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टीही-धार रेलखंड पर पहली बार दौड़ा इलेक्ट्रिक इंजन: 47 किमी ट्रैक पर 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सफल हाई-स्पीड ट्रायल, 5-6 नवंबर को सीआरएस निरीक्षण

सांकेतिक चित्र: विद्युतीकृत ट्रैक पर इलेक्ट्रिक इंजन सांकेतिक चित्र

इंदौर ब्यूरो

सार: इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन के टीही-धार खंड पर सोमवार, 2 नवंबर को पहली बार इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ाया गया। 47 किलोमीटर लंबे नवनिर्मित ट्रैक पर चार चरणों में गति परीक्षण हुआ और अंतिम चरण में इंजन 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचा। पीथमपुर की करीब तीन किलोमीटर लंबी सुरंग का प्रदर्शन भी सामान्य और सुरक्षित पाया गया। अब 5 और 6 नवंबर को रेलवे सुरक्षा आयुक्त की टीम इस खंड का अंतिम निरीक्षण करेगी, जिसके बाद यात्री और मालगाड़ियों के संचालन का रास्ता साफ हो सकेगा।

ट्रायल के दिन क्या-क्या हुआ

सोमवार को टीही से धार तक का रेलखंड पहली बार इलेक्ट्रिक इंजन की आवाज से गूंजा। इंजन टीही से रवाना होकर पीथमपुर, सागौर और गुणावद होते हुए धार पहुंचा। इस खंड पर अब तक ट्रैक बिछाने, विद्युतीकरण और सिग्नलिंग का काम पूरा हो चुका था, लेकिन इलेक्ट्रिक इंजन का चलना ही वह पड़ाव था जिससे यह साफ होता है कि ट्रैक और बिजली व्यवस्था वास्तविक परिचालन के लिए तैयार है या नहीं।

ट्रायल की तैयारियों के तहत रविवार शाम को ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन का काम पूरा करके 25 हजार वोल्ट की एसी लाइन को चार्ज किया गया था। इसके बाद सोमवार को गति परीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। सुबह के लिए तय कार्यक्रम के मुकाबले वास्तविक परीक्षण दोपहर बाद शुरू हुआ, क्योंकि बिजली से जुड़े कुछ काम पूरे होने में समय लगा। इसके बावजूद दिन भर में चारों चरणों का परीक्षण पूरा कर लिया गया।

इस परीक्षण को देखने के लिए ट्रैक के आसपास के गांवों में भी उत्सुकता रही। लंबे समय से धार तक रेल पहुंचने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए यह दिन इसलिए अहम था, क्योंकि यह ट्रायल यात्री ट्रेन संचालन की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। हालांकि अभी यात्री सेवा शुरू होने की कोई तिथि घोषित नहीं हुई है, और यह फैसला सुरक्षा निरीक्षण के बाद ही होगा।

चार चरणों में हुआ गति परीक्षण

गति परीक्षण एक ही रफ्तार से नहीं किया गया, बल्कि इसे चार चरणों में बांटा गया था। पहले चरण में इंजन को 30 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से टीही से धार तक चलाया गया। इस धीमी गति का मकसद ट्रैक, पुल-पुलियों और अन्य निर्माण कार्यों की शुरुआती जांच करना था। दूसरे चरण में धार से टीही की ओर इंजन को 75 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ाया गया।

तीसरे चरण में गति बढ़ाकर 110 किलोमीटर प्रति घंटा की गई, जिसमें इंजन टीही से धार तक पहुंचा। चौथा और अंतिम चरण सबसे अहम था, जिसमें धार से टीही की ओर इंजन को 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया गया। इस तरह एक ही दिन में धीमी गति से लेकर हाई-स्पीड तक के सभी चरण पूरे किए गए। दो फेरों में हुई इस कवायद के दौरान ट्रैक की मजबूती, पुल-पुलियों की स्थिति और विद्युत व्यवस्था के व्यवहार की जांच की गई।

पहले फेरे में धीमी गति से चलकर इंजन दोपहर बाद धार पहुंचा, और इसके बाद गति बढ़ाते हुए परीक्षण आगे बढ़ा। शाम तक अंतिम चरण भी पूरा हो गया। परीक्षण के दौरान ट्रैक और सुरंग का प्रदर्शन सामान्य पाया गया, जिसे रेलवे के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

सांकेतिक चित्र: सुरंग की ओर जाता विद्युतीकृत रेल ट्रैक
सांकेतिक चित्र

पीथमपुर सुरंग की परीक्षा भी सफल

इस ट्रायल की एक खास उपलब्धि पीथमपुर स्थित करीब तीन किलोमीटर लंबी सुरंग का सफल परीक्षण रही। तेज गति से इंजन के गुजरने के दौरान सुरंग और ट्रैक का व्यवहार सामान्य पाया गया। सुरंग रेलखंड का सबसे संवेदनशील हिस्सा मानी जाती है, क्योंकि वहां वेंटिलेशन, संरचना की मजबूती और विद्युत व्यवस्था की एक साथ जांच होती है।

सुरंग से गुजरते समय इंजन की गति, ट्रैक की स्थिरता और ओवरहेड लाइन की कार्यप्रणाली पर नजर रखी गई। परीक्षण के बाद यह कहा जा सकता है कि सुरंग खंड भी हाई-स्पीड संचालन के लिए तैयार दिखा। यही वजह है कि इस ट्रायल को केवल गति का परीक्षण नहीं, बल्कि पूरे खंड की तकनीकी तैयारी का परीक्षण माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार परीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर कमियां भी सामने आईं, जिन्हें 3 नवंबर को दूर किया जाएगा। यह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें ट्रायल के बाद मिली खामियों को सुरक्षा निरीक्षण से पहले ठीक किया जाता है, ताकि अंतिम निरीक्षण के समय कोई बाधा न रहे।

अब सीआरएस निरीक्षण क्यों अहम है

किसी भी नई रेल लाइन पर यात्री ट्रेन चलाने से पहले रेलवे सुरक्षा आयुक्त का निरीक्षण अंतिम और अनिवार्य पड़ाव होता है। टीही-धार खंड पर यह निरीक्षण 5 और 6 नवंबर को होगा। 5 नवंबर को टीही से गुणावद तक और 6 नवंबर को गुणावद से धार तक के खंड का निरीक्षण किया जाएगा।

इस निरीक्षण के दौरान ट्रैक, पुल-पुलियों और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की विस्तार से जांच होगी। सीआरएस की अनुमति मिलने पर ही धार और इंदौर के बीच यात्री ट्रेन संचालन का रास्ता साफ हो सकेगा। इसके बाद ही रेलवे इस खंड पर ट्रेनों के समय, ठहराव और संचालन की योजना को अंतिम रूप दे सकेगा।

यही कारण है कि सोमवार का ट्रायल भले ही सफल रहा हो, लेकिन इसे यात्री सेवा की शुरुआत नहीं माना जा सकता। ट्रायल एक तकनीकी परीक्षण है, जबकि सीआरएस निरीक्षण एक सुरक्षा मंजूरी है। दोनों के पूरा होने के बाद ही आम यात्रियों के लिए इस मार्ग पर ट्रेन चलना संभव होगा।

इंदौर-दाहोद परियोजना की पृष्ठभूमि

टीही-धार खंड इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना का हिस्सा है। इस परियोजना के तहत इंदौर से दाहोद के बीच नई रेल लाइन बिछाई जा रही है, जिससे मालवा और निमाड़ क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। टीही-धार खंड पर नवनिर्मित बड़ी लाइन का सिविल निर्माण, विद्युतीकरण और सिग्नलिंग कार्य पूरा हो चुका है।

इस खंड पर 30 अक्टूबर से 6 नवंबर तक निरीक्षण और गति परीक्षण का कार्यक्रम तय था। सोमवार का हाई-स्पीड ट्रायल उसी कार्यक्रम का एक प्रमुख हिस्सा था। इससे पहले भी इस ट्रैक पर परीक्षण की प्रक्रिया चल रही थी, और धीरे-धीरे गति बढ़ाकर ट्रैक की क्षमता परखी जा रही थी।

इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के ट्रायल की तैयारी पर पहले भी खबर प्रकाशित हुई थी। उस समय ट्रायल की योजना, विद्युतीकरण की तैयारी और सुरक्षा अपील के बारे में जानकारी दी गई थी। सोमवार का सफल परीक्षण उसी तैयारी का अगला और निर्णायक चरण है।

यात्रियों और क्षेत्र के लिए इसका मतलब क्या है

धार तक रेल पहुंचना इस क्षेत्र के यात्रियों, व्यापारियों और विद्यार्थियों के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। अभी धार से इंदौर और आसपास के शहरों तक की यात्रा के लिए सड़क मार्ग पर निर्भरता अधिक है। रेल सेवा शुरू होने पर यात्रा का समय, लागत और सुविधा तीनों में बदलाव की उम्मीद की जा रही है।

किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए भी रेल कनेक्टिविटी का मतलब है कि उनकी उपज और सामान को बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। मालगाड़ियों के संचालन से औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर और आसपास के इलाकों को भी फायदा पहुंच सकता है, क्योंकि वहां से सामान की ढुलाई के लिए रेल एक सस्ता और भरोसेमंद विकल्प बन सकती है।

हालांकि यह सब सीआरएस की मंजूरी और रेलवे की संचालन योजना पर निर्भर करेगा। ट्रेनों की संख्या, समय और ठहराव के बारे में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए यात्रियों को सेवा शुरू होने की तिथि के बारे में किसी भी अपुष्ट दावे पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए।

सुरक्षा अपील और आगे क्या होगा

ट्रायल और निरीक्षण के दौरान रेलवे ने लोगों से अपील की है कि वे रेलवे ट्रैक के पास न जाएं और अपने पशुओं को भी ट्रैक की ओर न जाने दें। 6 नवंबर तक सुबह 8 बजे से रात 9 बजे के बीच इस मार्ग पर ट्रायल और निरीक्षण की गतिविधियां चलेंगी, इसलिए ट्रैक के आसपास रहना खतरनाक हो सकता है। ओवरहेड लाइन में 25 हजार वोल्ट की बिजली प्रवाहित हो रही है, इसलिए ट्रैक और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।

आगे की प्रक्रिया अब इस क्रम में होगी: पहले 3 नवंबर को ट्रायल में सामने आई कमियों को दूर किया जाएगा, फिर 5 और 6 नवंबर को सीआरएस निरीक्षण होगा, और उसके बाद सुरक्षा मंजूरी मिलने पर यात्री और मालगाड़ियों के संचालन का रास्ता साफ होगा। रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में वंदे भारत जैसी परियोजनाएं भी चर्चा में हैं, लेकिन टीही-धार खंड के लिए फिलहाल सबसे अहम कदम सीआरएस की हरी झंडी है।

इस खंड पर यात्री सेवा शुरू होने के बाद इंदौर-दाहोद परियोजना का एक और हिस्सा पूरा हो जाएगा। तब तक रेलवे की अपील का पालन करना और ट्रैक से दूरी बनाए रखना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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