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इंदौर के स्टार्टअप फीडबॉक्स की दीवाली छुट्टी बनी चर्चा: 7 दिन का ब्रेक, 24 घंटे में 250 से ज्यादा नौकरी आवेदन

सांकेतिक चित्र: आधुनिक कार्यालय में काम करते कर्मचारी सांकेतिक चित्र: आधुनिक कार्यालय में काम करते कर्मचारी (स्रोत: Wikimedia Commons)

इंदौर ब्यूरो

सार: इंदौर की डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी फीडबॉक्स ने दीवाली पर अपने कर्मचारियों को पूरे सात दिन की छुट्टी दी। कंपनी के सह-संस्थापक यश कुलश्रेष्ठ ने जब इस हॉलिडे कैलेंडर को लिंक्डइन पर साझा किया, तो पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और 24 घंटे के भीतर 250 से ज्यादा लोगों ने कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन कर दिया। आवेदन भेजने वालों में इंटर्न से लेकर ऑपरेशंस हेड और सीएक्सओ स्तर के पेशेवर तक शामिल रहे।

इंदौर स्टार्टअप फीडबॉक्स दीवाली छुट्टी की यह खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब देशभर में काम के लंबे घंटों, छुट्टियों की कमी और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बहस चल रही है। एक तरफ कई कंपनियों में कर्मचारियों के छंटनी और बढ़ते काम के दबाव की चर्चा है, वहीं इंदौर की इस कंपनी ने त्योहार पर अपने लोगों को परिवार के साथ पूरा समय बिताने का मौका देकर सबका ध्यान खींच लिया। कंपनी का कहना है कि यह कोई एक बार का फैसला नहीं है, बल्कि वह कई सालों से दीवाली पर इसी तरह की छुट्टी देती आ रही है। इस बार फर्क सिर्फ इतना रहा कि सह-संस्थापक की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और कंपनी को एक दिन में ही सैकड़ों आवेदन मिल गए।

फीडबॉक्स के सह-संस्थापक यश कुलश्रेष्ठ ने बताया कि उन्हें भी इस प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। उनके मुताबिक, पोस्ट के वायरल होने के बाद उन्हें एक ही दिन में करीब 16,000 नए फॉलोअर भी मिले। कंपनी ने साफ किया है कि वह मिले आवेदनों की समीक्षा करेगी और भविष्य की भर्तियों के लिए योग्य उम्मीदवारों से संपर्क करेगी। जो उम्मीदवार इंदौर आकर काम करने के इच्छुक हैं, उनसे भी बात की जाएगी।

फीडबॉक्स का दीवाली हॉलिडे कैलेंडर: 4 से 11 नवंबर तक क्या-क्या हुआ

कंपनी ने दीवाली के लिए एक पूरा हॉलिडे कैलेंडर तैयार किया था। 4 नवंबर को ऑफिस में सभी कर्मचारियों को मिठाइयां और दीवाली के उपहार बांटे गए। इसके बाद 5 और 6 नवंबर के लिए कर्मचारियों को वर्क-फ्रॉम-होम की सुविधा दी गई। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि जो कर्मचारी इंदौर से बाहर के थे, वे भीड़ और ट्रैफिक से बचते हुए समय पर अपने घर पहुंच गए और घर से ही काम किया।

7 नवंबर से दीवाली की छुट्टियां शुरू हो गईं। कंपनी ने इस दौरान आधे दिन का ब्रेक भी दिया, ताकि कर्मचारी आराम से परिवार को समय देते हुए त्योहार मना सकें। पूरे एक हफ्ते के इस ब्रेक के बाद सभी कर्मचारी 11 नवंबर को ऑफिस लौटेंगे। कंपनी प्रबंधन ने कर्मचारियों को यह छूट भी दी थी कि अगर किसी को अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताने के लिए छुट्टियां बढ़ाने की जरूरत पड़े, तो वह भी कर सकता है।

कंपनी के मुताबिक, उसकी टीम के लगभग सभी सदस्य इंदौर से बाहर के रहने वाले हैं। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों से आए कई कर्मचारी इंदौर में काम करते हैं। आम तौर पर त्योहारों पर घर जाने में ही लोगों का आधा समय सफर में बीत जाता है। ऐसे में कर्मचारियों को अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का पूरा मौका मिले, इसलिए कंपनी ने यह कदम उठाया।

लिंक्डइन पोस्ट कैसे वायरल हुई: 24 घंटे में 250 से ज्यादा आवेदन

यश कुलश्रेष्ठ ने लिंक्डइन पर दीवाली के मौके पर कंपनी के हॉलिडे शेड्यूल को लेकर एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में उन्होंने बताया था कि कंपनी अपने कर्मचारियों को दीवाली पर पूरे सात दिन की छुट्टी दे रही है और त्योहार के आसपास वर्क-फ्रॉम-होम की सुविधा भी दी गई है। यह पोस्ट देखते ही देखते सोशल मीडिया पर फैल गई।

पोस्ट के वायरल होने के बाद कंपनी को 24 घंटे के भीतर 250 से ज्यादा नौकरी के आवेदन मिले। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि आवेदन करने वालों में केवल इंटर्न ही नहीं थे, बल्कि ऑपरेशंस हेड और सीएक्सओ स्तर के पेशेवर भी शामिल थे। कंपनी के मुताबिक, उसे इंटर्न से लेकर वरिष्ठ प्रबंधन तक के पदों के लिए आवेदन मिले हैं।

यश कुलश्रेष्ठ ने बताया कि कंपनी नियमित रूप से वीडियो एडिटर और एआई एडिटर जैसे पदों के लिए भर्तियां करती है, लेकिन इस बार मिले आवेदनों का दायरा उससे कहीं बड़ा रहा। उन्होंने कहा कि कंपनी सभी आवेदनों की समीक्षा करेगी और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से योग्य उम्मीदवारों से बात करेगी। पोस्ट के वायरल होने से उन्हें एक ही दिन में करीब 16,000 नए फॉलोअर भी मिले।

इंदौर स्टार्टअप फीडबॉक्स दीवाली छुट्टी के पीछे की सोच

इंदौर स्टार्टअप फीडबॉक्स दीवाली छुट्टी के पीछे कंपनी की सोच साफ है। प्रबंधन का मानना है कि अगर किसी को सिर्फ दो दिन की छुट्टी मिलती है, तो उसका बड़ा हिस्सा सफर में ही बीत जाता है। कर्मचारी अपने परिवार के साथ ठीक से समय नहीं बिता पाता। इसलिए कंपनी ने त्योहार पर लंबी छुट्टी देने की परंपरा बनाई है।

कंपनी के सह-संस्थापक का कहना है कि यह कोई पब्लिसिटी स्टंट नहीं है। कंपनी कई सालों से ऐसा करती आ रही है और सोशल मीडिया पर मिलने वाले ध्यान के बिना भी इसे जारी रखना चाहती है। उनका मानना है कि इस तरह की पहल से बनने वाली सद्भावना छुट्टी से कहीं ज्यादा समय तक रहती है। कर्मचारियों के प्रति भरोसा दिखाने से टीम का मनोबल बढ़ता है और लोग कंपनी से लंबे समय तक जुड़े रहते हैं।

दीवाली पर एक हफ्ते की छुट्टी देने वाली इंदौर की कंपनी की यह पहल ऐसे समय में चर्चा में आई है, जब कामकाजी जीवन में संतुलन को लेकर देशभर में बहस चल रही है। कई युवा पेशेवर अब सिर्फ वेतन नहीं, बल्कि काम का माहौल, छुट्टियों की नीति और मानसिक स्वास्थ्य को भी नौकरी चुनते समय महत्व देने लगे हैं।

छुट्टी के दौरान काम कैसे संभाला गया

कंपनी की लीव पॉलिसी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसे कड़े नियम की तरह लागू नहीं किया गया। प्रबंधन ने कर्मचारियों को खुली छूट दी थी कि अगर किसी को अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताने के लिए छुट्टियां बढ़ानी हों, तो वह बढ़ा सकता है। इसके साथ ही काम का प्रबंधन भी पहले से सोच-समझकर किया गया था।

सांकेतिक चित्र: लैपटॉप पर काम करते हुए नोट्स लिखता कर्मचारी
सांकेतिक चित्र: काम के दौरान नोट्स लिखता कर्मचारी (स्रोत: Wikimedia Commons)

कंपनी अपने ग्राहकों को छुट्टियों से कम से कम तीन सप्ताह पहले ही इसकी जानकारी दे देती है। इससे टीम को अपना काम समेटने का पूरा समय मिल जाता है। ग्राहकों से पहले ही वह सब कुछ साझा करने को कहा जाता है, जिसकी उन्हें छुट्टियों के दौरान जरूरत पड़ सकती है। इस दौरान कंपनी नए काम लेने से भी बचती है, ताकि छुट्टी पर गए कर्मचारियों पर कोई दबाव न रहे।

फीडबॉक्स यूनिकॉर्न, सूचीबद्ध कंपनियों और फंड से जुड़े स्टार्टअप्स के साथ काम करती है। कंपनी के मुताबिक, उसके 50 से ज्यादा वैश्विक प्रीमियम ग्राहक हैं। इतने बड़े ग्राहक आधार के बावजूद कंपनी ने पहले से योजना बनाकर छुट्टियों का प्रबंधन किया, जिससे किसी भी ग्राहक के काम पर असर नहीं पड़ा।

फीडबॉक्स क्या करती है और कौन हैं इसके संस्थापक

फीडबॉक्स एक डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी है। इसकी स्थापना 2019 में हुई थी। कंपनी के सह-संस्थापक यश कुलश्रेष्ठ और आयुषी गुप्ता हैं। कंपनी परफॉर्मेंस मार्केटिंग, सोशल मीडिया ग्रोथ, सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन और ब्रांडिंग के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी के करीब 60 कर्मचारी हैं।

कंपनी की शुरुआत दो इंजीनियरों ने कॉलेज के दिनों में ही की थी। अक्टूबर 2019 में उन्होंने इंदौर के सपना संगीता इलाके में अपना पहला ऑफिस खोला था। कोरोना के दौर में कंपनी का काम पूरी तरह ठप हो गया था और आय शून्य हो गई थी, लेकिन कंपनी ने तब भी अपने कर्मचारियों की छंटनी नहीं की और उनका वेतन जारी रखा। इसके बाद कंपनी ने धीरे-धीरे अपना काम फिर से खड़ा किया और आज उसके ग्राहकों में कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

कंपनी को मध्य प्रदेश युवा अचीवर्स पुरस्कार और इंदौर सुपर स्टार्टअप पुरस्कार जैसे सम्मान भी मिल चुके हैं। कंपनी के मुताबिक, उसे प्रदेश के शीर्ष स्टार्टअप्स में गिना जाता है। कंपनी की कहानी इंदौर के युवा उद्यमियों के लिए प्रेरणा का उदाहरण मानी जाती है।

वर्क-लाइफ बैलेंस पर देशभर में छिड़ी बहस

फीडबॉक्स की इस पहल ने एक बार फिर वर्क-लाइफ बैलेंस पर बहस छेड़ दी है। पिछले कुछ समय से देश में काम के लंबे घंटों को लेकर तीखी चर्चा चल रही है। कई युवा पेशेवरों का कहना है कि लंबे काम के घंटे और छुट्टियों की कमी से उनकी सेहत और पारिवारिक जीवन पर असर पड़ता है। वहीं कुछ उद्योगपतियों का मानना है कि देश की तरक्की के लिए ज्यादा काम करना जरूरी है।

इसी बहस के बीच इंदौर की इस कंपनी का उदाहरण सामने आया है, जिसने दिखाया है कि कर्मचारियों को लंबी छुट्टी देने से भी काम नहीं रुकता, बल्कि टीम का भरोसा बढ़ता है। सोशल मीडिया पर लोगों ने कंपनी की इस नीति की जमकर सराहना की है। कई लोगों ने लिखा है कि ऐसी कंपनियों में काम करना गर्व की बात है।

विशेषज्ञों का मानना है कि छुट्टियों की उदार नीति से कर्मचारियों की उत्पादकता भी बढ़ती है। जब कर्मचारी तरोताजा होकर लौटते हैं, तो वे बेहतर काम करते हैं। इसके साथ ही ऐसी नीति से कंपनी की छवि भी मजबूत होती है और अच्छे पेशेवर खुद कंपनी से जुड़ना चाहते हैं। फीडबॉक्स को मिले 250 से ज्यादा आवेदन इसका सीधा उदाहरण हैं।

इंदौर के स्टार्टअप माहौल के लिए क्या संकेत

इंदौर पहले से ही स्वच्छता के क्षेत्र में देशभर में अपनी पहचान बना चुका है। त्योहारी सीजन में खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई भी यहां हुई है। अब फीडबॉक्स की कहानी से इंदौर के स्टार्टअप माहौल को भी राष्ट्रीय पहचान मिली है। इंदौर को अब सिर्फ स्वच्छ शहर के तौर पर नहीं, बल्कि युवा उद्यमियों और स्टार्टअप्स के शहर के तौर पर भी देखा जाने लगा है।

मध्य प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। इंदौर में कई युवा अपने स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं और डिजिटल मार्केटिंग, तकनीक और सेवा क्षेत्र में काम कर रहे हैं। फीडबॉक्स की कहानी ऐसे युवाओं के लिए एक उदाहरण है कि छोटे शहर से शुरू होकर भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।

कंपनी के सह-संस्थापक यश कुलश्रेष्ठ मूल रूप से भोपाल के रहने वाले हैं और अब इंदौर में रहते हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी हमेशा से अपने कर्मचारियों को परिवार की तरह मानती है। यही वजह है कि कंपनी ने कोरोना के कठिन दौर में भी किसी कर्मचारी को नहीं निकाला। इस तरह की नीतियों से इंदौर के स्टार्टअप जगत में भरोसे की संस्कृति मजबूत होती है।

आगे क्या: आवेदनों का क्या होगा

इंदौर स्टार्टअप फीडबॉक्स दीवाली छुट्टी की खबर के बाद कंपनी ने साफ किया है कि वह मिले सभी आवेदनों की समीक्षा करेगी। जो उम्मीदवार भविष्य की भर्तियों के लिए योग्य पाए जाएंगे, उनसे संपर्क किया जाएगा। कंपनी नियमित रूप से वीडियो एडिटर और एआई एडिटर के पदों पर भर्तियां करती है, लेकिन इस बार मिले आवेदनों में हर स्तर के पेशेवर शामिल हैं।

कंपनी का कहना है कि वह उन उम्मीदवारों से भी बात करेगी, जो इंदौर आकर काम करने के इच्छुक हैं। कंपनी की टीम में पहले से ही दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों से आए कई कर्मचारी काम कर रहे हैं। इससे साफ है कि कंपनी प्रतिभा को शहर की सीमा से नहीं बांधती।

फीडबॉक्स की यह कहानी सिर्फ एक कंपनी की छुट्टी की कहानी नहीं है। इंदौर स्टार्टअप फीडबॉक्स दीवाली छुट्टी की खबर ने यह दिखाया है कि कर्मचारियों के प्रति भरोसा और सम्मान दिखाने से कंपनी को भी फायदा होता है। दीवाली की छुट्टी ने कंपनी को देशभर में पहचान दिलाई और सैकड़ों प्रतिभाशाली पेशेवरों तक उसकी पहुंच बनाई। अब देखना यह होगा कि कंपनी इस मिले हुए भरोसे को आगे कैसे निभाती है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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