड्रो पावर प्लांट इस क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। बांध और उसके आसपास की जल व्यवस्था का उपयोग अब बिजली उत्पादन के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण के लिए भी हो रहा है। इस तरह पुराने जल संसाधन को नई तकनीक से जोड़कर उसका उपयोग बढ़ाया गया है।

चंबल अंचल में सिंचाई और पेयजल के लिए गांधी सागर बांध की भूमिका पहले से ही महत्वपूर्ण रही है। अब ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भी इस बांध का योगदान बढ़ेगा। पंप स्टोरेज परियोजना से क्षेत्र में तकनीकी कामकाज और रखरखाव से जुड़ी गतिविधियां भी बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिलने की उम्मीद है।

आगे क्या: दिसंबर और मार्च की समय-सीमा

अब सबकी नजर नीमच हाइड्रो पावर प्लांट की अगली समय-सीमा पर है। दिसंबर में जब पहली टरबाइन चालू होगी, तब संयंत्र से बिजली उत्पादन की औपचारिक शुरुआत होगी। इसके बाद मार्च तक शेष क्षमता को जोड़कर प्लांट को पूरी तरह चालू किया जाएगा। मार्च 2027 तक 2,000 मेगावाट की पूरी क्षमता उपलब्ध होने पर मध्य प्रदेश की बिजली व्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलेगी।

राज्य सरकार की ओर से ऊर्जा क्षेत्र में आगे भी कई परियोजनाएं तैयार हो रही हैं। 10,000 मेगावाट क्षमता के नए सरकारी और निजी प्लांट निर्माणाधीन हैं। इनमें सौर, पवन और जल ऊर्जा की परियोजनाएं शामिल हैं। गांधी सागर का पंप स्टोरेज प्लांट इन सबके बीच एक अलग पहचान रखता है, क्योंकि यह बिजली बनाने के साथ-साथ उसे संग्रहित करने की क्षमता भी रखता है। आने वाले समय में जब सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी और बढ़ेगी, तब ऐसे भंडारण संयंत्रों की भूमिका और भी अहम हो जाएगी।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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