भोपाल ब्यूरो
सार: भोपाल में आज मध्यप्रदेश एक्सपोर्ट एंड एफटीए कॉन्क्लेव आयोजित हो रहा है, जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कर रहे हैं। कॉन्क्लेव में प्रदेश के निर्यातकों के लिए पांच नई पहलें शुरू की जा रही हैं और ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों पर विस्तार से चर्चा हो रही है।
मध्यप्रदेश के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाने और प्रदेश की निर्यात क्षमता का विस्तार करने के उद्देश्य से गुरुवार, 5 नवंबर को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में मध्यप्रदेश एक्सपोर्ट एंड एफटीए कॉन्क्लेव आयोजित हो रहा है। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कर रहे हैं। मध्यप्रदेश शासन द्वारा भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के सहयोग से आयोजित इस कॉन्क्लेव में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप, केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रतिनिधि, उद्योग संगठनों के पदाधिकारी और प्रदेश के प्रमुख निर्यातक शामिल हो रहे हैं।
कॉन्क्लेव का मूल संदेश सीधा है — प्रदेश में बनने वाला उत्पाद सिर्फ स्थानीय या राष्ट्रीय बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि दुनिया के बाजारों तक पहुंचे। इसके लिए निर्यातकों को यह जानना जरूरी है कि किस देश के साथ भारत का कौन सा व्यापार समझौता है, उस समझौते में उनके उत्पाद को क्या रियायत मिलती है, और उस रियायत का लाभ लेने के लिए कौन से दस्तावेज और प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। यही जानकारी इस कॉन्क्लेव में एक ही मंच पर दी जा रही है।
कॉन्क्लेव में क्या-क्या होगा
कॉन्क्लेव में मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से प्रदेश के निर्यातकों के लिए उपलब्ध नए अवसरों को साझा किया जा रहा है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए व्यापार समझौतों के अंतर्गत भारतीय उत्पादों को मिलने वाली शुल्क रियायतों का लाभ प्रदेश के उद्यमियों तक पहुंचाने, निर्यात प्रक्रियाओं को समझने और नए व्यापारिक साझेदार विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इसके माध्यम से प्रदेश के औद्योगिक एवं कृषि आधारित उत्पादों के लिए संभावित अंतरराष्ट्रीय बाजारों की पहचान करने और निर्यात विस्तार की व्यावहारिक रणनीति पर पैनल चर्चा हो रही है। अलग-अलग सत्रों में नीति, प्रक्रिया, वित्त, गुणवत्ता और बाजार — निर्यात की पूरी श्रृंखला को कवर किया जा रहा है, ताकि एक नया निर्यातक भी यह समझ सके कि पहला कदम कहां से उठाना है और एक अनुभवी निर्यातक को भी नए बाजारों की जानकारी मिल सके।
भोपाल में हाल के महीनों में उद्योग-व्यापार सम्मेलन और निवेश से जुड़े आयोजन भी हुए हैं, और एक्सपोर्ट एंड एफटीए कॉन्क्लेव उसी श्रृंखला की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है — फर्क यह है कि इस बार ध्यान निवेश जुटाने से ज्यादा इस बात पर है कि प्रदेश का बना हुआ माल बाहर कैसे बिके।
निर्यातकों के लिए पांच नई पहलें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कॉन्क्लेव में प्रदेश के निर्यातकों को मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ दिलाने के लिए पांच महत्वपूर्ण नवाचारों का शुभारंभ कर रहे हैं। इनमें मध्यप्रदेश एफटीए कार्ययोजना 2026-27, मध्यप्रदेश एफटीए निर्यातक मार्गदर्शिका, मध्यप्रदेश एफटीए हेल्पडेस्क, एमपी ट्रेड पोर्टल का एफटीए मॉड्यूल और मध्यप्रदेश एफटीए एक्सेलेरेटर शामिल हैं।
एफटीए कार्ययोजना के माध्यम से प्रदेश के निर्यात विस्तार के लिए प्राथमिकता वाले उत्पादों, औद्योगिक क्लस्टरों और संभावित अंतरराष्ट्रीय बाजारों की पहचान की जाएगी। यानी यह तय होगा कि किस उत्पाद पर पहले ध्यान देना है, किस क्षेत्र के उद्यमियों को पहले मदद चाहिए और किस देश के बाजार में उस उत्पाद की सबसे ज्यादा संभावना है।
निर्यातक मार्गदर्शिका में विभिन्न देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों, शुल्क रियायतों, उत्पादों की पात्रता और निर्यात प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध होगी। एफटीए हेल्पडेस्क निर्यातकों की जिज्ञासाओं और समस्याओं के समाधान में सहायता करेगा। एमपी ट्रेड पोर्टल के एफटीए मॉड्यूल से उत्पादवार व्यापार समझौतों और निर्यात अवसरों की डिजिटल जानकारी मिलेगी। वहीं, एफटीए एक्सेलेरेटर के माध्यम से उद्यमियों को प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
इन पांचों पहलों का एक साझा उद्देश्य है — जानकारी की कमी के कारण कोई निर्यातक व्यापार समझौते का लाभ लेने से पीछे न रह जाए। अक्सर छोटे और मझोले उद्यमियों के पास न तो इतना समय होता है कि वे हर देश के समझौते की बारीकियां खुद पढ़ें, और न ही इतने संसाधन कि वे इसके लिए अलग सलाहकार रखें। कार्ययोजना, मार्गदर्शिका, हेल्पडेस्क, पोर्टल मॉड्यूल और एक्सेलेरेटर मिलकर इसी खाई को पाटने का प्रयास हैं।
ब्रिटेन, यूएई और ऑस्ट्रेलिया के समझौतों पर विशेष सत्र
कॉन्क्लेव के एक विशेष तकनीकी सत्र में ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए व्यापार समझौतों के अंतर्गत निर्यात कर चुके प्रदेश के उद्यमी अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। इसमें उत्पादों की पात्रता, उद्गम प्रमाण-पत्र, सीमा शुल्क प्रक्रिया, गुणवत्ता मानकों और अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों की आवश्यकताओं जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। इससे प्रदेश के अन्य निर्यातकों को व्यापार समझौतों का लाभ लेने की प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी।
यह सत्र इसलिए भी अहम है क्योंकि व्यापार समझौते की असली परीक्षा कागज पर नहीं, बल्कि बंदरगाह और खरीदार के गोदाम पर होती है। किसी उत्पाद को शुल्क रियायत तभी मिलती है जब उसका उद्गम प्रमाण-पत्र सही हो, गुणवत्ता मानक पूरे हों और दस्तावेजों में कोई कमी न हो। जो उद्यमी यह प्रक्रिया पहले पूरी कर चुके हैं, उनके अनुभव से नए निर्यातकों को गलतियों से बचने का रास्ता मिलता है — कौन सा दस्तावेज पहले तैयार रखें, किस मानक की जांच पहले कराएं और खरीदार से बातचीत में किन शर्तों पर ध्यान दें।
पांच प्रमुख उद्योग क्षेत्रों की भागीदारी और 2030 के लक्ष्य
कॉन्क्लेव में आयोजित विशेष पैनल चर्चा में प्रदेश के प्रमुख उद्योग क्षेत्रों के प्रतिनिधि निर्यात विस्तार की संभावनाओं और अपनी आवश्यकताओं पर विचार साझा कर रहे हैं। इसमें वस्त्र एवं परिधान, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग एवं ऑटो कंपोनेंट्स, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा रसायन उद्योग के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
उद्योग प्रतिनिधि वर्ष 2030 तक अपने-अपने क्षेत्रों के संभावित निर्यात लक्ष्य और उन्हें हासिल करने के लिए आवश्यक सहयोग एवं नीतिगत बदलावों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इस चर्चा से प्राप्त सुझावों और उद्योगों की आवश्यकताओं को प्रदेश की एफटीए कार्ययोजना में शामिल करने के लिए संकलित किया जाएगा। इससे निर्यात संवर्धन की रणनीति को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी।
यह तरीका नीति बनाने के पारंपरिक तरीके से अलग है। अक्सर नीति पहले बनती है और उद्योग बाद में अपनी दिक्कतें बताते हैं। यहां उल्टा क्रम अपनाया जा रहा है — पहले उद्योगों से पूछा जा रहा है कि उन्हें 2030 तक कहां पहुंचना है और रास्ते में क्या अड़चनें हैं, फिर उन्हीं जवाबों के आधार पर कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। वस्त्र उद्योग की जरूरतें फार्मा उद्योग से अलग होती हैं और खाद्य प्रसंस्करण की चुनौतियां इंजीनियरिंग उद्योग से अलग — इसलिए क्षेत्रवार चर्चा को कॉन्क्लेव का अहम हिस्सा बनाया गया है।
एफटीए आखिर है क्या, छोटे निर्यातक को क्या फायदा
मुक्त व्यापार समझौता, यानी एफटीए, दो या दो से अधिक देशों के बीच ऐसा समझौता होता है जिसके तहत वे एक-दूसरे के उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क को कम करते हैं या समाप्त करते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि समझौते वाले देश में भारतीय उत्पाद सस्ता पड़ता है और वहां के खरीदार के लिए उसे खरीदना आकर्षक हो जाता है। लेकिन यह लाभ अपने आप नहीं मिलता — निर्यातक को यह साबित करना होता है कि उसका उत्पाद समझौते की शर्तों के दायरे में आता है, उसके लिए सही दस्तावेज लगाने होते हैं और गुणवत्ता मानक पूरे करने होते हैं।
छोटे निर्यातक के लिए सबसे बड़ी दिक्कत जानकारी ही होती है। उसे यह पता नहीं होता कि उसके उत्पाद पर किस देश में कितनी रियायत है, उद्गम प्रमाण-पत्र कहां से बनेगा और खरीदार किन मानकों की मांग करेगा। कॉन्क्लेव में यही जानकारी सरल भाषा में, उदाहरणों के साथ दी जा रही है — ताकि इंदौर का फार्मा उद्यमी हो या प्रदेश के किसी जिले का खाद्य प्रसंस्करण इकाई चलाने वाला उद्यमी, दोनों को यह समझ आ सके कि व्यापार समझौता उनके लिए सिर्फ एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि बाजार तक पहुंचने का रास्ता है।
दस्तावेज, बीमा और गुणवत्ता — एक ही जगह मिलेगी मदद
कॉन्क्लेव में भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा भारत के व्यापार समझौतों और राष्ट्रीय स्तर पर संचालित आउटरीच कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही विदेश व्यापार महानिदेशालय के संयुक्त महानिदेशक अभिषेक शर्मा निर्यात प्रोत्साहन मिशन पर प्रस्तुति दे रहे हैं।
कॉन्क्लेव में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों के प्रतिनिधि निर्यातकों को उपलब्ध सहायता सुविधाओं और योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं। इसके लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय, निर्यात ऋण गारंटी निगम, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, भारतीय निर्यात संगठन महासंघ, इंडिया पोस्ट, एक्जिम बैंक, कस्टम्स और भारतीय मानक ब्यूरो सहित विभिन्न संस्थाओं के सहायता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
इन केंद्रों पर उद्यमियों को निर्यात संबंधी दस्तावेजी प्रक्रिया, वित्तीय सहायता, निर्यात ऋण बीमा, गुणवत्ता प्रमाणन, लॉजिस्टिक्स और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच से संबंधित मार्गदर्शन मिलेगा। साथ ही ट्रेड कनेक्ट पर तकनीकी प्रस्तुति के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी डिजिटल सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। एक निर्यातक के लिए इसका मतलब यह है कि उसे दस्तावेज के लिए एक दफ्तर, बीमा के लिए दूसरा और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए तीसरा दफ्तर नहीं भागना पड़ेगा — शुरुआती मार्गदर्शन एक ही जगह मिल जाएगा।
सरकारी एजेंसियों की भूमिका पर एक अलग पैनल चर्चा भी हो रही है, जिसमें यह बताया जा रहा है कि व्यापार और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी संस्थाएं निर्यातकों की किस तरह मदद करती हैं — दस्तावेज से लेकर डिलीवरी तक की श्रृंखला में कहां किस संस्था से संपर्क करना चाहिए।
प्रदेश के लिए क्यों अहम है यह कॉन्क्लेव
मध्यप्रदेश कृषि आधारित प्रदेश है और साथ ही इंदौर-पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र, वस्त्र, फार्मा और इंजीनियरिंग उद्योगों की मौजूदगी इसे निर्यात के लिहाज से विविधता देती है। लेकिन विविधता का फायदा तभी मिलता है जब हर क्षेत्र का उद्यमी यह जानता हो कि उसका उत्पाद किस बाजार में बिक सकता है और वहां पहुंचने का रास्ता क्या है। कॉन्क्लेव की कोशिश इसी जानकारी को प्रदेश के हर कोने के उद्यमी तक पहुंचाने की है — सिर्फ बड़े शहरों के बड़े निर्यातकों तक सीमित रखने की नहीं।
दूसरा अहम पहलू रोजगार से जुड़ा है। निर्यात बढ़ने का अर्थ है उत्पादन बढ़ना, और उत्पादन बढ़ने का अर्थ है काम के अवसर बढ़ना — खेत से लेकर फैक्ट्री तक और पैकेजिंग से लेकर ट्रांसपोर्ट तक। इसलिए निर्यात को सिर्फ व्यापार का आंकड़ा मानकर नहीं देखा जा सकता; यह प्रदेश के उद्यमियों, किसानों से जुड़े प्रसंस्करण उद्योगों और युवाओं के लिए काम के अवसरों से भी जुड़ा हुआ विषय है।
तीसरा पहलू प्रतिस्पर्धा का है। दुनिया के बाजार में वही उत्पाद टिकता है जो कीमत और गुणवत्ता दोनों में खरा उतरे। व्यापार समझौते कीमत के मोर्चे पर मदद करते हैं, लेकिन गुणवत्ता, पैकेजिंग और समय पर डिलीवरी की जिम्मेदारी उद्यमी की ही रहती है। कॉन्क्लेव में गुणवत्ता मानकों और खरीदारों की आवश्यकताओं पर हुई चर्चा इसी बात की ओर इशारा करती है कि रियायत मिलना शुरुआत है, बाजार में टिके रहना असली काम है।
आगे क्या होगा
कॉन्क्लेव से निकले सुझावों को प्रदेश की एफटीए कार्ययोजना 2026-27 में शामिल किया जाएगा, और पांच नई पहलों के माध्यम से निर्यातकों को लगातार मदद मिलती रहेगी — मार्गदर्शिका से जानकारी, हेल्पडेस्क से सवालों के जवाब, पोर्टल मॉड्यूल से डिजिटल सुविधा और एक्सेलेरेटर से प्रशिक्षण व खरीदारों से संपर्क।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि कॉन्क्लेव में हुई चर्चाएं जमीन पर कितनी उतरती हैं — कितने नए निर्यातक व्यापार समझौतों का लाभ लेने के लिए आगे आते हैं, हेल्पडेस्क और एक्सेलेरेटर तक उनकी पहुंच कितनी आसान रहती है, और प्रदेश के उत्पादों को ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में कितनी नई जगह मिलती है। इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में निर्यात के आंकड़ों और उद्यमियों के अनुभवों से मिलेंगे।
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