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मुख्यमंत्री मोहन यादव 28 अक्टूबर को इंदौर में करेंगे अर्बन कॉन्क्लेव का शुभारंभ: निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा, श्रेणी-2 शहरों पर मंथन

मुख्यमंत्री मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (फाइल फोटो)

इंदौर ब्यूरो

सार: अर्बन कॉन्क्लेव इंदौर — प्रदेश के शहरों को तेज गति से आधुनिक, सुविधायुक्त और निवेश के अनुकूल बनाने का बड़ा मंथन 28 अक्टूबर को इंदौर में होगा, और इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होने वाले इस कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा भी करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार, 28 अक्टूबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में अर्बन कॉन्क्लेव का शुभारंभ करेंगे। प्रदेश में नगरीय विकास को नई गति देने, शहरी अधोसंरचना में निवेश को प्रोत्साहित करने और आधुनिक तकनीक के माध्यम से शहरों को अधिक सुविधायुक्त तथा टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से इस कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार के विजन को साझा किया जाएगा और शहरी क्षेत्र में निवेश, परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा भावी सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी।

मुख्यमंत्री का कार्यक्रम: सुबह 11 बजे पहुंचेंगे, दोपहर में संबोधन

कार्यक्रम के अनुसार कॉन्क्लेव में सुबह 9:30 बजे से पंजीकरण होगा और 10:30 बजे से पूर्ण सत्र (प्लेनरी) शुरू होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुबह करीब 11 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। इसके बाद 11:45 से 12:05 के बीच भूमिपूजन और लोकार्पण के साथ इंदौर आर्थिक क्षेत्र की रिपोर्ट का लोकार्पण तथा नीतियों और समझौता ज्ञापनों (एमओयू) से जुड़े कार्यक्रम होंगे। मुख्यमंत्री का संबोधन दोपहर 12:05 से 12:45 तक प्रस्तावित है। दोपहर बाद मुख्यमंत्री निवेशकों से वन-टू-वन बैठक करेंगे और इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होगी। दोपहर 3 से शाम 5 बजे तक समानांतर पैनल सत्र चलेंगे।

निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा: शहरों में पैसा कैसे आए, इस पर सीधी बात

कॉन्क्लेव का एक अहम हिस्सा मुख्यमंत्री की निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठक है। इसमें शहरी क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं, चल रही परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में आ रही दिक्कतों और आगे के सहयोग पर सीधी चर्चा होगी। सरकार की मंशा साफ है — शहरों में निवेश सिर्फ घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि परियोजनाएं समय पर पूरी हों और उनका लाभ आम नागरिक तक पहुंचे। इसी कड़ी में शहरी निवेश, वित्तीय संसाधन, साझेदारी और वैश्विक विशेषज्ञता के अवसरों पर भी मंथन होगा।

श्रेणी-2 के शहरों के विकास पर विशेष मंथन

कॉन्क्लेव में महानगरों से आगे बढ़कर श्रेणी-2 के शहरों के विकास पर केंद्रित विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें पुनःघनीकरण, परिवहन आधारित विकास (टीओडी), टीडीआर, आवास, पुनर्विकास, मास्टर प्लान, विकास गलियारे, रेरा स्वीकृतियां, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, अनापत्ति प्रमाण-पत्रों में कमी (एनओसी) तथा एफएआर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा। छोटे और मझोले शहरों के लिए ये विषय इसलिए अहम हैं क्योंकि वहीं से प्रदेश के शहरीकरण की अगली लहर आएगी — और अगर वहां योजना, आवास और बुनियादी ढांचा पहले से मजबूत हो, तो बड़े शहरों पर दबाव भी कम होगा।

डिजिटल गवर्नेंस: भवन अनुज्ञा से लेकर जीआईएस नियोजन तक

नगरीय प्रशासन में सुधार और डिजिटल सशक्तिकरण पर केंद्रित सत्र में स्वचालित भवन अनुज्ञा अनुमोदन प्रणाली (एबीपीएएस), ऑनलाइन एनओसी एवं विकास अनुज्ञा प्रणाली, कॉलोनी अधिनियम, डिजिटल गवर्नेंस, जीआईएस आधारित नियोजन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा परियोजना प्रबंधन सूचना प्रणाली जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि आम आदमी को मकान की अनुज्ञा, एनओसी और विकास से जुड़े कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ें और प्रक्रिया पारदर्शी तथा समयबद्ध हो।

जलवायु अनुकूल शहर, जल सुरक्षा और ग्रीन फाइनेंसिंग

जलवायु अनुकूल शहर, जल सुरक्षा और सर्कुलर एकॉनामी विषय पर आयोजित सत्रों में विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। चर्चा के प्रमुख विषयों में शहरी जल पुनः उपयोग एवं जल प्रबंधन, अमृत 2.0, बीआरएसआर फ्रेमवर्क, नमो हरित नगर योजना, सिटी फॉरेस्ट एवं सेंट्रल पार्क, वायु गुणवत्ता सुधार की पहल, ईज ऑफ लिविंग एवं लिवेबिलिटी इंडेक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, एमआरएफ, कचरे से ऊर्जा, सौर ऊर्जा परियोजनाएं तथा सीबीजी इकोसिस्टम शामिल हैं। कार्यक्रम में नई आवास नीति और पुनर्चक्रित जल नीति के मसौदों पर भी चर्चा प्रस्तावित है, जो शहरों के भविष्य की दिशा तय कर सकती हैं।

शहरी निवेश के वित्तीय विकल्प: पीपीपी से लेकर ग्रीन बॉन्ड तक

कॉन्क्लेव में अर्बन चैलेंज फंड की परियोजनाओं, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), वित्तीय मॉडलिंग, टेंपल बॉन्ड, ग्रीन बॉन्ड, नगर पालिका बॉन्ड, संयुक्त उपक्रम, बहुपक्षीय बैंकों से वित्त पोषण, अनुदान और वायबिलिटी गैप फंडिंग सहित विभिन्न वित्तीय विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। शहरों के विकास के लिए सिर्फ सरकारी बजट पर्याप्त नहीं होता — इसलिए ऐसे वित्तीय साधनों पर मंथन हो रहा है जिनसे निजी निवेश भी आए और शहरों की अपनी आय भी बढ़े। इंदौर आर्थिक क्षेत्र की रिपोर्ट का लोकार्पण भी इसी दिशा में एक अहम कदम होगा, क्योंकि उसमें इंदौर संभाग के आठ जिलों को जोड़कर एक बड़े आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की रूपरेखा है।

कार्यक्रम में कौन-कौन रहेगा मौजूद

कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे तथा नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे सहित वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ भी उपस्थित रहेंगे। कॉन्क्लेव के बाद इसकी मुख्य घोषणाओं और मुख्यमंत्री के संबोधन की विस्तृत खबर भी प्रकाशित की जाएगी।

कार्यक्रम से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए देखें: अर्बन कॉन्क्लेव का आधिकारिक कार्यक्रम।

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