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इंदौर में आज दीपावली: महालक्ष्मी मंदिरों में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़, अन्नपूर्णा मंदिर में जलेंगे 1,000 दीप

सांकेतिक चित्र: मंदिर की सीढ़ियों पर जलते दीये और गेंदे के फूल सांकेतिक चित्र

इंदौर ब्यूरो

सार: दीपों के महापर्व दीपावली पर आज इंदौर रोशनी से जगमग है। शहर के घर-घर में शाम को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन होगा, महालक्ष्मी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी और अन्नपूर्णा मंदिर में एक हजार दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। नगर निगम ने दीपावली के बाद शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए सोमवार सुबह से ही बड़े सफाई अभियान की तैयारी कर ली है।

आज दीपावली, स्वाति नक्षत्र में मनेगा पर्व

दीपावली का मुख्य पर्व इस बार रविवार, 8 नवंबर को मनाया जा रहा है। तिथियों के अनुसार इस बार दीपावली स्वाति नक्षत्र में मनाई जाएगी। रविवार सुबह 11.28 बजे तक चतुर्दशी तिथि रहेगी, इसके बाद कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। इसी कारण सुबह रूप चौदस भी मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि दो दिन रहने के कारण इस बार दीपावली का पर्व छह दिनों तक मनाया जाएगा।

रोशनी के पर्व को लेकर इंदौरवासी पूरी तरह तैयार हैं। पिछले तीन-चार दिनों से शहर में जमकर खरीदारी का दौर चला। अब दीपावली पर शहरवासी भगवान राम के अयोध्या आगमन की खुशी में अपने घरों को रोशनी और सजावट से जगमग करेंगे। घरों में विधि-विधान से मां लक्ष्मी का पूजन किया जाएगा और उन्हें स्वादिष्ट पकवानों का भोग लगाया जाएगा।

धनतेरस से शुरू हुआ दीपोत्सव अब अपने शिखर पर है। शुक्रवार को धनतेरस पर शहर के बाजार देर रात तक ग्राहकों से गुलजार रहे। सराफा, बर्तन बाजार, क्लॉथ मार्केट और राजवाड़ा की दुकानें रात डेढ़-दो बजे के बाद बंद हुईं। राजवाड़ा पर रात एक बजे तक ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बनी रही। खरीदारी के लिए पहुंचे लोग राजवाड़ा स्थित प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर और धन्वंतरि मंदिर में दर्शन के लिए भी पहुंचे। दोनों मंदिर देर रात तक खुले रहे।

लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ समय शाम का प्रदोष काल माना जाता है। इंदौर में लक्ष्मी-गणेश पूजन का प्रमुख मुहूर्त शाम 6:10 से 8:08 बजे तक रहेगा। यह समय प्रदोष काल में स्थिर लग्न के संयोग वाला है, जिसे मां लक्ष्मी के पूजन के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट का अंतर संभव है, इसलिए पूजन से पहले अपने स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य कर लें।

सांकेतिक चित्र: जलते हुए मिट्टी के दीये और गेंदे की पंखुड़ियाँ
सांकेतिक चित्र

अमावस्या तिथि 8 नवंबर की सुबह 11:27 बजे से प्रारंभ होकर 9 नवंबर की दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। चूंकि अमावस्या प्रदोष काल में 8 नवंबर की शाम को विद्यमान रहेगी, इसलिए लक्ष्मी पूजन इसी दिन किया जाएगा। 9 नवंबर को अमावस्या दोपहर से पहले ही समाप्त हो जाएगी।

पूजन में मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और कुबेर की पूजा का विधान है। घर के मंदिर या पूजा स्थल को स्वच्छ करके मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। दीप जलाकर, फूल, फल और मिठाइयों का भोग लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

राजवाड़ा का महालक्ष्मी मंदिर: 193 साल की आस्था

इंदौर की दीपावली का सबसे बड़ा केंद्र राजवाड़ा स्थित प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर है। राजवाड़ा के सामने भारतीय स्टेट बैंक के पास स्थित देवी महालक्ष्मी का मंदिर शहरवासियों की आस्था का मुख्य केंद्र है। दीपावली पर मंदिर में विशेष अनुष्ठान और मां महालक्ष्मी का आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा।

मंदिर की स्थापना 193 वर्ष पूर्व 1832 में मल्हारराव होलकर द्वितीय के कार्यकाल में हुई थी। इंदौर को बसाने वाले होलकर राजा महाराष्ट्र के थे, और महालक्ष्मी के पूजन की परंपरा महाराष्ट्र में अधिक है। यही कारण है कि राजवाड़ा के सम्मुख महालक्ष्मी मंदिर की स्थापना की गई थी। मंदिर में मां लक्ष्मी कमल के फूल पर विराजित हैं और सुख-समृद्धि के प्रतीक गज स्थापित हैं। मंदिर का संचालन खासगी ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

महालक्ष्मी मंदिर में दीपावली के पांच दिनों में भक्तों की कतार लगी रहती है। दीपावली के दिन विशेष श्रृंगार किया जाता है और दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं। मंदिर में 56 भोग लगाया जाएगा और सुबह, दोपहर और शाम को अलग-अलग श्रृंगार में लोग महालक्ष्मी के दर्शन करेंगे। दीपावली पर मंदिर में फूल बंगला सजाया जाता है और लोग खूब चढ़ावा देते हैं।

मंदिर में दीपावली से पहले ही दर्शन के लिए खासी भीड़ उमड़ रही है। शाम के समय कतारें और लंबी हो जाती हैं और मंदिर से गुरुद्वारा चौराहा तक भक्त खड़े रहकर दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार करते हैं। भीड़ को देखते हुए पुलिस ने कतार के लिए अलग-अलग बैरिकेड लगा दिए हैं। मंदिर में धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलने वाला पांच दिवसीय उत्सव मनाया जा रहा है, जिसमें हर दिन मां महालक्ष्मी की पूजा-आराधना के साथ विभिन्न धार्मिक कृत्य किए जाते हैं।

अन्नपूर्णा मंदिर में 1,000 दीप और नोटों का श्रृंगार

इंदौर के प्रसिद्ध अन्नपूर्णा मंदिर में दीपावली पर विशेष आयोजन होगा। रविवार को मंदिर में एक हजार दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मंदिर को दस लाख रुपये के नए नोटों से सजाया गया है। हर साल की परंपरा के अनुसार इस बार भी मंदिर के गर्भगृह का करीब 10 लाख रुपये के नोटों से श्रृंगार किया गया है।

मंदिर के स्वामी जयेन्द्रानंद गिरि ने बताया कि मंदिर में पिछले पांच दिनों से सजावट की जा रही थी। धनतेरस पर 10, 20, 100, 200 और 500 रुपये के नए नोटों से गर्भगृह का श्रृंगार किया गया। धनतेरस पर नोटों से श्रृंगार पूरा होने के बाद मां अन्नपूर्णा का दरबार शुक्रवार सुबह भक्तों के लिए खोल दिया गया। मंदिर में अगले तीन दिन यानी दीपावली तक नोटों का श्रृंगार रहेगा।

करीब छह दशक पुराना अन्नपूर्णा मंदिर इंदौर की पहचान है। तीन साल पहले 20 करोड़ रुपये की लागत से मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था। मंदिर में मां अन्नपूर्णा, मां कालका और मां सरस्वती की प्रतिमाएं हैं और तीनों देवियों का दिनभर में तीन बार श्रृंगार किया जाता है। दीपावली पर मां अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

उषा नगर, मल्हारगंज और हरसिद्धि मंदिरों में भी आयोजन

राजवाड़ा के अलावा शहर के अन्य महालक्ष्मी मंदिरों में भी दीपावली पर विशेष आयोजन होंगे। उषा नगर स्थित महालक्ष्मी मंदिर में भी विशेष आयोजन होंगे, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मल्हारगंज और हरसिद्धि स्थित महालक्ष्मी मंदिरों में भी विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे।

मल्हारगंज का महालक्ष्मी मंदिर भी शहर के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है। दीपावली के अवसर पर यहां भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिरों में दीपावली के दिन विशेष श्रृंगार, अभिषेक और भोग की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु मां लक्ष्मी से धन-धान्य और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

शहर की तैयारियाँ: बाजार, यातायात और सफाई

दीपावली को लेकर शहर की तैयारियाँ कई दिनों से चल रही हैं। धनतेरस पर शहर के परंपरागत बाजार रात डेढ़ बजे तक ग्राहकों से गुलजार रहे। राजवाड़ा पर पूजन सामग्री फुटपाथ पर बेची जा रही थी, जिसके चलते चौक के आसपास खरीदारों की भीड़ जमा हो गई थी।

त्योहार के दौरान भीड़ को देखते हुए शहर के प्रमुख बाजारों में विशेष यातायात व्यवस्था की गई है। राजवाड़ा, सराफा, बर्तन बाजार, आड़ा बाजार, मच्छी बाजार, यशवंत रोड और पिपली बाजार सहित आसपास के बाजारों में वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी। तीन लेयर में डायवर्शन की व्यवस्था की गई है और आठ जगहों पर पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

दीपावली के दूसरे दिन यानी सोमवार सुबह शहरवासियों को साफ-सुथरी सड़कें और गलियां नजर आएं, इसके लिए नगर निगम का सफाई अमला विशेष तैयारी में जुटा है। दीपावली पर पटाखों के कारण बड़ी मात्रा में कचरा सड़कों पर फैल जाता है। इसकी सफाई के लिए करीब आठ हजार सफाईकर्मियों की टीम मैदान में उतरेगी। सुबह साढ़े तीन बजे से ही शहर के प्रमुख मार्गों पर सफाई अभियान शुरू कर दिया जाएगा। आम दिनों की तुलना में सफाईकर्मी इस दिन जल्दी काम शुरू करेंगे। धनतेरस की रात राजवाड़ा की सड़कों की सफाई के लिए नगर निगम ने महिला सफाईकर्मियों की टीमें भी तैनात की थीं।

छह दिन का दीपोत्सव: आगे का कार्यक्रम

इस बार दीपावली का पर्व छह दिनों तक मनाया जाएगा। 6 नवंबर को धनतेरस के साथ पर्व की शुरुआत हुई। 7 नवंबर को रूप चौदस मनाई गई और 8 नवंबर को सुबह रूप चौदस के साथ शाम को प्रदोष काल में मुख्य दीपावली यानी लक्ष्मी पूजन संपन्न होगा। इसके बाद 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा। 11 नवंबर को यम द्वितीया के रूप में भाई दूज मनाई जाएगी, जिससे छह दिवसीय दीपावली महापर्व का समापन होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी प्रदेशवासियों को धनतेरस और दीपावली की शुभकामनाएं दी हैं। 5 नवंबर को इंदौर पहुंचने पर उन्होंने कहा था कि प्रदेशभर में गोवर्धन पूजा धूमधाम से मनाई जाएगी। छोटी दीपावली पर मुख्यमंत्री चित्रकूट पहुंचे थे, जहां उन्होंने मंदाकिनी नदी में दीपदान किया और भगवान कामतानाथ के दर्शन किए।

सुरक्षित दीपावली के लिए क्या करें, क्या न करें

दीपावली पर पटाखों का उपयोग करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में निर्देश दिए हैं कि त्योहार के दौरान प्रतिबंधित पटाखों का इस्तेमाल न होने पाए। स्वास्थ्य के लिए खतरनाक कार्बाइड गन और कार्बाइड लैंप पर भी सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

बच्चों को पटाखे जलाते समय बड़ों की निगरानी में रखना चाहिए। दीये जलाते समय उन्हें पर्दों, कागज और अन्य ज्वलनशील चीजों से दूर रखना चाहिए। मिट्टी के दीये और फूलों से सजावट पर्यावरण के लिए भी बेहतर मानी जाती है। पटाखों के बाद फैलने वाले कचरे को निर्धारित स्थान पर डालना चाहिए, ताकि सफाईकर्मियों को शहर साफ रखने में आसानी हो।

इंदौर में दीपावली का उल्लास मंदिरों की घंटियों, घरों के दीयों और बाजारों की रौनक में साफ दिखाई दे रहा है। आस्था, परंपरा और शहर की तैयारियों के साथ इंदौर एक बार फिर रोशनी के इस महापर्व को धूमधाम से मना रहा है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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