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बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू: आज से मुंबई से नियमित सेवा, जानें समय, किराया और सभी ठहराव

Symbolic image: a modern train at a station. Symbolic image: a modern train at a station.

नई दिल्ली ब्यूरो

सार: बेंगलुरु और मुंबई के बीच देश की तीसरी वंदे भारत स्लीपर सेवा शुरू हो गई है। 1 नवंबर को बेंगलुरु में हरी झंडी दिखाने के बाद मुंबई से नियमित सेवा आज, 2 नवंबर की शाम से शुरू हो रही है, जबकि बेंगलुरु से नियमित सेवा 3 नवंबर से चलेगी। यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलेगी, रात में चलेगी और सुबह-सुबह के बजाय दोपहर से पहले गंतव्य तक पहुंचाएगी।

देश के दो बड़े आर्थिक केंद्रों के बीच रात की यात्रा का एक नया विकल्प अब हकीकत बन गया है। बेंगलुरु के सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल और मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बीच वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस की शुरुआत हो गई है। यह सेवा दक्षिण भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर सेवा के रूप में देखी जा रही है और इसके आने से बेंगलुरु-मुंबई मार्ग पर रात में सफर करने वाले यात्रियों को तेज और आधुनिक विकल्प मिला है।

इस मार्ग पर अब तक यात्री दिन की लंबी यात्रा या रात की पारंपरिक ट्रेनों पर निर्भर थे। नई स्लीपर सेवा शाम को चलकर अगले दिन दोपहर से पहले गंतव्य तक पहुंचने का वादा करती है। यानी यात्री शाम को ट्रेन पकड़ सकते हैं, रात ट्रेन में सोकर बिता सकते हैं और अगले दिन दोपहर से पहले अपने काम के शहर में पहुंच सकते हैं। कारोबार, पढ़ाई, चिकित्सा और परिवार से जुड़े सफर के लिए यह समय-सारणी खास तौर पर उपयोगी मानी जा रही है।

रेलवे के अनुसार यह सेवा दक्षिण पश्चिम रेलवे द्वारा संचालित की जाएगी। ट्रेन संख्या 27652 बेंगलुरु से मुंबई जाएगी और ट्रेन संख्या 27651 मुंबई से बेंगलुरु आएगी। दोनों दिशाओं में सेवा सप्ताह में छह दिन चलेगी, लेकिन साप्ताहिक अवकाश का दिन दोनों दिशाओं में अलग-अलग है। इस फर्क को समझना यात्रियों के लिए सबसे जरूरी है, ताकि गलत दिन की बुकिंग से बचा जा सके।

1 नवंबर को हुआ शुभारंभ, उद्घाटन यात्रा दोपहर में रवाना हुई

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 नवंबर 2026 को बेंगलुरु के सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल से बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। यह दिन कर्नाटक के स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए शुभारंभ का दिन राज्य के लिए प्रतीकात्मक रूप से भी खास रहा। उद्घाटन कार्यक्रम के तहत पहली यात्रा दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर बेंगलुरु से मुंबई के लिए रवाना हुई।

यहां एक बात साफ करना जरूरी है। उद्घाटन यात्रा का समय नियमित समय-सारणी से अलग था। नियमित सेवा में बेंगलुरु से ट्रेन शाम को चलेगी, जबकि उद्घाटन के दिन विशेष कार्यक्रम के कारण ट्रेन दोपहर में रवाना की गई। इसलिए यात्रियों को नियमित यात्रा के लिए शाम के समय को ही आधार मानना चाहिए, न कि उद्घाटन यात्रा के दोपहर के समय को।

यह देश की तीसरी वंदे भारत स्लीपर सेवा बताई जा रही है। इससे पहले हावड़ा-कामाख्या और वाराणसी-दिल्ली मार्गों पर वंदे भारत स्लीपर सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। बेंगलुरु-मुंबई सेवा के साथ यह आधुनिक स्लीपर नेटवर्क दक्षिण भारत तक फैल गया है। तीनों सेवाओं का मकसद एक ही है — लंबी दूरी की रात की यात्रा को तेज, सुरक्षित और आरामदायक बनाना।

नियमित सेवा कब से: मुंबई से आज, बेंगलुरु से कल

नियमित वाणिज्यिक सेवा दोनों दिशाओं में अलग-अलग तारीखों से शुरू हो रही है। मुंबई से बेंगलुरु की दिशा में नियमित सेवा आज, 2 नवंबर 2026 की शाम से शुरू हो रही है। बेंगलुरु से मुंबई की दिशा में नियमित सेवा 3 नवंबर 2026 से शुरू होगी। इस अंतर का कारण साप्ताहिक संचालन का चक्र है, जिसमें हर दिशा का अवकाश वाला दिन अलग रखा गया है।

मुंबई से बेंगलुरु जाने वाली ट्रेन संख्या 27651 छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से रात 8 बजकर 10 मिनट पर रवाना होगी और अगले दिन दोपहर 12 बजे बेंगलुरु के सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल पहुंचेगी। यह सेवा मंगलवार को नहीं चलेगी। बाकी छह दिन यह सेवा नियमित रूप से उपलब्ध रहेगी।

बेंगलुरु से मुंबई जाने वाली ट्रेन संख्या 27652 सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल से शाम 7 बजकर 45 मिनट पर रवाना होगी और अगले दिन सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पहुंचेगी। यह सेवा सोमवार को नहीं चलेगी। बाकी छह दिन यात्री इस सेवा का उपयोग कर सकेंगे।

दूरी के हिसाब से बेंगलुरु से मुंबई का सफर लगभग 16 घंटे 10 मिनट का होगा, जबकि मुंबई से बेंगलुरु का सफर लगभग 15 घंटे 50 मिनट का होगा। कुल मार्ग की लंबाई लगभग 1,118 किलोमीटर बताई जा रही है। रात की यात्रा के लिहाज से यह समय इस तरह तय किया गया है कि यात्री शाम को चढ़ें और अगले दिन दोपहर से पहले उतर जाएं।

मार्ग और आठ ठहराव: किन राज्यों से होकर गुजरेगी ट्रेन

यह ट्रेन तीन राज्यों से होकर गुजरेगी — कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र। बेंगलुरु से शुरू होकर यह ट्रेन आंध्र प्रदेश के स्टेशनों से गुजरती हुई कर्नाटक के उत्तरी हिस्से में प्रवेश करेगी और फिर महाराष्ट्र होते हुए मुंबई पहुंचेगी। वापसी में यही क्रम उल्टा होगा।

नियमित सेवा में इस ट्रेन के आठ मध्यवर्ती ठहराव तय किए गए हैं। ये ठहराव हैं — अनंतपुर, गुंटकल, रायचूर, यादगीर, कलबुर्गी, सोलापुर, पुणे और कल्याण। इनमें अनंतपुर और गुंटकल आंध्र प्रदेश में हैं, रायचूर, यादगीर और कलबुर्गी कर्नाटक में हैं, और सोलापुर, पुणे तथा कल्याण महाराष्ट्र में हैं। ठहरावों की संख्या सीमित रखने से यात्रा का समय नियंत्रित रहता है और लंबी दूरी के यात्रियों को तेज सेवा मिलती है।

पुणे और कल्याण जैसे ठहराव मुंबई महानगर क्षेत्र और पश्चिमी महाराष्ट्र के यात्रियों के लिए खास तौर पर उपयोगी होंगे। सोलापुर और कलबुर्गी जैसे शहरों के यात्री भी इस सेवा से सीधे बेंगलुरु और मुंबई से जुड़ जाएंगे। इससे पहले इन शहरों के यात्रियों को या तो लंबी यात्रा वाली ट्रेनों पर निर्भर रहना पड़ता था या फिर कई चरणों में सफर करना पड़ता था।

यात्रियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ठहरावों पर ट्रेन का रुकना आमतौर पर कुछ ही मिनट का होगा। इसलिए अपने स्टेशन से पहले तैयार रहना और सामान संभालकर रखना जरूरी है। रात के समय पड़ने वाले ठहरावों पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि कई यात्री उस समय सो रहे होंगे।

किराया कितना: तीन श्रेणियां, बुकिंग 1 नवंबर से शुरू

इस ट्रेन में तीन श्रेणियों में यात्रा की जा सकेगी — प्रथम श्रेणी वातानुकूलित, द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित और तृतीय श्रेणी वातानुकूलित। पूरे सफर का किराया तृतीय श्रेणी वातानुकूलित में 2,810 रुपये, द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित में 3,630 रुपये और प्रथम श्रेणी वातानुकूलित में 4,450 रुपये तय किया गया है। इन किराए पर वस्तु एवं सेवा कर अलग से लागू होगा, इसलिए अंतिम भुगतान के समय कुल राशि में थोड़ा अंतर आ सकता है।

टिकटों की बुकिंग 1 नवंबर से ही शुरू हो गई है। यात्री भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम की आधिकारिक वेबसाइट, रेलवे आरक्षण केंद्रों और रेलवन ऐप के माध्यम से टिकट बुक कर सकते हैं। बुकिंग से पहले यात्रा की तारीख, दिशा और साप्ताहिक अवकाश का दिन जरूर जांच लें, क्योंकि सोमवार और मंगलवार का नियम दोनों दिशाओं में अलग है।

किराए को लेकर एक बात और समझनी चाहिए। यह एक प्रीमियम स्लीपर सेवा है, इसलिए इसका किराया सामान्य स्लीपर या मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के मुकाबले अधिक है। बदले में यात्री को आधुनिक कोच, तेज यात्रा और रात की सुविधाजनक समय-सारणी मिलती है। यात्रा की योजना बनाते समय किराया, समय की बचत और सुविधा — तीनों को एक साथ तौलना समझदारी होगी।

बुकिंग के दौरान यात्री को अपनी श्रेणी का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए। तृतीय श्रेणी में सबसे अधिक सीटें हैं, इसलिए इसमें जगह मिलने की संभावना अधिक रहती है। प्रथम श्रेणी में सीटें सबसे कम हैं, इसलिए इस श्रेणी में यात्रा करने वाले यात्रियों को पहले से बुकिंग करानी चाहिए।

कोच और क्षमता: 16 कोच, 823 यात्री एक साथ सफर कर सकेंगे

इस ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे और एक बार में 823 यात्री सफर कर सकेंगे। इनमें तृतीय श्रेणी वातानुकूलित में 611 यात्री, द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित में 188 यात्री और प्रथम श्रेणी वातानुकूलित में 24 यात्री यात्रा कर सकेंगे। कोचों की बनावट रात की लंबी यात्रा को ध्यान में रखकर की गई है, ताकि यात्री सोकर सफर कर सकें।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति के हिसाब से डिजाइन किया गया है, हालांकि वास्तविक गति पटरी की स्थिति और मार्ग की सीमाओं पर निर्भर करेगी। इसका मतलब यह है कि ट्रेन की डिजाइन क्षमता अधिक है, लेकिन हर खंड पर उतनी गति से चलना संभव नहीं होगा। फिर भी, सीमित ठहरावों और आधुनिक तकनीक के कारण कुल यात्रा समय पारंपरिक ट्रेनों के मुकाबले कम रहने की उम्मीद है।

रात की यात्रा में यात्रियों के लिए बर्थ की सुविधा सबसे अहम होती है। स्लीपर सेवा में यात्री लेटकर सफर कर सकते हैं, जो दिन की कुर्सी वाली यात्रा से अलग अनुभव देता है। लंबी दूरी के सफर में, खासकर बुजुर्गों, बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों और रात में काम के बाद सफर करने वालों के लिए, यह सुविधा बड़ी राहत बन सकती है।

यात्रियों के लिए यह सेवा क्यों अहम है

बेंगलुरु और मुंबई देश के दो सबसे बड़े आर्थिक केंद्र हैं। बेंगलुरु सूचना प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और शोध के लिए जाना जाता है, जबकि मुंबई वित्तीय, फिल्म और व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र है। दोनों शहरों के बीच हर दिन बड़ी संख्या में लोग कारोबार, नौकरी, पढ़ाई और चिकित्सा के लिए सफर करते हैं। इनके लिए एक तेज रात की सेवा का होना सीधे तौर पर समय और सुविधा से जुड़ा मुद्दा है।

रात की सेवा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि दिन का समय बच जाता है। यात्री शाम को ट्रेन पकड़कर रात में सफर करते हैं और अगले दिन दोपहर से पहले गंतव्य पर पहुंचकर अपना काम शुरू कर सकते हैं। दिन की यात्रा में पूरा दिन सफर में निकल जाता है, जबकि रात की यात्रा में दिन का कामकाजी समय सुरक्षित रहता है। यही कारण है कि लंबी दूरी के मार्गों पर स्लीपर सेवाओं की मांग लगातार बनी रहती है।

इसके अलावा, यह सेवा मध्यवर्ती शहरों को भी सीधा जोड़ती है। रायचूर, कलबुर्गी, सोलापुर और पुणे जैसे शहरों के यात्री अब बिना बदले हुए सीधे दोनों महानगरों तक पहुंच सकेंगे। इससे छोटे शहरों के लोगों के लिए भी बड़े शहरों तक पहुंच आसान होगी और क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा।

यात्रा के आधुनिकीकरण की दृष्टि से भी यह सेवा अहम है। कवच जैसी सुरक्षा तकनीकों और आधुनिक कोचों के साथ भारतीय रेलवे लंबी दूरी की यात्रा को लगातार नया रूप दे रहा है। हवाई यात्रा में डिजी यात्रा जैसी सुविधाओं के साथ-साथ रेलवे की यह पहल बताती है कि देश में यात्रा के साधन एक साथ आधुनिक हो रहे हैं।

यात्रा से पहले जान लें ये जरूरी बातें

टिकट बुक करने से पहले तीन बातें जरूर जांच लें। पहली, यात्रा की दिशा — बेंगलुरु से मुंबई या मुंबई से बेंगलुरु — क्योंकि दोनों की ट्रेन संख्या अलग है। दूसरी, साप्ताहिक अवकाश — बेंगलुरु से सेवा सोमवार को नहीं चलेगी और मुंबई से सेवा मंगलवार को नहीं चलेगी। तीसरी, समय — बेंगलुरु से शाम 7 बजकर 45 मिनट और मुंबई से रात 8 बजकर 10 मिनट का प्रस्थान समय याद रखें।

पूरी समय-सारणी और ठहरावों की जानकारी के लिए यात्री आधिकारिक बुकिंग माध्यमों पर उपलब्ध विवरण देख सकते हैं। पूरी समय-सारणी की पुष्टि बुकिंग के समय ही कर लेनी चाहिए, क्योंकि त्योहारों या विशेष अवसरों पर समय-सारणी में बदलाव संभव होता है। स्टेशन पर समय से पहले पहुंचना भी समझदारी है, ताकि रात की यात्रा में जल्दबाजी न हो।

रात की यात्रा में सामान की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। कीमती सामान अपने पास रखें, बर्थ के पास जरूरी चीजें संभालकर रखें और अंजान व्यक्तियों से खाने-पीने की चीजें लेने से बचें। बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को पहले से ही नीचे की बर्थ या सुविधाजनक स्थान की बुकिंग का प्रयास करना चाहिए।

आगे क्या: नियमित सेवा के पहले हफ्ते पर रहेगी नजर

अब सबकी नजर नियमित सेवा के पहले हफ्ते पर रहेगी। मुंबई से सेवा आज शाम शुरू हो रही है और बेंगलुरु से सेवा कल शाम से शुरू होगी। पहले हफ्ते में यह साफ हो जाएगा कि बुकिंग की रफ्तार कैसी है, समय-सारणी का पालन कैसा हो रहा है और यात्रियों को कैसा अनुभव मिल रहा है।

लंबी दूरी की नई सेवाओं में शुरुआती दिनों में यात्रियों की प्रतिक्रिया ही आगे की तस्वीर तय करती है। अगर बेंगलुरु-मुंबई मार्ग पर यह सेवा यात्रियों को पसंद आती है, तो यह रात की यात्रा के लिए एक स्थायी और भरोसेमंद विकल्प बन सकती है। फिलहाल, यात्रियों के पास एक नया, तेज और आधुनिक विकल्प मौजूद है — और इस हफ्ते से वे इसका नियमित उपयोग शुरू कर सकेंगे।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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