दुबई में दिल का दौरा पड़ने के बाद तीन सप्ताह से अधिक समय तक कोमा में रहे मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के ज्ञानेंद्र तिवारी एयर एंबुलेंस से भारत लौट आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रधानमंत्री कार्यालय से समन्वय के बाद उनकी स्वदेश वापसी संभव हो सकी और अब नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है।
जारी जानकारी के अनुसार, ज्ञानेंद्र तिवारी को 15 अक्टूबर 2026 की रात दुबई में दिल का दौरा पड़ा था। उन्हें वहां अल जहरा अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वे लंबे समय तक कोमा में रहे। विदेश में गंभीर हालत में भर्ती परिजन की चिंता और स्वदेश वापसी की अनिश्चितता के बीच यह मामला मध्य प्रदेश सरकार तक पहुंचा। इसके बाद केंद्र सरकार और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से एयर एंबुलेंस की व्यवस्था हुई और ज्ञानेंद्र तिवारी को भारत लाया गया। ज्ञानेंद्र तिवारी एयर एंबुलेंस से गुरुवार तड़के करीब तीन बजे एम्स दिल्ली पहुंचाए गए, जहां उनका उपचार जारी है।
15 अक्टूबर की रात दुबई में पड़ा दिल का दौरा
ज्ञानेंद्र तिवारी अनूपपुर जिले के रहने वाले हैं। 15 अक्टूबर 2026 की रात करीब दस बजे दुबई में उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा। उन्हें तत्काल दुबई के अल जहरा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया। दिल का दौरा गंभीर था और इसके बाद वे कोमा में चले गए। अस्पताल में उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही थी, लेकिन होश में आने में लंबा समय लग गया। परिवार के लिए यह दौर सबसे कठिन था, क्योंकि उनका अपना विदेश में गंभीर हालत में अस्पताल में था और हर दिन नई चिंता लेकर आ रहा था।
दिल का दौरा पड़ने के बाद कोमा की स्थिति में मरीज की देखभाल के लिए विशेष चिकित्सा व्यवस्था की जरूरत होती है। दुबई के अस्पताल में ज्ञानेंद्र तिवारी का इलाज चलता रहा और परिजन उनके ठीक होने की उम्मीद लगाए रहे। इस बीच परिवार के सामने दोहरी चिंता थी — एक तरफ ज्ञानेंद्र तिवारी की गंभीर हालत और दूसरी तरफ विदेश में इलाज का भारी खर्च। परिजनों ने भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार से स्वदेश वापसी में मदद की गुहार लगाई थी।
22 दिन कोमा में रहे, इलाज पर खर्च हुए करीब 69 लाख रुपये
परिवार के अनुसार, ज्ञानेंद्र तिवारी करीब 22 दिन तक कोमा में रहे। इस दौरान दुबई के अस्पताल में उनके इलाज पर अब तक लगभग 69 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। परिवार के अनुसार, अस्पताल का प्रतिदिन का खर्च लगभग साढ़े चार लाख रुपये था। विदेश में इतने लंबे समय तक गंभीर मरीज का इलाज कराना किसी भी परिवार के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती होती है। अनूपपुर के एक सामान्य परिवार के लिए यह रकम बहुत बड़ी थी और हर बीतता दिन बोझ बढ़ा रहा था।

इसीलिए परिवार चाहता था कि ज्ञानेंद्र तिवारी को जल्द से जल्द भारत लाया जाए, ताकि उनका इलाज देश में हो सके और परिजन उनके पास रह सकें। लेकिन गंभीर हालत में कोमा के मरीज को एक देश से दूसरे देश लाना आसान नहीं होता। इसके लिए विशेष एयर एंबुलेंस, चिकित्सा दल और दोनों देशों के स्तर पर समन्वय की जरूरत होती है। परिवार की यही गुहार जब शासन तक पहुंची, तो स्वदेश वापसी की प्रक्रिया तेज हुई।
परिवार की चिंता और स्वदेश वापसी की उम्मीद
ज्ञानेंद्र तिवारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनूपपुर जिला संघचालक राजेंद्र तिवारी जी के पुत्र हैं। बीते तीन सप्ताह से पूरा परिवार उनकी सलामती को लेकर चिंतित था। विदेश में अस्पताल में भर्ती परिजन से दूर रहकर हर पल इंतजार करना परिवार के लिए बेहद कठिन था। परिजनों को यह भी चिंता थी कि गंभीर हालत में ज्ञानेंद्र तिवारी को भारत लाने की व्यवस्था कैसे होगी और इसमें कितना समय लगेगा।
परिवार के रिश्तेदार देवेंद्र तिवारी ने बताया कि ज्ञानेंद्र तिवारी की स्वदेश वापसी को लेकर पूरा परिवार लगातार चिंतित था। उन्होंने कहा कि परिवार को उम्मीद थी कि किसी तरह ज्ञानेंद्र तिवारी भारत लौट आएं, ताकि उनका इलाज अपने देश में और परिजनों की देखरेख में हो सके। देवेंद्र तिवारी ने ज्ञानेंद्र तिवारी की सुरक्षित वापसी में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति परिवार की ओर से आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री की पहल, प्रधानमंत्री कार्यालय से हुआ समन्वय
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गुरुवार देर शाम जारी बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ज्ञानेंद्र तिवारी की स्वदेश वापसी के लिए व्यक्तिगत पहल की। मुख्यमंत्री ने इस मामले में आवश्यक समन्वय के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क किया। बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री की पहल पर प्रधानमंत्री कार्यालय से आवश्यक समन्वय किया गया, जिसके बाद एयर एंबुलेंस से स्वदेश वापसी की व्यवस्था संभव हो सकी।
इस मामले में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह ने भी ज्ञानेंद्र तिवारी की सुरक्षित भारत वापसी और बेहतर उपचार सुनिश्चित कराने के लिए लगातार प्रयास किए। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि शासन-प्रशासन के स्तर पर किए गए समन्वित प्रयासों के फलस्वरूप दुबई से एयर एंबुलेंस के जरिए ज्ञानेंद्र तिवारी को भारत लाने की व्यवस्था सुनिश्चित हो सकी। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए एम्स दिल्ली पहुंचाया गया।
एयर एंबुलेंस से स्वदेश वापसी, तड़के पहुंचे एम्स दिल्ली
ज्ञानेंद्र तिवारी एयर एंबुलेंस से गुरुवार तड़के करीब तीन बजे एम्स दिल्ली पहुंचाए गए। गंभीर मरीज को एयर एंबुलेंस से लाने के लिए विमान में विशेष चिकित्सा व्यवस्था की जाती है, ताकि यात्रा के दौरान भी मरीज की निगरानी और उपचार जारी रह सके। दुबई से दिल्ली तक की इस यात्रा के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार के स्तर पर समन्वय किया गया था। प्रशासनिक स्तर पर की गई इस तैयारी के बाद ही ज्ञानेंद्र तिवारी को सुरक्षित भारत लाया जा सका।
विदेश में गंभीर रूप से बीमार भारतीय नागरिक की स्वदेश वापसी में अक्सर कई स्तरों पर समन्वय की जरूरत होती है। अस्पताल से छुट्टी और यात्रा की चिकित्सा अनुमति, विमान की व्यवस्था, यात्रा के दौरान चिकित्सा दल की मौजूदगी और भारत पहुंचने पर अस्पताल में भर्ती की तैयारी — इन सभी कड़ियों को जोड़ने के बाद ही ऐसी वापसी संभव हो पाती है। ज्ञानेंद्र तिवारी के मामले में यह समन्वय केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार के बीच हुआ।
एम्स दिल्ली में इलाज जारी
एम्स दिल्ली में ज्ञानेंद्र तिवारी का इलाज चिकित्सकों की निगरानी में जारी है। एम्स देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में से एक है, जहां गंभीर मरीजों के उपचार की विशेष व्यवस्था है। ज्ञानेंद्र तिवारी के परिजनों को उम्मीद है कि अब देश में बेहतर उपचार और परिजनों की देखरेख में उनकी हालत में सुधार होगा। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है और परिवार उनके ठीक होने की प्रतीक्षा कर रहा है।
तीन सप्ताह से अधिक समय तक कोमा में रहने के बाद मरीज के ठीक होने में समय लग सकता है। चिकित्सकों की टीम उनकी हालत पर नजर रखे हुए है। परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि ज्ञानेंद्र तिवारी अब भारत में हैं और उनका इलाज देश के बड़े अस्पताल में हो रहा है। अनूपपुर में भी उनके परिजनों और परिचितों ने उनकी सलामती की कामना की है।
परिवार ने जताया आभार
ज्ञानेंद्र तिवारी की स्वदेश वापसी के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है। परिवार के रिश्तेदार देवेंद्र तिवारी ने कहा कि ज्ञानेंद्र तिवारी की स्वदेश वापसी को लेकर पूरा परिवार लगातार चिंतित था। उन्होंने ज्ञानेंद्र तिवारी की सुरक्षित वापसी में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति परिवार की ओर से आभार व्यक्त किया। देवेंद्र तिवारी ने केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार के साथ ही उन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का भी आभार जताया, जिन्होंने इस व्यवस्था में मदद की।
परिवार का कहना है कि बीते तीन सप्ताह से वे ज्ञानेंद्र तिवारी के भारत लौटने की प्रतीक्षा कर रहे थे। विदेश में गंभीर हालत में भर्ती अपने परिजन की चिंता और स्वदेश वापसी की अनिश्चितता ने परिवार को बेचैन कर रखा था। अब ज्ञानेंद्र तिवारी के भारत लौटने से परिवार को बड़ी राहत मिली है और सभी उनके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं।
आगे क्या: इलाज जारी, स्वस्थ होने की उम्मीद
ज्ञानेंद्र तिवारी एयर एंबुलेंस से भारत लौट आए हैं और अब एम्स दिल्ली में उनका इलाज जारी है। आगे उनकी हालत में सुधार चिकित्सकों की निगरानी और उपचार पर निर्भर करेगा। परिवार को उम्मीद है कि देश में बेहतर उपचार मिलने से ज्ञानेंद्र तिवारी धीरे-धीरे ठीक होंगे। परिजन उनके पास रहकर उनकी देखभाल कर सकेंगे, जो विदेश में संभव नहीं था।
यह मामला उन भारतीय परिवारों के लिए भी उम्मीद की किरण है, जिनके परिजन विदेश में गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से ऐसी स्वदेश वापसी संभव हो सकती है, यह ज्ञानेंद्र तिवारी के मामले से साफ हुआ है। मुख्यमंत्री की पहल पर प्रधानमंत्री कार्यालय से समन्वय और जनप्रतिनिधियों के लगातार प्रयासों से यह वापसी संभव हुई। अब सभी की निगाहें एम्स दिल्ली में चल रहे इलाज पर हैं और परिवार ज्ञानेंद्र तिवारी के जल्द स्वस्थ होने की प्रतीक्षा कर रहा है।
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