नई दिल्ली ब्यूरो
दिल्ली में दिवाली का दिन जहरीली धुंध के साथ बीता। दिल्ली दिवाली AQI दिनभर के औसत में 376 रहा, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी है, और शहर के कई इलाकों में यह ‘गंभीर’ श्रेणी को पार कर गया। सुबह के समय 54 में से 24 निगरानी केंद्रों पर AQI 400 से ऊपर दर्ज हुआ, जबकि जहांगीरपुरी में यह 450 तक पहुंचा। वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणाली के अनुसार सोमवार से हवा और बिगड़कर ‘गंभीर’ श्रेणी में जा सकती है, और अगले कुछ दिनों तक हालात ऐसे ही बने रहने का अनुमान है।
दिवाली की सुबह जहरीली धुंध में डूबी दिल्ली
दिवाली की सुबह दिल्ली घनी जहरीली धुंध की चादर में लिपटी नजर आई। रातभर चले पटाखों और पहले से खराब हवा के मेल ने सुबह होते-होते शहर की हवा को और जहरीला कर दिया। सुबह के समय शहर के 54 निगरानी केंद्रों में से 24 पर AQI 400 से ऊपर दर्ज हुआ, यानी वे ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गए। जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग और आरके पुरम समेत कई इलाकों में हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज हुई। जहांगीरपुरी में सुबह के समय सबसे खराब AQI 450 दर्ज हुआ।
पूरे दिन के आंकड़ों में भी तस्वीर चिंताजनक रही। दिल्ली दिवाली AQI दिनभर के औसत में 376 रहा, जो शनिवार के 369 से ज्यादा है और ‘गंभीर’ श्रेणी की सीमा 400 से ज्यादा दूर नहीं है। रविवार को आंकड़े दर्ज करने वाले 59 निगरानी केंद्रों में से 12 पर हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में और 22 पर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही। दिन में सबसे खराब रीडिंग जहांगीरपुरी में 463 दर्ज हुई। शहर में सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाला तत्व PM2.5 रहा, जिसमें पटाखों से निकलने वाले कणों ने और इजाफा किया। राजधानी के आसपास के शहरों में भी हवा ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी के बीच रही।
दीवाली की पूर्व संध्या पर 10 साल का रिकॉर्ड टूटा
दिवाली से एक दिन पहले ही दिल्ली की हवा ने दस साल का खराब रिकॉर्ड तोड़ दिया था। शनिवार 7 नवंबर को शाम 4 बजे दिल्ली का औसत AQI 369 दर्ज हुआ, जो दिवाली की पूर्व संध्या पर 2016 के बाद का सबसे खराब आंकड़ा है। साल 2016 में दिवाली की पूर्व संध्या पर AQI 404 दर्ज हुआ था। नवंबर की शुरुआत से ही हवा लगातार बिगड़ रही थी — 1 नवंबर को AQI 261 था, जो 7 नवंबर तक 369 पर पहुंच गया।

शनिवार सुबह से ही प्रदूषण के स्तर ऊंचे थे। सुबह 10 से 11 बजे के बीच PM2.5 का औसत 295 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ, जबकि शहर के 59 निगरानी केंद्रों में से 36 पर यह 250 से ऊपर था। शाम को पटाखे जलाने की तय खिड़की खुलते ही हालात तेजी से बिगड़े। शाम 7:45 बजे PM2.5 का औसत 177 था, जो रात 8 बजे 208 और रात 10 बजे तक 289 पर पहुंच गया। पंजाबी बाग में रात 8 बजे PM2.5 का स्तर 593, आरके पुरम में रात 9 बजे 621 और मुंडका में 718 दर्ज हुआ। अनुमान है कि रात 8 बजे की खिड़की खुलने के दो घंटे के भीतर ही शहर की हवा में करीब 30 प्रतिशत की गिरावट आई।
पटाखों की खिड़की और पराली ने बढ़ाई मुश्किल
दिल्ली की हवा बिगड़ने के पीछे सिर्फ पटाखे नहीं हैं, बल्कि कई कारण एक साथ मिले हैं। पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं इस समय अपने मौसमी चरम पर हैं। उपग्रह से मिले आंकड़ों के अनुसार शनिवार को दोनों राज्यों में आग की 415 घटनाएं दर्ज हुईं, जो 1 नवंबर की तुलना में करीब साढ़े पांच गुना ज्यादा हैं। पिछले दस दिनों से आग की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी, और शनिवार को यह मौसमी उच्च स्तर पर पहुंच गई। शांत शाम की हवा और बड़े पैमाने पर पटाखों के इस्तेमाल ने मिलकर शहर की हवा को तेजी से खराब किया।
दिल्ली की हवा में प्रदूषण के स्रोतों पर नजर डालें तो परिवहन क्षेत्र रविवार को सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा, जिसकी हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत रही। पराली जलाने की हिस्सेदारी रविवार को 3.5 प्रतिशत रही, जबकि सोमवार को इसके करीब 2.99 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मौसम की स्थितियां भी प्रदूषण को फैलने नहीं दे रही हैं। रविवार दोपहर हवा की रफ्तार करीब 3 किलोमीटर प्रति घंटा रही, और 14 नवंबर तक बारिश की कोई संभावना नहीं है। जब हवा धीमी रहती है तो धुआं और प्रदूषक तत्व जमीन के पास ही ठहर जाते हैं। शहर के ऊपर गर्म हवा की परत भी प्रदूषण को सतह के पास रोककर रख रही है। वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणाली के अनुसार 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से कम का वेंटिलेशन इंडेक्स और 10 किलोमीटर प्रति घंटा से कम की औसत हवा की रफ्तार प्रदूषकों के फैलाव के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती।
दिल्ली दिवाली AQI: सोमवार सुबह 406 तक पहुंचने का अनुमान
आने वाले दिनों को लेकर पूर्वानुमान और चिंताजनक है। वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणाली के अनुसार दिल्ली की हवा 8 और 9 नवंबर को ‘गंभीर’ श्रेणी में रह सकती है, और 9 नवंबर से कुछ दिनों तक यही स्थिति बने रहने की आशंका है। मौसम विज्ञान संस्थान के अनुमान के अनुसार सोमवार सुबह 4 बजे तक दिल्ली का AQI करीब 406 तक पहुंच सकता है। अगर ऐसा होता है तो शहर आधिकारिक रूप से ‘गंभीर’ श्रेणी में प्रवेश कर जाएगा।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 48 घंटे और खराब दिख रहे हैं, क्योंकि हवाएं कमजोर बनी हुई हैं और पूर्वानुमान पहले से ही दिवाली और उसके अगले दिन दिल्ली को ‘गंभीर’ श्रेणी के करीब बता रहे हैं। विशेषज्ञों ने यह भी याद दिलाया है कि 2015 के बाद से हर साल दिवाली के बाद दिल्ली की हवा और खराब हुई है। साल 2020 में दिवाली के दिन AQI 414 दर्ज हुआ था, जो अगले दिन बढ़कर 435 हो गया था। इस साल प्रदूषण का स्तर पहले से ही ऊंचा है, इसलिए जश्न के बाद शहर को एक और मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रीन पटाखे, GRAP-3 और सख्ती के बावजूद चुनौती
दिल्ली में पटाखों को लेकर इस बार सख्त नियम लागू किए गए थे। उच्चतम न्यायालय के 2 नवंबर के आदेश के अनुसार दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री 4 से 6 नवंबर के बीच अनुमत थी, और उन्हें सिर्फ 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे तथा रात 8 से 10 बजे के बीच जलाया जा सकता था। 9 नवंबर से पटाखों पर पूरी तरह से फिर से रोक लग जाएगी। न्यायालय ने यह भी कहा था कि पूर्ण प्रतिबंध से हवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है और अवैध बिक्री भी नहीं रुकी है, लेकिन धार्मिक त्योहार मनाने के अधिकार के साथ लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार का भी सम्मान होना चाहिए।
प्रदूषण से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने शुक्रवार को ही ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का तीसरा चरण लागू कर दिया था। नियमों के उल्लंघन पर नजर रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने 250 से अधिक विशेष दल बनाए हैं, लेकिन इतने बड़े शहर में नियमों को लागू करना मुश्किल साबित हो रहा है। पुलिस अधिकारियों ने यह चिंता भी जताई है कि किसी पटाखे के वास्तव में प्रमाणित ग्रीन पटाखा होने की पहचान करना आसान नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार चांदनी चौक और सदर बाजार जैसे बाजारों में पारंपरिक पटाखे बिक रहे हैं, और कुछ डिब्बों पर आदेश के अनुसार जरूरी क्यूआर कोड भी नहीं लगे हैं।
AQI का पैमाना क्या कहता है
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पैमाने के अनुसार AQI 0 से 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है। इस पैमाने पर दिल्ली दिवाली AQI का दिनभर का औसत 376 ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है, जबकि शहर के कई हिस्से 400 का आंकड़ा पार करके ‘गंभीर’ श्रेणी में जा चुके हैं। मध्यप्रदेश की हवा भी दिवाली पर खराब श्रेणी में रही थी, जहां ग्वालियर में AQI 331 दर्ज हुआ था, लेकिन दिल्ली की स्थिति उससे भी ज्यादा गंभीर है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बढ़ते प्रदूषण को लेकर लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है, खासकर बच्चों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए। सुबह और देर शाम के समय बाहर निकलने से बचना, मास्क का इस्तेमाल और घर के अंदर हवा को साफ रखने जैसे उपायों की सलाह दी जा रही है।
सेहत पर खतरा और आगे क्या
दिल्ली सरकार दिवाली और छठ के बाद कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) के विकल्प पर भी विचार कर रही है, ताकि प्रदूषण से कुछ राहत मिल सके। हालांकि, जब तक हवाएं तेज नहीं होतीं और बारिश नहीं होती, तब तक शहर की हवा में जल्द सुधार की उम्मीद कम है। अगले कुछ दिनों में छठ के दौरान भी पटाखों और भीड़ का दबाव रहेगा, इसलिए प्रशासन की नजर अब आने वाले दिनों के पूर्वानुमान पर टिकी है। दिल्ली की हवा पर ताजा रिपोर्ट के अनुसार आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं, और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
दिल्ली दिवाली AQI की यह स्थिति सिर्फ एक दिन की समस्या नहीं है। हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ राजधानी की हवा खराब होती है, और दिवाली के आसपास यह चरम पर पहुंच जाती है। इस बार पराली का चरम, धीमी हवाएं और पटाखों का मेल एक साथ आया है। सवाल यह है कि आने वाले दिनों में प्रशासन और लोग मिलकर इस जहरीली हवा से कितनी राहत पा सकेंगे। फिलहाल, दिल्लीवासियों के लिए यही सलाह है कि वे घर के अंदर रहें, जरूरी होने पर ही बाहर निकलें और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करें।
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