भोपाल ब्यूरो।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 अक्टूबर को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भोपाल पहुंचे। मुख्यमंत्री ने वहां भर्ती सड़क हादसों के घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से भी बातचीत की और घायलों के इलाज में कोई कमी न रहने के निर्देश दिए।
कोटा सड़क हादसे के घायल AIIMS में भर्ती
17 अक्टूबर को राजस्थान के कोटा में हुए एक सड़क हादसे में मध्यप्रदेश के बैतूल जिले (मुलताई क्षेत्र) के लोग प्रभावित हुए थे। हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने राजस्थान सरकार से समन्वय कर घायलों को बेहतर इलाज के लिए AIIMS भोपाल शिफ्ट किया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के एक्स-पोस्ट के अनुसार, मुलताई क्षेत्र के 5 गांवों के 14 निवासी AIIMS भोपाल में भर्ती थे।
इनमें से मंगलवार को 2 घायलों को डिस्चार्ज कर दिया गया, जबकि 2 और घायलों के बुधवार को डिस्चार्ज होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने डिस्चार्ज हो रहे मरीजों के बारे में भी जानकारी ली और उनके घर तक सुरक्षित पहुंचने की व्यवस्था के निर्देश दिए।
ग्वालियर हादसे के 2 गंभीर घायल एयरलिफ्ट
18 अक्टूबर की तड़के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास श्रद्धालुओं के बीच एक बेकाबू ट्रक घुस गया था, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। इस दर्दनाक हादसे के 2 गंभीर घायलों को मंगलवार शाम एयरलिफ्ट करके AIIMS भोपाल लाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। मुख्यमंत्री ने इन घायलों से भी मुलाकात की और उनके परिजनों को ढांढस बंधाया।
घायलों के परिजनों से संवाद
मुख्यमंत्री ने AIIMS में भर्ती घायलों के परिजनों से अलग-अलग बातचीत की। उन्होंने परिजनों से पूछा कि इलाज में कोई दिक्कत तो नहीं आ रही और अस्पताल प्रशासन से कहा कि दवाओं, जांच और देखभाल में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस कठिन समय में हर परिवार के साथ खड़ी है और इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। परिजनों ने मुख्यमंत्री के आने पर आभार जताया और कहा कि इससे उन्हें हिम्मत मिली है।
राजस्थान सरकार से समन्वय
कोटा हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने तत्काल राजस्थान सरकार से संपर्क साधा था। दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच समन्वय से घायलों को कोटा से भोपाल लाने की व्यवस्था की गई। मुख्यमंत्री ने इस समन्वय की सराहना की और कहा कि आपदा और हादसों के समय राज्यों के बीच ऐसा सहयोग जरूरी होता है, ताकि पीड़ितों को समय पर सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा मिल सके।
AIIMS भोपाल: गंभीर मरीजों का भरोसा
AIIMS भोपाल मध्य भारत के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में से एक है, जहां गंभीर हादसों और जटिल बीमारियों के मरीजों को रेफर किया जाता है। कोटा और ग्वालियर जैसे हादसों के घायलों को यहां लाया जाना इस बात का संकेत है कि प्रदेश सरकार गंभीर मरीजों के लिए सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दे रही है। AIIMS के डॉक्टरों की टीम घायलों के इलाज में जुटी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मुख्यमंत्री के निर्देश: इलाज में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए
मुख्यमंत्री ने AIIMS के डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन से विस्तार से बातचीत की। उन्होंने हर घायल की स्थिति की जानकारी ली — किसकी सर्जरी हुई है, किसे आईसीयू में रखा गया है और किसकी हालत में सुधार हो रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि दवाओं, जांचों और देखभाल में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर बाहर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद भी ली जाए। उन्होंने कहा कि इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी, ताकि किसी परिवार को आर्थिक चिंता न सताए।
परिजनों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था
अस्पताल में भर्ती घायलों के परिजन दूर-दराज के गांवों से आए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि परिजनों के ठहरने और भोजन की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि वे निश्चिंत होकर अपने मरीज की देखभाल कर सकें। अक्सर ऐसे मौकों पर परिजन अस्पताल के बाहर रात गुजारने को मजबूर होते हैं — मुख्यमंत्री ने इस मानवीय पहलू पर विशेष ध्यान देने को कहा।
सड़क हादसों पर सरकार की संवेदनशीलता
पिछले कुछ दिनों में प्रदेश में एक के बाद एक सड़क हादसे हुए हैं — पहले कोटा में बैतूल के यात्रियों का हादसा, फिर ग्वालियर में श्रद्धालुओं पर बेकाबू ट्रक का कहर। मुख्यमंत्री का AIIMS जाकर घायलों से मिलना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। सड़क हादसों में घायल होने वालों के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज सबसे अहम होता है, और सरकार की ओर से घायलों को AIIMS जैसे उच्च संस्थान में शिफ्ट करना इसी सोच का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हादसों के बाद त्वरित चिकित्सा सुविधा और सरकार का सक्रिय समन्वय जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है। कोटा हादसे में राजस्थान सरकार से समन्वय और ग्वालियर हादसे में एयरलिफ्ट की व्यवस्था इसके उदाहरण हैं।
पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मृतकों के परिजनों को मिलने वाली नियमानुसार आर्थिक सहायता की प्रक्रिया तेज की जाए। ग्वालियर हादसे में जान गंवाने वाले 15 लोगों के परिजनों के लिए सरकार पहले ही सहायता की घोषणा कर चुकी है, जिसकी प्रक्रिया अब आगे बढ़ाई जाएगी। साथ ही घायलों के इलाज और पुनर्वास में भी सरकार हरसंभव मदद करेगी। अधिकारियों को कहा गया है कि कागजी कार्यवाही में पीड़ित परिवारों को परेशान न होना पड़े और सहायता राशि समय पर उनके खातों तक पहुंचे।
डिस्चार्ज के बाद फॉलो-अप इलाज पर नजर
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि डिस्चार्ज होने वाले घायलों को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए और उनके फॉलो-अप इलाज पर भी ध्यान दिया जाए। हादसों में गंभीर रूप से घायल मरीजों को अक्सर महीनों तक फिजियोथेरेपी और नियमित जांच की जरूरत होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिस्चार्ज के बाद भी इन मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी सरकार की है और जिला प्रशासन को इसकी निगरानी करनी होगी।
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