भोपाल ब्यूरो
सार: मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत अब तक 15,98,046 रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं। प्रदेश के सभी 55 जिलों में चल रहे इस अभियान में छिंदवाड़ा 74,002 रजिस्ट्रियों के साथ सबसे आगे है। इन दस्तावेजों से ग्रामीण परिवारों को अपनी आवासीय संपत्ति का वैधानिक अधिकार अभिलेख मिल रहा है, जिससे बैंक ऋण और दूसरी वित्तीय सुविधाओं का रास्ता आसान हो रहा है।
मध्य प्रदेश के गांवों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए उनकी आवासीय संपत्ति का कागजी अधिकार अब हकीकत बन रहा है। स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में अब तक 15 लाख 98 हजार 46 रजिस्ट्रियां पूरी की जा चुकी हैं। यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि इसके साथ ही इतने ही ग्रामीण परिवारों को अपने मकान और आवासीय भूखंड पर मालिकाना हक का पक्का दस्तावेज मिल गया है। पहले जिन परिवारों के पास अपने घर का कोई वैधानिक कागज नहीं था, वे अब उस दस्तावेज के आधार पर बैंक से ऋण लेने, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और संपत्ति से जुड़े विवादों से बचने की स्थिति में आ गए हैं।
राज्य सरकार इस अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने में जुटी है। राजस्व विभाग के अनुसार प्रदेश के सभी 55 जिलों में रजिस्ट्रियों के पंजीयन का काम निरंतर जारी है। शेष पात्र हितग्राहियों को निर्धारित समय-सीमा में अधिकार अभिलेख उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है। आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
15,98,046 रजिस्ट्रियां: क्या है इस उपलब्धि का मतलब
स्वामित्व योजना का मकसद ग्रामीण आबादी भूमि पर बने पात्र मकानों और भूखंडों का पंजीयन कराना है। गांवों में लंबे समय से यह दिक्कत रही है कि लोग पीढ़ियों से अपने घरों में रहते आए हैं, लेकिन उनके पास उस संपत्ति का कोई वैधानिक दस्तावेज नहीं होता। कागज न होने से न तो वे बैंक से ऋण ले पाते हैं, न ही संपत्ति को लेकर कोई विवाद होने पर अपना पक्ष पक्के सबूत के साथ रख पाते हैं। कई बार तो एक ही संपत्ति पर कई दावे खड़े हो जाते हैं और मामला सालों तक अटका रहता है।
स्वामित्व योजना इसी कमी को दूर करती है। इसके तहत संपत्ति का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, मौके पर सत्यापन किया जाता है और फिर पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। पंजीयन पूरा होने पर परिवार को अधिकार अभिलेख मिलता है, जो उसके मालिकाना हक का प्रमाण बनता है। अब जब प्रदेश में 15,98,046 रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि इतने परिवारों के पास अपनी संपत्ति का वैधानिक दस्तावेज पहुंच गया है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है, क्योंकि सभी जिलों में पंजीयन का काम एक साथ चल रहा है।
जिलावार तस्वीर: छिंदवाड़ा पहले, राजगढ़ दूसरे स्थान पर

जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो छिंदवाड़ा 74,002 रजिस्ट्रियों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद राजगढ़ में 64,880 और उज्जैन में 62,244 रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं। सागर में 56,143, सिवनी में 55,910, छतरपुर में 55,381, जबलपुर में 54,573, बालाघाट में 53,228 और शिवपुरी में 51,855 रजिस्ट्रियां दर्ज की गई हैं।
इसके बाद नरसिंहपुर में 49,896, मंदसौर में 49,552, रायसेन में 45,333, धार में 45,311, विदिशा में 44,025 और बैतूल में 42,743 रजिस्ट्रियां पूरी हुई हैं। नीमच, सीहोर, खंडवा, खरगोन, कटनी, शाजापुर, देवास और नर्मदापुरम में भी हजारों ग्रामीण परिवारों का पंजीयन किया जा चुका है। इंदौर में 30,141, मंडला में 29,504, दमोह में 28,181, सतना में 25,987 और गुना में 25,588 रजिस्ट्रियां पूरी हुई हैं। भोपाल में 10,887 और निवाड़ी में 10,024 रजिस्ट्रियां दर्ज की गई हैं।
यहां यह समझना जरूरी है कि केवल रजिस्ट्रियों की संख्या के आधार पर जिलों की प्रगति का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित जिले में पात्र मकानों और भूखंडों की कुल संख्या की जानकारी भी जरूरी है। किसी जिले में पात्र संपत्तियों की संख्या कम होगी तो वहां रजिस्ट्रियों की संख्या भी कम दिखेगी, भले ही वहां का काम शत-प्रतिशत पूरा हो गया हो। इसलिए जिलों की तुलना करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
छोटे जिलों में भी लगातार बढ़ रहा पंजीयन
बड़े जिलों के साथ-साथ छोटे जिलों में भी पंजीयन का काम लगातार आगे बढ़ रहा है। पांढुर्णा में 9,416, मैहर में 9,100, झाबुआ में 8,629, सीधी में 4,041 और सिंगरौली में 2,588 रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं। आलीराजपुर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर और मऊगंज में भी पंजीयन का काम जारी है।
छोटे जिलों के ये आंकड़े इसलिए खास हैं क्योंकि वहां प्रशासनिक अमला सीमित होता है और गांव दूर-दराज के इलाकों में फैले होते हैं। इसके बावजूद इन जिलों में हजारों परिवारों तक अधिकार अभिलेख पहुंचाया जा चुका है। इससे साफ है कि यह अभियान केवल बड़े शहरों के आसपास के जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के हर कोने तक पहुंच रहा है। जिन गांवों में अब तक पंजीयन नहीं हुआ है, वहां भी प्रक्रिया चल रही है और आने वाले हफ्तों में और परिवारों को दस्तावेज मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण परिवारों को क्या-क्या लाभ मिलेगा
स्वामित्व योजना से ग्रामीण परिवारों को कई तरह के लाभ मिलते हैं। सबसे पहला लाभ तो यही है कि उन्हें अपनी आवासीय संपत्ति का वैधानिक अधिकार अभिलेख मिल जाता है। यह दस्तावेज उनके मालिकाना हक का प्रमाण होता है। दूसरा बड़ा लाभ यह है कि संपत्ति के दस्तावेज के आधार पर बैंक से ऋण लेना आसान हो जाता है। पहले कागज न होने से बैंक ऋण देने से हिचकते थे, लेकिन अब दस्तावेज होने पर परिवार अपनी जरूरत के लिए ऋण ले सकेंगे, चाहे वह बच्चों की पढ़ाई हो, खेती के लिए निवेश हो या घर की मरम्मत।
तीसरा लाभ संपत्ति से जुड़े विवादों में कमी का है। जब हर संपत्ति का पक्का रिकॉर्ड और दस्तावेज होगा, तो उस पर होने वाले झगड़े कम होंगे। परिवारों को अदालतों और पंचायतों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। चौथा लाभ यह है कि पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से आसान हो गई है, जिससे लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। कुल मिलाकर यह योजना ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
निशुल्क पंजीयन और डिजिटल प्रक्रिया
योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि पर स्थित पात्र मकानों और भूखंडों का पंजीयन निशुल्क किया जा रहा है। यानी पात्र परिवारों को पंजीयन के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता। पक्की रजिस्ट्री के लिए लगने वाली स्टांप शुल्क की राशि राज्य सरकार अपने खजाने से वहन करती है। यह बात इसलिए अहम है क्योंकि ग्रामीण इलाकों में कई परिवार ऐसे हैं जो शुल्क की वजह से ही पंजीयन नहीं करा पाते थे। निशुल्क व्यवस्था ने इस रुकावट को दूर कर दिया है।
पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘सारा’ ऐप और ‘संपदा 2.0’ जैसी प्रणालियों के जरिए संपत्ति का रिकॉर्ड तैयार करने, मौके पर सत्यापन करने और पंजीयन की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जा रहा है। डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ी है और गड़बड़ी की आशंका कम हुई है। साथ ही काम की गति भी तेज हुई है, जिसका असर आंकड़ों में साफ दिख रहा है।
12.87 लाख से 15.98 लाख तक का सफर
इस अभियान की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1 नवंबर की स्थिति में प्रदेश में 12 लाख 87 हजार 252 रजिस्ट्रियां पूरी हुई थीं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उसी दिन मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना की प्रगति की समीक्षा बैठक को संबोधित किया था। बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व ने यह आंकड़ा रखा था और बताया था कि 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
महज कुछ ही दिनों में यह आंकड़ा 12.87 लाख से बढ़कर 15.98 लाख तक पहुंच गया है। यानी रोजाना हजारों की संख्या में रजिस्ट्रियां पूरी हो रही हैं। कैबिनेट की बैठक में भी इस योजना की प्रगति की जानकारी दी गई थी और बताया गया था कि इस योजना से करीब 60 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। 20 लाख रजिस्ट्रियों का लक्ष्य पूरा होने पर लाभान्वित लोगों की संख्या और बढ़ जाएगी। यह रफ्तार बताती है कि प्रशासन इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता पर चला रहा है।
धनतेरस पर गांवों में शत-प्रतिशत पंजीयन का अभियान
इस अभियान को और तेज करने के लिए धनतेरस के दिन एक विशेष पहल की जा रही है। 6 नवंबर को धनतेरस के अवसर पर प्रदेश के सभी मंत्री, सांसद और विधायक अपने पैतृक गांव या अपनी पसंद के किसी गांव में जाकर उस गांव की शत-प्रतिशत रजिस्ट्री अपने सामने रहकर पूरी कराएंगे। इसका मकसद गांवों में बचे हुए पात्र हितग्राहियों का पंजीयन एक ही दिन में पूरा कराना है।
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को उन गांवों में जाकर दीपावली और गोवर्धन पूजा मनाने के निर्देश भी दिए हैं, जहां आबादी भूमि पर काबिज पात्र हितग्राहियों की शत-प्रतिशत रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। इससे उन गांवों के लोगों का हौसला बढ़ेगा और दूसरे गांवों में भी शत-प्रतिशत पंजीयन की प्रेरणा मिलेगी। दीपावली के त्योहार के ठीक पहले गांवों में इस तरह का अभियान ग्रामीण परिवारों के लिए एक बड़ी सौगात की तरह है, क्योंकि त्योहार के मौके पर उन्हें अपनी संपत्ति का पक्का दस्तावेज मिलने जा रहा है।
आगे क्या: शेष पात्र हितग्राहियों तक अधिकार अभिलेख
राजस्व विभाग के अनुसार प्रदेश के सभी जिलों में स्वामित्व योजना का काम जारी है और शेष पात्र हितग्राहियों को निर्धारित समय-सीमा में अधिकार अभिलेख उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है। 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियों का लक्ष्य रखा गया है, और मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इस लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ा जा रहा है।
आने वाले दिनों में धनतेरस के अभियान के बाद आंकड़े और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। जिन गांवों में अभी पंजीयन बाकी है, वहां के परिवारों को सलाह दी जाती है कि वे अपने दस्तावेज तैयार रखें और स्थानीय राजस्व अमले से संपर्क में रहें। स्वामित्व योजना का असली मकसद तभी पूरा होगा जब प्रदेश का कोई भी पात्र ग्रामीण परिवार अपनी संपत्ति के वैधानिक दस्तावेज से वंचित न रहे। 15.98 लाख का आंकड़ा इस दिशा में एक बड़ा पड़ाव है, लेकिन मंजिल अभी 20 लाख और उसके बाद शत-प्रतिशत पंजीयन की है।
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