नई दिल्ली ब्यूरो
सार: धनतेरस पर पीएम मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने भगवान धन्वंतरि से सभी के सुख, शांति और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हुए हर घर में उमंग और आनंद का अखंड दीप जलने की मंगलकामना की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी देशवासियों को धनतेरस की शुभकामनाएं दी हैं। योगी आदित्यनाथ ने त्योहार की खरीदारी में ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाने और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के सामान को तरजीह देने का आह्वान किया है।
देशभर में आज 6 नवंबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जा रहा है। धनतेरस के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो गई है। सुबह से ही बाजारों में खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ रही है और घरों में दीये जलाने और पूजा की तैयारियाँ चल रही हैं। धनतेरस पर पीएम मोदी ने सुबह सोशल मीडिया पर संदेश साझा करके देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री के संदेश के साथ ही देश के अन्य नेताओं ने भी धनतेरस की बधाई दी है और सुख-समृद्धि की कामना की है। धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और नई चीजें खरीदना शुभ होता है, इसलिए धनतेरस पर बाजारों में खरीदारी का खास उत्साह देखने को मिलता है।
धनतेरस पर पीएम मोदी का संदेश — धन्वंतरि की कृपा और हर घर में अखंड दीप
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा किए अपने संदेश में लिखा, “सभी देशवासियों को धनतेरस की अनंत शुभकामनाएं। भगवान धन्वन्तरि की दिव्य कृपा से सभी का जीवन सुख, शांति और उत्तम स्वास्थ्य से सदैव आलोकित रहे। हर परिवार में उमंग और आनंद का अखंड दीप प्रज्वलित रहे, यही मंगलकामना है।” प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के साथ भगवान धन्वंतरि को समर्पित एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया है। श्लोक में कहा गया है, “नमामि धन्वन्तरिमादिदेवं सुरासुरैर्वन्दितपादपद्मम्। लोके जरारुग्भयमृत्युनाशं दातारमीशं विविधौषधीनाम्॥” इसका भावार्थ है कि आदिदेव भगवान धन्वंतरि को नमन है, जिनके चरणकमल देवताओं और असुरों द्वारा भी वंदित हैं, जो लोक में रोग, बुढ़ापे और मृत्यु के भय को दूर करने वाले हैं और विभिन्न औषधियों के दाता हैं। प्रधानमंत्री के संदेश में धनतेरस को सिर्फ धन और खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली से जुड़ा पर्व बताया गया है। भगवान धन्वंतरि की पूजा करके लोग अपने और अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। प्रधानमंत्री का यह संदेश धनतेरस के दिन सुबह से ही चर्चा में है और लोग इसे साझा कर रहे हैं।
कौन हैं भगवान धन्वंतरि — आयुर्वेद के देवता और समुद्र मंथन की कथा

हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी कहा जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से धनतेरस के दिन उनकी पूजा की जाती है। आयुर्वेद में भगवान धन्वंतरि को चिकित्सा विज्ञान का जनक माना जाता है और स्वास्थ्य से जुड़े हर कार्य में उनका स्मरण किया जाता है। धनतेरस का त्योहार सिर्फ धन और खरीदारी से ही नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली से भी जुड़ा है। यही वजह है कि इस दिन लोग भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार धनतेरस का दिन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का भी दिन है। इस दिन से जुड़ी परंपराओं में औषधियों और स्वास्थ्य का खास स्थान है। भगवान धन्वंतरि की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है, जिसमें देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया था और उसी दौरान अमृत कलश लेकर भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे।
धनतेरस का महत्व — धनत्रयोदशी से पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत
धनतेरस पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन से दीपावली के त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो आनंदमय समारोहों, पारिवारिक मिलन और पारंपरिक अनुष्ठानों का समय होता है। धनतेरस के दिन लोग भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करते हैं। माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान कुबेर को धन के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और दूसरी नई चीजें खरीदने की परंपरा है। मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदी गई चीजें घर में सुख-समृद्धि लाती हैं। बाजारों में धनतेरस के दिन सोने-चांदी की दुकानों, बर्तन की दुकानों और इलेक्ट्रॉनिक सामान की दुकानों पर खास भीड़ देखने को मिलती है। दीपावली के पांच दिनों में धनतेरस के बाद रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन पर्व और भाई दूज के त्योहार आते हैं। हर दिन की अपनी परंपरा और अपना महत्व है। धनतेरस के दिन से ही घरों में दीये जलाने और सजावट का काम शुरू हो जाता है।
नेताओं की शुभकामनाएं — शाह, योगी, खड़गे और गडकरी ने भी दी बधाई
धनतेरस पर पीएम मोदी के संदेश के बाद देश के अन्य नेताओं ने भी धनतेरस के मौके पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपनी शुभकामनाएं दीं और सभी के लिए समृद्धि और कल्याण की कामना की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी देशवासियों को धनतेरस की शुभकामनाएं दीं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी धनतेरस के शुभ अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और देश में सुख-समृद्धि की कामना की। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी जनता को अपनी शुभकामनाएं दीं। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी अच्छे स्वास्थ्य और खुशी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अलग-अलग दलों के नेताओं की ओर से आई शुभकामनाओं से साफ है कि धनतेरस का पर्व सभी के लिए सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना का अवसर है। नेताओं के संदेशों में त्योहार की खुशी के साथ लोगों के कल्याण की भावना भी झलकती है। धनतेरस जैसे पर्वों पर नेताओं की ओर से शुभकामनाएं देने की परंपरा रही है और इस बार भी सभी ने देशवासियों को बधाई दी है।
‘वोकल फॉर लोकल’ और ओडीओपी — त्योहार की खरीदारी में स्थानीय कारीगरों को सहारा
धनतेरस की शुभकामनाओं के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के कारीगरों और शिल्पकारों के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने नागरिकों से प्रधानमंत्री मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ दृष्टिकोण को अपनाने का आग्रह किया, विशेष रूप से अपने त्योहार की खरीदारी के दौरान एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) की वस्तुओं का समर्थन करने के लिए कहा। योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के निर्यात में वृद्धि का उल्लेख किया, जो 2016-17 में 84,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 के लिए अनुमानित 2 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि स्थानीय शिल्पकारों की क्षमताओं का प्रमाण है। उन्होंने भदोही के कालीन और मैनपुरी के तारकशी जैसे पारंपरिक शिल्पों को प्रदर्शित किया और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लिए उनके प्रचार को प्रोत्साहित किया। ‘वोकल फॉर लोकल’ का आह्वान प्रधानमंत्री ने 2020 में आत्मनिर्भर भारत के आह्वान के साथ दिया था। इसका मकसद है कि लोग स्थानीय उत्पाद खरीदें, ताकि स्थानीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों और कुटीर उद्योगों को सहारा मिले। त्योहारों के मौसम में यह आह्वान और भी अहम हो जाता है, क्योंकि दीपावली जैसे त्योहारों पर खरीदारी सबसे ज्यादा होती है। ओडीओपी योजना के तहत हर जिले के एक खास उत्पाद को पहचान देकर उसे बाजार तक पहुँचाया जाता है। धनतेरस और दीपावली की खरीदारी में अगर लोग स्थानीय उत्पादों को तरजीह दें, तो इसका सीधा फायदा कारीगरों और छोटे कारोबारियों को मिलता है।
धनतेरस पर खरीदारी — सोना-चांदी और बर्तनों की धूम
धनतेरस के दिन खरीदारी की परंपरा सबसे ज्यादा सोने-चांदी और बर्तनों से जुड़ी है। सुबह से ही सराफा बाजारों और ज्वैलरी की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ देखने को मिल रही है। लोग सोने के सिक्के, चांदी के सिक्के, आभूषण और बर्तन खरीद रहे हैं। सोना-चांदी के ताजा भाव आज भी चर्चा में हैं और लोग खरीदारी से पहले भावों की जानकारी ले रहे हैं। धनतेरस पर सोने-चांदी की खरीदारी को शुभ माना जाता है और मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना-चांदी घर में समृद्धि लाता है। बर्तनों की खरीदारी की भी धनतेरस पर खास परंपरा है। पीतल और तांबे के बर्तन, पूजा के सामान और घर के उपयोग की चीजें खरीदने के लिए भी लोग बाजारों में आ रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक सामान और वाहनों की खरीदारी के लिए भी धनतेरस को शुभ दिन माना जाता है। बाजारों में दुकानदारों ने धनतेरस के लिए खास सजावट की है और ग्राहकों के लिए उपहार योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। त्योहारों के मौसम में बाजारों की रौनक देखते ही बनती है।
मध्य प्रदेश में धनतेरस की रौनक — बाजारों में भीड़, दीयों की रोशनी
मध्य प्रदेश में भी धनतेरस की धूम है। इंदौर के सराफा बाजार में धनतेरस से दीपावली तक देर रात तक खरीदारी का सिलसिला जारी रहेगा। सराफा बाजार को दुल्हन की तरह सजाया गया है और दुकानें रात 12 बजे तक खुली रहेंगी। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और प्रदेश के अन्य शहरों में भी बाजार सजे हुए हैं और लोग खरीदारी के लिए उमड़ रहे हैं। दीपावली से पहले नगर निगमों ने भी शहरों में सफाई और रोशनी की खास व्यवस्था की है। इंदौर में दीपावली के लिए सड़कों की मरम्मत, सफाई अभियान और फायर सेफ्टी की तैयारियाँ की गई हैं। त्योहारों के दिनों में शहरों में भीड़ बढ़ जाती है, इसलिए व्यवस्थाओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश के बाजारों में स्थानीय उत्पादों की भी अच्छी मांग है। दीपों, सजावटी सामान और पूजा सामग्री की दुकानों पर भी भीड़ देखने को मिल रही है। धनतेरस के दिन प्रदेश के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ है और लोग भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
आगे क्या — रूप चौदस से गोवर्धन तक पांच दिन का उत्सव
धनतेरस पर पीएम मोदी की शुभकामनाओं के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव का सिलसिला जारी रहेगा। 7 नवंबर को रूप चौदस मनाई जाएगी, 8 नवंबर को दीपावली का मुख्य पर्व है और 9 नवंबर को गोवर्धन पर्व मनाया जाएगा। गोवर्धन पर्व पर प्रदेशभर में गौ-पूजन और पशुपालकों के सम्मान के कार्यक्रम होंगे। दीपावली के दिन घरों में दीये जलाए जाएंगे, माता लक्ष्मी की पूजा होगी और आतिशबाजी की जाएगी। इसके बाद भाई दूज का त्योहार भी है, जो भाई-बहन के स्नेह का पर्व है। पांच दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में हर दिन की अपनी परंपरा है। लोगों से अपील की जाती है कि वे दीपावली के दौरान सुरक्षा का ध्यान रखें, आतिशबाजी करते समय सावधानी बरतें और पर्यावरण का भी ख्याल रखें। त्योहारों के दिनों में बाजारों में भीड़ रहेगी, इसलिए खरीदारी के लिए समय का ध्यान रखना भी जरूरी है।
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