चित्रकूट ब्यूरो।
सार: दीपावली की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री मोहन यादव चित्रकूट पहुंचे, जहां उन्होंने मंदाकिनी तट पर दीपदान किया, कामतानाथ के दर्शन किए और कहा कि भारतीय संस्कृति में सिर्फ पर्यटन नहीं, तीर्थाटन की भावना महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने वनवासी राम लोक के विकास और चित्रकूट धाम से गुप्त गोदावरी तक चार लेन सड़क के भूमिपूजन की घोषणा भी की। मोहन यादव चित्रकूट दौरा दीपावली की पूर्व संध्या पर आस्था, परंपरा और विकास तीनों की झलक लेकर आया।
छोटी दीपावली के दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव का दौरा सुबह ओरछा से शुरू हुआ और शाम तक चित्रकूट पहुंचा। ओरछा में रामराजा सरकार के दर्शन-पूजन और रामराजा लोक के निर्माण कार्यों के निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री धर्मनगरी चित्रकूट के लिए रवाना हुए थे। मोहन यादव चित्रकूट दौरा छोटी दीपावली का सबसे चर्चित कार्यक्रम रहा। चित्रकूट पहुंचने पर उनका कार्यक्रम पूरी तरह आस्था और परंपरा से जुड़ा रहा। आरोग्यधाम में संतों का आशीर्वाद लेने से लेकर मंदाकिनी तट पर दीपदान और कामतानाथ के दरबार में दर्शन तक, मुख्यमंत्री ने दीपावली मेले के बीच श्रद्धालुओं के साथ पर्व की भावना को साझा किया।
आरोग्यधाम में संतों का आशीर्वाद
मुख्यमंत्री मोहन यादव चित्रकूट पहुंचने पर सबसे पहले आरोग्यधाम गए, जहां उन्होंने परंपरा के अनुसार संतों का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। संतों के प्रति मुख्यमंत्री की श्रद्धा और सत्कार का यह क्षण उनके चित्रकूट प्रवास की शुरुआत बना। आरोग्यधाम में हुए इस कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री पवित्र मंदाकिनी नदी के तट की ओर बढ़े।
आरोग्यधाम चित्रकूट के उन स्थलों में से है, जहां संत परंपरा और सेवा भाव से जुड़े कार्यक्रम नियमित रूप से होते रहते हैं। मुख्यमंत्री के यहां पहुंचने पर स्थानीय संतों और श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया। मुख्यमंत्री ने संतों से आशीर्वाद लेते हुए प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। यह कार्यक्रम दीपावली के पावन अवसर पर आस्था और संस्कृति के संगम का प्रतीक बना।
मंदाकिनी तट पर दीपदान
मंदाकिनी नदी के तट पर पहुंचकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरी आस्था के साथ दीपदान कर दीपोत्सव की ज्योति प्रज्वलित की। मंदाकिनी के तट पर दीपों की जगमगाती रोशनी और धार्मिक वातावरण ने चित्रकूट की आध्यात्मिक छटा को और गरिमामयी बना दिया। रामघाट और भरतघाट सहित विभिन्न घाटों पर श्रद्धालु स्नान के बाद पूजा-अर्चना और दीपदान कर रहे थे, और मुख्यमंत्री का दीपदान उसी परंपरा से जुड़ा।

चित्रकूट में दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदाकिनी में स्नान, कामदगिरि की परिक्रमा और राम से जुड़े धार्मिक स्थलों के दर्शन विशेष महत्व रखते हैं। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु सबसे पहले मंदाकिनी तट पहुंचते हैं। इस बार दीपावली मेला ऐसे समय हो रहा है, जब अगस्त में मंदाकिनी की भीषण बाढ़ ने घाटों और आवागमन के कई रास्तों को प्रभावित किया था। इसके बावजूद प्रशासन ने घाटों की व्यवस्था संभाली और मेले की तैयारियां पूरी कीं।
कामतानाथ के दर्शन और कुल्हड़ वाली चाय
दीपावली के पावन पर्व पर उमड़े आस्था के सैलाब के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रसिद्ध चित्रकूट दीपावली मेले में शामिल हुए। यहां उन्होंने कामतानाथ के प्राचीन मुखारबिंद मंदिर में जाकर मत्था टेका और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने देश और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।
दर्शन के बाद मुख्यमंत्री का एक बेहद सहज और लोक-संस्कृति से जुड़ा रूप भी सामने आया, जब उन्होंने स्थानीय परंपरा के अनुसार कुल्हड़ वाली चाय का आनंद लिया। दीपावली मेले के बीच मुख्यमंत्री की यह सहजता श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी। मुख्यमंत्री का यह अंदाज बताता है कि धार्मिक आयोजनों में वे केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि स्थानीय परंपराओं से जुड़ाव को महत्व देते हैं।
मोहन यादव चित्रकूट दौरा: तीर्थाटन की भावना
चित्रकूट प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सिर्फ पर्यटन नहीं, तीर्थाटन की भावना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि तीर्थ स्थलों का विकास केवल घूमने-फिरने की सुविधा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और परंपरा को केंद्र में रखकर होना चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, महाकाल लोक की तर्ज पर ओरछा में रामराजा लोक और चित्रकूट में वनवासी राम लोक का विकास किया जा रहा है।
महाकाल लोक के बनने के बाद उज्जैन की आर्थिक स्थिति में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक स्थलों का विकास स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देता है। इसी तरह ओंकारेश्वर कॉरिडोर और चित्रकूट व ओरछा के विकास पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राम के रामराज्य, कृष्ण के काल और विक्रमादित्य के स्वर्णिम युग को केवल सुना गया है, और सरकार का प्रयास है कि उन आदर्शों को धरातल पर उतारा जाए।
वनवासी राम लोक चित्रकूट में राम के वनवास काल से जुड़े स्थलों को जोड़ने वाली एक बड़ी योजना है। चित्रकूट को अयोध्या की तर्ज पर देश-दुनिया में प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बनाने का लक्ष्य पहले से तय है। राम वन पथ गमन मार्ग से जुड़े स्थलों के विकास की कार्ययोजना भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट और ओरछा में रामराजा सरकार के मंदिर का कायाकल्प किया जा रहा है।
चित्रकूट धाम से गुप्त गोदावरी तक चार लेन सड़क
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चित्रकूट प्रवास के दौरान चित्रकूट धाम से गुप्त गोदावरी तक चार लेन सड़क के भूमिपूजन की घोषणा की। यह सड़क चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवागमन को सुगम बनाएगी। गुप्त गोदावरी चित्रकूट के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
इस बार गुप्त गोदावरी की गुफाओं में प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से गुप्त गोदावरी दर्शन का वर्चुअल प्रसारण किया जा रहा है। चार लेन सड़क बनने से चित्रकूट धाम और गुप्त गोदावरी के बीच की दूरी आसान होगी और मेले के समय उमड़ने वाली भीड़ को संभालना भी आसान होगा। मोहन यादव चित्रकूट दौरा सड़क विकास की इस घोषणा के साथ और अहम हो गया। सड़क विकास से स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
पांच दिवसीय दीपदान मेला और तैयारियां
चित्रकूट में 6 से 10 नवंबर तक पांच दिवसीय दीपदान मेला आयोजित हो रहा है। मेले में करीब 40 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। दीपावली मेले में इस बार परंपरा और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। पहली बार मेले में हाट बाजार और विद्युत चलित झूलों की व्यवस्था की गई है। वहीं मंदाकिनी की प्रतिमा, रोशनी से सजी अयोध्या की झलक और रामसेतु की कथा इस बार के प्रमुख आकर्षण हैं।
मेले का सबसे बड़ा आकर्षण 8 नवंबर को अमावस्या पर देखने को मिलेगा। रामघाट पर शाम आठ बजे दीपदान के दौरान मंदाकिनी तट के आसमान में पहली बार 500 ड्रोन एक साथ उड़ान भरेंगे और करीब 30 मिनट तक रामायण की भक्ति थीम पर भगवान राम के वनवास काल पर आधारित आकृतियां बनाएंगे। पांच दिनों तक चित्रकूट के अलग-अलग स्थानों पर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन भी तय किए गए हैं। कामदगिरि आरती स्थल और रामायण दर्शन परिक्रमा मार्ग सहित विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक मंच तैयार किए गए हैं।
मेले को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कलेक्टर सतीश कुमार और पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह ने चित्रकूट में डेरा डाल रखा है। संभागायुक्त शैलेंद्र सिंह और पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत भी चित्रकूट पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा ले चुके हैं। मेले के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल और यातायात की विशेष व्यवस्था की गई है।
चित्रकूट का धार्मिक महत्व और आगे क्या
मोहन यादव चित्रकूट दौरा धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन के विकास की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। सरकार धार्मिक स्थलों के विकास को पर्यटन और तीर्थाटन दोनों दृष्टियों से आगे बढ़ा रही है। वनवासी राम लोक और चार लेन सड़क जैसी घोषणाएं आने वाले समय में चित्रकूट की तस्वीर बदल सकती हैं। दीपावली मेले के बाद भी इन परियोजनाओं पर काम जारी रहेगा। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की निगाह अब इन घोषणाओं के अमल पर टिकी है।
चित्रकूट को राम की तपोभूमि माना जाता है। मान्यता है कि राम ने अपने वनवास काल के साढ़े ग्यारह वर्ष चित्रकूट में बिताए थे। मंदाकिनी नदी, कामदगिरि पर्वत, गुप्त गोदावरी, भरतकूप और रामशैय्या जैसे स्थल राम कथा से जुड़े हैं। हर वर्ष दीपावली और अमावस्या के मेले में देशभर से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
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