Headlines

इंदौर में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक संपन्न: नशे के खिलाफ देशव्यापी जागरण अभियान, प्रांत की जगह अब 88 संभाग

इंदौर में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक की पत्रकार वार्ता इंदौर में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक की पत्रकार वार्ता, 4 नवंबर 2026

इंदौर ब्यूरो

सार: इंदौर के डेली कॉलेज में 2 से 4 नवंबर तक चली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की तीन दिवसीय बैठक बुधवार को संपन्न हो गई। समापन के बाद पत्रकार वार्ता में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने बताया कि संघ युवाओं में बढ़ते नशे के खिलाफ सामाजिक संगठनों और शिक्षण संस्थाओं के साथ मिलकर देशव्यापी जागरण अभियान चलाएगा, वहीं संगठन की प्रांत व्यवस्था की जगह अब 88 संभागों की नई व्यवस्था बनेगी, जिसके लिए नवंबर-दिसंबर में संघचालकों के चुनाव और नई कार्यकारिणियों का गठन होगा।

तीन दिन का मंथन, समापन पर पत्रकार वार्ता

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक का आयोजन इंदौर के डेली कॉलेज में हुआ। यह बैठक 2 नवंबर को आरंभ हुई थी और 4 नवंबर को इसका समापन हुआ। बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत जी और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी सहित देशभर से आए वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा की गई और समाज के सामने रखे गए पंच परिवर्तन के विषयों को आगे बढ़ाने की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श हुआ।

समापन के दिन सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने पत्रकार वार्ता को संबोधित किया और बैठक में हुए विचार-विमर्श की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाल के समय में संघ ने 8,346 नगरों और 5,028 समूहों में व्यापक संपर्क अभियान चलाया, जिसमें 3,79,581 समाज के प्रमुख लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद किया गया। इस अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य समाज में समरसता को बढ़ावा देना और हर प्रकार के भेदभाव को समाप्त करना रहा है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं से नियमित संपर्क बनाए रखा जाए, ताकि तय की गई योजनाएं जमीन पर उतर सकें।

नशे के खिलाफ सामाजिक जागरण की बड़ी योजना

बैठक में सबसे गंभीर चिंता के रूप में युवाओं में नशीले पदार्थों का बढ़ता चलन सामने आया। सरकार्यवाह ने इसे एक गंभीर सामाजिक चुनौती बताते हुए कहा कि नशे की लत को एक विशाल और संगठित अंतरराष्ट्रीय तंत्र से बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के नशा तस्करी रोकने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि रोकथाम और जागरूकता में समाज की भी अहम भूमिका है।

सांकेतिक चित्र: परिसर में चर्चा करते लोग
सांकेतिक चित्र

योजना के अनुसार, संघ विभिन्न सामाजिक संगठनों और संस्थाओं के साथ मिलकर नशे के खिलाफ जागरूकता का काम करेगा। प्रभावित लोगों को मानसिक स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराने और उनके परिवारों को सहारा देने की बात भी बैठक में हुई। इसके लिए विभिन्न प्रयासों के बीच समन्वय की व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में यह रुख साफ हुआ कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार और समाज के स्तर पर भी सतत प्रयास जरूरी हैं। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं की भागीदारी से जागरूकता अभियान चलाने की दिशा तय की गई है।

संगठन का नया नक्शा: प्रांत की जगह 88 संभाग

बैठक का दूसरा बड़ा निर्णय संगठनात्मक ढांचे से जुड़ा रहा। अब तक संघ की व्यवस्था प्रांतों के आधार पर चलती थी, लेकिन समापन पर सामने आई व्यवस्था के अनुसार अब प्रांतों की जगह 88 संभाग बनाए जाएंगे। नवंबर और दिसंबर में संघचालकों के चुनाव और नई कार्यकारिणियों के गठन के बाद यह नई व्यवस्था आकार लेगी। बैठक में इस बात पर भी विचार हुआ कि हर संभाग की जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी।

बैठक के दौरान पहले 85 से 90 संभागों के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई थी, और समापन पर 88 संभागों की संख्या सामने आई। इसी तरह क्षेत्रों की संख्या को भी छोटा करने का प्रस्ताव बैठक के एजेंडे में रहा। संगठन के विस्तार को देखते हुए यह बदलाव किया जा रहा है, ताकि काम बस्तियों और दूर-दराज के क्षेत्रों तक और व्यवस्थित तरीके से पहुंच सके। प्रस्तावित बदलावों को मार्च 2027 से लागू करने की संभावना भी बैठक के दौरान चर्चा में रही। नई व्यवस्था के बाद जिला स्तर पर भी काम के दायरे में विस्तार की बात सामने आई है, जिससे संगठन की पहुंच और गहरी होगी।

पंच परिवर्तन: पांच विषयों पर जमीनी काम

बैठक में शताब्दी वर्ष के दौरान समाज के सामने रखे गए पंच परिवर्तन के पांच विषयों की प्रगति की समीक्षा की गई। इन पांच विषयों में सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, स्व का भाव और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। बैठक का मानना रहा कि इन विषयों को केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

इसके लिए समाज की विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से आगे बढ़ने की योजना तैयार की गई है। जमीनी कार्यकर्ताओं से नियमित संपर्क, परिवारों से संवाद और स्थानीय स्तर पर सेवा गतिविधियों को इस योजना का आधार बनाया गया है। बैठक में यह भी तय हुआ कि शताब्दी वर्ष के दौरान जिन परिवारों और स्वयंसेवकों तक पहुंच बनी है, उनसे संपर्क टूटने नहीं दिया जाएगा, बल्कि उन्हें स्थानीय समस्याओं के समाधान और सामाजिक सेवा के कामों से जोड़ा जाएगा।

तीन महापुरुषों का स्मरण और प्रस्ताव

बैठक में तीन महापुरुषों से जुड़े प्रस्ताव भी पारित किए गए। स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान की शताब्दी पर उनका स्मरण किया गया, वहीं स्वामी सदानंद के योगदान को भी याद किया गया। दोनों संतों को धर्मांतरण रोकने, जनजातीय समुदायों में शिक्षा और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने तथा सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता मजबूत करने के प्रयासों के लिए याद किया गया। बैठक ने समाज से आह्वान किया कि इन महापुरुषों की ओर से शुरू की गई सेवा गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाए।

एक अन्य प्रस्ताव में राष्ट्र चेतना के अग्रदूत राजनारायण बसु की 200वीं जयंती का उल्लेख हुआ। बसु का जन्म 7 दिसंबर 1826 को बंगाल में हुआ था और उन्होंने निर्धनों के उत्थान, नशामुक्ति, महिला शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह जैसे सामाजिक सुधारों के लिए काम किया था। बैठक के आरंभ में यह जानकारी भी दी गई थी कि सरकार्यवाह की ओर से तीन वक्तव्य जारी किए जाएंगे, जिनमें बसु और स्वामी श्रद्धानंद के साथ कांधमाल के जनजातीय समुदाय में आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए काम करने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की 100वीं जयंती भी शामिल है।

शताब्दी वर्ष की समीक्षा और विदेश प्रवास

बैठक में शताब्दी वर्ष के दौरान विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक देशभर में आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। बैठक के आरंभ में दी गई जानकारी के अनुसार, शताब्दी वर्ष में संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1,01,151 हो गई है, जबकि साप्ताहिक शाखाओं और मासिक बैठकों को मिलाकर गतिविधियां 1,10,849 स्थानों तक पहुंच गई हैं। बैठक में इन आंकड़ों की समीक्षा के साथ आगे के विस्तार की दिशा पर भी चर्चा हुई।

बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत जी की अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा की हाल की यात्राओं पर भी चर्चा हुई। जानकारी के अनुसार, इन यात्राओं के दौरान उन्होंने भारतीय प्रवासियों, शिक्षाविदों और समुदाय के प्रमुख लोगों से संवाद किया और वैश्विक एकता तथा मानवता की एकता का संदेश साझा किया। उन्होंने स्वामीनारायण मंदिर और खालसा गुरुद्वारा सहित विभिन्न संस्थानों के कार्यक्रमों में भाग लिया और संघ के संगठनात्मक स्वरूप तथा समर्पित स्वयंसेवकों के निर्माण के दृष्टिकोण पर चर्चा की। सरकार्यवाह ने बताया कि विदेशों में लोगों के बीच शाखा आधारित व्यवस्था और चरित्र निर्माण के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को लेकर काफी जिज्ञासा देखी गई।

इंदौर के लिए क्या मायने, आगे क्या

इंदौर के लिए यह बैठक इसलिए भी खास रही, क्योंकि 26 वर्ष के अंतराल के बाद अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक इस शहर में आयोजित हुई। इससे पहले वर्ष 2000 में इस तरह की बैठक इंदौर में हुई थी। मालवा क्षेत्र को संघ के काम का मजबूत केंद्र माना जाता है, और डेली कॉलेज के सभागार में हुई इस बैठक में देशभर के पदाधिकारियों का जमावड़ा रहा। बैठक स्थल पर संघ की 100 वर्षों की यात्रा और मालवा क्षेत्र में संघ कार्य के क्रमिक विकास को दर्शाने वाली प्रदर्शनी भी लगाई गई थी।

आगे की राह के लिहाज से बैठक के निर्णयों का असर संगठन की दैनंदिन कार्यशैली पर पड़ेगा। नशे के खिलाफ जागरण अभियान को सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर चलाना, संभागों की नई व्यवस्था को जमीन पर उतारना और पंच परिवर्तन के विषयों को लोगों के जीवन से जोड़ना — यही तीन काम आने वाले महीनों की प्राथमिकता में रहेंगे। संभागों की नई व्यवस्था के बाद होने वाले चुनाव और कार्यकारिणियों के गठन पर भी सबकी नजर रहेगी, क्योंकि उसी से नई व्यवस्था की रफ्तार तय होगी।

पृष्ठभूमि: बैठक की शुरुआत कैसे हुई

इससे पहले 2 नवंबर को बैठक का शुभारंभ सरसंघचालक मोहन भागवत जी और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित करके किया था। बैठक के आरंभ में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने पत्रकारों को बैठक के एजेंडे की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि बैठक में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा, संगठन के पुनर्गठन, युवाओं में नशे की प्रवृत्ति, डिजिटल माध्यमों पर संवाद की रणनीति और वैश्विक परिस्थितियों जैसे विषयों पर विचार होगा। बैठक के दौरान नई पीढ़ी के बदलते रुझान, शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती की भूमिका और विदेशों में संघ के काम के विस्तार पर भी चर्चा हुई। तीन दिन के मंथन के बाद अब समापन पर लिए गए निर्णयों को संगठन की आगामी कार्ययोजना का आधार बनाया गया है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार