नई दिल्ली ब्यूरो
सार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली के दिन छत्तीसगढ़ के बस्तर में जवानों के साथ त्योहार मनाया और करनपुर के सीआरपीएफ शिविर में जवानों को संबोधित करते हुए ‘दिमागी नक्सली‘ पर तीखा हमला बोला। पीएम मोदी दिमागी नक्सली वाले अपने बयान में बोले कि हथियारबंद नक्सली खत्म हो गए हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है, क्योंकि ऐसे तत्व कई राजनीतिक दलों और संगठनों में घुसपैठ कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि देश 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद से मुक्त घोषित हो चुका है और यह दीपावली 40-50 वर्षों बाद आई एक विशेष दीपावली है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बस्तर पहुंचकर जवानों के साथ दीपावली मनाई। सुबह उन्होंने सोशल मीडिया पर बस्तर में जवानों के साथ दीपावली मनाने का एलान किया था। इसके बाद वह छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के करनपुर स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के शिविर पहुंचे, जहां उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने जवानों से कहा कि कारगिल से लेकर लेह-लद्दाख तक और समुद्र तट पर सर क्रीक से लेकर आईएनएस विक्रांत तक, वीर जवानों के साथ मनाई गई हर दीपावली उनके लिए यादगार रही है। उन्होंने कहा कि इस बार वह बस्तर के जंगलों में जवानों के बीच दीपावली मनाने आए हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि साल 2026 की दीपावली विशेष है। उनके शब्दों में, 40-50 वर्षों बाद ऐसी दीपावली आई है। यह पहली दीपावली है, जब देश नक्सलवाद और माओवादी आतंकवाद के खिलाफ दशकों लंबी लड़ाई में निर्णायक सफलता हासिल कर चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह 140 करोड़ देशवासियों की ओर से जवानों के बलिदान, समर्पण और सेवा-भाव के लिए आभार व्यक्त करने आए हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तो बाहरी दुश्मन सफल नहीं हो सकते, और जब आंतरिक सुरक्षा कमजोर होती है, तो बाहरी दुश्मन भी सिर उठाने लगते हैं।
करनपुर के सीआरपीएफ शिविर में जवानों के साथ दीपावली
प्रधानमंत्री मोदी ने करनपुर स्थित कोबरा ऑपरेशंस बेस का भी दौरा किया। यह बेस बस्तर और अबूझमाड़ में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र और लॉन्च पैड के रूप में काम करता था। प्रधानमंत्री के इस दौरे को सुरक्षा बलों के लिए एक बड़े सम्मान के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि बस्तर वह धरती है जहां कभी नक्सली आतंक का कहर हुआ करता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह वही भूमि है, जहां कभी नक्सली आतंक का कहर हुआ करता था, और आज जवानों के साहस, त्याग, तपस्या और समर्पण के कारण वहां नक्सली हिंसा का प्रभाव काफी कम हुआ है तथा विकास की नई दीपावली शुरू हुई है।
जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरा देश और दुनिया के कोने-कोने में करोड़ों भारतीय प्रकाश का पावन पर्व मना रहे हैं। दूर-दूर से लोग अपने घर पहुंच रहे हैं और परिवार तथा परिजनों के साथ मिलने का यह एक बड़ा महोत्सव होता है। उन्होंने कहा कि वह दीपावली मनाने जवानों के बीच पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री ने जवानों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि करोड़ों देशवासियों को उन पर गर्व है। उन्होंने कहा कि सीमाओं पर सशस्त्र बल जो भूमिका निभाते हैं, वही भूमिका सुरक्षा बलों के जवान देश के भीतर निभाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह था कि किसी मां की गोद सूनी न हो, कोई परिवार तबाही का सामना न करे, कोई बच्चा हथियार उठाकर हिंसा की राह पर न निकले और किसी युवा का भविष्य बर्बाद न हो। उन्होंने कहा कि जब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं हो गया, सरकार संकल्प के साथ लगातार लगी रही। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई प्रचार-प्रसार नहीं, कोई दिखावा नहीं, संवेदनशीलता के साथ काम करते हुए माओवादी आतंक की कमर तोड़ दी गई। उन्होंने कहा कि सेवा भाव से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के जीवन को बदला गया, इसलिए नक्सलवाद से पीड़ित लोग भी सरकार और सुरक्षा बलों के साथ मजबूती से खड़े हुए हैं।
पीएम मोदी दिमागी नक्सली पर क्या बोले
पीएम मोदी दिमागी नक्सली वाले अपने संबोधन में राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए बोले कि भले ही हथियारबंद माओवादियों का सफाया हो गया है, लेकिन नक्सलवाद का खतरा अभी टला नहीं है। उन्होंने कहा कि जंगलों से हथियार वाले नक्सली तो मिट गए, लेकिन ‘दिमागी नक्सली’ कई संगठनों पर कब्जा कर चुके हैं। उनके अनुसार, ऐसे तत्व आज भी देश के संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को उकसा रहे हैं और कई राजनीतिक दलों तथा अलग-अलग संगठनों में इनकी घुसपैठ हो चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें ऐसे तत्वों की पहचान करके उन्हें हराना होगा और देश को सुरक्षित रखना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सफलताओं के बीच एक और बात याद रखनी है कि नक्सली खत्म हुए हैं, लेकिन खतरा अभी गया नहीं है। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए सही इरादे और सही नीतियां बहुत जरूरी हैं। पीएम मोदी दिमागी नक्सली का जिक्र इससे पहले स्वतंत्रता दिवस पर भी कर चुके थे। तब उन्होंने कहा था कि देश हथियारबंद नक्सलवाद को हटाने में सफल रहा है, लेकिन उसके वैचारिक समर्थक हिंसा को बढ़ावा देने के मौके तलाश रहे हैं। बस्तर में दिए गए संबोधन में प्रधानमंत्री ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक के बाद एक कई कड़े फैसले लिए हैं।
बस्तर की लड़ाई: 230 जिले, दो हजार हमले और दंतेवाड़ा की शहादत
बस्तर में माओवादी हिंसा के खिलाफ दशकों तक चली लड़ाई को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ यह लड़ाई आसान नहीं थी। एक समय लगभग 20 राज्यों के 230 से ज्यादा जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सूर्यास्त के बाद इन इलाकों में जीवन ठहर सा जाता था, हजारों गांव और करोड़ों लोग इससे प्रभावित थे तथा हर साल यहां लगभग दो हजार नक्सली हमले होते थे। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने तो लोगों से वोट डालने का अधिकार भी छीन लिया था।
प्रधानमंत्री ने दंतेवाड़ा की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 2010 में यहीं पास में दंतेवाड़ा में नक्सलियों से मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। उसी साल दंतेवाड़ा की एक और घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की हत्या हुई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह धरती वीरों के रक्त से सन गई थी, लेकिन महलों में रहने वाले किसी भी नामदार की सिसकी नहीं सुनाई दी और किसी की आंखों से आंसू नहीं निकला। उन्होंने कहा कि लगभग हर दिन कहीं न कहीं ऐसे हमले होते रहते थे और यह सिलसिला दशकों तक चलता रहा। अकेले छत्तीसगढ़ में ही एक हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी शहीद हुए।
प्रधानमंत्री ने 2004 से 2013 के बीच के समय का जिक्र करते हुए कहा कि हर साल शहीद सुरक्षाकर्मियों की संख्या, मारे गए नक्सलियों की संख्या से कहीं अधिक होती थी। उन्होंने कहा कि नक्सली संगठनों के मुखिया इसे अपनी जीत समझते थे और जश्न मनाते थे। प्रधानमंत्री के अनुसार, दुर्भाग्य से तब की सरकारों ने नक्सलवाद को लाइलाज बीमारी समझकर छोड़ दिया था और आदिवासी परिवारों को उनके नसीब पर जीने के लिए छोड़ दिया गया था। उन्होंने कहा कि स्वीकार कर लिया गया था कि हालात ऐसे ही चलते रहेंगे, गोलियां चलेंगी, जवान मरेंगे और नागरिक पिटेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी देश अपने दुश्मनों के सामने ऐसी सोच से नहीं चल सकता।
47 साल बाद पहली बार: एक साल में सीआरपीएफ का कोई जवान शहीद नहीं
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए देश के दुश्मनों को बुलंद हौसलों के साथ एक रणनीति बनाकर कुचलना ही होता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी देश में थी और वह कमी साल 2014 में दूर हुई, जब लोगों ने उन्हें मां भारती की सेवा का मौका दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद हालात भी बदलने लगे और आंकड़े भी बदलने लगे। उनके अनुसार, 47 साल बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब पिछले एक वर्ष में सीआरपीएफ के एक भी जवान को ड्यूटी के दौरान जान नहीं गंवानी पड़ी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह देश की सही नीतियों और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत है। उन्होंने कहा कि यह जवानों की वीरता, साहस और संयम की जीत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने जमीनी अभियानों के दौरान सुरक्षाबलों के हाथ बांध दिए थे और उन्हें माओवादी हमलों का प्रभावी ढंग से जवाब देने की आजादी नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सुरक्षाबलों को हर जरूरी निर्णय लेने की आजादी दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार और व्यवस्था में बैठे कुछ लोगों से वामपंथी उग्रवाद को जो समर्थन मिलता था, उसे रोकने का भी काम किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों का मनोबल 2014 के बाद से बदलने लगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कड़े फैसले लिए हैं और इन फैसलों ने नक्सलियों तथा अलगाववादियों की फंडिंग पर करारी चोट की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होने से बाहरी दुश्मन भी सफल नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि जवानों ने देश की एकता और अखंडता के लिए अनगिनत बलिदान दिए हैं और करोड़ों देशवासियों को उन पर गर्व है।
फंडिंग और नकली नोटों के नेटवर्क पर चोट
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कड़े फैसले लिए हैं, जिनमें कुछ ऐसे कदम भी शामिल हैं जिनके बारे में अधिक लोगों को पता नहीं है। उन्होंने कहा कि इन फैसलों और प्रयासों ने नक्सलियों तथा अलगाववादियों के फंडिंग नेटवर्क को जबरदस्त झटका दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, जाली मुद्रा के नेटवर्क को नष्ट कर दिया गया, जिससे न केवल उनकी आर्थिक कमर टूट गई, बल्कि उनकी पूरी आपूर्ति लाइन भी ठप हो गई। नतीजतन, हथियारों की आपूर्ति रुक गई और नक्सलियों की नई भर्तियां भी कम हो गईं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने सुरक्षाबलों को हर जरूरी निर्णय लेने की आजादी दी और पहले सरकार तथा व्यवस्था में बैठे कुछ लोगों से वामपंथी उग्रवाद को जो समर्थन मिलता था, उसे भी रोका गया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य था कि किसी मां की गोद सूनी न हो, कोई परिवार तबाही का सामना न करे, कोई बच्चा हथियार उठाकर हिंसा की राह पर न निकले और किसी युवा का भविष्य बर्बाद न हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि बिना प्रचार-प्रसार और बिना दिखावे के संवेदनशीलता के साथ काम किया गया, जिससे माओवादी आतंक की कमर टूट गई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सेवा भाव से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के जीवन को बदला गया, इसलिए नक्सलवाद से पीड़ित लोग भी सरकार और सुरक्षा बलों के साथ मजबूती से खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस बड़ी लड़ाई को जीतने में अहम योगदान देने वाले कई नागरिक भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे और वह उन सभी का आभार व्यक्त करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होने से ही देश आगे बढ़ सकता है और बाहरी दुश्मनों को भी रोका जा सकता है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट: 12 साल में 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने न केवल नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई जीती है, बल्कि गरीबी के खिलाफ भी एक बड़ी लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा कि इस साल दीपावली से ठीक पहले, कुछ दिन पहले ही, विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत में 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि गरीबी हटाओ के नारों से दशकों में जो हासिल नहीं हो सका, उसे देश ने महज 12 वर्षों में कर दिखाया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दीपावली के दौरान लोग रंगोली बनाते हैं और सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं की एक ऐसी रंगोली बनाई है, जिसने गरीबों को लगातार सशक्त बनाया है। उन्होंने कहा कि भारत में अपने संकल्पों को पूरा करने की क्षमता है। प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार द्वारा पूरे किए गए वादों के उदाहरण के तौर पर अनुच्छेद 370 को हटाने, घरों में शौचालय बनवाने और टीकाकरण के दायरे को बढ़ाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब गरीबी मिटाने, नशा-मुक्त भारत बनाने, एक विकसित भारत के निर्माण और भारत को आत्मनिर्भर बनाने की बात होती है, तो देश इन लक्ष्यों को भी जरूर हासिल करेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें भारत के युवाओं और यहां के लोगों पर पूरा विश्वास है तथा देश निश्चित रूप से अपने लक्ष्यों को हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि जब देश के लिए काम किया जाता है, तो देश में शांति और सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई जीती है और गरीबी के खिलाफ भी बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की सही नीतियों और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है।
2014 से चली परंपरा: कारगिल से आईएनएस विक्रांत तक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जवानों के साथ दीपावली मनाने की परंपरा 2014 से चली आ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल से लेकर लेह-लद्दाख तक, समुद्र तट पर सर क्रीक से लेकर आईएनएस विक्रांत तक, वीर जवानों के साथ मनाई गई हर दीपावली उनके लिए यादगार रही है। पिछले साल प्रधानमंत्री ने आईएनएस विक्रांत पर जवानों के साथ दीपावली मनाई थी। इस साल उन्होंने बस्तर को चुना, जहां कभी नक्सली आतंक का कहर हुआ करता था और आज विकास की बहार है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 2026 की दीपावली विशेष है, क्योंकि यह पहली दीपावली है, जब देश नक्सलवाद और माओवादी आतंकवाद के खिलाफ दशकों लंबी लड़ाई में निर्णायक सफलता हासिल कर चुका है। सरकार ने 31 मार्च 2026 को देश को नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह वही भूमि है, जहां कभी नक्सली आतंक का कहर हुआ करता था, और आज जवानों के साहस, त्याग, तपस्या और समर्पण के कारण वहां नक्सली हिंसा का प्रभाव काफी कम हुआ है। उन्होंने कहा कि बस्तर में विकास की नई दीपावली शुरू हुई है।
प्रधानमंत्री ने जवानों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह 140 करोड़ देशवासियों की ओर से उनके बलिदान, समर्पण और सेवा-भाव के लिए आभार व्यक्त करने आए हैं। उन्होंने कहा कि जवान चाहे जहां भी तैनात हों और पहरा दे रहे हों, देशवासियों की कृतज्ञता और अपनापन उनके साथ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दीपावली उन लोगों के साथ मनाना सबसे सार्थक है, जो देश की रक्षा करते हैं।
आगे क्या: विपक्ष की प्रतिक्रिया और नक्सल-मुक्त भारत की राह
प्रधानमंत्री के इस संबोधन में पिछली सरकारों और कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा गया। उन्होंने कहा कि 2004 से 2013 के बीच हर साल शहीद जवानों की संख्या मारे गए नक्सलियों से ज्यादा होती थी और तब की सरकारों ने नक्सलवाद को लाइलाज बीमारी मानकर छोड़ दिया था। प्रधानमंत्री के इन आरोपों पर खबर लिखे जाने तक कांग्रेस या किसी अन्य विपक्षी दल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पीएम मोदी दिमागी नक्सली वाले अपने बयान में यह भी बोले कि ऐसे तत्वों को पहचानकर हराना होगा और देश को सुरक्षित रखना होगा।
आगे की राह में सरकार का ध्यान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने पर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बस्तर में विकास की नई दीपावली शुरू हुई है और देश अब गरीबी मिटाने, नशा-मुक्त भारत बनाने, एक विकसित भारत के निर्माण तथा भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्यों की ओर बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत में अपने संकल्पों को पूरा करने की क्षमता है और देश इन लक्ष्यों को भी जरूर हासिल करेगा। जवानों के साथ दीपावली मनाकर प्रधानमंत्री ने यह संदेश दिया है कि देश की सुरक्षा और विकास एक साथ चलेंगे।
दीपावली के इस पावन पर्व पर प्रधानमंत्री ने जवानों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि करोड़ों देशवासियों को उन पर गर्व है। उन्होंने कहा कि जब किसी देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तो बाहरी दुश्मन सफल नहीं हो सकते। बस्तर में जवानों के साथ मनाई गई यह दीपावली नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में मिली निर्णायक सफलता का प्रतीक बन गई है। गोवर्धन पूजा के साथ त्योहारों का सिलसिला आगे बढ़ेगा और देशभर में दीपावली की रौनक बनी रहेगी।
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