भोपाल ब्यूरो
सार: दीपावली से ठीक पहले भोपाल समेत मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सफाई व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वेतन वृद्धि और नियमितीकरण सहित अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेशभर के सफाई कर्मचारियों ने बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक न कचरा उठेगा और न सफाई होगी, और इसका असर बुधवार सुबह से ही भोपाल के कई इलाकों में दिखाई देने लगा है।
बुधवार से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल
प्रदेश के सफाई कर्मचारियों ने बुधवार, 4 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है, इसलिए अब आर-पार की लड़ाई का फैसला लिया गया है। भोपाल में हड़ताल का असर सुबह से ही नजर आने लगा है। शहर के कई गली-मोहल्लों और बाजारों में कचरा नहीं उठाया गया, और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने वाली गाड़ियां भी कई इलाकों में नहीं पहुंचीं। बताया गया है कि सफाई कर्मचारियों ने अपनी गाड़ियां कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर खड़ी कर काम बंद कर दिया है।
भोपाल के न्यू मार्केट सहित कई प्रमुख बाजारों में कचरा जमा होने की खबरें सामने आई हैं। दीपावली से पहले बाजारों में खरीदारी का दौर चरम पर होता है, और ऐसे में सफाई व्यवस्था ठप होना व्यापारियों और खरीदारों दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो दीपावली के दौरान भी शहरों में कचरा नहीं उठाया जाएगा।
मंगलवार का प्रदर्शन और चक्काजाम बनी वजह
इस हड़ताल की सीधी वजह मंगलवार को भोपाल में हुआ प्रदेशव्यापी प्रदर्शन है। अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के बैनर तले प्रदेश के 57 जिलों से आए सफाई कर्मचारियों ने शाहजहांनी पार्क में धरना दिया था। सुबह नौ बजे से धरने पर बैठे कर्मचारियों का ज्ञापन लेने जब कोई अधिकारी नहीं पहुंचा तो वे मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने जहांगीराबाद चौराहे पर उन्हें रोक दिया।
इसके बाद नाराज कर्मचारियों ने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया, जिससे करीब तीन घंटे तक जहांगीराबाद, काली मंदिर रोड, लाल परेड मैदान और भारत टॉकीज मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। कर्मचारियों का कहना है कि मंगलवार का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन ज्ञापन लेने कोई अधिकारी नहीं आया और मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। इसी के बाद बुधवार से प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया गया।

आठ सूत्रीय मांगें: नियमितीकरण और 25 हजार वेतन सबसे आगे
सफाई कर्मचारी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग संविदा और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की है। कर्मचारियों की मांग है कि 29 दिवसीय दैनिक वेतन भोगियों को नियमित किया जाए या उन्हें 25 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए। इसके साथ ही सभी कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग भी शामिल है।
कर्मचारियों की अन्य मांगों में पति या पत्नी की मृत्यु होने पर अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता देना भी शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है, और दीपावली जैसे त्योहार पर बच्चों के कपड़े, मिठाई, घर की रंगाई-पुताई और किराना जैसी जरूरतों के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं होता। संगठन का कहना है कि वह 20 से 25 वर्षों से कर्मचारियों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन वेतन और नियमितीकरण जैसे मुद्दे जस के तस हैं।
कितने बड़े पैमाने पर है आंदोलन
संगठन के अनुसार यह आंदोलन प्रदेश के 10 संभागों, 16 नगर निगमों और 374 नगरपालिकाओं के कर्मचारियों से जुड़ा है। संगठन का दावा है कि प्रदेश के एक लाख से अधिक कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं। भोपाल नगर निगम में ही करीब 14 हजार सफाई कर्मचारी बताए जाते हैं, जिनमें दो हजार नियमित, आठ हजार दैनिक वेतनभोगी और एक हजार आउटसोर्स कर्मचारी शामिल बताए गए हैं।
हड़ताल का असर भोपाल के 21 जोन और 85 वार्डों की सफाई पर पड़ सकता है। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन से लेकर सड़कों और बाजारों की सफाई तक, पूरी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। दीपावली से पहले शहरों में कचरे का ढेर लगना स्वास्थ्य और स्वच्छता दोनों के लिहाज से चिंता का विषय बन सकता है, खासकर तब जब बाजारों में लोगों की आवाजाही सबसे ज्यादा होती है।
बुधवार को मंत्री से बैठक, नतीजे का इंतजार
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के अनुसार बुधवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रमुख सचिव मनोज दुबे के साथ बैठक प्रस्तावित है। संगठन ने साफ कहा है कि यदि इस बैठक में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन अनिश्चितकाल तक चलेगा। बैठक के नतीजे पर ही यह तय होगा कि हड़ताल आगे बढ़ेगी या समाप्त होगी।
मांगों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, सिवाय इसके कि बैठक प्रस्तावित है। इसलिए इस खबर में सरकार का पक्ष बैठक के प्रस्ताव और निगम की वैकल्पिक व्यवस्था तक ही सीमित रखा गया है। बैठक में क्या निर्णय होता है, यह खबर का अगला अहम पड़ाव होगा, और उसी के बाद हड़ताल की दिशा तय होगी।
निगम की वैकल्पिक व्यवस्था: विशेष सफाई और फागिंग अभियान
हड़ताल की आशंका के बीच भोपाल नगर निगम ने विशेष सफाई और फागिंग अभियान शुरू किया है। इसके तहत प्रतिदिन सुबह छह से 11 बजे और दोपहर 12 से तीन बजे तक सफाई के लिए मशीनरी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। शाम चार से रात आठ बजे तक पूरे शहर में विशेष फागिंग अभियान चलाया जाएगा और लार्वा की जांच की जाएगी।
निगम को उम्मीद है कि बातचीत से हड़ताल टल जाएगी, लेकिन लंबा आंदोलन हुआ तो वैकल्पिक व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ेगा। मशीनरी से सफाई की व्यवस्था डोर-टू-डोर कलेक्शन का पूरी तरह विकल्प नहीं बन सकती, इसलिए हड़ताल लंबी खिंचने पर शहरों में कचरे का संकट गहरा सकता है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि विशेष अभियान के जरिए स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है।
दीपावली से पहले सफाई पर संकट क्यों है गंभीर
दीपावली से ठीक पहले सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का समय ही इसे सबसे गंभीर बनाता है। धनतेरस और नरक चतुर्दशी सहित कई पर्व आने वाले हैं, और इस दौरान बाजारों में भारी रौनक रहती है। बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए निकलते हैं, और बाजारों की सफाई व्यवस्था सीधे तौर पर खरीदारों के अनुभव और व्यापारियों के कारोबार से जुड़ी होती है।
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि दीपावली सरकार मनाएगी और सफाईकर्मी सड़कों पर रहकर अपनी मांगों के लिए संघर्ष करेंगे। यह बयान आंदोलन की गंभीरता को दर्शाता है, लेकिन साथ ही यह भी बताता है कि त्योहार के दौरान सफाई व्यवस्था बनाए रखना कितना जरूरी है। यदि हड़ताल दीपावली तक जारी रही तो शहरों में गंदगी का अंबार लग सकता है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर बुधवार को होने वाली बैठक पर है। यदि बैठक में मांगों पर सकारात्मक निर्णय होता है तो हड़ताल समाप्त हो सकती है और सफाई व्यवस्था पटरी पर लौट सकती है। यदि निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन अनिश्चितकाल तक चलेगा, और दीपावली के दौरान भी कचरा नहीं उठाने की चेतावनी अमल में आ सकती है।
इससे पहले 3 नवंबर को भोपाल के नीलम पार्क में हुए धरने में भी यही चेतावनी दी गई थी कि मांगें नहीं मानी गईं तो 4 नवंबर से प्रदेशभर के नगरीय निकायों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। वह चेतावनी अब हकीकत बन चुकी है। आने वाले दिनों में बैठक के नतीजे, निगम की वैकल्पिक व्यवस्था की सफलता और हड़ताल की अवधि — तीनों ही इस खबर की अगली कड़ियां तय करेंगे।
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