नई दिल्ली ब्यूरो
सार: चक्रवात अरनब के 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने से पहले चक्रवात अरनब एनडीआरएफ की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 31 टीमें आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और यनम में तैनात कर दी गई हैं। आंध्र प्रदेश में 2131 आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं और 2 करोड़ से ज्यादा लोगों तक मोबाइल अलर्ट पहुंचाए गए हैं।
बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवात अरनब अब बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले चुका है। मौसम विभाग के अनुसार यह तूफान 28 अक्टूबर को पूर्वाह्न में आंध्र प्रदेश के तट से यनम के पास टकराएगा। लैंडफॉल के समय हवाओं की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने का अनुमान है, जबकि झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। तट से टकराने के बाद भी तेज हवाओं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा बना रहेगा। इसी खतरे को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।
चक्रवात अरनब: एनडीआरएफ की 31 टीमें कहां-कहां तैनात
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल ने मंगलवार को बताया कि चक्रवात से प्रभावित हो सकने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 31 टीमें तैनात की गई हैं। राज्यों की ओर से जितनी टीमों की मांग की गई थी, उतनी सभी टीमें अब अपने-अपने इलाकों में पहुंच चुकी हैं। ये टीमें आंध्र प्रदेश, यनम, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में लगाई गई हैं।
एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक मोहसिन शाहेदी ने बताया कि तूफान के मद्देनजर सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय बैठकें हो चुकी हैं और बचाव की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि टीमें उन इलाकों में विशेष रूप से तैनात की गई हैं, जहां तेज हवाओं, भारी बारिश और बाढ़ का सबसे ज्यादा खतरा है। तटीय जिलों में टीमों को नावों, जीवन रक्षक उपकरणों और राहत सामग्री के साथ तैयार रखा गया है, ताकि लैंडफॉल के बाद तुरंत राहत और बचाव का काम शुरू किया जा सके।
आंध्र प्रदेश में 14 जिलों में एनडीआरएफ की 12 और राज्य आपदा मोचन बल की 10 टीमें लगाई गई हैं। इसके अलावा एनडीआरएफ और राज्य बल की एक-एक टीम रिजर्व में रखी गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर उसे तुरंत किसी भी जिले में भेजा जा सके। ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में भी टीमें उन जिलों में पहुंचाई गई हैं, जहां तूफान के असर से भारी बारिश और जलभराव की आशंका है।
पहले एनडीएमए, फिर कैबिनेट सचिव की बैठक में बनी रणनीति
तैयारियों की कड़ी में रविवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तहत सभी संबंधित पक्षों की समन्वय बैठक हुई। इस बैठक में केंद्र सरकार के विभागों, राज्य सरकारों, मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों ने हिस्सा लिया। बैठक में तूफान की गति, लैंडफॉल के संभावित इलाके, आश्रय स्थलों की तैयारी, राहत सामग्री की उपलब्धता और संचार व्यवस्था पर चर्चा हुई।
इसके बाद सोमवार को कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक और बैठक हुई, जिसमें तैयारियों की अंतिम रणनीति तय की गई। इस बैठक के बाद ही राज्यों की मांग पर एनडीआरएफ की टीमों की तैनाती को अंतिम रूप दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस बार तैयारियों का मकसद केवल लैंडफॉल के समय ही नहीं, बल्कि उसके बाद के 48 घंटों में भी किसी भी आपात स्थिति से निपटना है। भारी बारिश से निचले इलाकों में जलभराव, पेड़ गिरने और बिजली व्यवस्था बाधित होने जैसी स्थितियों के लिए भी टीमें तैयार रखी गई हैं।
आंध्र प्रदेश में 2131 आश्रय स्थल, 2.07 करोड़ लोगों तक अलर्ट
आंध्र प्रदेश में प्रशासन ने 20 जिलों में 2131 चक्रवात आश्रय स्थल तैयार किए हैं। इन आश्रय स्थलों में खाने-पीने की व्यवस्था, पेयजल, दवाएं और चिकित्सा सहायता का इंतजाम किया गया है। तटीय इलाकों के निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम तेज कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अधिकारियों के कहने पर बिना देर किए निकटतम आश्रय स्थल में चले जाएं।
मोबाइल अलर्ट के जरिए 18 जिलों में करीब 2.07 करोड़ उपभोक्ताओं तक चेतावनी पहुंचाई गई है। इसके अलावा तटीय इलाकों के करीब 6.9 लाख उपभोक्ताओं को समुद्र में उठने वाली लहरों और तूफानी उफान से जुड़े विशेष अलर्ट भेजे गए हैं। प्रशासन का कहना है कि अलर्ट का मकसद लोगों को समय रहते सतर्क करना है, ताकि वे खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकें।
आंध्र प्रदेश के 11 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। रेलवे ने भी एहतियात के तौर पर कई ट्रेनों को रद्द किया है और कुछ ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया है। यात्रियों से कहा गया है कि वे यात्रा से पहले ट्रेनों की स्थिति की जानकारी ले लें।

समुद्र में न जाने की सलाह, 30043 नावें लौटीं किनारे
मछुआरों को 29 अक्टूबर तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। अधिकारियों के अनुसार सभी 30043 मछली पकड़ने वाली नावें किनारे पर लौट आई हैं। बंदरगाहों पर चेतावनी के संकेत लगा दिए गए हैं और समुद्र तट पर लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है।
लैंडफॉल के समय समुद्र में बहुत ऊंची और खतरनाक लहरें उठने की आशंका है। काकीनाडा और यनम के पास तूफानी उफान की ऊंचाई 1.0 से 2.0 मीटर तक रहने का अनुमान है। ऐसे में तटीय इलाकों में समुद्र के पानी के निचले इलाकों में घुसने का खतरा है। प्रशासन ने तटीय गांवों के लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने और समुद्र तट से दूर रहने की अपील की है।
ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में भी चौकसी
ओडिशा में भी प्रशासन ने तटीय जिलों में सतर्कता बढ़ा दी है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है। अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और अफवाहों से दूर रहें।
तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में भी एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं। इन राज्यों में तूफान के असर से भारी बारिश और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका है। प्रशासन ने जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिए हैं और राहत सामग्री की व्यवस्था की है। छत्तीसगढ़ के बस्तर और दक्षिणी जिलों में भी बारिश की चेतावनी को देखते हुए तैयारियां की जा रही हैं।
लैंडफॉल कब और कहां: 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार
मौसम विभाग के अनुसार चक्रवात अरनब के 28 अक्टूबर को पूर्वाह्न में आंध्र प्रदेश के तट से यनम के पास टकराने का अनुमान है। इससे पहले यह तूफान पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में आगे बढ़ रहा है। लैंडफॉल के समय हवाओं की गति 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रह सकती है, जबकि झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
तेज हवाओं के साथ भारी बारिश से तटीय जिलों में पेड़ उखड़ने, बिजली के खंभे गिरने और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों से तटीय इलाकों में बाढ़ जैसे हालात भी बन सकते हैं। प्रशासन ने लोगों से कहा है कि वे लैंडफॉल के दौरान घरों के अंदर रहें और खिड़कियों-दरवाजों से दूर रहें।
चक्रवात अरनब के लैंडफॉल की ताजा जानकारी के साथ ही रेलवे और सड़क परिवहन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी नजर रखी जा रही है। तटीय इलाकों में यातायात बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की गई है।
लोगों के लिए सुरक्षा निर्देश: फर्जी अलर्ट से सावधान
आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे हवाएं तेज होने पर घरों के अंदर रहें और अधिकारियों के कहने पर तुरंत निकटतम आश्रय स्थल में चले जाएं। बिजली के तारों, गिरे हुए पेड़ों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है।
लोगों से यह भी कहा गया है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट जानकारियों पर भरोसा न करें। तूफान से जुड़ी सही जानकारी के लिए केवल मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं को ही आधार बनाएं। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क किया जा सकता है।
घरों में पीने का पानी, सूखा भोजन, दवाएं, टॉर्च और जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखने की सलाह दी गई है। मोबाइल फोन को चार्ज रखने और जरूरी नंबरों को पास में रखने को भी कहा गया है।
मध्य प्रदेश सहित पूर्वी भारत पर क्या असर
चक्रवात अरनब का असर केवल तटीय राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा। सप्ताह के आखिरी दिनों में पूर्वी मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। बंगाल की खाड़ी से उठी नमी और तूफान के अवशेष के कारण पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश हो सकती है। किसानों और आम लोगों को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
पूर्वी भारत के राज्यों में भी तूफान के बाद बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। प्रशासन ने सभी राज्यों में जिला स्तर पर तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। राहत और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
कुल मिलाकर चक्रवात अरनब से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने पहले से ही व्यापक तैयारियां कर ली हैं। 31 एनडीआरएफ टीमों की तैनाती, 2131 आश्रय स्थलों की व्यवस्था और करोड़ों लोगों तक अलर्ट पहुंचाना इसी तैयारी का हिस्सा है। अब सबकी नजर 28 अक्टूबर के लैंडफॉल पर है, जिसके बाद ही तूफान के असली असर का आकलन हो सकेगा।
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