डेस्क रिपोर्ट
सार: दीपावली रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। इस दिन लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में स्थिर लग्न के संयोग में करना सबसे शुभ माना जाता है। दिल्ली में मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक है, काशी में 5:37 से 7:34 बजे तक। इस लेख में दिल्ली, काशी, उज्जैन, भोपाल और इंदौर समेत 15 बड़े शहरों का शहरवार मुहूर्त, प्रदोष काल, महानिशीथ काल और आधी रात के बाद सिंह लग्न का महत्व दिया गया है।
दीपावली 2026 कब है और अमावस्या तिथि क्या है
दीपावली इस वर्ष रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी। अमावस्या प्रदोष काल में केवल 8 नवंबर को पड़ रही है, इसलिए दीपावली 8 नवंबर को ही मनाई जाएगी, 9 नवंबर को नहीं।
पाँच दिन के दीपोत्सव का क्रम इस प्रकार है: धनतेरस 6 नवंबर को मनाया गया, नरक चतुर्दशी यानी छोटी दीपावली 7 नवंबर को है, महादीपावली 8 नवंबर को है, गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को होगी और भाई दूज 11 नवंबर को मनाई जाएगी। कुछ सरकारी अवकाश सूचियों में गोवर्धन पूजा 9 नवंबर दिखाई गई है, लेकिन पंचांग के अनुसार इसका सही दिन 10 नवंबर है।
लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा प्रदोष काल में हो, जब अमावस्या तिथि चल रही हो और स्थिर लग्न का संयोग बन रहा हो। इसी संयोग को देखते हुए हर शहर का मुहूर्त कुछ मिनट आगे-पीछे होता है।
शहरवार लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: अपने शहर का समय देखें
नीचे दिए गए समय दृक पंचांग और बड़े समाचार माध्यमों के पंचांग पर आधारित हैं। अलग-अलग पंचांगों में 1-2 मिनट का अंतर संभव है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय की पुष्टि अवश्य करें।
| शहर | लक्ष्मी पूजन मुहूर्त | प्रदोष काल |
|---|---|---|
| दिल्ली | शाम 5:54 – 7:50 | शाम 5:31 – 8:09 |
| वाराणसी (काशी) | शाम 5:37 – 7:34 | शाम 5:13 – 7:49 |
| उज्जैन | प्रदोष काल शाम 5:41 – 8:17* | शाम 5:41 – 8:17 |
| भोपाल | शाम 6:03 – 8:01 | शाम 5:38 – 8:13 |
| इंदौर | शाम 6:10 – 8:08 | शाम 5:45 – 8:19 |
| मुंबई | शाम 6:27 – 8:27 | शाम 6:02 – 8:34 |
| कोलकाता | शाम 5:20 – 7:18 | शाम 4:56 – 7:29 |
| चेन्नई | शाम 6:07 – 8:09 | शाम 5:40 – 8:09 |
| बेंगलुरु | शाम 6:18 – 8:20 | शाम 5:51 – 8:20 |
| जयपुर | शाम 6:03 – 7:59 | शाम 5:40 – 8:16 |
| लखनऊ | शाम 5:43 – 7:39 | शाम 5:19 – 7:56 |
| पटना | शाम 5:28 – 7:25 | शाम 5:04 – 7:40 |
| अहमदाबाद | शाम 6:22 – 8:20 | शाम 5:58 – 8:32 |
| हैदराबाद | शाम 6:08 – 8:08 | शाम 5:42 – 8:13 |
| पुणे | शाम 6:24 – 8:24 | शाम 5:59 – 8:31 |
*उज्जैन के लिए वृषभ लग्न का सटीक समय स्थानीय पंचांग से देखें। उज्जैन में प्रदोष काल शाम 5:41 से 8:17 बजे तक है और निशिता काल रात 11:44 से 12:36 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन करना शुभ माना गया है।
समय का यह अंतर सूर्यास्त के समय से जुड़ा है। पूर्वी भारत में सूर्य जल्दी डूबता है, इसलिए कोलकाता और पटना में मुहूर्त सबसे पहले शुरू होता है, जबकि पश्चिमी शहरों मुंबई और अहमदाबाद में मुहूर्त सबसे देर से शुरू होता है। मध्य भारत के शहरों भोपाल, इंदौर और उज्जैन का मुहूर्त इनके बीच में पड़ता है।
सिंह लग्न में लक्ष्मी पूजा क्यों खास है

दीपावली की पूजा में लग्न का उतना ही महत्व है, जितना मुहूर्त का। ज्योतिष में चार स्थिर लग्न माने गए हैं — वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ। स्थिर का अर्थ है जो चलायमान न हो, जो टिका रहे। मान्यता है कि स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करने से लक्ष्मी घर में स्थिर होकर रहती हैं, यानी समृद्धि टिकती है।
इसीलिए गृहस्थों के लिए प्रदोष काल में वृषभ लग्न का संयोग सबसे उत्तम माना गया है। दिल्ली में वृषभ काल शाम 5:54 से 7:50 बजे तक है, जो पूरे प्रदोष काल के भीतर आता है। यही समय ऊपर दी गई तालिका में लक्ष्मी पूजन मुहूर्त के रूप में दिया गया है।
सिंह लग्न इन चारों स्थिर लग्नों में विशेष स्थान रखता है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी का जन्म सिंह लग्न में हुआ था, इसलिए सिंह लग्न में उनका पूजन अत्यंत प्रभावशाली और समृद्धिदायक माना जाता है। दीपावली की रात में सिंह लग्न आधी रात के बाद आता है — दिल्ली और उत्तर भारत में यह समय रात 12:25 बजे से 9 नवंबर को रात 2:42 बजे तक रहेगा।
यह समय गृहस्थों की शाम की पूजा का नहीं, बल्कि साधकों की पूजा का है। जो लोग तंत्र साधना, काली उपासना या विशेष लक्ष्मी साधना करते हैं, वे महानिशीथ काल और सिंह लग्न में पूजा करते हैं। आम गृहस्थों के लिए प्रदोष काल में वृषभ लग्न का मुहूर्त ही उत्तम माना गया है।
महानिशीथ काल: रात की पूजा किसके लिए
दीपावली की रात में महानिशीथ काल भी पड़ता है। दिल्ली में यह रात 11:39 बजे से 9 नवंबर को रात 12:31 बजे तक रहेगा, यानी लगभग 53 मिनट का। पंचांग के अनुसार महानिशीथ काल तांत्रिक समुदाय और अभ्यासी पंडितों के लिए उपयुक्त माना जाता है, जो इस समय की पूजा की विधि जानते हैं। आम लोगों को प्रदोष काल में पूजा करने की सलाह दी जाती है।
व्यापारियों के लिए भी एक अलग मुहूर्त है। गुजराती व्यापारी समुदाय में दीपावली पर चोपड़ा पूजन की परंपरा है, जिसमें नए बही-खाते का पूजन किया जाता है। इसके लिए कुंभ लग्न का समय दोपहर 1:27 से 2:54 बजे तक शुभ माना गया है। दुकानों और कार्यालयों में बही-खाता पूजन इसी समय किया जाता है।
लक्ष्मी पूजन की विधि संक्षेप में
पूजा की तैयारी दिन से ही शुरू हो जाती है। घर को साफ करके मुख्य द्वार के दोनों ओर मंगल कलश रखे जाते हैं। पूजा स्थल पर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं। बाईं ओर सफेद कपड़े पर नवग्रह के लिए अक्षत की नौ ढेरियाँ बनाई जाती हैं।
पूजन के दौरान माता लक्ष्मी और गणेश जी का रोली-अक्षत से तिलक करके उन्हें गंध, फूल, धूप और मिठाई अर्पित की जाती है। माता को धनिया के बीज, कपास के बीज, सूखी साबुत हल्दी, चाँदी का सिक्का, सुपारी और कमल के फूल चढ़ाए जाते हैं। अंत में माता लक्ष्मी की आरती की जाती है। पूजन के समय “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप किया जाता है। दीपक रात भर जलाकर रखना शुभ माना जाता है।
पूजा से पहले घर के बड़े-बुजुर्गों और पितरों का स्मरण भी किया जाता है, क्योंकि अमावस्या के दिन पितरों के लिए श्राद्ध की परंपरा भी है।
चौघड़िया मुहूर्त: दिन भर के शुभ समय
जो लोग दिन में भी शुभ कार्य करना चाहते हैं, उनके लिए चौघड़िया मुहूर्त भी दिए जाते हैं। दिल्ली के अनुसार सुबह का मुहूर्त 11:27 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक, दोपहर का शुभ मुहूर्त 1:26 से 2:48 बजे तक, शाम का मुहूर्त 5:31 से रात 10:27 बजे तक, रात्रि का लाभ मुहूर्त 1:43 से 3:22 बजे तक और अगले दिन सुबह का शुभ मुहूर्त 5:00 से 6:39 बजे तक रहेगा। अन्य शहरों के लिए चौघड़िया समय स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट बदल सकता है।
पूजा से पहले किन बातों का ध्यान रखें
पहली बात, अपने शहर का सही समय देखें। दीपावली का मुहूर्त हर शहर में अलग होता है, इसलिए दिल्ली का समय भोपाल या इंदौर में लागू नहीं होगा। दूसरी बात, पूजा प्रदोष काल में ही करें, जब सूर्यास्त हो चुका हो और अमावस्या तिथि चल रही हो। तीसरी बात, पूजा के लिए स्थिर लग्न का संयोग देखें — वृषभ लग्न गृहस्थों के लिए और सिंह लग्न साधकों के लिए विशेष माना गया है।
दीप जलाते समय सुरक्षा का भी ध्यान रखें। दीये जलती हुई वस्तुओं से दूर रखें, बच्चों को पटाखों से दूर रखें और घर में एक बाल्टी पानी या रेत तैयार रखें। मिट्टी के दीये खरीदते समय स्थानीय कुम्हारों से खरीदारी करें, ताकि त्योहार की खुशी उन तक भी पहुँचे।
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