छिंदवाड़ा ब्यूरो
सार: छिंदवाड़ा की कृषि उपज मंडी कुसमैली में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्रालय से वर्चुअली जुड़े और जिले के किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा के मक्का और स्वीट कॉर्न की गुणवत्ता और स्वाद को देश-दुनिया के बाजारों तक पहुंचाया जाएगा, इसके लिए किसानों को बेहतर भंडारण, प्रोसेसिंग यूनिट और राष्ट्रीय स्तर के बाजार की सुविधा दी जा रही है। साथ ही छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना पूरी होने पर जिले की सिंचाई क्षमता 29 प्रतिशत से बढ़कर 54 प्रतिशत हो जाएगी, और किसान कल्याण स्वाभिमान पर्व कृषि क्विज 2026 के विजेताओं को ट्रैक्टर, बुलेट और ई-स्कूटी के लिए पुरस्कार राशि दी गई है।
कुसमैली मंडी में जुटे किसान, मंत्रालय से वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री
मंगलवार को छिंदवाड़ा की कृषि उपज मंडी कुसमैली के प्रांगण में बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल स्थित मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े और जिले के किसानों को संबोधित किया। कार्यक्रम में जिले के जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान भाई-बहन मौजूद रहे। इनमें अपेक्स बैंक के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव और छिंदवाड़ा के सांसद विवेक बंटी साहू भी शामिल थे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि साल 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश में पहली बार सभी जिलों में किसानों का उत्साह बढ़ाने के लिए बलराम कृषि महोत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। सिंचाई के लिए 10 घंटे बिजली दी जा रही है, सिंचाई के संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं और दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस महोत्सव का मकसद सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। इसके जरिए किसानों को नई तकनीक, योजनाओं और बाजार की जानकारी एक ही मंच पर मिल रही है। छिंदवाड़ा का यह आयोजन उसी श्रृंखला की एक कड़ी है, जिसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों में किसान, जनप्रतिनिधि और अधिकारी एक साथ बैठकर खेती की चुनौतियों और उनके समाधान पर बात कर रहे हैं।
कॉर्न सिटी की पहचान: मक्का, स्वीट कॉर्न, संतरा, श्रीअन्न और फूल
मुख्यमंत्री ने कहा कि छिंदवाड़ा की धरती जनजातीय भाई-बहनों के परिश्रम और उनकी समृद्ध परंपराओं से सिंचित है। यहां के मेहनती किसानों ने खेती के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। छिंदवाड़ा को प्रदेश की कॉर्न सिटी कहा जाता है और यहां का स्वीट कॉर्न देशभर में मशहूर है।
उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा सिर्फ मक्का उत्पादन के लिए ही नहीं जाना जाता। यहां श्रीअन्न और फूलों की खेती में भी जिले ने अलग स्थान बनाया है। यहां के संतरे को जीआई टैग मिलने से जिले को एक अलग पहचान मिली है। इस तरह छिंदवाड़ा की कृषि पहचान एक फसल तक सीमित नहीं है, बल्कि कई फसलों और उत्पादों से मिलकर बनी है।
यही विविधता छिंदवाड़ा की ताकत भी है और चुनौती भी। ताकत इसलिए कि जिले के पास बाजार में रखने के लिए कई उत्पाद हैं। चुनौती इसलिए कि हर उत्पाद के लिए अलग भंडारण, अलग प्रसंस्करण और अलग बाजार की जरूरत होती है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इसी चुनौती का जवाब देने की बात कही — यानी उपज को सिर्फ मंडी तक पहुंचाना काफी नहीं, उसे सही कीमत पर बड़े बाजार तक पहुंचाना भी जरूरी है।

राष्ट्रीय बाजार, भंडारण और प्रोसेसिंग: किसानों को मिलेगा बेहतर मूल्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छिंदवाड़ा के मक्का उत्पादक किसानों को बेहतर सुविधाएं देने और उनकी उपज के लिए नया बाजार तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। राज्य सरकार का प्रयास है कि यहां के मक्के की गुणवत्ता और स्वाद की पहचान देश-दुनिया के बाजारों में बने।
इसके लिए किसानों को बेहतर भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और मार्केट लिंकेज की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। भंडारण की सुविधा मिलने से किसान अपनी उपज को सुरक्षित रख सकेंगे और उसे जल्दबाजी में कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर नहीं होंगे। प्रसंस्करण इकाइयों से उपज का मूल्य बढ़ेगा, क्योंकि कच्ची उपज की तुलना में प्रसंस्कृत उत्पाद की कीमत आमतौर पर ज्यादा होती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार की कोशिश है कि किसान केवल कच्ची उपज बेचने तक सीमित न रहें, बल्कि खुद भी उसका प्रसंस्करण कर सकें। इससे उन्हें अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। यह बात खास तौर पर मक्का जैसे उत्पाद के लिए अहम है, जिसका इस्तेमाल खाद्य प्रसंस्करण, पशु आहार और उद्योगों में कई रूपों में होता है। अगर किसान या किसान समूह खुद प्रसंस्करण की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो मूल्य श्रृंखला का बड़ा हिस्सा उनके पास ही रह सकता है।
मार्केट लिंकेज का मतलब है कि किसान की उपज को खरीदारों, कंपनियों और बड़े बाजारों से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी दिशा में काम हो रहा है, ताकि छिंदवाड़ा का मक्का और स्वीट कॉर्न सिर्फ स्थानीय मंडी तक सीमित न रहे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के बाजार तक पहुंचे।
सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना: 29 से 54 प्रतिशत तक का सफर
खेती की तरक्की के लिए पानी की उपलब्धता सबसे बुनियादी जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए खेती के साथ उद्यानिकी को भी लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, और इसी सोच के तहत छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद छिंदवाड़ा जिले की सिंचाई क्षमता मौजूदा 29 प्रतिशत से बढ़कर 54 प्रतिशत हो जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि जिले के ज्यादा खेतों तक सिंचाई की सुविधा पहुंचेगी। ज्यादा सिंचित क्षेत्र का मतलब है कि किसान सिर्फ बारिश पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि रबी और अन्य फसलों की योजना भी भरोसे के साथ बना सकेंगे।
सिंचाई क्षमता बढ़ने से कृषि उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। जब पानी समय पर और भरोसे के साथ मिलता है, तो किसान नई फसलें आजमा सकते हैं, फसल चक्र बदल सकते हैं और उद्यानिकी जैसी ज्यादा आय वाली खेती की ओर बढ़ सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती की तरक्की के लिए पानी बहुत जरूरी है और सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह परियोजना छिंदवाड़ा की कृषि क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताई गई है। इसके पूरा होने पर जिले के किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जो आने वाले समय में उत्पादन और आमदनी दोनों पर असर डाल सकती हैं।
पीएमएफएमई: 122 हितग्राहियों तक पहुंचा लाभ
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का भी जिक्र किया। इस योजना के माध्यम से किसानों और छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को सुविधाएं दी जा रही हैं। इसका उद्देश्य किसानों को अपनी उपज के प्रसंस्करण के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ दिलाना है।
उन्होंने बताया कि छिंदवाड़ा जिले के 122 हितग्राही इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। यह संख्या बताती है कि जिले में छोटे स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण की दिशा में काम शुरू हो चुका है। सरकार चाहती है कि किसान अपनी उपज का मूल्य बढ़ाने के लिए प्रसंस्करण की दिशा में भी आगे आएं।
इससे कृषि आधारित छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी तैयार हो सकेंगे। जब प्रसंस्करण गांव या जिले के स्तर पर होता है, तो रोजगार भी वहीं पैदा होता है। इससे पलायन पर भी असर पड़ सकता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
पीएमएफएमई जैसी योजनाओं का फायदा यह भी है कि छोटे उद्यमी औपचारिक व्यवस्था से जुड़ते हैं। इससे उन्हें प्रशिक्षण, तकनीक और बाजार की जानकारी मिलने की संभावना बढ़ती है। छिंदवाड़ा के 122 हितग्राहियों का उदाहरण दूसरे किसानों को भी इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित कर सकता है।
किसानों से सीधा संवाद: चार सफल कहानियां, चार अलग रास्ते
बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा में मौजूद कई प्रगतिशील किसानों से वर्चुअली बातचीत की। उन्होंने किसानों के खेती से जुड़े अनुभवों और उनके द्वारा अपनाई जा रही नई तकनीकों की जानकारी ली। इस संवाद में चार किसानों की कहानियां खास तौर पर सामने आईं, जो अलग-अलग रास्तों से खेती को लाभकारी बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने किसान पूरनलाल इनवाती से प्राकृतिक और समन्वित खेती को लेकर चर्चा की। प्राकृतिक खेती का मतलब है कि रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करके मिट्टी की सेहत को बनाए रखते हुए खेती की जाए। समन्वित खेती में फसल के साथ पशुपालन या अन्य गतिविधियों को जोड़कर आमदनी के कई स्रोत बनाए जाते हैं।
प्रवेश रघुवंशी से कृषि यंत्रीकरण के जरिए नरवाई प्रबंधन के बारे में जानकारी ली गई। नरवाई यानी फसल कटाई के बाद खेत में बचा अवशेष, जिसका प्रबंधन खेती और पर्यावरण दोनों के लिए अहम मुद्दा है। यंत्रीकरण से इस अवशेष का सही इस्तेमाल हो सकता है और खेत की तैयारी भी समय पर हो सकती है।
सुषमा शर्मा से देसी गाय पालन के बारे में बातचीत हुई। देसी गाय पालन से दूध के साथ-साथ गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों की संभावना भी जुड़ी है, जो प्राकृतिक खेती में काम आते हैं। गुरु प्रसाद पवार से आलू और स्वीट कॉर्न के क्षेत्र में उनके द्वारा संचालित गतिविधियों पर चर्चा हुई। आलू और स्वीट कॉर्न दोनों ही ऐसी फसलें हैं, जिनकी बाजार में मांग रहती है और जिनका प्रसंस्करण भी संभव है।
मुख्यमंत्री ने किसानों के प्रयासों की जानकारी लेते हुए कृषि क्षेत्र में नवाचार और नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों द्वारा किए जा रहे इनोवेशन की पूरी जानकारी ली और उनके प्रयासों की सराहना करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया।
क्विज विजेताओं को सम्मान: ट्रैक्टर, बुलेट और ई-स्कूटी की राशि
बलराम कृषि महोत्सव के दौरान किसान कल्याण स्वाभिमान पर्व कृषि क्विज 2026 के प्रथम, द्वितीय और तृतीय विजेता किसानों से भी मुख्यमंत्री ने चर्चा की और उन्हें बधाई दी। इस क्विज में बुजुर्ग कृषक चंद्रा चंद्रवंशी को पहले पुरस्कार के तहत ट्रैक्टर के लिए 7.26 लाख रुपये, पूजा साहू को द्वितीय पुरस्कार के तहत बुलेट के लिए 1.68 लाख रुपये और मनोज चंद्रवंशी को तीसरे पुरस्कार के रूप में ई-स्कूटी के लिए 1.20 लाख रुपये की राशि शासन द्वारा दी गई है।
क्विज का मकसद किसानों को कृषि संबंधी जानकारी और शासन की योजनाओं से जोड़ना है। जब किसान योजनाओं और तकनीक की जानकारी रखते हैं, तो वे उनका लाभ भी बेहतर तरीके से उठा पाते हैं। पुरस्कारों के जरिए मेहनती और जानकार किसानों को सम्मान भी मिलता है और दूसरे किसानों को भी इस तरह की प्रतियोगिताओं में भाग लेने की प्रेरणा मिलती है।
इसी कार्यक्रम में वृंदावन ग्रामों में आयोजित गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों से भी मुख्यमंत्री ने सीधा संवाद किया और उन्हें बधाई दी। इसके अलावा किसान परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों के नाम इस खबर में नहीं दिए जा रहे हैं, क्योंकि उनमें नाबालिग विद्यार्थी भी शामिल हो सकते हैं।
यह सम्मान सिर्फ पुरस्कार तक सीमित नहीं है। यह संदेश भी देता है कि खेती में ज्ञान, नवाचार और मेहनत की पहचान होती है। जो किसान नई तकनीक अपनाते हैं और योजनाओं की जानकारी रखते हैं, उन्हें समाज और सरकार दोनों की ओर से सम्मान मिलता है।
फसल विविधीकरण और आगे की राह: क्या बदलेगा किसानों के लिए
मुख्यमंत्री ने किसान भाई-बहनों से खेती में नए प्रयोग करने और फसल विविधीकरण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ ऐसी फसलों और गतिविधियों पर भी ध्यान देना चाहिए, जिनसे उन्हें बेहतर आमदनी मिल सके। उन्होंने किसानों को अपनी उपज के प्रसंस्करण और बेहतर मार्केटिंग के जरिए बड़े बाजारों तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। खेती में नवाचार और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आगे की राह में तीन बातें साफ नजर आती हैं। पहली, सिंचाई क्षमता बढ़ने से खेती का आधार मजबूत होगा। दूसरी, भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार की सुविधाएं मिलने से उपज का मूल्य बढ़ेगा। तीसरी, फसल विविधीकरण और नवाचार से किसान की आमदनी एक फसल पर निर्भर नहीं रहेगी।
छिंदवाड़ा के लिए यह संयोजन खास तौर पर अहम है, क्योंकि जिले के पास मक्का, स्वीट कॉर्न, संतरा, श्रीअन्न और फूलों जैसी कई संभावनाएं हैं। अगर सिंचाई, प्रसंस्करण और बाजार की सुविधाएं एक साथ आगे बढ़ती हैं, तो इन संभावनाओं का फायदा किसानों तक पहुंच सकता है।
बलराम कृषि महोत्सव का संदेश भी यही है कि खेती को सिर्फ परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान, तकनीक और बाजार से जुड़े उद्यम के रूप में देखा जाए। छिंदवाड़ा के किसानों से हुए संवाद में यही बात बार-बार सामने आई कि मेहनत के साथ सही जानकारी और सही सुविधा मिले, तो खेती लाभकारी भी हो सकती है और सम्मानजनक भी।
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