धार ब्यूरो
धनतेरस के दिन धार को रेल कनेक्टिविटी की बड़ी सौगात का रास्ता साफ हो गया। टीही-धार रेल ट्रायल सफल रहा — रेलवे सुरक्षा आयुक्त का फाइनल निरीक्षण और स्पीड ट्रायल पूरा हुआ। दोपहर बाद इलेक्ट्रिक इंजन के साथ कोच वाली स्पेशल ट्रेन सायरन बजाते हुए धार स्टेशन पहुंची तो स्टेशन पर मौजूद लोगों के चेहरों पर खुशी छा गई। टीही से धार आते समय ट्रेन करीब 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली, जबकि वापसी में इसने 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ी। अब आयुक्त की रिपोर्ट रेल मंत्रालय को भेजी जाएगी और वहां से हरी झंडी मिलते ही इस नए रेल मार्ग पर नियमित ट्रेन संचालन का रास्ता साफ हो जाएगा। रेलवे अधिकारियों के संकेतों के अनुसार नवंबर के अंत या दिसंबर में इंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा शुरू हो सकती है।
धनतेरस के दिन धार स्टेशन पर ऐतिहासिक पल
शुक्रवार का दिन धार के लोगों के लिए लंबे समय तक याद रहने वाला बन गया। धनतेरस के शुभ अवसर पर जब स्पेशल ट्रेन धार रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पहुंची, तो वहां मौजूद लोगों ने इस पल को अपने मोबाइल में कैद किया और परिवार के साथ ट्रेन की एक झलक पाने के लिए स्टेशन पहुंचे लोग खुशी से तालियां बजाने लगे। धार स्टेशन को इस मौके के लिए पहले से सजाया गया था। प्लेटफॉर्म सहित पूरे स्टेशन परिसर में आकर्षक लाइटिंग की गई थी और इलेक्ट्रिक साइन बोर्ड पर रोशनी से चमकता धार नाम दूर से ही दिखाई दे रहा था। लोगों के लिए यह केवल एक ट्रेन का आना नहीं था, बल्कि बरसों के इंतजार के पूरा होने की ओर बढ़ता कदम था। धार जिले में अब तक रेल सुविधा नहीं थी और यहां के लोग ट्रेन के लिए इंदौर या रतलाम की ओर देखते थे। अब स्टेशन पर कोच वाली ट्रेन के पहुंचने से यह भरोसा मजबूत हुआ है कि जल्द ही धार से सीधी रेल सेवा शुरू होगी। त्योहार के दिन मिली इस खबर को लोग धार के लिए धनतेरस का तोहफा बता रहे हैं। स्टेशन पर मौजूद लोगों का कहना था कि जिस पल का इंतजार पीढ़ियों से था, वह अब आंखों के सामने साकार होता दिख रहा है।
टीही-धार रेल ट्रायल: 110 और 120 की रफ्तार से परखा गया ट्रैक
टीही-धार रेल ट्रायल शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे शुरू हुआ। रेलवे सुरक्षा आयुक्त ई. श्रीनिवास के नेतृत्व में अधिकारियों का दल ट्रॉलियों से धार स्टेशन पहुंचा। इसके बाद स्टेशन, ट्रैक और यात्री सुविधाओं का बारीकी से निरीक्षण किया गया। करीब एक घंटे तक चली जांच के बाद स्पेशल कोच के जरिए स्पीड ट्रायल किया गया। दोपहर दो बजकर पच्चीस मिनट पर इलेक्ट्रिक इंजन के साथ दो डिब्बों वाली ट्रेन सायरन बजाते हुए धार स्टेशन पहुंची। टीही से धार आते समय ट्रेन की गति करीब 110 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि वापसी में 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रायल किया गया। आयुक्त के साथ मुख्य पुल अभियंता भावेश झा, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी विनीत कुमार श्रीवास्तव, रतलाम मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार और उप रेलवे सुरक्षा आयुक्त देव प्रकाश भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने ट्रायल के बाद सकारात्मक संकेत दिए। अब रिपोर्ट के आधार पर नियमित ट्रेन संचालन का निर्णय होगा। इस ट्रायल में ट्रैक की मजबूती, विद्युतीकरण व्यवस्था, सिग्नलिंग और यात्री सुविधाओं की सुरक्षा मानकों के अनुसार जांच की गई। रेलवे सुरक्षा आयुक्त का निरीक्षण किसी भी नई रेल लाइन को यात्री सेवा के लिए खोलने से पहले की सबसे अहम औपचारिकता होता है। उनकी रिपोर्ट के बिना नियमित ट्रेनें नहीं चलाई जा सकतीं। यही कारण है कि शुक्रवार का ट्रायल धार-इंदौर रेल सेवा की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।

अब मंत्रालय की हरी झंडी का इंतजार
टीही-धार रेल ट्रायल के सफल रहने के बाद अब सबकी नजर रेलवे सुरक्षा आयुक्त की रिपोर्ट पर है। यह रिपोर्ट केंद्रीय रेल मंत्रालय को भेजी जाएगी। वहां से हरी झंडी मिलते ही इस नए रेल मार्ग पर नियमित ट्रेन संचालन का रास्ता साफ हो जाएगा। रेलवे अधिकारियों के संकेतों के अनुसार नवंबर के अंत या दिसंबर में इंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा शुरू हो सकती है। हालांकि नियमित सेवा की आधिकारिक तारीख और लोकार्पण को लेकर अभी कोई घोषणा नहीं हुई है। रेलवे के जानकारों का कहना है कि आयुक्त की रिपोर्ट में यदि कोई छोटी कमी सामने आती है तो उसे पहले दूर किया जाएगा और उसके बाद ही सेवा शुरू करने की तारीख तय होगी। शुरुआती दौर में इस मार्ग पर मेमू ट्रेन चलाने की योजना है। मेमू ट्रेनें कम दूरी के लिए उपयुक्त होती हैं और इनसे धार से इंदौर के बीच रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। इंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा शुरू होने से पहले टिकट बुकिंग, समय-सारणी और ठहराव की औपचारिक घोषणा भी होनी है। रेलवे की ओर से इन सभी तैयारियों पर काम चल रहा है। धार के व्यापारियों और विद्यार्थियों का कहना है कि सेवा शुरू होते ही इंदौर आना-जाना सस्ता और आसान हो जाएगा। अभी धार से इंदौर जाने के लिए सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। ट्रेन सेवा शुरू होने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
दो दिन के निरीक्षण का पूरा सफर
टीही-धार रेल ट्रायल के तहत रेलवे सुरक्षा आयुक्त का निरीक्षण दो दिन तक चला। गुरुवार को निरीक्षण के पहले दिन टीही से गुणावद तक करीब 32 किलोमीटर रेलखंड का बारीकी से परीक्षण किया गया। पहले दिन आयुक्त ने करीब तीन किलोमीटर लंबी सुरंग का भी निरीक्षण किया और वहां सुरक्षा व्यवस्था की जांच की। टीही रेलवे स्टेशन पर विधि-विधान से पूजन के बाद निरीक्षण शुरू हुआ था। निरीक्षण दल ने ट्रॉली के माध्यम से सुरंग पार कर गुणावद तक का जायजा लिया। पहले दिन का निरीक्षण सफल रहा। इसके बाद शुक्रवार को निरीक्षण के दूसरे दिन गुणावद से धार स्टेशन तक और फिर टीही से धार के बीच पूरे 47 किलोमीटर रेलखंड पर इलेक्ट्रिक इंजन और कोच के साथ स्पीड ट्रायल किया गया। दो दिन के निरीक्षण में ट्रैक, सिग्नलिंग, विद्युतीकरण और पुलों की सुरक्षा व्यवस्था को परखा गया। निरीक्षण के साथ ही धार स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का भी जायजा लिया गया। प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय, टिकट व्यवस्था और स्टेशन तक पहुंचने वाले मार्ग की तैयारियों को भी देखा गया। रेलवे सुरक्षा आयुक्त के निरीक्षण के दौरान रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया था कि निरीक्षण पूरा होने के बाद ही नियमित सेवा का रास्ता खुलेगा। अब दो दिन का निरीक्षण पूरा हो चुका है और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
2 नवंबर को इंजन का ट्रायल और 2008 से चला आ रहा इंतजार
टीही-धार रेलखंड पर यह पहला मौका नहीं था जब ट्रेन दौड़ी हो। इससे पहले दो नवंबर को निर्माण विभाग ने इस रेलखंड पर इलेक्ट्रिक इंजन चलाकर ट्रैक की क्षमता का परीक्षण किया था। उस दिन दोपहर एक बजकर पैंतीस मिनट पर टीही से निकला इंजन पीथमपुर, सागौर और गुणावद होते हुए धार पहुंचा था। पहला फेरा 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हुआ और टीही से धार पहुंचने में 79 मिनट लगे। इसके बाद अलग-अलग चरणों में गति बढ़ाई गई और वापसी में इंजन की गति 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। चार चरणों में हुए उस ट्रायल में 30, 75, 110 और 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैक और विद्युतीकरण व्यवस्था को परखा गया था। ट्रायल सफल रहा था, हालांकि कुछ स्थानों पर कमियां सामने आई थीं, जिन्हें तीन नवंबर को दूर किया गया। चार नवंबर को पश्चिम रेलवे के प्रधान मुख्य विद्युत अभियंता रजनीश कुमार गोयल ने रेलखंड का निरीक्षण किया और 25 केवी एसी ओवरहेड विद्युत लाइन का परीक्षण किया। इसके बाद पांच और छह नवंबर को रेलवे सुरक्षा आयुक्त का निरीक्षण तय हुआ था। इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना का भूमिपूजन 2008 में हुआ था। टीही से धार के बीच नवनिर्मित सिंगल लाइन रेलखंड की लंबाई 47.14 किलोमीटर है, जबकि इसकी कुल ट्रैक लंबाई 59.76 किलोमीटर है। इस रेलखंड पर करीब 2,957 मीटर लंबी सुरंग भी है। 25 केवी एसी विद्युतीकरण सहित सिविल, सिग्नलिंग और विद्युतीकरण के सभी आवश्यक कार्य पूरे कर लिए गए हैं। धार तक ट्रेन पहुंचने का इंतजार लंबा रहा है, लेकिन अब अंतिम औपचारिकताएं पूरी होने की ओर बढ़ रही हैं।
धार से इंदौर, उज्जैन और भोपाल तक की मांग
ट्रायल के साथ ही धार से ट्रेन सेवा को लेकर मांगें भी सामने आने लगी हैं। इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने धार से कुछ ट्रेनें चलाने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से आग्रह किया है कि शुरुआती दौर में धार-उज्जैन-धार और धार-भोपाल-धार ट्रेनें चलाई जाएं। धार से उज्जैन और भोपाल तक सीधी ट्रेन सेवा की मांग इसलिए भी अहम है क्योंकि इन शहरों में बड़ी संख्या में धार के लोग पढ़ाई, इलाज और काम के लिए आते-जाते हैं। धार से इंदौर के बीच पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र पड़ता है, जहां हजारों लोग काम करते हैं। ट्रेन सेवा शुरू होने से औद्योगिक क्षेत्र के कर्मचारियों और व्यापारियों को भी लाभ होगा। धार के आसपास मांडू जैसा प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जहां देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। रेल कनेक्टिविटी से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विद्यार्थियों के लिए इंदौर में उच्च शिक्षा के कई संस्थान हैं और ट्रेन सेवा से उनका आना-जाना आसान होगा। किसानों और छोटे व्यापारियों को भी अपनी उपज और सामान इंदौर के बड़े बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी। धार जिले के लोग लंबे समय से रेल सेवा की मांग कर रहे थे और अब जब ट्रायल सफल हो गया है, तो उनकी उम्मीदें और बढ़ गई हैं।
आगे क्या होगा
अब आगे की प्रक्रिया टीही-धार रेल ट्रायल की रिपोर्ट से तय होगी। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे केंद्रीय रेल मंत्रालय को भेजा जाएगा। मंत्रालय की अनुमति मिलने पर ही टीही-धार रेलखंड पर यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू हो सकेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार नवंबर के अंत या दिसंबर में सेवा शुरू होने की संभावना है, लेकिन अंतिम तारीख की घोषणा मंत्रालय की हरी झंडी के बाद ही होगी। इसके साथ ही समय-सारणी, ठहराव वाले स्टेशनों और किराए की घोषणा भी की जाएगी। धार स्टेशन पर तैयारियां लगभग पूरी हैं और स्टेशन सजकर तैयार है। ट्रायल के दौरान रेलवे ने लोगों से अपील की थी कि परीक्षण के समय ट्रैक के आसपास न जाएं, क्योंकि ट्रेन तेज रफ्तार से दौड़ रही थी। यह सुरक्षा सलाह 30 अक्टूबर से छह नवंबर तक के ट्रायल कार्यक्रम के दौरान लागू रही। अब जब ट्रायल पूरा हो गया है, तो धार के लोग नियमित सेवा की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो इस साल के अंत तक धार के लोग पहली बार अपने शहर से ट्रेन में सवार होकर इंदौर जा सकेंगे। यह धार के लिए केवल एक नई सुविधा नहीं, बल्कि विकास की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
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