भोपाल ब्यूरो
मध्य प्रदेश के इंदौर और नागदा में आयोजित ‘श्रम संवाद‘ कार्यक्रमों में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों ने नियोक्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और मानव संसाधन पेशेवरों को देश की नई श्रम संहिताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। दो दिन चले इन कार्यक्रमों में चारों श्रम संहिताओं के तहत नियोक्ताओं की जिम्मेदारियों, पीएफ-ईएसआई से जुड़ी व्यवस्थाओं और असंगठित कामगारों की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर चर्चा हुई। कार्यक्रमों का उद्देश्य नए श्रम कानूनों को जमीन पर सही तरीके से लागू करने की तैयारी को मजबूत करना रहा।
इंदौर में 3 नवंबर और नागदा में 4 नवंबर को कार्यक्रम
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और मध्य प्रदेश के श्रम विभाग ने मिलकर जिला स्तर पर क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम ‘श्रम संवाद’ का आयोजन किया। पहला कार्यक्रम 3 नवंबर 2026 को इंदौर में हुआ, जिसमें एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्य प्रदेश और पीथमपुर औद्योगिक संगठन ने सहयोग किया। दूसरा कार्यक्रम 4 नवंबर 2026 को उज्जैन जिले के नागदा में हुआ, जिसमें ग्रासिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने सहयोग किया। दोनों ही कार्यक्रमों का विषय एक रहा — श्रम संहिताएं, श्रम कल्याण और सामाजिक सुरक्षा। इंदौर कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश की श्रम आयुक्त शीतला पटले ने की, जबकि नागदा कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के निदेशक एस.आर. दत्ता ने की। नागदा कार्यक्रम में ग्रासिम इंडस्ट्रीज नागदा के उपाध्यक्ष एस.के. सिंह ने सह-अध्यक्षता की। कार्यक्रमों में श्रम सुधारों, कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ केंद्र और राज्य के बीच समन्वय और सभी पक्षों की भागीदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुआ
दोनों कार्यक्रमों में डेढ़ सौ से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। इनमें नियोक्ता, उद्योग प्रतिनिधि, कानूनी सलाहकार, मानव संसाधन और वित्त पेशेवर शामिल रहे। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, मध्य प्रदेश श्रम विभाग, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ, कर्मचारी राज्य बीमा निगम यानी ईएसआईसी, मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) और श्रम कल्याण महानिदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। मंत्रालय के निदेशक एस.आर. दत्ता ने मुख्य भाषण में नई श्रम संहिताओं की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डाला। मंत्रालय के अधिकारियों ने तकनीकी सत्रों में चारों श्रम संहिताओं और उनके तहत अधिसूचित केंद्रीय नियमों के अनुसार नियोक्ताओं के लिए पालन की जाने वाली जरूरतों को विस्तार से समझाया। सत्रों में श्रम कानूनों के व्यावहारिक पहलुओं और वैधानिक दायित्वों पर भी चर्चा हुई, ताकि प्रतिभागी नए नियमों को अपने संस्थानों में सही तरीके से लागू कर सकें।
चारों श्रम संहिताएं क्या हैं
देश में अब तक लागू 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समेटकर चार श्रम संहिताएं बनाई गई हैं। पहली है मजदूरी संहिता, जो न्यूनतम मजदूरी, समय पर वेतन भुगतान और समान काम के लिए समान पारिश्रमिक जैसे विषयों से जुड़ी है। दूसरी है औद्योगिक संबंध संहिता, जो नियोक्ता और श्रमिक के बीच संबंधों, स्थायी आदेशों और विवादों के निपटारे की व्यवस्था करती है। तीसरी है सामाजिक सुरक्षा संहिता, जिसमें भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा, ग्रेच्युटी और मातृत्व लाभ जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं और जिसका दायरा असंगठित क्षेत्र तथा गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों तक भी पहुंचता है। चौथी है व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता, जो कार्यस्थल की सुरक्षा, स्वास्थ्य मानकों, काम के घंटों और अवकाश से जुड़े नियम तय करती है। केंद्र सरकार ने इन चारों संहिताओं को अधिसूचित कर दिया है। अब राज्यों को इनके तहत अपने नियम बनाने हैं, ताकि संहिताएं पूरी तरह लागू हो सकें। मध्य प्रदेश का श्रम विभाग इस प्रक्रिया में केंद्र के साथ मिलकर काम कर रहा है और जिला स्तर पर हो रहे ‘श्रम संवाद’ जैसे कार्यक्रम इसी तैयारी का हिस्सा हैं।
नियोक्ताओं को क्या समझाया गया
कार्यक्रमों का सबसे बड़ा जोर इस बात पर रहा कि नियोक्ता और उनके मानव संसाधन तथा कानूनी दल नए कानूनों को सही तरीके से समझें और लागू करें। तकनीकी सत्रों में चारों श्रम संहिताओं के तहत पालन की जाने वाली जरूरतों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। मंत्रालय की ओर से तैयार ‘हैंडबुक ऑफ कंप्लायंस फॉर एम्प्लॉयर्स’ और ‘संकलन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न’ भी प्रतिभागियों को दिए गए, ताकि वे अपने संस्थानों में नियमों को लागू करते समय इनका उपयोग कर सकें। कार्यक्रम के अंत में प्रश्न-उत्तर सत्र भी हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने श्रम संहिताओं, पालन की जरूरतों और सामाजिक सुरक्षा के प्रावधानों को लेकर अपने सवाल पूछे और अधिकारियों से स्पष्टीकरण पाया। आयोजकों का कहना है कि इस तरह की सीधी बातचीत से नियोक्ताओं की उलझनें दूर होती हैं और कानूनों के सही अमल का रास्ता साफ होता है।
श्रमिकों के लिए क्या मायने रखता है यह बदलाव
नए श्रम कानूनों का सबसे सीधा असर उन करोड़ों श्रमिकों पर पड़ेगा, जो संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में काम करते हैं। कार्यक्रम में ईपीएफओ के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना पर सत्र लिया, जो रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना है और जिसका मकसद नए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। श्रम कल्याण महानिदेशालय के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के बारे में जानकारी दी, जो असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए पेंशन योजना है। ईएसआईसी से जुड़े सत्रों में स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था पर चर्चा हुई। सामाजिक सुरक्षा संहिता का दायरा अब गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों तक भी पहुंच रहा है, जिनके लिए हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की व्यवस्था की गई है। मजदूरी संहिता के तहत न्यूनतम मजदूरी और समय पर भुगतान की व्यवस्था मजबूत होने से दिहाड़ी और ठेका श्रमिकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। सुरक्षा संहिता के तहत कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर नियोक्ताओं की जिम्मेदारी और स्पष्ट हुई है।

मध्य प्रदेश में अमल की तैयारी
मध्य प्रदेश औद्योगिक दृष्टि से तेजी से बढ़ता राज्य है। इंदौर और पीथमपुर का औद्योगिक क्षेत्र, उज्जैन के नागदा का रसायन और उद्योग क्षेत्र तथा प्रदेश के अन्य औद्योगिक केंद्रों में लाखों श्रमिक काम करते हैं। ऐसे में नए श्रम कानूनों को लेकर नियोक्ताओं और श्रमिकों दोनों की तैयारी जरूरी है। जिला स्तर पर आयोजित ‘श्रम संवाद’ कार्यक्रम इसी तैयारी की कड़ी हैं। इनमें केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी एक मंच पर आकर उद्योग जगत से सीधा संवाद कर रहे हैं। कार्यक्रमों में यह बात भी सामने आई कि कानूनों की जानकारी के साथ-साथ उनका पालन भी उतना ही जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रतिभागियों को अनुपालन पुस्तिका और प्रश्न-उत्तर संकलन दिए गए हैं। श्रम विभाग की ओर से आगे भी जिलों में इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम जारी रहने की संभावना है, ताकि छोटे और मझोले उद्योगों तक भी नए नियमों की जानकारी पहुंच सके।
आगे क्या होगा
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रमों से नए श्रम कानूनों को सही तरीके से अपनाने और लागू करने में मदद मिलेगी। केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों तथा उद्योग प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर जागरूकता बढ़ाना, समझ को बेहतर करना और सभी पक्षों की भागीदारी को मजबूत करना ही ‘श्रम संवाद’ का मकसद रहा। आने वाले समय में नियोक्ताओं को अपने मानव संसाधन, वेतन और अनुपालन की व्यवस्थाओं को नई संहिताओं के अनुसार ढालना होगा। श्रमिकों के लिए भी यह जरूरी होगा कि वे चारों संहिताओं के तहत अपने अधिकारों और मिलने वाली सुविधाओं को जानें। ईपीएफओ और ईएसआईसी से जुड़ी योजनाओं की जानकारी के लिए कामगार अपने नजदीकी कार्यालयों या विभागीय पोर्टल से संपर्क कर सकते हैं। जिला स्तर पर जागरूकता का यह सिलसिला जारी रहेगा, ताकि नए श्रम कानून केवल कागजों तक सीमित न रहें और कारखानों, निर्माण स्थलों तथा कार्यालयों तक उनकी पहुंच बने।
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