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चक्रवात अरनब कल सुबह आंध्र तट से टकराएगा: 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, 11 जिलों में रेड अलर्ट; पूर्वी मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश की चेतावनी

सांकेतिक चित्र: बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवात का उपग्रह चित्र सांकेतिक चित्र: बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवात का उपग्रह चित्र

विशाखापत्तनम ब्यूरो

सार: बंगाल की खाड़ी में उठा अति गंभीर चक्रवाती तूफान अरनब बुधवार की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार लैंडफॉल के समय 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। तटीय जिलों में रेड अलर्ट जारी है, ट्रेनें रद्द की गई हैं और लाखों लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की तैयारी चल रही है। पूर्वी मध्य प्रदेश में भी इस तूफान के असर से भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

मंगलवार सुबह मौसम विभाग की ताजा चेतावनी में बताया गया कि अति गंभीर चक्रवाती तूफान अरनब पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर था और पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा था। मंगलवार शाम तक इसके इसी दिशा में बढ़ने और फिर उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़ने का अनुमान है। इसके बाद बुधवार की सुबह यह आंध्र प्रदेश और यनम के तट को बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यनम के करीब पार करेगा।

अरनब को इस मौसम का बंगाल की खाड़ी में बना पहला चक्रवात बताया जा रहा है। सोमवार रात यह गंभीर से अति गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया था। तूफान के नाम का उच्चारण ‘ऑरनब’ बताया गया है। तटीय राज्यों के प्रशासन ने बचाव और राहत की तैयारियां तेज कर दी हैं, जबकि केंद्र स्तर पर भी तैयारियों की समीक्षा की गई है।

चक्रवात अरनब लैंडफॉल: कब, कहां और कितनी तेज होंगी हवाएं

मौसम विभाग की ताजा चेतावनी के अनुसार चक्रवात अरनब बुधवार, 28 अक्टूबर की सुबह के समय आंध्र प्रदेश और यनम के तट को बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यनम के करीब पार करेगा। लैंडफॉल के समय इसके अति गंभीर चक्रवाती तूफान बने रहने का अनुमान है। इस दौरान अधिकतम sustained हवाओं की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, जबकि झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

लैंडफॉल के समय समुद्र में ज्वार से 1 से 1.5 मीटर ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई गई है। सबसे अधिक असर काकीनाडा और यनम के आसपास के निचले इलाकों में पड़ सकता है, जहां समुद्री पानी घुसने से जलभराव की स्थिति बन सकती है। उत्तरी आंध्र के तट पर समुद्र पहले ही उग्र हो गया है और कई जगह ऊंची लहरें देखी गई हैं।

मछुआरों को 26 से 29 अक्टूबर के बीच समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। आंध्र प्रदेश, ओडिशा और यनम के तट के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में मछली पकड़ने की गतिविधियों पर रोक जैसी सावधानी बरती जा रही है। सभी समुद्र तटों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है, ताकि तेज हवाओं और ऊंची लहरों से कोई हादसा न हो।

आंध्र प्रदेश में 11 जिलों में रेड अलर्ट, राहत की तैयारी तेज

आंध्र प्रदेश में 28 अक्टूबर के लिए 11 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। इनमें एलुरु, एनटीआर, कृष्णा, कोनसीमा, काकीनाडा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, गुंटूर, अल्लूरी सीताराम राजू, अनकापल्ली और विशाखापत्तनम शामिल हैं। काकीनाडा, कोनसीमा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी और एलुरु जिलों में अत्यंत भारी बारिश का अनुमान है, जबकि अन्य जिलों में भी भारी से अत्यंत भारी बारिश हो सकती है।

जानकारी के अनुसार आंध्र प्रदेश में राहत और बचाव कार्यों के लिए 27 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जो 20 जिलों में काम आएंगे। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें राज्य में तैनात की गई हैं और जिला प्रशासन ने राहत शिविरों की व्यवस्था की है। अनुमान के अनुसार करीब 5.7 लाख लोग तूफान से प्रभावित हो सकते हैं, जिन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का काम सोमवार शाम से शुरू कर दिया गया था।

उत्तरी तटीय जिलों में मंगलवार को ही भारी बारिश और तेज हवाएं चलने लगी थीं। काकीनाडा जिले में समुद्री कटाव की खबरें भी आई हैं, जहां किनारे पर रखे पत्थर सड़क पर आ गए और आवाजाही प्रभावित हुई। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से घरों में सुरक्षित रहने की अपील की है और मदद के लिए एक व्हाट्सऐप हेल्पलाइन नंबर 9552300009 भी जारी किया गया है।

सांकेतिक चित्र: बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवात का उपग्रह चित्र
सांकेतिक चित्र: बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवात का उपग्रह चित्र

ओडिशा में भारी बारिश शुरू, स्कूल बंद और ट्रेनें रद्द

ओडिशा में मंगलवार को तूफान का असर दिखने लगा। राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई। मौसम विभाग ने पुरी, गजपति, गंजम, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरि जिलों के लिए ऑरेंज चेतावनी जारी की है, जहां 12 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश हो सकती है। अन्य जिलों में 7 से 11 सेंटीमीटर बारिश की यलो चेतावनी है। प्रभावित इलाकों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री ने कहा है कि राज्य पूरी तरह तैयार है और कमजोर जगहों पर लोग और उपकरण तैनात किए गए हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है। गजपति जिले में ही करीब 15 हजार कमजोर लोगों की पहचान की गई है और उनके लिए 281 चक्रवात आश्रय स्थल और अस्थायी शिविर तैयार किए गए हैं।

तूफान के कारण रेल यातायात भी प्रभावित हुआ है। 27 और 28 अक्टूबर के लिए करीब 53 ट्रेनें रद्द की गई हैं। इनमें विजयवाड़ा, राजमुंदरी, मछलीपट्टनम, नरसापुर, भीमावरम, काकीनाडा पोर्ट, गुंटूर और विशाखापत्तनम से होकर जाने वाली सेवाएं शामिल हैं। ओडिशा में भी आठ ट्रेनें रद्द की गई हैं और दो सेवाओं को बीच में ही समाप्त किया गया है। रेलवे ने यात्रियों की मदद के लिए चौबीसों घंटे चलने वाले नियंत्रण कक्ष बनाए हैं और यात्रा से पहले ट्रेन की ताजा स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।

चक्रवात अरनब का मध्य प्रदेश पर असर: पूर्वी जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

चक्रवात अरनब का असर मध्य प्रदेश तक भी पहुंचने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार सप्ताह के आगे के दिनों में पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। 28 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का अनुमान है, जबकि 29 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए ऑरेंज अलर्ट जैसी स्थिति बन सकती है।

मंगलवार को मध्य प्रदेश में मौसम ज्यादातर साफ और शुष्क रहा, लेकिन तूफान के आगे बढ़ने के साथ पूर्वी हिस्से में बादल और बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। इससे पहले इस सप्ताह के लिए मध्य प्रदेश में बारिश का अलर्ट पहले ही जारी किया जा चुका है। किसानों और यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखें और तेज बारिश या तेज हवाओं के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।

पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि भारी बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बन सकती है। जिला प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना ही इस दौरान सबसे सुरक्षित तरीका है। खेतों में खड़ी फसलों को लेकर भी किसान मौसम की चेतावनियों पर ध्यान रखें।

पड़ोसी राज्यों में भी अलर्ट: छत्तीसगढ़, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश

तूफान का असर केवल आंध्र प्रदेश और ओडिशा तक सीमित नहीं रहेगा। छत्तीसगढ़ में 28 अक्टूबर को दक्षिणी हिस्से में अत्यंत भारी बारिश और 29 अक्टूबर को उत्तरी हिस्से में अत्यंत भारी बारिश का अनुमान है। तेलंगाना में 27 अक्टूबर को भारी बारिश हुई है, जबकि 28 अक्टूबर को कुछ जगहों पर अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। विदर्भ में 28 से 30 अक्टूबर के बीच भारी बारिश का अनुमान है।

उत्तर प्रदेश में भी तूफान के असर से 28 से 31 अक्टूबर के बीच कई हिस्सों में बारिश, आंधी और तेज हवाओं का अनुमान है। राज्य के राहत आयुक्त कार्यालय ने एहतियाती निर्देश जारी किए हैं और अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों के लिए तैयार रहने को कहा गया है। सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, गाजीपुर और बलिया के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां 28 अक्टूबर को 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। बिहार और झारखंड में भी इस दौरान बारिश का अनुमान है।

अरनब कितना खतरनाक: पुराने तूफानों से तुलना

अति गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में हवाओं की रफ्तार काफी अधिक होती है और इससे मकानों, पेड़ों, बिजली के खंभों और संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है। अरनब की तुलना 2014 में विशाखापत्तनम में आए हुदहुद तूफान से की जा रही है। हुदहुद के समय लैंडफॉल पर हवाओं की रफ्तार करीब 200 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी, जबकि अरनब उससे कमजोर रहने का अनुमान है। फिर भी तटीय इलाकों में नुकसान की आशंका बनी हुई है।

बंगाल की खाड़ी में मानसून के बाद के मौसम में चक्रवात बनना आम बात है, क्योंकि इस समय समुद्र की सतह का तापमान ऊंचा रहता है। विशाखापत्तनम से काकीनाडा तक का तटीय क्षेत्र पहले भी कई तूफानों का सामना कर चुका है। यही वजह है कि प्रशासन ने इस बार पहले से ही राहत शिविर, बचाव दल और हेल्पलाइन की व्यवस्था कर ली है। लैंडफॉल की रात को बचाव व्यवस्था पूरी तरह तैयार रखना सबसे अहम माना जा रहा है।

सुरक्षा के लिए क्या करें और क्या न करें

तूफान के दौरान सबसे जरूरी है कि लोग मौसम विभाग के बुलेटिन और जिला प्रशासन के निर्देशों पर ध्यान दें। तेज हवाओं और भारी बारिश के समय घर से बाहर निकलने से बचें। समुद्र तट, नदी किनारे और कमजोर पेड़ों के पास न जाएं। मछुआरे समुद्र में न उतरें और नावों को सुरक्षित जगह पर बांधकर रखें।

घर में पीने का पानी, जरूरी दवाएं, टॉर्च और मोबाइल फोन चार्ज करके रखें। बिजली जाने की स्थिति में मोमबत्ती या लालटेन का इस्तेमाल सावधानी से करें। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल सरकारी चेतावनियों पर भरोसा करें। अगर प्रशासन की ओर से किसी इलाके को खाली करने को कहा जाए, तो तुरंत सुरक्षित जगह पर चले जाएं। यात्रा करने वाले लोग ट्रेन या सड़क यात्रा से पहले ताजा स्थिति जरूर जांच लें।

आगे क्या होगा: लैंडफॉल के बाद कमजोर होगा तूफान

लैंडफॉल के बाद तूफान के धीरे-धीरे कमजोर होने का अनुमान है, लेकिन इसका असर जमीन के अंदरूनी हिस्सों में बारिश के रूप में जारी रहेगा। छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वी मध्य प्रदेश में आगे के दिनों में बारिश का दौर चल सकता है। प्रशासन तूफान की गति और दिशा पर लगातार नजर रखे हुए है और हर नए बुलेटिन के साथ चेतावनियों को अपडेट किया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में लैंडफॉल के बाद नुकसान का आकलन किया जाएगा और राहत कार्य तेज किए जाएंगे। पूर्वी मध्य प्रदेश सहित अंदरूनी राज्यों के लोगों को भी अगले दो-तीन दिनों तक मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि तूफान के बाद की बारिश भी फसलों और यातायात को प्रभावित कर सकती है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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