डेस्क रिपोर्ट। कल, रविवार, 8 नवंबर को दीपावली है। रोशनी का यह सबसे बड़ा त्योहार कल रात पूरे देश के साथ इंदौर में भी मनाया जाएगा। माना जाता है कि दीपावली की रात लक्ष्मी घर-घर आती हैं, इसलिए घरों की सफाई, रंगोली, दीपों की सजावट और लक्ष्मी पूजा की तैयारी आज से ही पूरी हो रही है। कल का दिन सिर्फ पूजा का नहीं, बल्कि पूरे परिवार के एक साथ होने, मिठाइयां बांटने और घर को रोशनी से सजाने का दिन है। अगर आप कल की पूजा की योजना बना रहे हैं, तो यह गाइड आपके काम आएगी — इसमें इंदौर के अनुसार अमावस्या तिथि, लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त, प्रदोष काल, निशिता काल और दिनभर का पूरा क्रम दिया गया है।
कल दीपावली: अमावस्या तिथि और मुख्य मुहूर्त एक नजर में
कल दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 8 नवंबर की सुबह करीब 11:27 बजे से शुरू हो रही है और 9 नवंबर की दोपहर करीब 12:31 बजे तक रहेगी। यानी कल की शाम और कल की रात पूरी तरह अमावस्या में पड़ रही है, इसलिए लक्ष्मी पूजा कल शाम को ही होगी। इंदौर में लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त शाम 6:10 बजे से रात 8:08 बजे तक है। प्रदोष काल शाम 5:45 बजे से रात 8:19 बजे तक रहेगा। मुख्य मुहूर्त वृषभ लग्न के साथ प्रदोष काल के मिलने से बनता है — परंपरा के अनुसार स्थिर लग्न में की गई लक्ष्मी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है, क्योंकि माना जाता है कि स्थिर लग्न में लक्ष्मी घर में ठहरती हैं। इस लेख में दिए गए सभी समय इंदौर के अनुसार हैं। दूसरे शहरों में सूर्यास्त के समय के अनुसार इनमें कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
इंदौर में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त: प्रदोष काल में करें पूजा
कल शाम की पूजा प्रदोष काल में करने की परंपरा है। इंदौर में प्रदोष काल शाम 5:45 बजे से शुरू होगा और रात 8:19 बजे तक रहेगा। इसी के भीतर लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त शाम 6:10 बजे से रात 8:08 बजे तक है। व्यावहारिक सलाह यही है कि पूजा की सारी तैयारी शाम होने से पहले पूरी कर लें — चौकी सजाना, लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा स्थापित करना, दीपक, फूल, मिठाई, फल, पंचामृत और पूजा की थाली तैयार रखना। मुहूर्त करीब दो घंटे का है, इसलिए परिवार के सभी लोग पहले से समय जान लें ताकि पूजा बिना जल्दबाजी के पूरी हो सके। जो परिवार किसी कारण मुख्य मुहूर्त में पूजा न कर पाएं, वे प्रदोष काल में पूजा कर सकते हैं — परंपरा के अनुसार प्रदोष काल में की गई पूजा भी शुभ मानी जाती है।
निशिता काल: आधी रात की पूजा का क्रम
दीपावली की रात का एक और महत्वपूर्ण समय निशिता काल माना जाता है। निशिता काल आधी रात के आसपास का समय होता है, जब माना जाता है कि लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। कुछ परिवार और साधक इस समय भी पूजा करते हैं, और कुछ मंदिरों में आधी रात को विशेष आरती का क्रम रहता है। इंदौर के लिए निशिता काल का मिनट-दर-मिनट समय अलग से सत्यापित नहीं हो सका है, इसलिए इस लेख में आधी रात के आसपास का सामान्य क्रम ही दिया जा रहा है — सटीक समय शहर के अनुसार बदल सकता है। सामान्य परिवारों के लिए शाम का मुख्य मुहूर्त ही पूजा का प्रमुख समय माना जाता है, और निशिता काल की पूजा उन्हीं परिवारों में की जाती है जहाँ इसकी परंपरा रही है। आधी रात को पूजा करने वाले परिवार दीपक और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।
पूजा विधि: कल शाम घर में ऐसे करें लक्ष्मी पूजा
कल शाम की पूजा की तैयारी आज ही कर लेना अच्छा रहेगा। सबसे पहले घर की साफ-सफाई करें और मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं। माना जाता है कि साफ और रोशन घर में लक्ष्मी का आगमन होता है। पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं, लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें, और साथ में सरस्वती तथा कुबेर का भी स्मरण करने की परंपरा है। कलश, दीपक, फूल, अक्षत, रोली, चंदन, मिठाई, फल, बताशे, खील, पंचामृत और सिक्के पूजा थाली में रखें। पूजा की शुरुआत दीपक जलाकर और गणेश का स्मरण करके करें, फिर लक्ष्मी की पूजा करें। पूजा के बाद आरती करें, घर के सभी कमरों और द्वार पर दीपक जलाएं और प्रसाद सबमें बांटें। कई परिवार इस दिन बही-खाता या व्यापारिक बही की पूजा भी करते हैं, जिसे चोपड़ा पूजन कहा जाता है। व्यापार से जुड़े परिवार कल शाम को अपने बही-खातों की पूजा भी मुख्य मुहूर्त में कर सकते हैं।
दिनभर का क्रम: सुबह से रात तक क्या-कब
कल की योजना इस क्रम में बनाएं तो सुविधा रहेगी। सुबह घर की सफाई और सजावट का काम पूरा करें। दोपहर तक रंगोली, फूलों की माला और दीपों की व्यवस्था कर लें। अमावस्या सुबह करीब 11:27 बजे से शुरू हो रही है, इसलिए दोपहर के बाद पूजा की थाली और प्रसाद की तैयारी पर ध्यान दें। शाम 5:45 बजे प्रदोष काल शुरू होने से पहले पूजा की चौकी सजा लें और घर के द्वार पर दीपक जलाना शुरू करें। शाम 6:10 बजे से रात 8:08 बजे के मुख्य मुहूर्त में परिवार के साथ लक्ष्मी पूजा करें। पूजा के बाद घर के हर कोने में दीपक जलाएं, मिठाइयां बांटें और परिवार के साथ समय बिताएं। आधी रात के आसपास निशिता काल की परंपरा वाले परिवार अपनी पूजा का क्रम पूरा कर सकते हैं।
क्या खास है इस बार: पांच दिन के उत्सव का केंद्र
कल दीपावली पांच दिन के उत्सव का केंद्र है। 6 नवंबर को धनतेरस और 7 नवंबर को छोटी दीपावली के बाद कल मुख्य दीपावली आ रही है, और इसके बाद 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा तथा 11 नवंबर को भाई दूज मनाई जाएगी। यानी कल की रात पूरे उत्सव की सबसे रोशन रात होगी। इंदौर में कल बाजारों, मंदिरों और घरों में विशेष रौनक रहेगी — राजवाड़ा, सराफा और छप्पन दुकान जैसे इलाकों में भीड़ रहने की उम्मीद है। अगर आप कल शाम को बाहर जा रहे हैं, तो यातायात और भीड़ को ध्यान में रखकर समय निकालें। पटाखों का इस्तेमाल हो तो स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करें, बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें और पालतू जानवरों का भी ध्यान रखें।
ध्यान रखने वाली बातें
दीपावली पर दीपक जलाते समय आग से सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें — दीपक को पर्दों, कागज और सूखी सजावट से दूर रखें और सोने से पहले सभी दीपक बुझा दें। बिजली की झालरों की वायरिंग पहले जांच लें और खराब तारों का इस्तेमाल न करें। मिठाइयां खरीदते समय साफ-सफाई और ताजगी का ध्यान रखें, और ज्यादा मीठा खाने से बचें। कल का दिन परिवार के साथ बिताएं, बुजुर्गों का आशीर्वाद लें, पड़ोसियों और जरूरतमंदों के साथ मिठाई और खुशियां बांटें। माना जाता है कि दीपावली की असली रोशनी घर के भीतर के प्रेम और सद्भाव से ही आती है — कल की रात उसी रोशनी को संजोने का दिन है।
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