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नशा-शराब माफिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की सख्त कार्रवाई: पांच जिलों में शिकंजा, दीपावली पर विशेष सतर्कता

सांकेतिक चित्र: हाईवे पर पुलिस जांच चौकी सांकेतिक चित्र

भोपाल ब्यूरो

दीपावली से पहले मध्यप्रदेश में नशा और अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में ड्रग्स माफिया, अवैध शराब और अवैध हथियारों के खिलाफ प्रदेशव्यापी अभियान के निर्देश दिए हैं। पुलिस को अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की खुली छूट दी गई है, और पांच जिलों में फैले अवैध शराब कारोबार के नेटवर्क को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

मुख्यमंत्री निवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक

मंगलवार को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मध्यप्रदेश में अवैध गतिविधियों के खिलाफ पूरी ताकत और दृढ़ता के साथ कार्रवाई की जाए। बैठक में नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध शराब के परिवहन और भंडारण, अवैध आग्नेयास्त्रों, कार्बाइन और विस्फोटक सामग्री पर विशेष चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध शराब के परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए पूरे प्रदेश में एक साथ अभियान चलाया जाएगा। ऐसे अवैध कारोबार में जो भी व्यक्ति संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे बिना किसी दबाव के कानून के अनुसार कार्रवाई करें और आम जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान यह भी तय किया गया कि त्योहारी सीजन में पुलिस की सतर्कता और गश्त बढ़ाई जाएगी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

खातेगांव की घटना बनी सख्ती की वजह

इस उच्चस्तरीय बैठक की पृष्ठभूमि में देवास जिले की खातेगांव की घटना है। सोमवार तड़के इंदौर-बैतूल हाईवे पर अवैध शराब ले जा रहे एक ट्रक को रोकने के प्रयास में खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत हो गई थी। जानकारी के अनुसार ट्रक में विशेष रूप से बनाए गए खुफिया खांचे में 1800 लीटर से अधिक शराब छिपाकर ले जाई जा रही थी। इस घटना के बाद प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

घटना की जानकारी मिलते ही मंत्री नरेंद्र सिंह पटेल को मौके पर भेजा गया था, और विशेष पुलिस महानिदेशक उपेंद्र जैन को भी आवश्यक निर्देश दिए गए थे। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि कर्तव्य के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मी और उसके परिवार को सरकार की ओर से हरसंभव सहायता दी जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि अवैध शराब का नेटवर्क कितना संगठित और खतरनाक हो चुका है, और इसीलिए इस नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की रणनीति पर चर्चा हुई।

सांकेतिक चित्र: बाजार में गश्त करती पुलिस
सांकेतिक चित्र

पांच जिलों में एक साथ कार्रवाई

बैठक में सामने आया कि देवास की घटना से जुड़ा अवैध शराब कारोबार पांच जिलों में फैला हुआ है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इन पांचों जिलों में पुलिस की कार्रवाई तेज कर दी गई है। पुलिस ने शराब के परिवहन में इस्तेमाल किए गए ट्रक को जब्त कर लिया है। इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें ट्रक का मालिक और इस कारोबार का मुख्य सरगना शामिल है। ट्रक चालक की तलाश अभी जारी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार पांच जिलों में फैले इस नेटवर्क की कड़ियों की पड़ताल की जा रही है। परिवहन, भंडारण और बिक्री — तीनों स्तरों पर एक साथ कार्रवाई की रणनीति बनाई गई है, ताकि नेटवर्क के किसी भी हिस्से को बचने का मौका न मिले। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस अभियान में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। अवैध शराब के कारोबार से जुड़े हर व्यक्ति तक कानून की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

टीआई के परिवार को आर्थिक सहायता और अनुकंपा नियुक्ति

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खातेगांव में जान गंवाने वाले थाना प्रभारी दिलीप पुरी के परिवार को आर्थिक और रोजगार संबंधी सहायता देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने उनकी पत्नी को उपनिरीक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने और परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता है कि कर्तव्य के दौरान अपने प्राणों की बाजी लगाने वाले जवान और उसके परिवार को हरसंभव सहायता दी जाए। यह सहायता केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। अनुकंपा नियुक्ति से परिवार को स्थायी सहारा मिलेगा, और आर्थिक सहायता से तत्काल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

दीपावली पर विशेष सतर्कता के निर्देश

बैठक में आगामी दीपावली पर्व पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर भी विस्तृत निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि दीपावली के दौरान अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष सतर्कता बरती जाए। कार्बाइड गन और अवैध पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह नियंत्रण रखने के निर्देश दिए गए हैं। दीपावली के बाद भी असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है।

त्योहारी सीजन में भीड़भाड़ वाले स्थानों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने की योजना है। अवैध रूप से भंडारित विस्फोटक सामग्री और बिना लाइसेंस के बेचे जा रहे पटाखों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहार के दौरान आम नागरिक सुरक्षित और निश्चिंत होकर खरीदारी और उत्सव मना सकें, यह पुलिस की जिम्मेदारी है। किसी भी तरह की लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

2029 तक नशामुक्त प्रदेश का लक्ष्य

बैठक में मुख्यमंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि वर्ष 2029 तक मध्यप्रदेश को नशे की समस्या से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। यह लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2029 तक ड्रग्स माफिया के खिलाफ कठोर कार्रवाई के संकल्प के अनुरूप है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संकल्प के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश में प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।

नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल गिरोहों पर कानूनी शिकंजा कसने के साथ-साथ इस समस्या की जड़ तक पहुंचने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि नशे के अवैध कारोबार के परिवहन मार्गों, भंडारण ठिकानों और बिक्री के नेटवर्क की पहचान करके एक साथ कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि यह युवाओं के भविष्य और समाज की सेहत से जुड़ा मुद्दा है, इसलिए इसके खिलाफ अभियान लगातार और निर्णायक होना चाहिए।

पुलिस को खुली छूट, लापरवाही पर जवाबदेही

मुख्यमंत्री ने बैठक में पुलिस अधिकारियों को अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की खुली छूट दी है। उन्होंने कहा कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अवैध शराब, नशीले पदार्थों और अवैध हथियारों के खिलाफ निडर होकर कार्रवाई करें।

इस बैठक से यह संदेश साफ है कि प्रदेश सरकार त्योहारी सीजन से पहले कानून-व्यवस्था को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहती। अवैध शराब और नशे के नेटवर्क के खिलाफ एक साथ कई जिलों में चल रही कार्रवाई, परिवार को सहायता और दीपावली पर विशेष सतर्कता — ये सभी कदम एक ही रणनीति के हिस्से हैं। आने वाले दिनों में इस अभियान के और नतीजे सामने आने की उम्मीद है, और पुलिस की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।

कार्बाइड गन पर पहले भी लग चुकी है रोक

गौरतलब है कि कार्बाइड गन और विस्फोटक सामग्री के खिलाफ प्रदेश में पहले भी सख्ती हो चुकी है। अक्टूबर में मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को कार्बाइड गन और लैंप के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए थे, और कहा था कि हादसे पर संबंधित अधिकारी जवाबदेह होंगे। भोपाल में पुलिस आयुक्त की ओर से कार्बाइड गन, तोप और लैंप पर दो महीने का प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किया गया था। मंगलवार की बैठक में दिए गए निर्देश उसी सख्ती को आगे बढ़ाते हैं, ताकि दीपावली के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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