Headlines

मध्यप्रदेश राज्यसभा उपचुनाव: हरदीप सिंह पुरी का निर्विरोध निर्वाचन तय, कांग्रेस की आपत्तियां खारिज, दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे रद्द

सांकेतिक चित्र: संसद भवन, नई दिल्ली सांकेतिक चित्र

भोपाल ब्यूरो

मध्यप्रदेश से राज्यसभा की एक सीट के लिए हो रहे उपचुनाव की तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो गई है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। मंगलवार, 3 नवंबर को हुई नामांकन पत्रों की जांच में निर्वाचन अधिकारी ने पुरी का नामांकन स्वीकार कर लिया और उनके नामांकन के खिलाफ कांग्रेस की ओर से उठाई गई सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया। इसके साथ ही मैदान में बचे दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन पत्र भी खामियों के कारण रद्द कर दिए गए, जिससे पुरी मैदान में अकेले उम्मीदवार रह गए।

अब नाम वापसी की अंतिम तारीख 5 नवंबर दोपहर तीन बजे के बाद पुरी के निर्विरोध निर्वाचित होने की औपचारिक घोषणा होगी। इसके बाद 12 नवंबर को मतदान की जरूरत नहीं रह जाएगी, क्योंकि मुकाबले में कोई दूसरा उम्मीदवार ही नहीं बचा है। यह सीट पूर्व केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, और उपचुनाव के जरिए इसे भरा जाना है।

जांच में क्या-क्या हुआ: पुरी का पर्चा वैध, विरोधियों के पर्चे खारिज

नामांकन पत्रों की जांच मंगलवार को भोपाल में हुई। निर्वाचन अधिकारी उमेश शर्मा ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, पुरी के नामांकन में कोई खामी नहीं पाई गई और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं हुआ है। इसी के साथ पुरी का नामांकन वैध मानते हुए स्वीकार कर लिया गया।

दूसरी ओर, दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन पत्र रद्द कर दिए गए। कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का नामांकन इसलिए खारिज हुआ, क्योंकि उन्होंने 2 नवंबर दोपहर तीन बजे की समयसीमा तक फॉर्म-26 हलफनामा जमा नहीं किया था। दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार कांते सयन्ना का नामांकन इसलिए रद्द हुआ, क्योंकि वे निर्वाचित विधानसभा सदस्यों के आवश्यक हस्ताक्षर जुटाने में विफल रहे — नियम के अनुसार, प्रस्तावकों के रूप में निर्वाचित सदस्यों के दस प्रतिशत या दस सदस्यों के हस्ताक्षर, जो भी कम हो, आवश्यक थे।

जांच के दौरान कांग्रेस के विधायक हेमंत कटारे और आतिफ अकील भी मौजूद थे और उन्होंने लोहानी के पक्ष में दलीलें दी थीं। लेकिन दस्तावेजों की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी ने दोनों निर्दलीय नामांकन रद्द करने का फैसला सुनाया।

कांग्रेस ने 25 से ज्यादा आपत्तियां उठाईं, सभी खारिज

सांकेतिक चित्र: खाली सदन कक्ष
सांकेतिक चित्र

कांग्रेस ने पुरी के नामांकन पत्रों के खिलाफ 25 से ज्यादा आपत्तियां दर्ज कराई थीं। कांग्रेस के चुनाव कार्यालय प्रभारी जेपी धनोपिया के अनुसार, पार्टी ने पुरी के हलफनामे में खामियों का आरोप लगाया था। जांच के दौरान इन आपत्तियों पर विस्तार से सुनवाई हुई, लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया।

कांग्रेस विधायकों ने जांच के फैसले के बाद कहा है कि वे निर्वाचन अधिकारी के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। यानी कानूनी लड़ाई की संभावना अभी बनी हुई है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से पुरी का रास्ता साफ हो गया है। कांग्रेस की आपत्तियों और उसके आगे की कानूनी योजना को इस खबर में उसी रूप में दर्ज किया गया है, जैसा कांग्रेस की ओर से कहा गया है — यह पार्टी का पक्ष है, न कि कोई सिद्ध तथ्य।

भाजपा की ओर से पुरी आधिकारिक उम्मीदवार हैं। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को उनके नाम की घोषणा की थी, और पुरी ने 31 अक्टूबर को भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव तथा उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा सहित प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया था।

सीट क्यों खाली हुई और अब आगे की प्रक्रिया क्या है

यह उपचुनाव राज्यसभा की उस एक सीट के लिए हो रहा है, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। मुरुगन ने 13 अक्टूबर को इस्तीफा दिया था। वे अप्रैल 2024 में चुने गए थे और उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था, इसलिए यह सीट भरने के लिए उपचुनाव कराना जरूरी था।

चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच 3 नवंबर को हुई और नाम वापसी की अंतिम तारीख 5 नवंबर दोपहर तीन बजे है। चूंकि अब मैदान में पुरी के अलावा कोई उम्मीदवार नहीं बचा है, इसलिए नाम वापसी की समयसीमा खत्म होने के बाद उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा। पहले 12 नवंबर को मतदान और मतगणना की तारीख तय थी, लेकिन मुकाबला नहीं होने की स्थिति में मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी।

230 सदस्यीय मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा के 164 विधायक हैं, इसलिए संख्या के लिहाज से भी पुरी की जीत पहले से तय मानी जा रही थी। लेकिन कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में आने के बाद मुकाबले की संभावना बनी थी, जो अब जांच के फैसले के बाद खत्म हो गई है।

पहले क्या हुआ था: लोहानी के नामांकन से आया था मोड़

इस उपचुनाव में मोड़ तब आया था, जब 2 नवंबर को नामांकन के अंतिम दिन कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार लोहानी ने अपना नामांकन दाखिल किया था। लोहानी के प्रस्तावक कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे थे और नामांकन के समय कांग्रेस के कई नेता मौजूद थे। उस समय यह माना जा रहा था कि पुरी को अब निर्विरोध जीत नहीं मिलेगी और 12 नवंबर को मतदान होगा।

इसके बाद 3 नवंबर को जांच के दौरान लोहानी के नामांकन पर सवाल उठे। पहले यह जानकारी सामने आई थी कि फॉर्म-26 जमा नहीं होने के कारण उनका पर्चा खतरे में है, और पुरी के हलफनामे पर भी आपत्तियां लंबित थीं। मंगलवार शाम को जांच का फैसला आने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई — लोहानी का पर्चा खारिज हो गया, दूसरे निर्दलीय का पर्चा भी रद्द हो गया, और पुरी के खिलाफ आपत्तियां भी खारिज हो गईं।

इस तरह, जो उपचुनाव कुछ दिन पहले तक मुकाबले वाला दिख रहा था, वह अब निर्विरोध निर्वाचन की ओर बढ़ गया है।

पुरी कौन हैं और उनका राजनीतिक सफर

हरदीप सिंह पुरी केंद्र सरकार में मंत्री हैं और लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। उन्हें भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने मध्यप्रदेश की इस राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवार बनाया था। नामांकन के समय मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया था कि पार्टी इस उपचुनाव को कितनी गंभीरता से ले रही है।

राज्यसभा में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिहाज से अहम माना जाता है। निर्विरोध निर्वाचन के बाद पुरी का उच्च सदन में प्रवेश औपचारिक रूप से पूरा हो जाएगा, और वे शेष कार्यकाल के लिए इस सीट का प्रतिनिधित्व करेंगे।

कांग्रेस की आगे की रणनीति पर रहेगी नजर

कांग्रेस ने जांच के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है। अगर पार्टी अदालत जाती है तो इस मामले का कानूनी पहलू आगे भी चर्चा में रहेगा। लेकिन चुनावी प्रक्रिया के अनुसार, नाम वापसी की समयसीमा के बाद निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा हो जाएगी।

राजनीतिक लिहाज से यह घटनाक्रम भाजपा के लिए राहत भरा है, क्योंकि पार्टी को मतदान की प्रक्रिया से गुजरे बिना ही यह सीट मिल जाएगी। कांग्रेस के लिए यह झटका है, क्योंकि उसके समर्थित उम्मीदवार का पर्चा खारिज हो गया और पुरी के खिलाफ उसकी आपत्तियां भी नहीं टिकीं।

आगे क्या होगा

5 नवंबर दोपहर तीन बजे नाम वापसी की समयसीमा खत्म होने के बाद निर्वाचन अधिकारी पुरी के निर्विरोध निर्वाचित होने की औपचारिक घोषणा करेंगे। इसके बाद इस सीट के लिए मतदान की जरूरत नहीं रहेगी। कांग्रेस की ओर से अगर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की जाती है तो उस पर अलग से नजर रखी जाएगी।

मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा उपचुनाव का यह अध्याय अब अपने अंतिम चरण में है। कुछ दिन पहले तक मुकाबले की संभावना दिख रही थी, लेकिन जांच के फैसले ने तस्वीर साफ कर दी है — हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा पहुंचना अब तय है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार