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‘135 साल’ पुरानी लाइब्रेरी पर SC सख्त — केंद्र से मांगा ‘3 हफ्ते’ में जवाब, ‘2 कमरे ही काफी?’

शास्त्री भवन, नई दिल्ली (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स / पिनाकपानी)

नई दिल्ली ब्यूरो। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी के प्रस्तावित स्थानांतरण को लेकर केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को तीन हफ्तों के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। द हिंदू के अनुसार, पीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज मामले पर पहली सुनवाई में ही केंद्र के प्रस्तावों पर गंभीर सवाल उठाए।

तीन हफ्ते में हलफनामा, लेआउट प्लान भी दें

सुनवाई के दौरान पीठ ने तीखी टिप्पणी की, “यह 1891 की लाइब्रेरी है, जिसमें 1802 के लेखन हैं। यह कहना तो बहुत अच्छा है कि हमने कागज़ घटाया, पर इसका मतलब यह नहीं कि हम मूल्यवान कागज़ घटाएं। आप कर्तव्य भवन में दो कमरे आवंटित कर रहे हैं, बस इतना ही?” कोर्ट ने केंद्र से यह भी पूछा कि प्रस्तावित परिसर शास्त्री भवन की किताबों के साथ-साथ आर. के. पुरम में कार्टनों में रखी करीब दो लाख अतिरिक्त किताबों के लिए भी पर्याप्त होगा या नहीं। पीठ ने हलफनामे के साथ लाइब्रेरी के वास्तविक लेआउट प्लान भी प्रस्तुत करने को कहा है।

शास्त्री भवन, नई दिल्ली (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स / पिनाकपानी)
शास्त्री भवन — 1969 से यहां सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी स्थित है (सांकेतिक तस्वीर — फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स / पिनाकपानी)

क्यों गरमाया विवाद

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 3 अक्टूबर को इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक मामला “इन रे: 135-ईयर-ओल्ड लाइब्रेरी, 8.5 लाख बुक्स — एंड नो रूम इन द सेंट्रल विस्टा प्लान” शीर्षक से दर्ज किया गया। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के बाद यह मुद्दा उठा था कि आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने लाइब्रेरी को कर्तव्य भवन-2 परिसर में महज दो कमरे — करीब 300 वर्गमीटर — आवंटित किए हैं, जो 8.5 लाख किताबों के लिए नाकाफी माना गया। संस्कृति मंत्रालय ने भी इस आवंटन पर आपत्ति जताई थी। उधर, आवास मंत्रालय ने इन खबरों का खंडन करते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि लाइब्रेरी के लिए कर्तव्य पथ पुनर्विकास योजना में जगह तय की गई है और निर्माण की प्रक्रिया जारी है।

1891 से आज तक — लाइब्रेरी का सफर

सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी देश की सबसे पुरानी सरकारी लाइब्रेरियों में से एक है। इसकी स्थापना 1891 में तत्कालीन कलकत्ता में ‘इंपीरियल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी’ के रूप में हुई थी। 1911 में ब्रिटिश भारत की राजधानी दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद यह सिविल लाइंस स्थित ओल्ड सेक्रेटेरियट भवन में आई, फिर नॉर्थ ब्लॉक और 1969 से शास्त्री भवन में स्थित है। करीब 5,500 वर्गमीटर में फैली इस लाइब्रेरी में दुर्लभ ग्रंथों, सरकारी रिकॉर्ड और गजेटियर समेत 8.5 लाख से अधिक पुस्तकें हैं, जिन्हें सरकारी अधिकारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र नियमित रूप से पढ़ते हैं। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास के तहत शास्त्री भवन खाली कराया जा रहा है — सीपीडब्ल्यूडी ने 17 सितंबर को सभी कार्यालयों को 30 सितंबर तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया था।

— द हिंदू, PTI और डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्टों पर आधारित

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