डेस्क रिपोर्ट
दशहरा बीत चुका है और दिवाली नजदीक आ रही है, लेकिन इन दिनों मौसम भी तेजी से करवट ले रहा है। सुबह-शाम हल्की ठंडक महसूस हो रही है, जबकि दोपहर में अभी भी गर्मी है। इस तापमान के उतार-चढ़ाव में सबसे पहले गला और पेट प्रभावित होते हैं। आज का हेल्थ टिप इन्हीं दो चीजों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
गला बचाएं: गुनगुना पानी और भाप
मौसम बदलते समय गले में खराश, सूखी खांसी और जुकाम की शिकायत आम हो जाती है। इससे बचने के लिए दिन में 3-4 बार गुनगुना पानी पिएं। रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पीना गले के लिए फायदेमंद माना जाता है। ठंडी चीजों — आइसक्रीम, फ्रिज का ठंडा पानी — से कुछ दिन परहेज रखें। भाप लेना बंद नाक और गले की जकड़न में राहत देता है।
पेट हल्का रखें: दिवाली से पहले का नियम
दशहरे की दावत और अब दिवाली की तैयारियों के बीच मिठाइयों और तले-भुने का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में पेट को आराम देने के लिए दिन का एक भोजन हल्का रखें — खिचड़ी, दलिया या सिर्फ सब्जी-रोटी। रात का खाना सोने से कम से कम 2 घंटे पहले खा लें। अदरक, अजवाइन और सौंफ का पानी अपच में मदद करता है। ज्यादा तला-भुना एक साथ न खाएं, छोटे-छोटे अंतराल में खाएं।
नींद और धूप: दो प्राकृतिक दवाएं
बदलते मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर पड़ती है। 7-8 घंटे की नींद इसे संभाले रखने में मदद करती है। सुबह की 15-20 मिनट की धूप विटामिन-डी के साथ-साथ मन को भी तरोताजा रखती है। सुबह की सैर करें, लेकिन हल्की ठंडी हवा से बचने के लिए हल्का शॉल या स्वेटर साथ रखें।
याद रखें
अगर गले की खराश 3 दिन से ज्यादा रहे, बुखार आए या पेट की तकलीफ बढ़े, तो घरेलू उपायों के भरोसे न रहें — डॉक्टर से सलाह लें। सेहत का छोटा सा ध्यान बड़ा खर्च और तकलीफ से बचाता है।
डिस्क्लेमर: यह सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है, चिकित्सीय सलाह नहीं। किसी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से परामर्श करें।
