भोपाल ब्यूरो
मध्य प्रदेश में सरकारी सेवा के दौरान निधन होने पर आश्रितों को मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति के करीब 16 हजार लंबित मामलों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को सभी विभागों को इस बारे में निर्देश जारी कर दिए हैं। हाल में हुए पदोन्नति के बड़े अभियान के बाद हर संवर्ग में पद खाली हुए हैं, जिससे वर्षों से अटके मामलों के निपटारे की उम्मीद बढ़ गई है।
मध्य प्रदेश अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को विशेष अभियान चलाकर प्रकरणों का तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री जल्द ही इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा भी करेंगे। माना जा रहा है कि इस अभियान से हजारों परिवारों को लंबे इंतजार के बाद राहत मिलेगी।
16 हजार मामले क्यों अटके हैं
मध्य प्रदेश के विभिन्न विभागों में अनुकंपा नियुक्ति के करीब 16 हजार प्रकरण वर्षों से लंबित हैं। इन मामलों के अटकने की सबसे बड़ी वजह पदों की कमी बताई गई है। कई विभागों में पात्र आश्रितों की फाइलें इसलिए आगे नहीं बढ़ पाईं, क्योंकि संबंधित संवर्ग में रिक्त पद उपलब्ध नहीं थे।

हालांकि, विगत कुछ दिनों में विशेष अभियान चलाकर वृहद स्तर पर पदोन्नतियां की गई हैं। इससे अब प्रत्येक संवर्ग में पर्याप्त पद उपलब्ध हो गए हैं। इसी स्थिति का लाभ उठाते हुए सरकार ने अब अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों के निराकरण के लिए भी विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है।
अनुकंपा नियुक्ति वह व्यवस्था है, जिसके तहत शासकीय सेवक की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिजन को शासकीय नौकरी दी जाती है। इसका मकसद अचानक आजीविका छिन जाने वाले परिवार को आर्थिक सहारा देना है। लेकिन जब प्रकरण वर्षों तक लंबित रहते हैं, तो परिवारों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश क्या हैं
सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर प्रदेश के सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को विशेष अभियान चलाकर लंबित प्रकरणों का तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि विभाग के अंतर्गत लंबित समस्त अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का निराकरण किया जाए।
विभागों को यह भी कहा गया है कि वे अपने स्तर पर लंबित प्रकरणों की सूची तैयार करें और पात्रता के अनुसार एक-एक करके उनका निराकरण करें। मुख्यमंत्री ने इस विषय पर सख्त रुख अपनाया है और त्वरित निराकरण के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री स्वयं भी जल्द ही इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेंगे।
इस निर्देश के बाद सभी विभागों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में विभाग अपने लंबित प्रकरणों की स्थिति की रिपोर्ट तैयार करके सामान्य प्रशासन विभाग को भेजेंगे, ताकि अभियान की प्रगति पर नजर रखी जा सके।
किन विभागों में सबसे ज्यादा मामले लंबित
अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों की संख्या लोक निर्माण, वन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, पुलिस एवं गृह, जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व और नगरीय विकास विभाग में अधिक है। ये वे विभाग हैं, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यरत हैं और वर्षों से नियुक्तियों के मामले अटके हुए हैं।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में भी बड़ी संख्या में मामले लंबित बताए जा रहे हैं। पुलिस एवं गृह विभाग में भी हजारों प्रकरण अटके हुए हैं, जहां सेवा के दौरान निधन होने वाले कर्मचारियों के आश्रित लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
इन विभागों में मामलों के लंबित रहने की वजह सिर्फ पदों की कमी नहीं रही है। कई मामलों में दस्तावेजों की जांच, पात्रता का सत्यापन और अन्य प्रक्रियाओं में भी देरी हुई है। विशेष अभियान के तहत इन सभी अड़चनों को दूर करके प्रकरणों का तेजी से निराकरण करने की कोशिश की जाएगी।
स्कूल शिक्षा विभाग की मिसाल — 954 मामले दो दिन में
इस अभियान से पहले स्कूल शिक्षा विभाग ने एक मिसाल पेश की है। विभाग के आयुक्त अभिषेक सिंह ने सभी संभागीय अधिकारियों को भोपाल बुलाकर दो दिन में शिक्षक और अन्य कर्मचारियों के 954 प्रकरणों का निराकरण कराया। यह दिखाता है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो तो लंबित मामलों का तेजी से निपटारा संभव है।
इसके बाद 21 अक्टूबर को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पात्र अभ्यर्थियों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र सौंपे थे। इसी कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग में 20 हजार नई भर्तियों की घोषणा भी की गई थी। इस कार्यक्रम में 954 अभ्यर्थियों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र दिए गए थे।
स्कूल शिक्षा विभाग का यह अनुभव अब अन्य विभागों के लिए भी रास्ता दिखा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग का मानना है कि अगर हर विभाग इसी तरह अपने लंबित प्रकरणों पर ध्यान दे, तो 16 हजार मामलों का निराकरण भी समय पर हो सकता है।
अनुकंपा नियुक्ति क्या है और कौन पात्र है
अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था उन परिवारों के लिए बनाई गई है, जिनके कमाने वाले सदस्य की सरकारी सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है। ऐसे में मृतक के आश्रित पति, पत्नी, बेटा या बेटी को शासकीय नौकरी दी जाती है, ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति संभल सके।
हालांकि, यह नियुक्ति अपने आप मिलने वाला अधिकार नहीं है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अक्टूबर में एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया था कि अनुकंपा नियुक्ति विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं है। पात्र व्यक्ति सरकारी नीति के अनुसार दावा प्रस्तुत कर सकते हैं और पात्रता व शर्तें पूरी करने पर ही नियुक्ति मिल सकती है।
इसका मतलब यह है कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए आश्रित को निर्धारित योग्यता और शर्तों को पूरा करना होता है। विभागों को भी यह देखना होता है कि आवेदक संबंधित पद के लिए पात्र है या नहीं। यही वजह है कि कई मामलों में जांच और सत्यापन में समय लगता है।
पदोन्नति अभियान से कैसे खुला रास्ता
मध्य प्रदेश अनुकंपा नियुक्ति के मामलों के निराकरण का रास्ता हाल में हुए पदोन्नति अभियान से खुला है। विगत कुछ दिनों में विशेष अभियान चलाकर वृहद स्तर पर पदोन्नतियां की गई हैं, जिससे अब प्रत्येक संवर्ग में पर्याप्त पद उपलब्ध हो गए हैं।
इससे पहले कई विभागों का कहना था कि पद उपलब्ध न होने के कारण अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण लंबित हैं। अब जब पदोन्नति के बाद पद खाली हुए हैं, तो विभागों के पास यह बहाना नहीं रह गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसी स्थिति का लाभ उठाते हुए विशेष अभियान चलाकर विभाग के अंतर्गत लंबित समस्त अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने पहले भी सभी सरकारी विभागों में वर्षों से लंबित पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों के निराकरण के सख्त निर्देश दिए थे। इसके बाद अनेक विभागों ने अपने यहां पदोन्नति के आदेश जारी करने शुरू कर दिए थे। अब अनुकंपा नियुक्ति के मामलों पर भी उसी तरह की तेजी दिखाई जा रही है।
आगे क्या — समीक्षा और निराकरण की प्रक्रिया
आने वाले दिनों में सभी विभाग अपने लंबित अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों की सूची तैयार करेंगे और पात्रता के अनुसार उनका निराकरण करेंगे। मुख्यमंत्री जल्द ही इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेंगे, जिससे अभियान की गति पर नजर रखी जा सकेगी।
जिन परिवारों के प्रकरण वर्षों से लंबित हैं, उनके लिए यह अभियान बड़ी राहत लेकर आ सकता है। अगर विभागों ने निर्देशों का पालन करते हुए समय पर प्रकरणों का निराकरण किया, तो हजारों आश्रितों को शासकीय नौकरी मिल सकेगी। इससे न सिर्फ उन परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।
वहीं, यह भी देखना होगा कि विभाग इस अभियान को कितनी गंभीरता से लेते हैं। पहले भी कई बार ऐसे निर्देश जारी हो चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन धीमा रहा है। इस बार मुख्यमंत्री की सीधी समीक्षा का ऐलान होने से उम्मीद है कि विभाग इस बार तेजी दिखाएंगे।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
