भोपाल ब्यूरो
सार: मध्यप्रदेश में मोहन सरकार दिसंबर में अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे करने की ओर बढ़ रही है। मोहन सरकार तीन साल के इस सफर में पहला वर्ष महिलाओं, दूसरा उद्योग और तीसरा किसान कल्याण को समर्पित कर चुकी है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश को 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें से करीब 12 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। वहीं विपक्ष ने निवेश के इन दावों पर सवाल उठाते हुए पिछली इन्वेस्टर्स समिट का हिसाब और श्वेतपत्र मांगा है।
मोहन सरकार तीन साल: दिसंबर में पूरा होगा कार्यकाल का तीसरा वर्ष
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार अगले महीने अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे करने की ओर बढ़ रही है। तीन साल के आकलन में सरकार के कामकाज को लेकर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी राय है, लेकिन यह तय है कि इन तीन वर्षों में सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं साल-दर-साल तय की हैं।
तीन साल के आकलन के अनुसार मुख्यमंत्री ने कार्यकाल का पहला वर्ष महिलाओं को समर्पित किया था। दूसरा वर्ष उद्योग जगत को समर्पित रहा, जहां से निवेश लाने की बड़ी शुरुआत हुई। तीसरा वर्ष किसान कल्याण के नाम रहा और अगला वर्ष युवाओं के लिए घोषित किया गया है। इस तरह सरकार ने हर साल एक बड़े वर्ग को केंद्र में रखकर काम करने की रणनीति अपनाई है।
भाजपा ने वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव मोहन यादव के चेहरे पर नहीं लड़ा था। ऐसे में उनके सामने उम्मीदों से ज्यादा उपलब्धियों का खाता भरने की चुनौती थी। तीन साल के आकलन में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने बिना शोर मचाए काम करने की शैली अपनाई है। सरकार के समर्थकों का कहना है कि यही शैली उनकी पहचान बनी है।
तीन साल पूरे होने का यह मौका सरकार के लिए अपने काम का लेखा-जोखा पेश करने का भी है। निवेश, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर सरकार के दावे बड़े हैं। विपक्ष इन्हीं दावों की हकीकत पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में तीन साल का यह आकलन केवल उपलब्धियों की सूची नहीं, बल्कि दावों और सवालों की कसौटी भी है।
निवेश के दावे: 34 लाख करोड़ के प्रस्ताव, 12 लाख करोड़ धरातल पर
तीन साल के आकलन में सबसे बड़ा दावा निवेश को लेकर है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश को 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से करीब 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने अलग-अलग मंचों पर यह आंकड़ा दोहराया है।
निवेश लाने की इस कोशिश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट सबसे बड़ा मंच रहा। भोपाल में हुई समिट के बाद से सरकार ने रीजनल कॉन्क्लेव, सेक्टर समिट और विदेशी रोड शो के जरिए निवेशकों से संपर्क बढ़ाया। हाल में भोपाल में एक्सपोर्ट एंड एफटीए कॉन्क्लेव का आयोजन भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जिसमें राज्य के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया।
सेमीकंडक्टर समिट में भी निवेश के बड़े प्रस्ताव सामने आए। इंदौर में हुई समिट में 14 कंपनियों ने 5,800 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए थे, जिनसे 10 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद जताई गई थी। इस समिट में सेमीकंडक्टर नीति का जापानी, ताइवानी और कोरियाई भाषाओं में विमोचन भी किया गया था।
रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में भी बड़े दावे किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार बीना मध्यप्रदेश के पेट्रोकेमिकल उद्योग का नया गढ़ बन रहा है, जहां लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल यूनिट का भूमिपूजन हो चुका है। सरकार का कहना है कि पिछले ढाई वर्षों में 25 से अधिक नीतियां बनाकर निवेशकों के लिए रास्ता आसान किया गया है।

किसान कल्याण का वर्ष: एमएसपी से सोलर पंप तक
सरकार ने अपने तीसरे वर्ष को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। तीन साल के आकलन में कहा गया है कि किसानों को मजबूत करने के लिए कई मोर्चों पर एक साथ काम किया जा रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ ही सस्ती कीमत पर खाद और बिजली की व्यवस्था की गई है।
किसानों को सोलर पंप की सुविधा देने के साथ ही फसल क्षति होने पर तुरंत मुआवजे की व्यवस्था का भी दावा किया जा रहा है। सम्मान निधि के जरिए किसानों को सीधी आर्थिक मदद पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने गोपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण को भी खेती-किसानी से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को मकान और जमीन का कानूनी हक देने का काम भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है। प्रदेश में अब तक 15.98 लाख से अधिक रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं। सरकार का कहना है कि यह योजना किसानों और ग्रामीण परिवारों को बैंक ऋण और अन्य सुविधाओं का रास्ता खोल रही है।
कृषि क्षेत्र में इन प्रयासों का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने की बात कही जा रही है। आकलन में कहा गया है कि खेती के साथ पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण को जोड़ने से किसानों की आय के नए स्रोत बने हैं। हालांकि इन दावों की जमीनी हकीकत को लेकर विपक्ष और किसान संगठनों की अपनी राय है।
बजट और अर्थव्यवस्था: 4.38 लाख करोड़ से 7.28 लाख करोड़ का लक्ष्य
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर प्रदेश का बजट हर साल बढ़ रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश का बजट 4,38,317 करोड़ रुपये का पेश किया गया है। सरकार ने 2028 तक राज्य के बजट को 7.28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार भी बढ़ रहा है। वर्ष 2026-27 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 18.48 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के अनुमान से करीब 10.69 प्रतिशत अधिक है। बजट में कृषि कल्याण के लिए 1,15,013 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बिजली उत्पादन के मोर्चे पर भी बड़े दावे किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश की विद्युत उत्पादन क्षमता करीब 5,000 मेगावाट से बढ़कर 32,000 मेगावाट हो गई है। सरकार का कहना है कि निवेशकों को रियायती दरों पर औद्योगिक भूमि, पर्याप्त वाटर बैंक और सरप्लस बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
बजट को गरीब कल्याण, युवा शक्ति, अन्नदाता, नारी शक्ति, बुनियादी ढांचे और उद्योग के सिद्धांत पर तैयार किया गया है। वित्त मंत्री ने बजट पेश करते समय कहा था कि इसमें कोई नया कर नहीं लगाया गया है। लाड़ली बहना योजना के लिए 23,882 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट की बड़ी घोषणाओं में शामिल है।
सिंचाई और नदी जोड़ो: बुंदेलखंड तक पानी
तीन साल के आकलन में कहा गया है कि सिंचाई का रकबा बढ़ाकर एक करोड़ हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए तीन राज्यों के साथ नदी जोड़ो परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के साथ इन परियोजनाओं से बुंदेलखंड सहित मध्यप्रदेश के बड़े भूभाग में सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। आकलन के अनुसार इन परियोजनाओं से पेयजल और बिजली की भी भरपूर प्राप्ति होगी।
सिंचाई का रकबा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसे एक करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती भी है। नदी जोड़ो परियोजनाएं लंबी अवधि की परियोजनाएं हैं, जिनका पूरा लाभ आने वाले वर्षों में मिलेगा। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से सूखाग्रस्त इलाकों में भी पानी पहुंचेगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और शहर: सांदीपनि से मेडिकल कॉलेज तक
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने सांदीपनि स्कूलों का मॉडल खड़ा किया है। तीन साल के आकलन में कहा गया है कि इस मॉडल को देशभर में सराहना मिल रही है, हालांकि इसकी सफलता पूरी तरह प्रमाणित होने में अभी कुछ साल शेष हैं। कौशल विकास को प्राथमिकता देते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी कदम उठाए गए हैं।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रदेश में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या जिलों की संख्या के बराबर, यानी 55 तक ले जाने की योजना पर काम चल रहा है। आकलन के अनुसार यह योजना स्वास्थ्य सेवाओं को हर जिले तक पहुंचाने की दिशा में अहम कदम है।
नगरीय विकास के मोर्चे पर महानगरों और उनके आसपास के शहरों को मिलाकर अलग-अलग मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की तैयारी है। प्रदेश में एक लाख किलोमीटर सड़क के निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है। मेट्रो ट्रेन की सुविधा के साथ गांव-गांव को जोड़ने वाली मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना की बसें भी पूरे प्रदेश में चल रही हैं।
सरकारी नौकरियों के मोर्चे पर भी तैयारी की बात कही जा रही है। आकलन के अनुसार सरकार ने दो लाख से अधिक भर्तियों की तैयारी कर रखी है, जिसके लिए वर्षों से अटकी पदोन्नति का रास्ता भी साफ किया गया है। युवाओं के लिए घोषित किए गए अगले वर्ष में रोजगार का मुद्दा सबसे अहम रहने की संभावना है।
विपक्ष के सवाल: पिछली समिट का हिसाब और श्वेतपत्र की मांग
निवेश के बड़े दावों पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 4 नवंबर को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में घोषित 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों का हिसाब मांगा है। पत्र में कहा गया है कि प्रदेश की जनता को एक और इन्वेस्टर्स समिट नहीं, बल्कि पिछली समिट में किए गए वादों और खर्च का पूरा हिसाब चाहिए।
पत्र के अनुसार मार्च 2024 से नवंबर 2025 के बीच निवेश आकर्षित करने और उसके प्रचार-प्रसार पर करीब 230 करोड़ रुपये खर्च किए गए। पत्र में निवेश सम्मेलनों पर 186.64 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री की तीन विदेश यात्राओं पर करीब 34 करोड़ रुपये और विभिन्न शहरों में आयोजित बैठकों पर 9.05 करोड़ रुपये खर्च होने का उल्लेख किया गया है। अकेले भोपाल में हुई दो दिवसीय इन्वेस्टर्स समिट पर करीब 82 करोड़ रुपये खर्च होने की बात भी पत्र में कही गई है।
पटवारी ने मुख्यमंत्री से पांच सवाल पूछे हैं। इनमें यह भी शामिल है कि 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में से अब तक वास्तव में कितना निवेश प्रदेश में आया है और युवाओं को कितना रोजगार मिला है। पत्र में सरकार से निवेश के दावों पर श्वेतपत्र जारी करने और सभी निवेश प्रस्तावों, निवेशकों की पहचान और परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
पत्र के बाद सरकार की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया खबरों में सामने नहीं आई है। सरकार की ओर से पहले यह कहा जाता रहा है कि निवेश प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा धरातल पर उतर रहा है। ऐसे में निवेश के आंकड़ों को लेकर सरकार के दावे और विपक्ष के सवाल आमने-सामने हैं।
आगे की चुनौतियां: चुनाव, सिंहस्थ और कैबिनेट
तीन साल पूरे होने के बाद सरकार के सामने अगले दो वर्ष ज्यादा चुनौती भरे माने जा रहे हैं। स्थानीय निकाय, विधानसभा और उसके बाद लोकसभा के चुनाव होने हैं। इसके अलावा उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन भी है, जिसकी तैयारियां बड़े पैमाने पर चल रही हैं।
सरकार का कार्यकाल जैसे पूर्णता की ओर बढ़ेगा, कैबिनेट में बदलाव का दबाव भी बढ़ने की बात कही जा रही है। तीन साल के आकलन में कहा गया है कि मुख्यमंत्री की कार्यशैली से यह संकेत मिलता है कि वे किसी दबाव में झुके बिना अपने रास्ते पर आगे बढ़ेंगे।
आने वाले वर्ष को युवाओं के लिए घोषित किया गया है। ऐसे में रोजगार, कौशल विकास और सरकारी भर्तियों का मुद्दा सबसे अहम रहने की संभावना है। निवेश के दावों को जमीन पर उतारना, किसानों की आय बढ़ाना और सिंहस्थ की तैयारियां — ये तीनों मोर्चे सरकार की अगली परीक्षा होंगे।
तीन साल का यह आकलन बताता है कि सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं तय की हैं और उन पर काम भी हुआ है। लेकिन दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर ही आने वाले समय में सरकार के काम का असली मूल्यांकन करेगा।
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