भोपाल ब्यूरो
सार: चक्रवात मुरासु का असर अब मध्य प्रदेश के मौसम पर साफ दिखने लगा है। मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के 23 जिलों में तेज आंधी और बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। अगले तीन दिन तक प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदला रहेगा, हालांकि 6 नवंबर को धनतेरस के दिन पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहने का अनुमान है।
चक्रवात मुरासु के आंध्र तट से टकराने के बाद उसकी नमी और हवाओं का असर मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। मंगलवार की सुबह से ही प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बादलों का डेरा दिखने लगा, जबकि पश्चिमी हिस्से में धूप खिली रही। मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 24 घंटों में 23 जिलों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इस बदले मौसम का असर सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तीन दिन तक प्रदेश के कई इलाकों में आंधी-बारिश का दौर बना रह सकता है।
आज किन जिलों में चेतावनी जारी हुई है
मंगलवार के लिए जारी चेतावनी में जबलपुर संभाग और विंध्य-महाकोशल के जिलों के साथ नर्मदापुरम संभाग के कई जिले शामिल हैं। जिन 23 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट है, उनमें बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, कटनी, मैहर, सीधी, मऊगंज और सिंगरौली शामिल हैं। इन जिलों में बादल छाए रहने के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है।
यलो अलर्ट का मतलब यह होता है कि मौसम में बदलाव पर नजर रखने की जरूरत है और लोगों को अपनी दिनचर्या में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर पेड़ों की डालियां टूट सकती हैं, बिजली के तारों पर असर पड़ सकता है और सड़कों पर पानी भर सकता है। इसलिए इन जिलों में रहने वाले लोगों को मौसम की ताजा जानकारी पर ध्यान देना चाहिए, खासकर तब जब वे लंबी यात्रा पर निकल रहे हों या खुले में काम कर रहे हों।
कहां धूप खिली रहेगी और मौसम शुष्क रहेगा
मुरासु के असर का एक दिलचस्प पहलू यह है कि प्रदेश दो हिस्सों में बंटा हुआ दिख रहा है। एक तरफ पूर्वी और दक्षिणी जिलों में बारिश का अलर्ट है, तो दूसरी तरफ पश्चिमी और उत्तरी जिलों में मौसम शुष्क बना हुआ है। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, रीवा, सतना, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में मंगलवार को धूप निकलने और मौसम साफ रहने का अनुमान है।
इसका मतलब यह है कि राजधानी भोपाल और वाणिज्यिक राजधानी इंदौर में रहने वाले लोगों को मंगलवार को बारिश की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। धूप खिलने से दिन का कामकाज सामान्य रूप से चल सकेगा। हालांकि तापमान में नरमी इन शहरों में भी महसूस की जा रही है, क्योंकि हवाओं का रुख बदलने से दिन और रात दोनों का पारा सामान्य से नीचे चल रहा है।

4 और 5 नवंबर को भी बारिश का दौर, धनतेरस पर राहत
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 4 और 5 नवंबर को भी प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला बना रह सकता है। यानी बुधवार और गुरुवार को भी पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बादल और बौछारों का दौर पूरी तरह थमेगा नहीं। जिन इलाकों में मंगलवार को अलर्ट है, वहां अगले दो दिन भी मौसम पर नजर रखनी होगी।
लेकिन त्योहार की तैयारियों के लिहाज से सबसे अच्छी खबर यह है कि 6 नवंबर को धनतेरस के दिन पूरे प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ रहने की उम्मीद है। धनतेरस पर बाजारों में भारी भीड़ होती है, लोग सोना-चांदी, बर्तन, वाहन और घरेलू सामान की खरीदारी करते हैं। साफ मौसम का मतलब है कि खरीदारी और त्योहार की गतिविधियों में बारिश बाधा नहीं बनेगी। व्यापारियों के लिए भी यह राहत की खबर है, क्योंकि धनतेरस की खरीदारी का बड़ा हिस्सा खुले बाजारों और सड़कों पर निर्भर करता है।
तापमान में गिरावट: रातें ठंडी, दिन भी सामान्य से नीचे
बारिश और बादलों के साथ-साथ तापमान में भी साफ गिरावट दर्ज की जा रही है। भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, जबलपुर और सागर संभाग में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 1.7 से 2.7 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चल रहा है। वहीं भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल, रीवा और सागर संभाग में रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.8 से 3 डिग्री तक कम दर्ज किया गया है। दिन का तापमान फिलहाल 32 डिग्री के आसपास टिका हुआ है, जो नवंबर की शुरुआत के लिहाज से ठंडक का एहसास देता है।
बीती रात प्रदेश में सबसे कम तापमान शाजापुर जिले के गिरवर में 14.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दमोह में रात का पारा 14.8 डिग्री, भोपाल में 15 डिग्री, पचमढ़ी में 15.4 डिग्री और कटनी के करौंदी में 15.6 डिग्री रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि रातें अब धीरे-धीरे ठंडी हो रही हैं और सुबह-शाम हल्की ठंड महसूस होने लगी है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए रात की ठंड से बचाव अब जरूरी हो गया है।
मुरासु कहां से आया और प्रदेश तक उसका असर कैसे पहुंचा
चक्रवात मुरासु ने आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक दी थी, जहां तेज हवाओं और भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया। तटीय इलाकों से टकराने के बाद चक्रवात की नमी वाली हवाएं भीतरी इलाकों की ओर बढ़ीं, जिससे मध्य प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बादल और बारिश की स्थिति बनी। यही वजह है कि तट से दूर होने के बावजूद प्रदेश के 23 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी करना पड़ा।
इससे पहले के पूर्वानुमानों में भी मुरासु के प्रदेश पर असर की बात कही गई थी, लेकिन मंगलवार का बुलेटिन ज्यादा साफ तस्वीर पेश करता है। अब अलर्ट वाले जिलों की संख्या और हवा की रफ्तार दोनों स्पष्ट हैं। पूर्वी हिस्सों में नमी ज्यादा है, इसलिए वहां बारिश की संभावना ज्यादा है, जबकि पश्चिमी हिस्सों में नमी कम पहुंच रही है, इसलिए वहां धूप और शुष्क मौसम बना हुआ है।
नवंबर के दूसरे सप्ताह से सर्दी पकड़ेगी जोर
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि नवंबर के दूसरे सप्ताह से उत्तरी हवाओं की आमद शुरू होते ही सर्दी अपने तेवर दिखाने लगेगी। खासकर ग्वालियर-चंबल अंचल में तापमान तेजी से नीचे आ सकता है। नवंबर के महीने में प्रदेश में कड़ाके की ठंड का पुराना इतिहास भी रहा है। करीब 57 वर्ष पहले नवंबर में ग्वालियर का न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जबकि करीब 53 वर्ष पहले उज्जैन में पारा 2.3 डिग्री तक लुढ़क गया था।
इसलिए आने वाले दिनों में सुबह की ठंड और बढ़ सकती है। जो लोग सुबह जल्दी काम पर निकलते हैं, उन्हें गर्म कपड़ों की जरूरत पड़ने लगेगी। किसानों के लिए भी यह समय अहम है, क्योंकि रात के तापमान में गिरावट का असर फसलों पर पड़ता है। हालांकि मौजूदा बारिश का दौर हल्का से मध्यम रहने का अनुमान है, जिससे फसलों को बड़े नुकसान की आशंका नहीं जताई गई है।
बारिश के दिनों में बरतें ये सावधानियां
आंधी-बारिश के अलर्ट वाले दिनों में कुछ सामान्य सावधानियां बहुत काम आती हैं। तेज हवाओं के दौरान पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। जलभराव वाली सड़कों पर वाहन चलाते समय गति धीमी रखनी चाहिए, क्योंकि पानी की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। खुले खेतों में काम करने वाले लोगों को गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए।
घरों में भी बारिश के दिनों में बिजली के उपकरणों और छतों की जांच कर लेनी चाहिए, ताकि पानी के रिसाव से नुकसान न हो। बाजार जाने वाले लोगों को छाता और जरूरी सामान साथ रखना चाहिए, खासकर उन जिलों में जहां अलर्ट जारी है। त्योहार की खरीदारी के लिए 6 नवंबर का दिन मौसम के लिहाज से सबसे अनुकूल रहने का अनुमान है, इसलिए बड़ी खरीदारी की योजना उसी दिन के आसपास बनाना समझदारी होगी।
आगे क्या: अगले बुलेटिन पर रहेगी नजर
मौसम विभाग के अगले बुलेटिन में यह साफ होगा कि 4 और 5 नवंबर को बारिश का दायरा कितना रहता है और किन जिलों में अलर्ट जारी रहता है या हटता है। धनतेरस के साफ मौसम के पूर्वानुमान पर भी नजर रहेगी, क्योंकि त्योहार के दिन मौसम बदलने पर बाजारों और यातायात पर सीधा असर पड़ता है। फिलहाल मंगलवार का अलर्ट, तापमान में गिरावट और धनतेरस पर साफ मौसम की उम्मीद ही प्रदेश के मौसम की मुख्य तस्वीर है।
प्रदेश के लोगों के लिए सलाह यही है कि वे अपने जिले के लिए जारी चेतावनी को देखें और उसी के अनुसार अपनी यात्रा और कामकाज की योजना बनाएं। पूर्वी और दक्षिणी जिलों में बारिश से बचाव की तैयारी रखें, जबकि पश्चिमी जिलों में धूप का लाभ उठाकर त्योहार की तैयारियां आगे बढ़ा सकते हैं।
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