सार: धनतेरस के शुभ अवसर पर मुरैना जिले के ग्राम करुआ में मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत स्वामित्व दस्तावेजों के पंजीयन का विशेष अभियान शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को करुआ पहुँचे, दीप जलाकर और रिमोट का बटन दबाकर अभियान की शुरुआत की, हितग्राहियों और पटवारियों से संवाद किया और गाँव के प्राथमिक विद्यालय को माध्यमिक विद्यालय में उन्नत करने की घोषणा भी की।
धनतेरस को खरीदारी और नई शुरुआत का सबसे शुभ दिन माना जाता है, और इस बार मध्य प्रदेश सरकार ने इस दिन को गाँवों के उन परिवारों के नाम कर दिया, जिनके पास मकान या प्लॉट का पट्टा तो है, लेकिन उसकी पक्की रजिस्ट्री नहीं हुई है। मुरैना जिले के बनमोर तहसील के ग्राम करुआ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के अंतर्गत स्वामित्व दस्तावेजों के पंजीयन अभियान में सहभागिता की। कार्यक्रम में लाभान्वित हितग्राही, पटवारी, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
करुआ का यह कार्यक्रम केवल एक गाँव का आयोजन नहीं है। यह धनतेरस पर प्रदेशभर के चयनित गाँवों में चलाए जा रहे विशेष अभियान का केंद्र बिंदु है, जिसमें पात्र हितग्राहियों की संपत्तियों का शत-प्रतिशत पंजीयन कराने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने इस अभियान को प्रदेशभर में गति देने का काम किया है, और करुआ से शुरू हुई यह पहल अब दूसरे जिलों के गाँवों तक पहुँच रही है।
करुआ में क्या हुआ: दीप जलाकर रिमोट बटन दबाया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार, 6 नवंबर को मुरैना जिले के ग्राम करुआ पहुँचे। कार्यक्रम स्थल पर उन्होंने दीप जलाया और रिमोट का बटन दबाकर मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के अंतर्गत स्वामित्व दस्तावेजों के पंजीयन अभियान की औपचारिक शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने हितग्राहियों से बातचीत की और योजना के लाभ के बारे में जानकारी ली।
कार्यक्रम में मंत्री ऐदल सिंह कंसाना, सांसद शिवमंगल सिंह तोमर, चंबल संभागायुक्त मनोज खत्री, कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ और पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा भी मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में करुआ का कार्यक्रम पूरे प्रदेश के लिए एक संदेश बन गया कि ग्रामीण संपत्तियों के दस्तावेजीकरण का काम अब सर्वोच्च प्राथमिकता पर है।
मुरैना प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने भाजपा संभागीय कार्यालय का लोकार्पण भी किया। करुआ कार्यक्रम के बाद जिले में इस लोकार्पण को भी संगठनात्मक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
हितग्राहियों से संवाद, पटवारियों और तहसीलदारों का सम्मान

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह रहा, जब मुख्यमंत्री ने लाभान्वित हितग्राहियों से सीधे संवाद किया। जगदीश यादव, रामचित कुशवाहा, राकेश बाथम, अतर सिंह, सोवरन सिंह और रामखट्याहर सिंह से मुख्यमंत्री ने बात की और उनसे जाना कि रजिस्ट्री मिलने के बाद उनके जीवन में क्या बदलाव आया है। इन परिवारों के लिए रजिस्ट्री का कागज केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि उनके मकान पर कानूनी हक की मुहर है।
मुख्यमंत्री ने पटवारियों मुकेश तिवारी और विवेक सिकरवार से भी संवाद किया। इन पटवारियों ने दो सौ से अधिक रजिस्ट्रियां कराने में अहम भूमिका निभाई थी। कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित किया गया। इसके साथ ही सबलगढ़ तहसीलदार रवीश भदौरिया और मुरैना ग्रामीण तहसीलदार घनश्याम शर्मा को भी उनके कार्य के लिए सम्मान दिया गया।
पटवारियों और तहसीलदारों का सम्मान इस बात का संकेत है कि मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना की सफलता मैदान में काम करने वाले राजस्व अमले की मेहनत पर टिकी है। गाँव-गाँव जाकर सर्वेक्षण करना, पात्रता जाँचना और दस्तावेज तैयार करना कोई छोटा काम नहीं है, और करुआ में इस मेहनत को सार्वजनिक रूप से सराहा गया।
करुआ के स्कूल को बड़ी सौगात: प्राथमिक विद्यालय बनेगा माध्यमिक
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ग्राम करुआ के प्राथमिक विद्यालय को माध्यमिक विद्यालय में उन्नत करने की घोषणा की। गाँव के बच्चों के लिए यह घोषणा रजिस्ट्री अभियान से कम अहम नहीं है। प्राथमिक विद्यालय के माध्यमिक विद्यालय बनने से गाँव के बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और उनकी पढ़ाई बीच में छूटने का खतरा भी कम होगा।
करुआ जैसे गाँवों में स्कूल की उन्नति का सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ता है। जब बच्चे अपने ही गाँव में आठवीं तक पढ़ सकेंगे, तो खासकर बेटियों की पढ़ाई जारी रहने की संभावना बढ़ जाती है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा को ग्रामीणों ने कार्यक्रम की दूसरी बड़ी सौगात के रूप में लिया।
मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना क्या है
मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में स्थित मकानों और अन्य संपत्तियों का सर्वेक्षण किया जाता है। सर्वेक्षण के बाद पात्र हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख और संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। इस योजना का मकसद उन परिवारों को उनकी संपत्ति का वैधानिक अधिकार दिलाना है, जिनके पास दशकों से मकान है, लेकिन उसके पक्के कागज नहीं हैं।
योजना की सबसे बड़ी राहत यह है कि रजिस्ट्री का खर्च राज्य सरकार वहन करती है। रजिस्ट्री के लिए लगने वाला स्टांप शुल्क सरकारी खजाने से जमा किया जाता है, इसलिए गरीब परिवारों को इस काम के लिए अपनी जेब से पैसा नहीं देना पड़ता। यही वजह है कि धनतेरस जैसे शुभ दिन पर इस अभियान को विशेष रूप से चलाया जा रहा है।
स्वामित्व योजना के अंतर्गत अब तक की प्रगति भी उल्लेखनीय है। राज्य शासन के अनुसार प्रदेश में अब तक 17 लाख 9 हजार से अधिक रजिस्ट्रियां पूरी की जा चुकी हैं। पाँच नवंबर तक यह आंकड़ा 15 लाख 98 हजार 46 था, और धनतेरस के विशेष अभियान के साथ इसमें तेज बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। राज्य सरकार ने 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य तय किया है।
आंकड़े और लक्ष्य: 50 लाख निशुल्क रजिस्ट्री का लक्ष्य
करुआ कार्यक्रम में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि यह अभियान कितने बड़े पैमाने पर चल रहा है। राज्य शासन के अनुसार अब तक 17 लाख 9 हजार से अधिक रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं। एक नवंबर को मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के समय यह आंकड़ा 12 लाख 87 हजार था। पाँच नवंबर तक यह बढ़कर 15 लाख 98 हजार 46 हो गया था, और छह नवंबर को धनतेरस के दिन यह 17 लाख 9 हजार से अधिक बताया गया।
लक्ष्य की बात करें तो राज्य सरकार ने 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इससे आगे का लक्ष्य और बड़ा है — प्रदेश में कुल 50 लाख निशुल्क रजिस्ट्रियां कराने का लक्ष्य रखा गया है। यह आंकड़ा बताता है कि सरकार ग्रामीण संपत्तियों के दस्तावेजीकरण को एक बड़े जनकल्याणकारी मिशन के रूप में देख रही है।
धनतेरस पर प्रदेशभर के चयनित गाँवों में मंत्री, सांसद और विधायकों की मौजूदगी में पात्र हितग्राहियों की संपत्तियों का शत-प्रतिशत पंजीयन कराया जा रहा है। करुआ में मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने इस राज्यव्यापी अभियान को गति दी है, और आने वाले दिनों में दूसरे जिलों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।
धनतेरस पर विशेष अभियान क्यों
धनतेरस का दिन भारतीय परंपरा में समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है। सरकार ने इसी भावना को ध्यान में रखकर धनतेरस पर विशेष पंजीयन अभियान चलाने का फैसला किया। इस दिन गाँवों में रजिस्ट्री कराने का मतलब है कि परिवारों को त्योहार पर संपत्ति का पक्का हक मिल रहा है, जो उनके लिए सोने-चाँदी की खरीद से कहीं बड़ी सौगात है।
अभियान के तहत प्रदेश के चयनित गाँवों में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पंजीयन का काम चल रहा है। मंत्री, सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों के गाँवों में इस अभियान से जुड़ रहे हैं, ताकि पात्र परिवारों का पंजीयन शत-प्रतिशत हो सके। करुआ का कार्यक्रम इस राज्यव्यापी अभियान का प्रमुख केंद्र रहा।
मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह विशेष अभियान इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसमें समय-सीमा तय की गई है। 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियों का लक्ष्य और 50 लाख निशुल्क रजिस्ट्रियों का समग्र लक्ष्य इस अभियान को एक निश्चित दिशा दे रहा है।
ग्रामीण परिवारों को क्या फायदा मिलेगा
रजिस्ट्री मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति का वैधानिक अधिकार मिल जाता है। अब तक जिन परिवारों के पास केवल पट्टा था, उनकी संपत्ति पर कानूनी दावेदारी कमजोर मानी जाती थी। पक्की रजिस्ट्री के बाद उनकी संपत्ति पर उनका हक पूरी तरह स्थापित हो जाता है।
दूसरा बड़ा फायदा बैंक ऋण और अन्य वित्तीय सुविधाओं से जुड़ा है। पक्के स्वामित्व दस्तावेज होने पर ग्रामीण परिवार आसानी से बैंक से ऋण ले सकते हैं, जिससे वे अपने मकान की मरम्मत, बच्चों की पढ़ाई या छोटे व्यवसाय के लिए पूँजी जुटा सकते हैं। बिना दस्तावेज के यह रास्ता उनके लिए लगभग बंद था।
तीसरा फायदा यह है कि संपत्ति के उत्तराधिकार और हस्तांतरण में भी आसानी होगी। जब संपत्ति के पक्के कागज होंगे, तो परिवार के भीतर विवाद कम होंगे और संपत्ति का बंटवारा या बिक्री कानूनी तरीके से हो सकेगी। यही वजह है कि सरकार इस योजना को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत करने वाला कदम बता रही है।
आगे क्या: 15 नवंबर तक 20 लाख का लक्ष्य
करुआ कार्यक्रम के बाद अब सबकी निगाहें 15 नवंबर के लक्ष्य पर हैं। राज्य सरकार ने 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य तय किया है, और धनतेरस से शुरू हुआ विशेष अभियान इस दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले दिनों में प्रदेश के बाकी चयनित गाँवों में भी इसी तरह पंजीयन शिविर और कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।
करुआ के हितग्राहियों को मिले दस्तावेज और गाँव के स्कूल की उन्नति की घोषणा, दोनों ही बताते हैं कि सरकार इस अभियान को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखना चाहती। गाँवों में शिक्षा, संपत्ति का हक और वित्तीय सुविधाएँ — इन तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश ही इस अभियान की असली पहचान है।
मुरैना जिले के लिए करुआ कार्यक्रम एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी, पटवारियों और तहसीलदारों का सम्मान और स्कूल की उन्नति की घोषणा — इन सबने मिलकर करुआ के ग्रामीणों को धनतेरस पर दोहरी सौगात दी है। अब देखना यह है कि 15 नवंबर तक 20 लाख का लक्ष्य कितनी जल्दी पूरा होता है और कितने और गाँवों में इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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