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टीही-धार रेलखंड पर आज से सीआरएस निरीक्षण: विद्युतीकरण जांच पास, 120 से अधिक की रफ्तार से परखा जाएगा ट्रैक, धार-इंदौर मेमू का प्रस्ताव भी आगे बढ़ा

सांकेतिक चित्र: विद्युतीकृत रेल ट्रैक और छोटा स्टेशन सांकेतिक चित्र

धार ब्यूरो

सार: इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना के टीही-धार रेलखंड पर गुरुवार, 5 नवंबर से रेल संरक्षा आयुक्त का दो दिवसीय निरीक्षण शुरू हो रहा है। इससे एक दिन पहले बुधवार को विद्युतीकरण से जुड़ी तकनीकी जांच पूरी हो गई, जिसमें ओवरहेड लाइन से लेकर बिजली आपूर्ति तक की व्यवस्थाएं परखी गईं। निरीक्षण के दौरान 120 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से इंजन दौड़ाकर ट्रैक की संरक्षा और तकनीकी उपयुक्तता जांची जाएगी। साथ ही धार और इंदौर के बीच मेमू ट्रेन चलाने का प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा गया है, जिस पर निरीक्षण की रिपोर्ट के बाद स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।

आज से शुरू हो रहा है अंतिम सुरक्षा निरीक्षण

टीही-धार रेलखंड पर यात्री ट्रेन चलाने से पहले की सबसे महत्वपूर्ण औपचारिक प्रक्रिया गुरुवार से शुरू हो रही है। रेल संरक्षा आयुक्त, पश्चिमी परिमंडल इस खंड का विस्तृत निरीक्षण करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 5 नवंबर को टीही से गुणावद तक और 6 नवंबर को गुणावद से धार तक के हिस्से की जांच होगी। इस दौरान ट्रैक, पुल-पुलियों, सिग्नलिंग, विद्युतीकरण और सुरक्षा से जुड़े सभी इंतजामों को परखा जाएगा।

नई रेल लाइन पर परिचालन शुरू करने से पहले यह निरीक्षण अनिवार्य चरण माना जाता है। निरीक्षण में खंड की संरक्षा, ट्रैक की तकनीकी उपयुक्तता और तेज गति से परिचालन के लिए जरूरी व्यवस्थाओं का आकलन किया जाता है। निरीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे परिचालन की अनुमति से जुड़ी प्रक्रिया बढ़ती है। इसलिए इस दो दिवसीय जांच को धार तक रेल पहुंचने की दिशा में निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।

बुधवार को विद्युतीकरण की जांच पूरी, परख इंजन टीही से धार पहुंचा

निरीक्षण से ठीक पहले बुधवार को विद्युतीकरण से जुड़ी तकनीकी जांच पूरी कर ली गई। पश्चिम रेलवे के प्रधान मुख्य विद्युत इंजीनियर रजनीश कुमार गोयल ने टीही-धार रेलखंड का निरीक्षण किया। इस दौरान 25 केवी एसी ओवरहेड विद्युत लाइन का परीक्षण किया गया। साथ ही ट्रैक्शन सब-स्टेशन, पावर सब-स्टेशन और बिजली आपूर्ति से जुड़े अन्य तकनीकी कार्यों की बारीकी से जांच हुई।

विद्युतीकरण किसी भी विद्युतीय रेलखंड पर ट्रेन संचालन की बुनियादी जरूरत है। ओवरहेड लाइन से लेकर बिजली की निर्बाध आपूर्ति और सब-स्टेशनों की कार्यप्रणाली तक प्रत्येक व्यवस्था का परीक्षण इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बुधवार को परख इंजन से टीही से निरीक्षण शुरू किया गया और शाम तीन बजे तक इंजन धार पहुंच गया। इस जांच के पूरा होने के बाद अब रेल संरक्षा आयुक्त के निरीक्षण और गति परीक्षण की बारी है।

सांकेतिक चित्र: सुरंग की ओर जाता विद्युतीकृत रेल ट्रैक
सांकेतिक चित्र

47 किलोमीटर का खंड, 2.95 किलोमीटर लंबी सुरंग भी शामिल

टीही स्टेशन से धार स्टेशन तक नवनिर्मित सिंगल लाइन रेलखंड की लंबाई 47.14 रूट किलोमीटर है, जबकि ट्रैक किलोमीटर 59.76 है। इस खंड में 2.957 किलोमीटर लंबी सुरंग भी शामिल है। रेलखंड पर 25 केवी एसी ओवरहेड विद्युत लाइन, सिग्नलिंग, सुरंग निर्माण सहित अन्य जरूरी कार्य पूरे हो चुके हैं।

इस मार्ग पर टीही, पीथमपुर, सागौर, गुणावद और धार स्टेशन आते हैं। पीथमपुर के पास बनी सुरंग इस खंड की सबसे चुनौतीपूर्ण संरचनाओं में गिनी जाती रही है। सुरंग में बैलास्टलेस ट्रैक बिछाने का काम पहले ही पूरा हो चुका था। अब सीआरएस निरीक्षण में सुरंग सहित पूरे खंड की संरक्षा और परिचालन क्षमता को अंतिम रूप से परखा जाएगा।

2 नवंबर को 130 की रफ्तार तक हुआ था हाई-स्पीड ट्रायल

इससे पहले 2 नवंबर को इस खंड पर पहली बार इलेक्ट्रिक इंजन का हाई-स्पीड ट्रायल किया गया था। ट्रायल चार चरणों में हुआ। पहले चरण में इंजन 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चला, दूसरे में 75, तीसरे में 110 और अंतिम चरण में 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ा। दोपहर 1:35 बजे टीही से निकला इंजन पीथमपुर, सागौर और गुणावद होते हुए धार पहुंचा था।

ट्रायल के दौरान ट्रैक और पीथमपुर की सुरंग का व्यवहार सामान्य और सुरक्षित पाया गया। तेज गति से इंजन गुजरने के दौरान सुरंग और ट्रैक की स्थिति पर विशेष नजर रखी गई। इसी ट्रायल के बाद यह स्पष्ट हुआ था कि खंड अब अंतिम सुरक्षा निरीक्षण के चरण तक पहुंच गया है। अब सीआरएस निरीक्षण में 120 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से इंजन दौड़ाकर ट्रैक की क्षमता को फिर से परखा जाएगा।

गति परीक्षण के दौरान ट्रैक के पास न जाने की अपील

रेलवे ने निरीक्षण और गति परीक्षण को देखते हुए आसपास के ग्रामीणों और आम नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। रतलाम मंडल ने स्पष्ट किया है कि परीक्षण के दौरान रेल इंजन तेज गति से दौड़ेगा। ऐसे में रेलवे ट्रैक के आसपास जाना दुर्घटना का कारण बन सकता है।

रेलवे ने लोगों से ट्रैक से पर्याप्त सुरक्षित दूरी बनाए रखने और अपने मवेशियों को भी रेलवे लाइन के नजदीक नहीं आने देने की अपील की है। संभावित दुर्घटनाओं और जान-माल की हानि से बचने के लिए रेलवे प्रशासन ने नागरिकों से सहयोग करने को कहा है। परीक्षण के दिनों में ट्रैक के आसपास किसी भी तरह की गतिविधि से बचना जरूरी बताया गया है।

धार-इंदौर मेमू का प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा गया

धार से इंदौर और इंदौर से धार के बीच यात्री ट्रेन शुरू करने को लेकर रेलवे स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। पश्चिम रेलवे की ओर से धार-इंदौर के बीच मेमू ट्रेन चलाने का प्रस्ताव तैयार कर उच्च स्तर पर भेजा गया है। 5 और 6 नवंबर को रेल संरक्षा आयुक्त के निरीक्षण और गति परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर इस संबंध में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।

इसके अलावा रेल सुविधा का विस्तार करते हुए लंबी दूरी की कुछ ट्रेनों को महू से धार तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। यदि इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो धार और आसपास के आदिवासी अंचल के यात्रियों को इंदौर सहित अन्य शहरों तक आवागमन में बड़ी सुविधा मिल सकती है। हालांकि अभी इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

दिसंबर में लोकार्पण की संभावना, आधिकारिक कार्यक्रम अभी घोषित नहीं

दाहोद-इंदौर रेल परियोजना के लोकार्पण को लेकर भी तैयारियां और संभावनाएं सामने आ रही हैं। दिसंबर माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस परियोजना का लोकार्पण कर सकते हैं, ऐसी संभावना जताई जा रही है। संभावना है कि प्रधानमंत्री धार पहुंचकर स्थानीय कार्यक्रम में शामिल हों और परियोजना का लोकार्पण करें अथवा वर्चुअल माध्यम से इसकी शुरुआत करें।

हालांकि रेलवे की ओर से अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है। इसलिए लोकार्पण की तारीख या कार्यक्रम के स्वरूप को लेकर अभी कोई दावा नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री पोर्टल के माध्यम से भी इस परियोजना की निगरानी की जाती रही है। आदिवासी अंचल को रेल सुविधा की सौगात देने वाली इस परियोजना के लोकार्पण को लेकर लोगों की नजरें अब सीआरएस निरीक्षण की रिपोर्ट पर टिकी हैं।

आगे क्या: रिपोर्ट के बाद साफ होगा परिचालन का रास्ता

सीआरएस निरीक्षण पूरा होने के बाद तैयार रिपोर्ट सक्षम स्तर पर भेजी जाएगी। रिपोर्ट में सुरक्षा मानकों पर खंड के खरा उतरने की स्थिति स्पष्ट होगी। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद ही टीही से धार तक रेल परिचालन का रास्ता साफ हो सकेगा।

धार जिले के लोग लंबे समय से रेल सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। इंदौर-दाहोद परियोजना के इस खंड के शुरू होने से धार का सीधा रेल संपर्क इंदौर से जुड़ेगा। इससे व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए आवागमन आसान होने की उम्मीद है। अभी यात्री ट्रेनों के शुरू होने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। सीआरएस निरीक्षण और उसके बाद की औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही परिचालन की तारीख तय हो सकेगी।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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