डेस्क रिपोर्ट
सार: जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर बुधवार 28 अक्टूबर को सुबह 10 बजे शेयर बाजार में ₹1,358 पर लिस्ट हुए — इश्यू प्राइस ₹1,119 से 21.36 प्रतिशत ऊपर। प्रति लॉट (12 शेयर) अलॉटी को लिस्टिंग पर करीब ₹2,868 का फायदा हुआ, और कंपनी का बाजार मूल्यांकन करीब ₹12.5 लाख करोड़ पहुंच गया, जिससे वह रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद देश की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई।
लिस्टिंग के आंकड़े: क्या हुआ सुबह 10 बजे
जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज — दोनों पर एक ही कीमत ₹1,358 पर लिस्ट हुए। इश्यू प्राइस ₹1,119 के मुकाबले यह ₹239 प्रति शेयर ज्यादा है, यानी 21.36 प्रतिशत का प्रीमियम। शुरुआती कारोबार में शेयर ₹1,374 के ऊपरी स्तर तक भी पहुंचा, और कुछ देर बाद ₹1,357-₹1,358 के आसपास कारोबार करता दिखा। लिस्टिंग के साथ ही कंपनी का बाजार मूल्यांकन करीब ₹12,50,586 करोड़ दर्ज किया गया।
यह आईपीओ देश का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम था — करीब ₹30,213 करोड़ का। इसमें कुल 27 करोड़ नए शेयर जारी किए गए थे, और पूरी रकम कंपनी के पास गई। इश्यू 21 से 23 अक्टूबर के बीच खुला था, 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ था, और करीब 1.39 करोड़ आवेदन आए थे — जो अपने आप में एक रिकॉर्ड स्तर की भागीदारी है।
ग्रे मार्केट का अनुमान कितना सही निकला
लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब ₹248 के आसपास था, जिससे अनुमानित लिस्टिंग कीमत ₹1,367 के करीब बन रही थी — यानी करीब 22 प्रतिशत का प्रीमियम। असल लिस्टिंग ₹1,358 पर हुई, जो इस अनुमान से थोड़ी नीचे रही, लेकिन फिर भी 21 प्रतिशत से ज्यादा का मजबूत प्रीमियम है।
यह फर्क एक बार फिर याद दिलाता है कि ग्रे मार्केट का भाव सिर्फ एक अनौपचारिक संकेत होता है, पक्का वादा नहीं। जिन निवेशकों ने सिर्फ ग्रे मार्केट के भरोसे ऊंचे भाव पर खरीदने की योजना बनाई थी, उन्हें लिस्टिंग के दिन थोड़ा धैर्य रखना पड़ा — क्योंकि शेयर लिस्टिंग के बाद ₹1,374 के उच्च स्तर से थोड़ा नीचे आकर स्थिर हुआ।

प्रति लॉट हिसाब: अलॉटी को कितना फायदा
रिटेल निवेशक के लिए एक लॉट 12 शेयरों का था, जिसकी कीमत इश्यू प्राइस पर ₹13,428 बैठती थी। लिस्टिंग कीमत ₹1,358 के हिसाब से एक लॉट की कीमत ₹16,296 हो गई — यानी प्रति लॉट करीब ₹2,868 का फायदा। जिन्हें अलॉटमेंट मिला था, उनके लिए यह लिस्टिंग का सीधा गणित है।
कर्मचारी वर्ग के निवेशकों को प्रति शेयर ₹54 की छूट मिली थी, इसलिए उनका प्रति शेयर लागत और भी कम थी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए आरक्षित कोटे से मिले शेयरों पर भी लिस्टिंग प्रीमियम का लाभ बना। संस्थागत निवेशकों की मांग सबसे ज्यादा थी — योग्य संस्थागत खरीदारों का हिस्सा 70 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था — और एंकर निवेशकों ने ₹8,110 करोड़ का निवेश पहले ही किया था।
दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बनने का मतलब
लिस्टिंग के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स का बाजार मूल्यांकन करीब ₹12.5 लाख करोड़ पहुंच गया, जिससे वह रिलायंस इंडस्ट्रीज (करीब ₹16 लाख करोड़) के बाद देश की दूसरी सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बन गई। यह इस बात का संकेत है कि बाजार ने कंपनी के डिजिटल कारोबार — 53 करोड़ से ज्यादा ग्राहक, टेलीकॉम, डिजिटल सेवाएं और बढ़ता डिजिटल बुनियादी ढांचा — को कितनी बड़ी कीमत दी है।
लिस्टिंग समारोह में कंपनी की ओर से कहा गया कि आईपीओ को ₹7.5 लाख करोड़ से ज्यादा की मांग मिली और 1.3 करोड़ से ज्यादा आवेदन आए। कंपनी ने यह भी कहा कि आगे का ध्यान डिजिटल पहुंच बढ़ाने, पारदर्शी संवाद रखने और शेयरधारकों का भरोसा बनाए रखने पर रहेगा।
किन्हें फायदा, किन्हें सावधानी
फायदा उन निवेशकों को हुआ जिन्हें अलॉटमेंट मिला था — खासकर रिटेल अलॉटी, कर्मचारी और शेयरधारक कोटे के निवेशक। संस्थागत निवेशकों के लिए भी लिस्टिंग प्रीमियम सकारात्मक रहा।
सावधानी उन लोगों के लिए है जो लिस्टिंग के दिन ऊंचे भाव पर शेयर खरीदने की सोच रहे थे। लिस्टिंग के दिन कीमत में उतार-चढ़ाव तेज रहता है — शेयर सुबह ₹1,374 तक गया और फिर थोड़ा नीचे आया। ग्रे मार्केट के अनुमान से कम लिस्टिंग यह भी दिखाती है कि पहले दिन की कीमत पर ही भविष्य का भरोसा नहीं किया जा सकता। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनी के तिमाही नतीजे, ग्राहक वृद्धि और डिजिटल कारोबार की कमाई ही असली कसौटी होगी।
आगे क्या देखें
अब नजर इस बात पर रहेगी कि शेयर लिस्टिंग के बाद के दिनों में किस स्तर पर टिकता है, क्या संस्थागत निवेशक अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते हैं, और क्या कंपनी अपने डिजिटल विस्तार की योजनाओं पर आगे बढ़ती है। बाजार के जानकारों का कहना है कि मेगा आईपीओ की लिस्टिंग के बाद पहले कुछ सत्रों में उतार-चढ़ाव सामान्य होता है, इसलिए जल्दबाजी में फैसले से बचना चाहिए।
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