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दिल्ली की हवा फिर जहरीली: दिवाली से पहले AQI 350 के पार, 24 घंटे में 144 अंकों का उछाल, GRAP के तहत सख्ती तेज

दिल्ली में स्मॉग की चादर में डूबी सड़क पर हेडलाइट जलाए वाहन (सांकेतिक चित्र) सांकेतिक चित्र (AI-generated)

नई दिल्ली ब्यूरो

सार: दिवाली से ठीक एक सप्ताह पहले दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। सोमवार सुबह कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 350 के पार पहुंच गया, जिसे बहुत खराब श्रेणी में रखा जाता है। महज 24 घंटे में औसत एक्यूआई में 144 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है, और मौसम विभाग की चेतावनी है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।

सोमवार सुबह के आंकड़े: कहां कितनी खराब हवा

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में हवा बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई। अक्षरधाम मंदिर और आईटीओ के आसपास के इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक 349 दर्ज किया गया। इंडिया गेट और जनपथ के आसपास एक्यूआई 335 रहा। जहांगीरपुरी में सबसे अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया, जहां एक्यूआई 380 के पार पहुंच गया। सुबह आठ बजे शहर का कुल एक्यूआई 310 रहा, जबकि कुछ इलाकों में यह 400 के पार भी दर्ज किया गया।

बोर्ड के कुल 59 निगरानी केंद्रों में से 43 पर हवा खराब से बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई। इनमें 23 इलाके ऐसे रहे, जहां एक्यूआई 300 के पार पहुंच गया। अधिकतर केंद्रों पर पीएम2.5 ही मुख्य प्रदूषक रहा, जो सेहत के लिए सबसे खतरनाक माना जाता है। सुबह के समय धुंध की चादर इतनी घनी रही कि कई जगहों पर दृश्यता सामान्य से कम दर्ज की गई और सड़कों पर वाहनों की हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा।

24 घंटे में 144 अंकों का उछाल

दिल्ली की हवा में यह गिरावट अचानक नहीं आई, लेकिन इसकी रफ्तार ने सबको चौंका दिया है। शनिवार को दिल्ली का औसत एक्यूआई 117 था, जिसे मध्यम श्रेणी में रखा जाता है। रविवार को यह बढ़कर 261 पर पहुंच गया, यानी महज 24 घंटे में 144 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। रविवार शाम होते-होते हालात और बिगड़ गए। शाम छह बजे एक्यूआई 272, रात दस बजे 287 और रात ग्यारह बजे 290 तक पहुंच गया।

इस तरह रविवार इस सीजन के सबसे प्रदूषित दिनों में दर्ज किया गया। इससे पहले बारिश के बाद दिल्ली की हवा में कुछ सुधार देखने को मिला था और एक्यूआई 100 के नीचे भी पहुंच गया था, लेकिन बारिश रुकते ही प्रदूषक तत्व फिर से हवा में जमा होने लगे और सोमवार सुबह तक हालात बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गए।

सांकेतिक चित्र: धुंध में डूबी दिल्ली की सड़क
सांकेतिक चित्र: धुंध में डूबी दिल्ली की सड़क

हवा क्यों बिगड़ी: पराली, हवाएं और बारिश का रुकना

दिल्ली की हवा बिगड़ने के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़े डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के अनुमान के अनुसार, रविवार को पराली जलाने की हिस्सेदारी 18.57 फीसदी रही, जबकि शनिवार को यह हिस्सेदारी 5.33 फीसदी थी। यानी एक ही दिन में पराली के धुएं का योगदान तीन गुना से अधिक हो गया।

इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम दिशा से चली हवाओं के कारण पंजाब और हरियाणा की ओर से प्रदूषक दिल्ली पहुंचे। मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से एक डिग्री कम था। ठंडी और शांत हवा में प्रदूषक तत्व नीचे ही जमे रहते हैं और फैल नहीं पाते, जिससे धुंध की परत और घनी हो जाती है। बारिश रुकने के बाद यही ठहराव दिल्ली की हवा पर भारी पड़ रहा है।

आगे का पूर्वानुमान: बुधवार तक और बिगड़ने की आशंका

केंद्र के वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी तंत्र के अनुमान के अनुसार, दिल्ली की हवा में अभी राहत की उम्मीद कम है। सोमवार और मंगलवार को दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में रह सकती है, जबकि बुधवार तक इसके बहुत खराब स्तर पर पहुंचने की आशंका जताई गई है। अगले छह दिनों का अनुमान भी हवा की गुणवत्ता खराब से बहुत खराब रहने की ओर इशारा करता है।

मौसम विभाग का भी कहना है कि आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि दिवाली से पहले के इस सप्ताह में दिल्ली के लोगों को प्रदूषण से जूझना पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रशासन ने प्रवर्तन और निगरानी दोनों को तेज कर दिया है।

GRAP और प्रवर्तन: 1 नवंबर से लागू विंटर प्लान

दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए एक नवंबर से विंटर प्रदूषण नियंत्रण प्लान लागू कर दिया गया है। इसके तहत ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान की पाबंदियों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि एक नवंबर को प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और निर्माण स्थलों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया।

इस अभियान के दौरान एक नवंबर को 14,930 वाहनों की जांच की गई, 566 पीयूसीसी चालान जारी किए गए और 300 निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया गया। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान की पाबंदियों का सख्ती से पालन कराने के लिए सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, एक नवंबर को सुबह शून्य बजे से रात आठ बजे तक 7,279 वाहनों की जांच की गई। जनता को जागरूक करने के लिए प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया, रेडियो और दिल्ली की सीमाओं पर लगे बड़े सूचना बोर्डों के जरिए अभियान चलाया जा रहा है।

सेहत पर असर: किसे ज्यादा खतरा, क्या करें बचाव

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वायु गुणवत्ता को छह श्रेणियों में बांटता है। शून्य से 50 तक अच्छा, 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब और 401 से 500 तक गंभीर श्रेणी मानी जाती है। सोमवार सुबह दिल्ली के कई इलाके बहुत खराब श्रेणी में थे, जो सेहत के लिए चिंताजनक मानी जाती है।

बहुत खराब हवा में सांस के मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस फूलने जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। ऐसे में सुबह की सैर टालना, बाहर निकलते समय मास्क पहनना, घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखना और पर्याप्त पानी पीना जैसे सामान्य उपाय मददगार माने जाते हैं। सांस की तकलीफ बढ़ने पर चिकित्सक से सलाह लेना उचित रहता है।

दिवाली से पहले बढ़ी चिंता

दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी और त्योहार से ठीक पहले हवा का इस तरह बिगड़ना चिंता बढ़ा रहा है। पिछले वर्षों का अनुभव रहा है कि त्योहार के दौरान पटाखों से हवा और खराब हो जाती है, इसलिए इस बार भी दिवाली के आसपास प्रदूषण का स्तर ऊंचा रहने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन की निगरानी जारी है और आने वाले दिनों के आंकड़ों पर सबकी नजर रहेगी।

दिल्ली की हवा का यह हाल सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आसपास के शहरों में भी हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ता है, इसलिए पूरे क्षेत्र में एक साथ निगरानी और प्रवर्तन की जरूरत बताई जा रही है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे प्रदूषण बढ़ाने वाली गतिविधियों से बचें और पाबंदियों का पालन करें।

पिछली बार कब बिगड़ी थी दिल्ली की हवा

दिल्ली की हवा का बिगड़ना इस सीजन में कोई नई बात नहीं है। 23 अक्टूबर को भी दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई थी, तब एक्यूआई 287 दर्ज किया गया था और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान का पहला चरण लागू किया गया था। उसके बाद बारिश से कुछ राहत मिली थी, लेकिन नवंबर की शुरुआत में प्रदूषण ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों की शुरुआत में हवा की गति धीमी होने, तापमान गिरने और पराली के धुएं के मिलने से दिल्ली में हर साल अक्टूबर के आखिर और नवंबर की शुरुआत में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। इस बार भी यही चक्र देखने को मिल रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार उछाल की रफ्तार तेज रही है, जिसने प्रशासन और आम लोगों दोनों को सतर्क कर दिया है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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