डेस्क रिपोर्ट
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। आज पापांकुशा एकादशी का व्रत रखा जाएगा और वृद्धि योग का संयोग बन रहा है। गुरुवार का दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। आइए जानते हैं आज का पूरा पंचांग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त और शुभ-अशुभ समय।
तिथि, नक्षत्र, योग, करण
तिथि: एकादशी (शुक्ल पक्ष) — दोपहर लगभग 2:49 बजे तक, इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू होगी।
नक्षत्र: शतभिषा — रात लगभग 8:49 बजे तक, इसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र।
योग: वृद्धि योग — रात लगभग 11:39 बजे तक, इसके बाद ध्रुव योग।
करण: विष्टि (भद्रा) — दोपहर लगभग 2:49 बजे तक, इसके बाद बव करण।
पक्ष: शुक्ल पक्ष।
वार: गुरुवार — भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना का दिन।
मास: आश्विन (पूर्णिमांत)।
पापांकुशा एकादशी व्रत
आज पापांकुशा एकादशी का व्रत है। यह एकादशी भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप को समर्पित है। मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य से पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्रत रखने वाले भक्त कल, शुक्रवार 23 अक्टूबर को प्रातः पारण करेंगे।
पारण का समय: 23 अक्टूबर सुबह लगभग 6:27 से 8:42 बजे तक। (तिथि क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है।)
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा
सूर्योदय: सुबह लगभग 6:30 बजे
सूर्यास्त: शाम लगभग 5:40 बजे
चंद्रोदय: दोपहर लगभग 2:54 बजे
चंद्रास्त: अगले दिन तड़के लगभग 2:18 बजे
चंद्रमा की स्थिति: कुंभ राशि में।
शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:27 बजे तक — सभी शुभ कार्यों के लिए सबसे उत्तम समय।
अमृत काल: दोपहर 12:31 से 2:11 बजे तक — शुभ कार्यों के लिए अनुकूल।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:54 से 5:42 बजे तक — ध्यान और साधना के लिए श्रेष्ठ।
अशुभ समय (बचाव का समय)
राहुकाल: दोपहर 1:29 से 2:53 बजे तक — इस दौरान नए कार्य शुरू न करें।
यमगण्ड: सुबह 6:30 से 7:53 बजे तक — महत्वपूर्ण कार्य टालें।
गुलिक काल: सुबह 9:17 से 10:41 बजे तक — चिकित्सकीय कार्य से बचें।
वर्ज्यम: सुबह 3:23 से 5:03 बजे तक — इस अवधि से परहेज करें।
आज का विशेष
गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करना और भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। केले के पौधे की पूजा और गुरुजनों का आशीर्वाद लेना भी आज के दिन विशेष फलदायी माना जाता है। एकादशी के दिन अन्न का त्याग कर फलाहार या निर्जला व्रत रखने की परंपरा है।
नोट: उपर्युक्त समय दिल्ली के मानक पंचांग पर आधारित है। स्थान के अनुसार कुछ मिनट का अंतर संभव है — सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
