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इंदौर: दीपावली से पहले खाद्य सुरक्षा की बड़ी कार्रवाई, 11 प्रतिष्ठानों से पनीर-मावा-घी-तेल के 26 नमूने, लैब रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई

सांकेतिक चित्र: दीपावली से पहले मिठाई की दुकान पर लड्डू, बर्फी और दीये सांकेतिक चित्र

इंदौर ब्यूरो.

सार: दीपावली से पहले इंदौर में खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने शहर के 11 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर पनीर, मावा, घी, दूध, मिठाई और तेल के कुल 26 नमूने संग्रहित किए हैं। सभी नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे जा रहे हैं और रिपोर्ट आने के बाद ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई तय होगी। नापतोल विभाग की संयुक्त कार्रवाई में दो प्रतिष्ठानों पर असत्यापित तौल उपकरण और बाट मिलने पर प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं।

दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में मिठाई, दूध और दूध से बने उत्पादों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। इसी मांग के साथ मिलावट और गुणवत्ता को लेकर चिंता भी बढ़ती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंदौर जिला खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने त्योहारी सीजन के लिए विशेष निरीक्षण अभियान तेज कर दिया है। इस अभियान के तहत 3 नवंबर को खाद्य सुरक्षा प्रशासन और नापतोल विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। यह कार्रवाई आयुक्त, खाद्य सुरक्षा मध्यप्रदेश एवं नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, भोपाल के निर्देशन तथा कलेक्टर के मार्गदर्शन में की गई। टीम ने एक ही दिन में 11 प्रतिष्ठानों की जांच की और अलग-अलग खाद्य पदार्थों के 26 नमूने लिए।

एक दिन में 11 प्रतिष्ठानों की जांच, 26 नमूने संग्रहित

निरीक्षण अभियान का मकसद साफ था — त्योहार पर उपभोक्ताओं तक शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचे। टीम ने डेयरी और मिष्ठान भंडारों के साथ-साथ तेल और नमकीन से जुड़े प्रतिष्ठानों को भी जांच के दायरे में लिया। जिन खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए, उनमें पनीर, मावा, घी, दूध, मिठाई, रिफाइंड तेल, वनस्पति, बेसन और सोनपापड़ी जैसे उत्पाद शामिल हैं। विभाग का कहना है कि नमूना संग्रहण की यह प्रक्रिया नियमित जांच का हिस्सा है और किसी भी उत्पाद की गुणवत्ता के बारे में अंतिम निष्कर्ष केवल प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जाएगा। इसलिए इस चरण में किसी भी प्रतिष्ठान के उत्पाद को खराब या मिलावटी घोषित नहीं किया गया है। नमूने लेने का मतलब जांच है, फैसला नहीं।

छोटा बांगड़दा, स्कीम नंबर 51 और चितावद रोड से दूध उत्पादों के नमूने

निरीक्षण की शुरुआत शहर के डेयरी क्षेत्रों से हुई। छोटा बांगड़दा स्थित एक डेयरी से पनीर, पारंपरिक मिठाई और घी के तीन नमूने लिए गए। स्कीम नंबर 51 स्थित एक अन्य डेयरी से पनीर और घी के दो नमूने संग्रहित किए गए। राधास्वामी नगर, चितावद रोड स्थित एक दूध-दही भंडार से दूध का एक नमूना लिया गया। इन तीनों स्थानों से लिए गए नमूनों का संबंध सीधे उन उत्पादों से है जिनकी दीपावली पर सबसे अधिक मांग रहती है। पनीर और घी का उपयोग मिठाइयों और घर के पकवानों में बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए इनकी जांच को अभियान में प्राथमिकता दी गई। टीम ने नमूने लेते समय भंडारण की स्थिति और साफ-सफाई का भी जायजा लिया।

मूसाखेड़ी में तेल का नमूना, असत्यापित तौल उपकरण जब्त

मूसाखेड़ी के एसडीए कंपाउंड क्षेत्र में टीम ने एक शिकायत के आधार पर एक इंटरप्राइजेज का निरीक्षण किया। वहां से एक ब्रांड के रिफाइंड सोयाबीन तेल का नमूना लिया गया। जांच के दौरान तेल के पैकेटों पर आवश्यक घोषणाएं और वजन नियमानुसार पाए गए। लेकिन उसी प्रतिष्ठान में उपयोग किया जा रहा इलेक्ट्रॉनिक तौल उपकरण असत्यापित पाया गया। नापतोल विभाग ने उपकरण को जब्त कर प्रकरण पंजीबद्ध किया। इसी क्षेत्र में एक मिल्क कार्ट से मावा, मिल्क केक, रसगुल्ला और केसर पेड़ा के चार नमूने लिए गए। वहां साफ-सफाई की व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिलने पर संचालक को सुधार सूचना पत्र जारी किया जा रहा है। उसी प्रतिष्ठान में उपयोग किया जा रहा असत्यापित बाट भी जब्त कर प्रकरण दर्ज किया गया। इस तरह मूसाखेड़ी क्षेत्र में एक ही दिन में दो अलग-अलग तरह की कार्रवाई हुई — एक खाद्य नमूनों की जांच और दूसरी तौल उपकरणों की वैधता की जांच।

तुकोगंज, पगनिशपागा और खातीवाला टैंक से दाल, तेल और नमकीन के नमूने

अभियान का दायरा केवल डेयरी उत्पादों तक सीमित नहीं रहा। साउथ तुकोगंज स्थित एक फूड वेंचर्स से उड़द दाल का नमूना संग्रहित किया गया। निरीक्षण के दौरान वहां कीट नियंत्रण व्यवस्था में कमियां मिलीं और खाद्य कारोबारकर्ताओं के मेडिकल फिटनेस प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं पाए गए। इस संबंध में आवश्यक सुधार के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है। पगनिशपागा स्थित एक ट्रेडिंग फर्म से वनस्पति, रिफाइंड तेल और कुकिंग मीडियम के चार नमूने लिए गए। खातीवाला टैंक स्थित एक नमकीन भंडार से मूंगफली तेल, बेसन और सोनपापड़ी के तीन नमूने संग्रहित किए गए। इन नमूनों से साफ है कि टीम ने त्योहारी रसोई में इस्तेमाल होने वाले लगभग हर तरह के उत्पाद को जांच में शामिल किया है — दूध उत्पाद, तेल, दाल और नमकीन सभी।

तेजाजी नगर और खंडवा नाका से मावा-पनीर के नमूने, मौके पर प्रारंभिक परीक्षण

तेजाजी नगर स्थित एक दूध डेयरी एंड स्वीट्स में भंडारित मावा और पनीर का मैजिक बॉक्स और टेस्ट किट से प्रारंभिक परीक्षण किया गया। इस प्रतिष्ठान से मावा, पनीर, मावा रोल और पेड़ा के चार नमूने लिए गए। प्रारंभिक परीक्षण का मकसद मौके पर ही एक सामान्य अंदाजा लगाना होता है, लेकिन अंतिम फैसला प्रयोगशाला रिपोर्ट पर ही निर्भर करता है। इसी क्षेत्र के एक दूध-दही भंडार से मिश्रित दूध का एक नमूना लिया गया। खंडवा नाका स्थित एक दूध डेयरी से गुपचुप और केसर पेड़ा के दो नमूने संग्रहित किए गए। इन सभी नमूनों को मिलाकर कुल संख्या 26 तक पहुंचती है। विभाग ने यह भी बताया कि निरीक्षण के साथ-साथ उच्च न्यायालय और एलआईसी कार्यालय परिसर के आसपास संचालित स्ट्रीट वेंडर्स को खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के बारे में जानकारी भी दी गई। उन्हें खाद्य पदार्थों के सुरक्षित रखरखाव, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन के बारे में जागरूक किया गया।

प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद ही तय होगी आगे की कार्रवाई

विभाग ने स्पष्ट किया है कि संग्रहित सभी 26 नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। प्रयोगशाला से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित खाद्य कारोबारकर्ताओं के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अंतर्गत नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसका मतलब यह है कि जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक किसी भी उत्पाद को असुरक्षित घोषित नहीं किया जा सकता। अगर रिपोर्ट में कोई नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो संबंधित कारोबारकर्ता के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी। अगर नमूना मानकों पर खरा उतरता है, तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं बनेगी। यही प्रक्रिया खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की बुनियाद है — पहले जांच, फिर रिपोर्ट, फिर कार्रवाई।

दीपावली से पहले अभियान क्यों तेज हुआ

दीपावली पर मिठाई, मावा, पनीर, दूध, घी और नमकीन की खपत साल के किसी भी अन्य समय की तुलना में कहीं अधिक होती है। मांग बढ़ने पर आपूर्ति भी बढ़ती है और कई बार गुणवत्ता से समझौता होने की आशंका भी बढ़ जाती है। इसलिए खाद्य सुरक्षा प्रशासन हर साल त्योहारी सीजन में विशेष अभियान चलाता है। इस बार भी यह अभियान दीपावली तक जारी रहने की बात कही गई है। इससे पहले भी इंदौर और बेटमा क्षेत्र में एक अन्य चरण में 15 प्रतिष्ठानों से 54 नमूने लिए जा चुके हैं, जिन्हें भोपाल की राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया था। उस चरण में भी मिठाई, मावा, पनीर, दूध, घी और नमकीन की जांच की गई थी। इन दोनों चरणों को एक साथ देखने पर साफ होता है कि इस बार जांच का दायरा व्यापक रखा गया है और शहर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया है।

खरीदारों के लिए सावधानी: क्या देखें, क्या पूछें

त्योहार पर मिठाई और दूध उत्पाद खरीदते समय कुछ सामान्य सावधानियां बरतना फायदेमंद रहता है। पैक्ड उत्पाद पर निर्माण और समाप्ति की तारीख, निर्माता का नाम और लाइसेंस नंबर देखना चाहिए। खुली मिठाई खरीदते समय दुकान की साफ-सफाई और भंडारण की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। मावा और पनीर जैसे उत्पादों में ताजगी की गंध और रंग का ध्यान रखना चाहिए। बिल लेना भी जरूरी है, क्योंकि किसी भी शिकायत की स्थिति में बिल ही खरीद का प्रमाण होता है। अगर किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो उसे खाने से पहले संबंधित विभाग से संपर्क करना बेहतर रहता है। ये सावधानियां किसी एक दुकान या उत्पाद के बारे में फैसला नहीं करतीं, बल्कि हर खरीदार के लिए सामान्य सुरक्षा के उपाय हैं।

आगे क्या: दीपावली तक जारी रहेगा निरीक्षण

विभाग ने बताया है कि त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण और नमूना संग्रहण की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में भी शहर के अन्य क्षेत्रों में इसी तरह की जांच हो सकती है। उपभोक्ताओं के लिए यह भरोसे की बात है कि त्योहार से पहले ही प्रशासन सक्रिय है। कारोबारकर्ताओं के लिए यह संदेश है कि साफ-सफाई, सही भंडारण, वैध तौल उपकरण और मानकों के अनुरूप उत्पाद रखना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाएगी और उससे पहले धनतेरस और गोवत्स द्वादशी जैसे पर्व भी आएंगे, जिनमें खरीदारी और पूजा से जुड़े उत्पादों की मांग और बढ़ेगी। ऐसे में यह अभियान त्योहार की तैयारियों का एक अहम हिस्सा बन गया है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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