नई दिल्ली ब्यूरो
सार: नई दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026 का भव्य उद्घाटन हुआ, जहाँ उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने अंगदान को महादान बताते हुए समाज से इससे जुड़ी भ्रांतियाँ दूर करने का आह्वान किया। उद्घाटन समारोह में 570 अंग प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं और दाताओं ने एक साथ ताड़ासन करके वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, नई दिल्ली का प्रमाणपत्र हासिल किया — यह पल इस बात का प्रतीक बना कि प्रत्यारोपण के बाद भी जीवन पूरी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ता है।
तालकटोरा में हुआ भव्य उद्घाटन समारोह
रविवार, 1 नवंबर को नई दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026 का उद्घाटन हुआ। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शामिल हुए और खेलों का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव सम्मानित अतिथि के रूप में मौजूद रहे। खेलों का आयोजन रीनल केयर फाउंडेशन और सर गंगा राम अस्पताल की ओर से किया जा रहा है, जबकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोट्टो) इसमें तकनीकी साझेदार की भूमिका में है। उद्घाटन से एक दिन पहले, 31 अक्टूबर को खेलों की प्रारंभिक स्पर्धाएँ शुरू हो चुकी थीं, और मुख्य आयोजन 1 नवंबर से तालकटोरा में चल रहा है। खेलों में 500 से अधिक खिलाड़ी भाग ले रहे हैं — ये सभी वे लोग हैं जिन्होंने अंग प्रत्यारोपण कराया है या अंगदान किया है और अब खेल के मैदान में अपनी नई जिंदगी का उत्सव मना रहे हैं।
570 लोगों ने एक साथ किया ताड़ासन, बना विश्व रिकॉर्ड
उद्घाटन समारोह का सबसे यादगार क्षण वह रहा जब 570 अंग प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं और दाताओं ने एक साथ ताड़ासन किया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं और दाताओं का ताड़ासन करना अपने आप में एक अनोखा प्रयास था, और इसके सफल होने पर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, नई दिल्ली की ओर से आयोजकों को प्रमाणपत्र दिया गया। यह प्रमाणपत्र अंग प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं और दाताओं के ताड़ासन करने वाले सबसे बड़े समूह के रूप में दर्ज हुआ। ताड़ासन योग की एक सीधी-सादी लेकिन प्रभावी मुद्रा है — सीधे खड़े होकर शरीर को ऊपर की ओर खींचना। इस मुद्रा को सामूहिक रूप से करना इस संदेश का प्रतीक था कि प्रत्यारोपण के बाद का जीवन कमजोरी का नहीं, बल्कि संतुलन, अनुशासन और आत्मविश्वास का जीवन होता है। मैदान में खड़े हर प्रतिभागी की कहानी अपने आप में एक संघर्ष और फिर वापसी की कहानी थी।

‘जिंदगी दोबारा’ कैलेंडर का विमोचन और विजेताओं का सम्मान
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने ‘जिंदगी दोबारा’ कैलेंडर का विमोचन किया। यह कैलेंडर उन लोगों की कहानियों और संदेशों को सामने लाता है जिन्हें अंगदान के कारण जीवन का दूसरा अवसर मिला। साथ ही, जर्मनी के ड्रेसडेन में आयोजित विश्व अंग प्रत्यारोपण खेल 2025 के पदक विजेताओं को सम्मानित किया गया। इन विजेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया था और पदक जीतकर लौटे थे। उपराष्ट्रपति ने समारोह में मौजूद सभी लोगों के साथ अंगदान की शपथ भी ली। इसके बाद कबड्डी, टेबल टेनिस और बैडमिंटन के प्रदर्शनी मैच देखे गए, जिनमें प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ता खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इन मैचों का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं था, बल्कि यह दिखाना था कि प्रत्यारोपण के बाद खिलाड़ी मैदान पर पूरी ताकत के साथ उतर सकते हैं।
उपराष्ट्रपति का संदेश — अंगदान महादान है
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने अंगदान को महादान बताया। उन्होंने कहा कि अंगदान एक ऐसा दान है जिसके माध्यम से किसी के चले जाने के बाद भी उम्मीदें बनी रह सकती हैं — एक व्यक्ति का दिया हुआ अंग किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन को बचा सकता है और उसके परिवार को नई सुबह दे सकता है। उन्होंने इन खेलों को साहस, दृढ़ संकल्प, करुणा और जीवन के अनमोल उपहार का उत्सव बताया। उपराष्ट्रपति ने अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़े मिथकों व गलत धारणाओं को दूर करने का आह्वान किया। समाज में आज भी अंगदान को लेकर कई तरह की आशंकाएँ और अधूरी जानकारियाँ फैली हुई हैं, और ऐसे आयोजनों का उद्देश्य इन्हीं भ्रांतियों को तथ्यों से बदलना है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए रीनल केयर फाउंडेशन, सर गंगा राम अस्पताल और नोट्टो को बधाई दी।
कौन-कौन हुआ शामिल, क्या है खेलों का स्वरूप
राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026 का स्वरूप किसी सामान्य खेल प्रतियोगिता से अलग है। यहाँ जीत-हार से ज्यादा महत्व इस बात का है कि प्रतिभागी मैदान तक पहुँचे हैं। खेलों में देशभर से 500 से अधिक खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। आयोजन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार उद्घाटन समारोह में उपराष्ट्रपति मुख्य अतिथि रहे, जबकि प्रतापराव जाधव सम्मानित अतिथि और सांसद बांसुरी स्वराज विशिष्ट अतिथियों में शामिल रहीं। खेलों की शुरुआत मार्च 2026 में मशाल प्रज्वलन समारोह से हुई थी, तब इनका नाम दिल्ली प्रत्यारोपण खेल था; बाद में इन्हें राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026 के रूप में नया नाम दिया गया। 31 अक्टूबर को प्रारंभिक स्पर्धाएँ शुरू हुईं और 1 नवंबर को मुख्य उद्घाटन समारोह हुआ। इस तरह यह आयोजन कई महीनों की तैयारी के बाद अपने मुख्य पड़ाव पर पहुँचा है।
भारत में अंगदान की तस्वीर — आंकड़े क्या कहते हैं
भारत में अंगदान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पहले साझा की गई जानकारी के अनुसार देश में प्रत्यारोपणों की संख्या वर्ष 2013 में 5 हजार से कम थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर लगभग 20 हजार हो गई। इसी अवधि में मृत दाताओं से होने वाले प्रत्यारोपण भी वर्ष 2013 के 837 से बढ़कर वर्ष 2025 में 3,526 तक पहुँच गए। वर्ष 2025 में 1,200 से अधिक परिवार अपने प्रियजनों की मृत्यु के बाद उनके अंगों का दान करने के लिए आगे आए। सितंबर 2023 से आधार कार्ड आधारित सत्यापन प्रणाली के माध्यम से मृत्यु के बाद अंग और ऊतक दान करने के लिए 48 लाख से अधिक नागरिकों ने पंजीकरण कराया है। इन आंकड़ों के साथ भारत कुल अंग प्रत्यारोपण के मामले में अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। हृदय, फेफड़े और अग्न्याशय जैसे जटिल अंगों के प्रत्यारोपण में भी भारत ने दक्षता हासिल की है, और हाथ के प्रत्यारोपण में भारत दुनिया में अग्रणी है।
व्यवस्था कैसे काम करती है — नोट्टो, कानून और डिजिटल पहल
अंगदान और प्रत्यारोपण की व्यवस्था राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोट्टो) के माध्यम से संचालित होती है, जो स्वास्थ्य मंत्रालय की नोडल एजेंसी है। इस क्षेत्र का कानूनी ढाँचा मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 से तय होता है। व्यवस्था को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए कई डिजिटल पहल की गई हैं। वर्ष 2023 में राष्ट्रीय डिजिटल अंगदान पोर्टल शुरू होने के बाद से अब तक 5 लाख से अधिक लोगों ने आधार सत्यापित अंगदान की शपथ ली है। ‘ई-प्रत्यारोपण’ नाम का डिजिटल प्लेटफॉर्म अस्पतालों, डॉक्टरों, मरीजों, दाताओं और अन्य संस्थाओं को एक ही नेटवर्क से जोड़ता है, और नोट्टो मोबाइल ऐप के माध्यम से आम लोगों को अंगदान से जुड़ी जानकारी और सेवाएँ मिलती हैं। आयुष्मान भारत योजना में किडनी प्रत्यारोपण को भी शामिल किया गया है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी यह सुविधा मिल सके। ‘जुग जुग जियो’ अभियान के माध्यम से गाँव-गाँव तक अंगदान का संदेश पहुँचाने का प्रयास चल रहा है।
आगे क्या — जागरूकता ही सबसे बड़ा मैदान है
राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026 का सबसे बड़ा संदेश मैदान से बाहर समाज के लिए है। विशेषज्ञों और आयोजकों का मानना है कि अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना ही सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि चिकित्सा विज्ञान की क्षमता बढ़ने के बावजूद दाताओं की संख्या माँग के मुकाबले कम है। ऐसे आयोजनों से समाज को यह देखने का अवसर मिलता है कि प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ता सामान्य, सक्रिय और सफल जीवन जी रहे हैं — वे खेल रहे हैं, पदक जीत रहे हैं और दूसरों को प्रेरित कर रहे हैं। अंगदान की शपथ लेने वाले नागरिकों की संख्या बढ़ रही है, और डिजिटल माध्यमों ने शपथ की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। आने वाले दिनों में इन खेलों की स्पर्धाएँ जारी रहेंगी और विजेताओं की कहानियाँ समाज तक पहुँचेंगी। उम्मीद है कि तालकटोरा में रचा गया ताड़ासन का विश्व रिकॉर्ड सिर्फ एक प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हजारों परिवारों को अंगदान के प्रति सोचने और आगे आने के लिए प्रेरित करेगा।
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