Headlines

भूटान ने प्रधानमंत्री मोदी को दिया अनोखा सम्मान: गेलेफू में 108 स्तूपों में से 76वां स्तूप उनके नाम समर्पित, मोदी बोले — ‘गहराई से प्रभावित हूँ’

सांकेतिक चित्र: भूटान में पारंपरिक बौद्ध स्तूप (चोर्टेन) सांकेतिक चित्र (विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली ब्यूरो

भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में एक ही दिन में खड़े किए गए 108 बौद्ध स्तूपों में से 76वां स्तूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया है। भारत के प्रति आभार के इस प्रतीक पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि वे इस सम्मान से गहराई से प्रभावित हैं और यह स्तूप दोनों देशों की साझा आध्यात्मिक विरासत और मित्रता का स्थायी प्रतीक बनेगा।

गेलेफू में क्या हुआ

1 नवंबर 2026 को भूटान के दक्षिणी शहर गेलेफू में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन हुआ। ल्हाबाब दुचेन के पावन अवसर पर माउ छू नदी के किनारे एक ही दिन में 108 जांगचुब चोर्टेन, यानी बौद्ध स्तूप, खड़े किए गए और उनका अभिषेक किया गया। तड़के शुरू हुआ समारोह दोपहर तक चला। इसमें भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, रानी जेत्सुन पेमा, भूटान के प्रधानमंत्री दाशो छेरिंग तोबगे और भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू मौजूद रहे।

समारोह में देश-विदेश से आए लगभग दो लाख लोगों ने भाग लिया। विभिन्न बौद्ध संप्रदायों के धर्मगुरु भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 58 सेट पारंपरिक दुंगचेन, यानी लंबे धार्मिक वाद्य यंत्रों, की ध्वनि के बीच स्तूपों का अभिषेक हुआ। यह पूरा आयोजन गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना का हिस्सा है, जिसकी परिकल्पना स्वयं भूटान के राजा ने की है।

76वां स्तूप ही क्यों मोदी को समर्पित

108 स्तूपों में से 76वें स्तूप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया गया। भूटानी अधिकारियों के अनुसार यह संख्या इसलिए चुनी गई क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में 76 वर्ष के हुए हैं। समर्पण का दूसरा और बड़ा कारण गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना के प्रति भारत का निरंतर समर्थन है।

समारोह के दौरान भूटान के राजा और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मिलकर उस पट्टिका का अनावरण किया, जिसके जरिए 76वें जांगचुब चोर्टेन को प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित किया गया। रिजिजू ने कहा कि यह भारत के लिए बहुत बड़ा सम्मान है कि अत्यंत पवित्र 76वां स्तूप प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित किया गया है। उन्होंने इसे भारत और भूटान के बीच गहरी आध्यात्मिक और सभ्यतागत मित्रता का प्रतीक बताया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी इस जानकारी को साझा किया और बताया कि 1 नवंबर को भूटान में एक ही दिन में 108 स्तूपों का निर्माण और अभिषेक किया गया।

सांकेतिक चित्र: भूटान का बौद्ध स्तूप

प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मान पर भूटान के राजा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे इस भाव से गहराई से प्रभावित हैं। प्रधानमंत्री ने जांगचुब चोर्टेन को दोनों देशों की साझा आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत तथा मित्रता का स्थायी प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री का यह संदेश 3 नवंबर की रात सामने आया और इसके बाद 4 नवंबर को इस सम्मान की चर्चा भारत में भी तेज हो गई। भारत और भूटान के बीच यह कोई औपचारिक राजनयिक आदान-प्रदान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और भावनात्मक सम्मान है, जो दोनों देशों के लोगों के बीच पुराने रिश्तों को दर्शाता है।

एक ही दिन में कैसे खड़ा हुआ यह आध्यात्मिक कॉरिडोर

इस परियोजना का पैमाना अपने आप में असाधारण है। प्रत्येक स्तूप 15 मीटर ऊंचा है और एक-दूसरे से 108 मीटर की दूरी पर स्थित है। इस तरह 108 स्तूप माउ छू नदी के किनारे लगभग 11.7 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में एक ही कतार में खड़े हैं, जो दूर से देखने पर स्तूपों की एक शोभायात्रा जैसे लगते हैं।

इन स्तूपों के निर्माण में 40 हजार से अधिक स्वयंसेवकों, भिक्षुओं और कारीगरों ने भाग लिया। आधी रात के बाद शुरू हुए काम में हजारों लोगों ने एक साथ हाथ बंटाया। स्तूपों के भीतर पवित्र अवशेष, धर्मग्रंथ, प्रार्थनाएं और अन्य पवित्र वस्तुएं रखी गई हैं, जो पारंपरिक बौद्ध विधि के अनुसार तैयार की गई हैं।

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना 21 फरवरी 2026 को राजा की ओर से घोषित की गई थी। इसका उद्देश्य शांति और सभी प्राणियों के कल्याण के लिए एक स्थायी आध्यात्मिक परिदृश्य तैयार करना है। 1 से 4 नवंबर तक चलने वाले चार दिवसीय समारोह में अभिषेक प्रार्थनाएं, धार्मिक अर्पण और नए स्तूपों की परिक्रमा शामिल है।

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी क्या है

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान के राजा की महत्वाकांक्षी परियोजना है। यह असम सीमा के पास दक्षिणी भूटान में विकसित किया जा रहा एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है। इसकी परिकल्पना एक ऐसे आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में की गई है, जो प्राचीन भूटानी सिद्धांतों और परंपराओं पर आधारित हो।

इस शहर का उद्देश्य आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता और नागरिकों की खुशहाली को केंद्र में रखना है। यानी यह ऐसा आर्थिक केंद्र बनेगा, जहां वाणिज्यिक लाभ से ज्यादा पर्यावरण और लोगों के कल्याण को महत्व दिया जाएगा। इस शहर का डिजाइन डेनमार्क के वास्तुकारों ने तैयार किया है।

108 स्तूपों की यह श्रृंखला इसी शहर की आध्यात्मिक नींव मानी जा रही है। भूटान के राजा ने कहा है कि माउ छू नदी के किनारे खड़े ये स्तूप केवल निर्माण नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा भी हैं। इनके जरिए गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी को वज्रयान बौद्ध धर्म के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है।

बौद्ध परंपरा में 108 का महत्व

बौद्ध परंपरा में 108 की संख्या का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। इसे बुद्ध की शिक्षाओं से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि 108 मन की उन प्रवृत्तियों का प्रतीक है, जिनसे ऊपर उठकर साधक ज्ञान की ओर बढ़ता है। जाप माला में भी 108 मनके होते हैं, जो साधना की पूर्णता का प्रतीक माने जाते हैं।

जांगचुब चोर्टेन का अर्थ है ज्ञानोदय के स्तूप। बौद्ध मान्यता के अनुसार ये स्तूप बुद्ध के ज्ञान और जीवन की शिक्षाओं के प्रतीक हैं। भूटान में स्तूपों की परंपरा ढाई हजार वर्ष से अधिक पुरानी मानी जाती है। शुरुआती स्तूप बुद्ध के अवशेषों को संरक्षित करने के लिए बनाए गए थे।

इसीलिए 108 स्तूपों का एक साथ खड़ा होना केवल एक निर्माण उपलब्धि नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक संदेश भी है। भूटान ने इसके जरिए शांति, करुणा और सभी प्राणियों के कल्याण की कामना को एक स्थायी रूप दिया है।

भारत-भूटान मित्रता के लिए इसका अर्थ

भारत और भूटान के बीच संबंध दशकों पुराने हैं। दोनों देश हिमालयी क्षेत्र में पड़ोसी हैं और उनके बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और आर्थिक रिश्ते गहरे हैं। भूटान के राजा का प्रधानमंत्री मोदी को स्तूप समर्पित करना इसी रिश्ते की एक नई और भावनात्मक अभिव्यक्ति है।

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना के प्रति भारत के समर्थन को भूटान विशेष महत्व देता है। इसी समर्थन के सम्मान में 76वां स्तूप समर्पित किया गया। भारत की ओर से समारोह में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की उपस्थिति ने भी इस बात को रेखांकित किया कि भारत इस पहल को कितनी गंभीरता से देखता है।

इस सम्मान का एक और पहलू यह है कि यह किसी संधि या समझौते से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक श्रद्धा से जुड़ा है। दोनों देशों के बीच बौद्ध धर्म की साझा विरासत है, और स्तूप उसी विरासत के प्रतीक हैं। ऐसे में यह सम्मान दोनों देशों के लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत करता है।

आगे क्या

गेलेफू में 1 से 4 नवंबर तक चलने वाले समारोह के बाद ये 108 स्तूप माइंडफुलनेस सिटी का स्थायी हिस्सा बन जाएंगे। आने वाले समय में ये स्तूप न केवल भूटान के लोगों के लिए आध्यात्मिक केंद्र होंगे, बल्कि दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।

भूटान के मीडिया के अनुसार इस आयोजन के साथ एक विश्व रिकॉर्ड भी दर्ज हुआ है, क्योंकि एक ही दिन में एक साथ इतने स्तूपों का अभिषेक पहले कभी नहीं हुआ था। हालांकि इस रिकॉर्ड की औपचारिक पुष्टि से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि यह पहल भूटान की आध्यात्मिक पहचान को दुनिया के सामने एक नई ऊंचाई पर ले गई है।

भारत के लिए यह सम्मान इसलिए भी खास है क्योंकि यह किसी पुरस्कार या उपाधि के रूप में नहीं, बल्कि एक पवित्र संरचना के समर्पण के रूप में मिला है। 76वां स्तूप अब गेलेफू की धरती पर भारत-भूटान मित्रता की एक स्थायी निशानी के रूप में खड़ा रहेगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार