इंदौर ब्यूरो
दीपावली के दिन मिठाइयों की खरीदारी चरम पर है और इसी बीच इंदौर खाद्य सुरक्षा कार्रवाई ने शहर में मिलावट के खिलाफ सख्त रुख दिखाया है। पांच और छह नवंबर को हुई जांच में पीपली बाजार की 10 मावा दुकानों की मौके पर जांच की गई, रिंग रोड के एक प्रतिष्ठान से करीब 600 किलोग्राम मावा और मिल्क केक की बिक्री जांच रिपोर्ट आने तक रोक दी गई, और शहर के कई प्रतिष्ठानों से कुल 17 नमूने प्रयोगशाला भेजे गए। खाद्य सुरक्षा प्रशासन का कहना है कि त्योहार के दौरान लोगों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ पहुंचे, यही इस अभियान का मकसद है।
इंदौर खाद्य सुरक्षा कार्रवाई: पीपली बाजार में 10 मावा दुकानों की जांच
दीपावली पर मिठाइयों और मावे की मांग कई गुना बढ़ जाती है। इसी मांग के साथ मिलावट की आशंका भी बढ़ती है, इसलिए खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने त्योहार से पहले शहर में जांच अभियान तेज कर दिया था। पांच और छह नवंबर को विभाग की टीमों ने शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में मिठाई दुकानों, मावा प्रतिष्ठानों और खाद्य कारोबारियों के यहां निरीक्षण किया।
छह नवंबर को पीपली बाजार स्थित मावा बाजार में मावा बेचने वाले 10 प्रतिष्ठानों पर रैपिड टेस्ट किट के जरिए मौके पर ही प्राथमिक जांच की गई। रैपिड टेस्ट किट से मावे की शुरुआती जांच तुरंत हो जाती है और यदि उसमें कोई गड़बड़ी का संकेत मिलता है तो नमूना विस्तृत जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है। जिला खाद्य अधिकारी मनीष स्वामी ने बताया कि निरीक्षण गुरुवार और शुक्रवार को किए गए थे, ताकि त्योहार के दौरान लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ मिल सकें।
यह अभियान खाद्य सुरक्षा आयुक्त मनोज पुष्प के निर्देशन और कलेक्टर शिवम वर्मा के मार्गदर्शन में चल रहा है। विभाग का कहना है कि जांच का मकसद किसी कारोबारी को परेशान करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि दीपावली पर घरों तक पहुंचने वाली मिठाई और मावा खाने लायक हो।
रिंग रोड के प्रतिष्ठान पर 600 किलो स्टॉक की बिक्री पर रोक
अभियान के दौरान रिंग रोड स्थित श्री बालाजी ट्रेडिंग पर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की। यहां कंचन श्री ब्रांड के मिल्क केक और मीठे मावे के नमूने जांच के लिए लिए गए। प्रतिष्ठान में इन दोनों उत्पादों का करीब 600 किलोग्राम स्टॉक मिला। विभाग ने जांच रिपोर्ट आने तक पूरे स्टॉक की बिक्री पर रोक लगा दी है।

नमूने विस्तृत जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह बात साफ है कि अभी किसी भी उत्पाद को मिलावटी घोषित नहीं किया गया है — बिक्री पर रोक एहतियात के तौर पर लगाई गई है और अंतिम फैसला प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बाद ही होगा।
रिंग रोड जैसे व्यस्त इलाके में स्थित प्रतिष्ठान पर हुई यह कार्रवाई इसलिए भी अहम है, क्योंकि त्योहार के दिनों में यहां से बड़ी मात्रा में मिठाई और मावा शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाता है। विभाग का कहना है कि यदि रिपोर्ट में गड़बड़ी पाई जाती है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई होगी।
शिप्रा में छह नमूने, दो प्रतिष्ठानों से 11 नमूने
शिप्रा स्थित माय श्री नाश्ता पॉइंट एवं आइसक्रीम प्रतिष्ठान का भी निरीक्षण किया गया। यहां से मीठा मावा, मावा, गुपचुप, केसर पेड़ा, मिल्क केक और सफेद पेड़ा सहित कुल छह खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए। इन नमूनों को भी प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।
इससे अलग, खाद्य सुरक्षा आयुक्त मनोज पुष्प के औचक निरीक्षण के बाद विभाग की टीम ने दो प्रतिष्ठानों की जांच की और 11 नमूने लिए। इस दौरान करीब 1.20 लाख रुपये मूल्य का संदिग्ध मावा और मीठा मावा जब्त किया गया। अग्रवाल कंपाउंड, सुखलिया-खातीपुरा स्थित श्री देव प्रेम मिल्क प्रोडक्ट्स में दूध से पनीर, घी, मावा और मिठाइयां तैयार की जा रही थीं। मोबाइल प्रयोगशाला की शुरुआती जांच में मिलावट की आशंका जताई गई, जिसके बाद मावा, मीठा मावा, मिल्क केक और स्टार्च सहित पांच नमूने लिए गए और स्टॉक को प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने तक जब्त रखा गया है।
रैपिड टेस्ट से लैब रिपोर्ट तक: जांच की प्रक्रिया
खाद्य सुरक्षा जांच में पहला चरण मौके पर रैपिड टेस्ट किट से प्राथमिक जांच का होता है। यह जांच तुरंत संकेत देती है कि नमूने में कोई गड़बड़ी है या नहीं। यदि संकेत मिलता है तो नमूना विस्तृत जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है और तब तक संबंधित स्टॉक की बिक्री रोक दी जाती है।
दूसरा चरण प्रयोगशाला की विस्तृत जांच है, जिसमें नमूने की गुणवत्ता और उसमें मिलावट की पुष्टि होती है। तीसरा चरण रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का होता है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत रिपोर्ट में गड़बड़ी पाए जाने पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और गंभीर मामलों में आपराधिक कार्रवाई तक का प्रावधान है।
इस पूरी प्रक्रिया में एक बात अहम है — जब तक प्रयोगशाला की रिपोर्ट नहीं आ जाती, किसी भी उत्पाद को मिलावटी नहीं कहा जा सकता। इंदौर खाद्य सुरक्षा कार्रवाई में हर जगह यही रुख अपनाया गया है कि स्टॉक की बिक्री रोकी जाए, नमूने जांचे जाएं और रिपोर्ट के बाद ही अंतिम कार्रवाई हो।
दीपावली से पहले अभियान क्यों तेज हुआ
त्योहारों के मौसम में मिठाई, मावा, घी और पनीर की मांग अचानक बढ़ जाती है। बाजार में मांग बढ़ते ही कुछ कारोबारी घटिया या मिलावटी सामान खपाने की कोशिश करते हैं, इसलिए खाद्य सुरक्षा विभाग हर साल दीपावली से पहले जांच अभियान चलाता है। इस साल भी यह अभियान अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से ही चल रहा है।
तीन नवंबर को हुई कार्रवाई में विभाग ने 11 प्रतिष्ठानों से पनीर, मावा, घी, दूध और तेल के 26 नमूने लिए थे। इससे पहले 30 अक्टूबर को अहीरखेड़ी में नकली मावा बनाने वाली फैक्ट्री सील की गई थी और वहां से 341 किलो सामग्री जब्त हुई थी। भोपाल में भी दीपावली से पहले रेलवे स्टेशन के बाहर से सात क्विंटल से अधिक संदिग्ध एनालॉग पनीर जब्त किया गया था, जो मुरैना से लाया गया था।
इन कार्रवाइयों से साफ है कि इंदौर खाद्य सुरक्षा कार्रवाई एक दिन की नहीं है, बल्कि त्योहार के पूरे मौसम में चलने वाला एक सिलसिला है। इंदौर में पांच और छह नवंबर की कार्रवाई इसी सिलसिले की ताजा कड़ी है।
मिठाई खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें
दीपावली के दिन मिठाई खरीदते समय कुछ सावधानियां बरतना फायदेमंद रहता है। पहली बात यह कि मिठाई हमेशा जाने-पहचाने और लाइसेंस वाले प्रतिष्ठान से ही खरीदें। दुकान पर खाद्य सुरक्षा लाइसेंस लगा होना चाहिए और खरीदारी का बिल जरूर लें, ताकि कोई शिकायत होने पर उसके आधार पर कार्रवाई हो सके।
दूसरी बात, मावा और दूध से बनी मिठाइयों की ताजगी पर ध्यान दें। यदि मिठाई से अजीब गंध आ रही हो, उसका रंग असामान्य हो या स्वाद में खट्टापन हो तो उसे न खरीदें। बहुत सस्ती कीमत पर बिकने वाला मावा भी संदेह की वजह हो सकता है, क्योंकि शुद्ध मावा और दूध की कीमत का एक अनुमान बाजार में सबको होता है।
तीसरी बात, पैकेटबंद मिठाई लेते समय उस पर छपी निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और निर्माता का नाम जरूर देखें। खुली मिठाई खरीदते समय भी यह पूछना उचित है कि वह कब बनी है। यदि किसी मिठाई से तबीयत खराब होती है तो डॉक्टर से संपर्क करें और संबंधित दुकान की जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग तक पहुंचाएं, ताकि समय रहते जांच हो सके।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर प्रयोगशाला की रिपोर्ट पर है। पीपली बाजार, रिंग रोड और शिप्रा से लिए गए नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि किस प्रतिष्ठान के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। यदि रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होती है तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा प्रशासन का कहना है कि इंदौर खाद्य सुरक्षा कार्रवाई दीपावली के दौरान भी जारी रहेगी। विभाग की टीमें त्योहार के दिनों में भी बाजारों पर नजर रखेंगी, ताकि मिलावटी सामान लोगों तक न पहुंचे। त्योहार के दिन मिठाई खरीदने वाले लोगों के लिए यह अभियान एक भरोसा है कि बाजार में बिकने वाली मिठाई पर नजर रखी जा रही है।
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