भोपाल ब्यूरो
सार: मुख्यमंत्री मोहन यादव आज गुरुवार को पहले इंदौर के दौरे पर रहेंगे और फिर भोपाल लौटकर जनजातीय प्रतिनिधियों के सम्मेलन में शामिल होंगे। यह सम्मेलन 11 से 18 नवंबर तक मनाए जाने वाले जनजातीय गौरव सप्ताह की तैयारियों की कड़ी में हो रहा है, जिसके तहत 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का आज का दिन इंदौर और भोपाल, दोनों शहरों के कार्यक्रमों से भरा हुआ है। सुबह के कार्यक्रम के अनुसार वे सुबह 10:40 बजे भोपाल के स्टेट हैंगर से इंदौर के लिए रवाना होंगे। सुबह 11:45 बजे वे इंदौर के डेली कॉलेज पहुंचेंगे और दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक वहां स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद दोपहर 2:20 बजे वे इंदौर से भोपाल के लिए वापस रवाना होंगे। भोपाल लौटने पर दोपहर 3:30 बजे वे समत्व स्थित मुख्यमंत्री निवास पर जनजातीय प्रतिनिधियों के सम्मेलन में शामिल होंगे। शाम 5:30 बजे मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक में भी उनकी भागीदारी तय है। इस तरह आज का दिन शहरी कार्यक्रम, जनजातीय समाज से संवाद और सड़क विकास से जुड़ी प्रशासनिक बैठक, तीनों मोर्चों पर व्यस्त रहने वाला है।
आज का कार्यक्रम: इंदौर से भोपाल तक
इंदौर का दौरा मुख्यमंत्री के नियमित जिला दौरों की कड़ी में है। डेली कॉलेज में दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक स्थानीय कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी रहेगी। इसके बाद भोपाल वापसी और फिर जनजातीय सम्मेलन, दिन के दूसरे हिस्से का सबसे अहम कार्यक्रम है। शाम को सड़क विकास निगम की बैठक में प्रदेश की सड़क परियोजनाओं की समीक्षा होने की उम्मीद है। यह पूरा कार्यक्रम दिखाता है कि मुख्यमंत्री का दिन केवल एक शहर या एक विषय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जनप्रतिनिधियों से संवाद और विकास कार्यों की समीक्षा, दोनों शामिल हैं।
जनजातीय सम्मेलन में कौन-कौन होगा शामिल

भोपाल में होने वाले सम्मेलन में सांसदों, विधायकों से लेकर पंचायत स्तर तक के जनजातीय जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारी भी इसमें मौजूद रहेंगे। सम्मेलन का मकसद जनजातीय वर्ग के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना है, ताकि इन योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके। साथ ही जनजातीय क्षेत्रों की जरूरतों के मुताबिक विकास कार्यों को गति देने पर भी चर्चा होगी। गांव-गांव तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की रणनीति इस सम्मेलन के केंद्र में रहेगी।
जनजातीय गौरव सप्ताह: 11 से 18 नवंबर तक
भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में 11 से 18 नवंबर तक जनजातीय गौरव सप्ताह मनाया जाएगा। इस दौरान जनजातीय समाज के गौरव, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सप्ताह की तैयारियां पहले से शुरू हो चुकी हैं। 3 नवंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के पदाधिकारियों को संबोधित किया था। 4 नवंबर को प्रदेश कार्यालय में जिला मीडिया और सोशल मीडिया प्रभारियों की कार्यशाला हुई। अब 5 नवंबर का यह सम्मेलन तैयारियों की अगली कड़ी है।
15 नवंबर: जयंती और प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम
15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस के तहत प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम होगा। तीन प्रमुख स्थानों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, वहीं जिला स्तर पर भी जयंती के कार्यक्रम होंगे। प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम के माध्यम से मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल वर्चुअल संबोधन देंगे। 10 से 12 नवंबर तक प्रदेश और जिला स्तर पर पत्रकार वार्ताएं होंगी, जिनमें सप्ताह के कार्यक्रमों की जानकारी दी जाएगी। 14 नवंबर को जयंती की पूर्व संध्या पर प्रदेशभर में दीप प्रज्ज्वलन, स्वच्छता अभियान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बिरसा मुंडा: क्यों मनाया जाता है गौरव दिवस
बिरसा मुंडा को जनजातीय समाज के स्वतंत्रता सेनानी और जननायक के रूप में याद किया जाता है। उनकी जयंती 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई जाती है, ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान और जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सके। मध्यप्रदेश में जनजातीय समाज की बड़ी आबादी रहती है और उसके विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाएं राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में रही हैं। गौरव सप्ताह का मकसद केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि जनजातीय संस्कृति, परंपरा और योगदान को सामने लाना भी है।
16 और 17 नवंबर: छात्रावासों में संपर्क, 18 को चौपाल
सप्ताह के आखिरी चरण में भी कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी रहेगी। 16 और 17 नवंबर को प्रदेश के अनुसूचित जनजाति छात्रावासों में जनप्रतिनिधि संपर्क अभियान चलाएंगे। इसका मकसद छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों से सीधा संवाद करना और उनकी जरूरतों को समझना है। सप्ताह के अंतिम दिन 18 नवंबर को प्रदेशभर में जनजातीय गौरव चौपाल आयोजित की जाएंगी। इन चौपालों में गांव और कस्बों के स्तर पर जनजातीय समाज के लोग जुटेंगे और योजनाओं, विकास कार्यों और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा होगी।
18 नवंबर को गांधी सागर में डेस्टिनेशन कैबिनेट
18 नवंबर को ही राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक मंदसौर जिले के गांधी सागर क्षेत्र में होगी। राज्य सरकार विभिन्न स्थानों के विकास को ध्यान में रखकर डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठकें कर रही है। इससे पहले कैबिनेट बैठक इंदौर के राजवाड़ा और भोपाल के करीब जगदीशपुर में हो चुकी है। गांधी सागर में होने वाली बैठक में भी क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इस तरह 18 नवंबर का दिन जनजातीय गौरव चौपालों और कैबिनेट बैठक, दोनों लिहाज से अहम रहेगा।
हाल के दिनों में मुख्यमंत्री की सक्रियता
हाल के दिनों में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सक्रियता लगातार चर्चा में रही है। उन्होंने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की और त्योहारी सीजन में कानून-व्यवस्था तथा जनसुविधाओं को लेकर सख्त निर्देश दिए। भोपाल में एक्सपोर्ट एंड एफटीए कॉन्क्लेव के शुभारंभ के जरिए प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल भी सामने आई है। जनजातीय सम्मेलन और गौरव सप्ताह इसी सक्रियता की अगली कड़ी माने जा रहे हैं, जिनमें विकास और जनसंवाद, दोनों पर जोर है।
आगे क्या: सम्मेलन के बाद क्या देखना होगा
आज के सम्मेलन के बाद सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास और योजनाओं के लाभ को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए क्या ठोस रूपरेखा सामने आती है। 10 से 12 नवंबर तक होने वाली पत्रकार वार्ताओं में सप्ताह के कार्यक्रमों का विस्तृत ब्योरा सामने आएगा। 14 नवंबर की पूर्व संध्या के कार्यक्रम, 15 नवंबर का प्रदेश स्तरीय आयोजन और 18 नवंबर की चौपालें इस अभियान के अहम पड़ाव होंगे। इस आयोजन को लेकर विपक्ष की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सम्मेलन के बाद सामने आने वाली जानकारियों के आधार पर आगे की खबरें तैयार की जाएंगी।
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