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पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत: घर बैठे मोबाइल से चेहरा दिखाकर बनेगा डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र, 30 नवंबर तक चलेगा अभियान 5.0

सांकेतिक चित्र: घर पर मोबाइल से चेहरा दिखाकर डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाते बुजुर्ग सांकेतिक चित्र

नई दिल्ली ब्यूरो

क्या है डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान 5.0

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की ओर से चलाया जा रहा यह देश का पांचवां राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान है। यह अभियान एक नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक पूरे देश में चलाया जा रहा है। इसके तहत देश के करीब 2,000 शहरों और जिलों में विशेष कैंप और व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि पेंशन पाने वाले हर व्यक्ति तक डिजिटल सुविधा पहुंच सके।

सरकार ने इस पूरे महीने में कुल 2.30 करोड़ डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाने का लक्ष्य रखा है। इसमें से 1.50 करोड़ प्रमाण पत्र अकेले फेस ऑथेंटिकेशन, यानी चेहरे की पहचान तकनीक के जरिए बनाने की योजना है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस बार अभियान का पूरा जोर ऐसी तकनीक पर है, जो बुजुर्गों के लिए सबसे आसान हो और जिसमें किसी तरह की मशीन या कार्यालय जाने की जरूरत न पड़े।

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र, जिसे जीवन प्रमाण के नाम से भी जाना जाता है, पेंशन व्यवस्था का एक अहम हिस्सा है। इसके जरिए पेंशन पाने वाला व्यक्ति यह प्रमाणित करता है कि वह जीवित है और उसकी पेंशन जारी रखी जाए। पहले यह काम कागज पर होता था, फिर डिजिटल माध्यम आया और अब चेहरे की पहचान से यह काम घर बैठे होने लगा है। अभियान 5.0 इसी सुविधा को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए चलाया जा रहा है।

क्यों जरूरी है हर साल जीवन प्रमाण पत्र

पेंशन जारी रखने के लिए हर साल जीवन प्रमाण पत्र जमा करना जरूरी होता है। जो पेंशनर समय पर अपना प्रमाण पत्र जमा नहीं कराते, उनकी पेंशन अटक सकती है। इसलिए हर साल नवंबर का महीना पेंशनरों के लिए सबसे अहम होता है, क्योंकि इसी महीने में बड़ी संख्या में पेंशनर अपना वार्षिक प्रमाण पत्र जमा कराते हैं।

पहले इस काम के लिए पेंशनरों को बैंक शाखा, कोषागार या पेंशन कार्यालय जाना पड़ता था। लंबी कतारों में लगना, कागज भरना और कई बार एक से ज्यादा चक्कर लगाना बुजुर्गों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनता था। जो बुजुर्ग चलने-फिरने में असमर्थ हैं या दूरदराज के इलाकों में रहते हैं, उनके लिए यह काम और भी कठिन हो जाता था। कई बार तो सिर्फ इसी काम के लिए गांव से शहर तक का सफर करना पड़ता था।

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र ने इस परेशानी को काफी हद तक कम कर दिया है। अब फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के आने के बाद तो यह काम और भी आसान हो गया है, क्योंकि इसके लिए न तो फिंगरप्रिंट मशीन की जरूरत है और न ही किसी बायोमेट्रिक उपकरण की। सिर्फ एक कैमरे वाला स्मार्टफोन हो, तो घर के किसी भी कोने से प्रमाण पत्र बनाया जा सकता है। यही कारण है कि इस बार के अभियान में चेहरे की पहचान तकनीक को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है।

सांकेतिक चित्र: कैंप में स्वयंसेवक की मदद से मोबाइल से प्रमाण पत्र बनाते पेंशनर
सांकेतिक चित्र

घर बैठे चेहरा दिखाकर कैसे बनेगा प्रमाण पत्र

घर बैठे डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल रखी गई है, ताकि तकनीक से कम परिचित बुजुर्ग भी इसे आसानी से पूरा कर सकें। इसके लिए सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में दो ऐप डाउनलोड करने होंगे। पहला ऐप जीवन प्रमाण फेस ऐप है और दूसरा आधार फेस आरडी ऐप है। ये दोनों ऐप एंड्रॉयड और आईओएस, दोनों तरह के स्मार्टफोन पर उपलब्ध हैं और इन्हें गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।

ऐप डाउनलोड करने के बाद आधार नंबर और मोबाइल नंबर की मदद से रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन के दौरान मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा, जिससे पहचान की पुष्टि होगी। इसके बाद पेंशन से जुड़े विवरण, जैसे पेंशनर का प्रकार, पीपीओ नंबर, बैंक या पेंशन देने वाली एजेंसी और स्वीकृति प्राधिकारी का विवरण दर्ज करना होगा।

सारी जानकारी भरने के बाद मोबाइल के फ्रंट कैमरे के सामने अपना चेहरा दिखाना होगा। कैमरा चेहरे को स्कैन करेगा और आधार के आंकड़ों से मिलान करेगा। चेहरा सत्यापित होते ही डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बन जाएगा। इसे डाउनलोड करके सुरक्षित रखा जा सकता है और इसकी स्थिति ऐप में ही देखी जा सकती है। प्रक्रिया पूरी होने पर पंजीकृत मोबाइल नंबर पर पुष्टि का संदेश भी भेजा जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। चेहरा स्कैन करते समय अच्छी रोशनी होनी चाहिए और कैमरे के सामने चेहरा सीधा रखना चाहिए। अगर किसी कारण से चेहरे का सत्यापन न हो, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे में पेंशनर अपनी बैंक शाखा, डाकघर या नजदीकी कैंप में जाकर सामान्य तरीके से भी प्रमाण पत्र जमा करा सकते हैं।

अभियान में कौन-कौन दे रहा है साथ

इस राष्ट्रव्यापी अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार ने एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें कई विभाग और संस्थाएं एक साथ काम कर रही हैं। अभियान में 19 बैंक, 785 डाकघर और 56 पेंशनर कल्याण संघों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, रेलवे और राज्य सरकारें भी इसमें सहयोग कर रही हैं।

तकनीकी मोर्चे पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा आधार प्राधिकरण पूरी मदद दे रहे हैं, ताकि चेहरे की पहचान की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके। पेंशन देने वाले बैंक, भारतीय डाक भुगतान बैंक, रक्षा लेखा विभाग और दूरसंचार विभाग भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं। इतने बड़े स्तर पर समन्वय का मकसद यही है कि देश के किसी भी कोने में रहने वाला पेंशनर इस सुविधा से वंचित न रह जाए।

अभियान के तहत कई जगहों पर विशेष कैंप भी लगाए जा रहे हैं। इन कैंपों में सिर्फ जीवन प्रमाण पत्र ही नहीं बनाया जा रहा, बल्कि स्वास्थ्य जांच और आधार अपडेट जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। इससे बुजुर्गों को एक ही जगह पर कई काम निपटाने का मौका मिल रहा है। किसी तरह की परेशानी होने पर अभियान के तहत नियुक्त शिकायत अधिकारी से भी मदद ली जा सकती है।

जो बुजुर्ग बैंक तक नहीं जा सकते, उनके लिए क्या सुविधा

अभियान की सबसे मानवीय पहलू यह है कि इसमें उन बुजुर्गों का भी खास ध्यान रखा गया है, जो खुद बैंक या कैंप तक नहीं जा सकते। ऐसे पेंशनरों के लिए जरूरत के हिसाब से घर पर सुविधा देने की व्यवस्था की गई है। यानी अगर कोई बुजुर्ग बीमारी, उम्र या किसी अन्य कारण से घर से बाहर नहीं निकल सकता, तो उसे प्रमाण पत्र के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

परिवार के सदस्यों की भी इसमें अहम भूमिका है। बच्चे या रिश्तेदार अपने बुजुर्ग माता-पिता या परिजनों के स्मार्टफोन में ऐप डाउनलोड करके और प्रक्रिया समझाकर उनकी मदद कर सकते हैं। यह काम कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाता है और इसके लिए किसी तरह के शुल्क की जरूरत नहीं होती। परिवार के किसी सदस्य के साथ होने से बुजुर्गों का भरोसा भी बढ़ता है और गलतियां भी कम होती हैं।

जिन पेंशनरों के पास स्मार्टफोन नहीं है, वे भी चिंता न करें। वे अपनी पेंशन देने वाली बैंक शाखा, डाकघर या अभियान के कैंप में जाकर प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं। वहां मौजूद कर्मचारी और स्वयंसेवक उनकी मदद करेंगे। मकसद सिर्फ इतना है कि 30 नवंबर की अंतिम तारीख से पहले हर पेंशनर का प्रमाण पत्र जमा हो जाए।

मध्य प्रदेश के पेंशनरों के लिए क्या है खास

यह राष्ट्रव्यापी अभियान मध्य प्रदेश के जिलों में भी चल रहा है, इसलिए प्रदेश के पेंशनरों के लिए भी यह सुविधा उतनी ही काम की है। प्रदेश में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, रेलवे और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से पेंशन पाने वाले लाखों लोग रहते हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे बुजुर्गों की है, जो छोटे शहरों और गांवों में रहते हैं और जिनके लिए हर साल बैंक के चक्कर लगाना मुश्किल होता है।

मध्य प्रदेश में पहले भी जीवन प्रमाण पत्र से जुड़े कैंप लगते रहे हैं। इंदौर में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के कैंपों में पेंशनरों को जीवन प्रमाण पत्र बनवाने की सुविधा दी जाती रही है। अब राष्ट्रव्यापी अभियान 5.0 के तहत यह सुविधा और बड़े स्तर पर उपलब्ध है। प्रदेश के पेंशनर अपनी पेंशन देने वाली बैंक शाखा, नजदीकी डाकघर या पेंशनर कल्याण संघ से संपर्क करके अपने जिले में कैंप की जानकारी ले सकते हैं।

प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले पेंशनरों के लिए डाकघरों की भूमिका खास तौर पर अहम है। डाकघर गांव-गांव तक पहुंचते हैं और अभियान में 785 डाकघरों को शामिल किया गया है। इसलिए जिन पेंशनरों के गांव में बैंक शाखा दूर है, वे डाकघर के जरिए भी मदद ले सकते हैं। परिवार के सदस्यों को चाहिए कि वे अपने बुजुर्ग परिजनों का प्रमाण पत्र समय रहते बनवा दें, ताकि महीने के आखिर में भीड़ और जल्दबाजी से बचा जा सके।

सावधानियां: ओटीपी और फर्जी ऐप से बचें

डिजिटल सुविधा के साथ कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। जीवन प्रमाण पत्र बनाने के लिए सिर्फ आधिकारिक ऐप ही डाउनलोड करें। जीवन प्रमाण फेस ऐप और आधार फेस आरडी ऐप ही सही ऐप हैं। किसी भी अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड न करें और न ही किसी अजनबी के कहने पर कोई ऐप इंस्टॉल करें।

अपना ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। कोई भी सरकारी अधिकारी या बैंक कर्मचारी फोन पर ओटीपी नहीं मांगता। अगर कोई व्यक्ति फोन पर खुद को अधिकारी बताकर ओटीपी मांगे, तो समझ लें कि वह ठगी की कोशिश है। ऐसी स्थिति में फोन काटकर अपनी बैंक शाखा या नजदीकी पुलिस से संपर्क करें।

अपना आधार नंबर, पीपीओ नंबर और बैंक खाते की जानकारी भी सिर्फ आधिकारिक ऐप या अधिकृत कार्यालय में ही दें। प्रमाण पत्र बनने के बाद उसकी प्रति सुरक्षित रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर उसे दिखाया जा सके। अगर प्रक्रिया के दौरान कोई त्रुटि आए, तो बार-बार गलत जानकारी भरने की बजाय बैंक शाखा या कैंप में मदद लें।

30 नवंबर के बाद क्या, समय रहते पूरा करें यह काम

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान 5.0 की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 है। पेंशन पाने वाले सभी लोगों को इस तारीख से पहले अपना प्रमाण पत्र जमा कर लेना चाहिए। महीने के आखिरी दिनों में भीड़ बढ़ने की आशंका रहती है, इसलिए बेहतर यही है कि यह काम शुरुआत में ही निपटा लिया जाए।

इस अभियान का मकसद सिर्फ एक कागज बनवाना नहीं है, बल्कि बुजुर्गों को यह भरोसा दिलाना है कि तकनीक उनकी सुविधा के लिए है, परेशानी के लिए नहीं। चेहरे की पहचान जैसी तकनीक ने पेंशन व्यवस्था को बुजुर्गों के लिए पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। जो काम पहले कई चक्करों में होता था, वह अब कुछ मिनटों में घर बैठे हो रहा है।

पेंशनर और उनके परिवारों को चाहिए कि वे इस सुविधा का लाभ उठाएं और अपने आसपास के अन्य बुजुर्गों को भी इसकी जानकारी दें। कई बुजुर्ग ऐसे हैं, जिन्हें इस अभियान की जानकारी नहीं है और वे अब भी पुराने तरीके से बैंक जाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें यह बताना कि घर बैठे मोबाइल से चेहरा दिखाकर भी प्रमाण पत्र बन सकता है, अपने आप में एक बड़ी मदद होगी। समय रहते प्रमाण पत्र जमा करना ही पेंशन को बिना रुकावट जारी रखने का सबसे आसान तरीका है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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