छतरपुर ब्यूरो।
“जब पूरी दुनिया आपका साथ छोड़ दे, तब समझना कि हनुमान जी ने आपका हाथ थाम लिया है।”
— पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह सुविचार अकेलेपन के पल में भरोसा देता है। जब अपने भी साथ छोड़ दें, तब मन टूटने लगता है — पर ऐसे ही पल में भक्ति का सहारा सबसे मजबूत होता है। यह संदेश कहता है कि अकेलापन अंत नहीं है, बल्कि ईश्वर के करीब आने का रास्ता है।

जब सब साथ छोड़ दें, तब क्या करें
इस संदेश का अर्थ यह नहीं है कि लोगों से उम्मीद ही छोड़ दी जाए — बल्कि यह है कि उम्मीद का एकमात्र सहारा लोग ही नहीं हैं। जो व्यक्ति मुश्किल समय में भी धैर्य रखता है और अपनी आस्था को पकड़े रहता है, वह धीरे-धीरे फिर खड़ा हो जाता है। बागेश्वर धाम में बालाजी की भक्ति इसी भरोसे पर टिकी है — मन सच्चा हो तो रास्ता निकल ही आता है।
आज के जीवन में यह संदेश
काम में असफलता मिलना, किसी अपने से दूरी बन जाना, या किसी योजना का बिगड़ जाना — ऐसे पल में अकेलापन घेर लेता है। तब हार मानने के बजाए शांत मन से एक कदम आगे बढ़ाना ही समझदारी है। जो व्यक्ति अपनी भक्ति और मेहनत को नहीं छोड़ता, वह दूसरों का भरोसा भी फिर जीतता है। यही आज का बागेश्वर सुविचार है — साथ छूट जाए तो भी हिम्मत न छोड़ें, क्योंकि भरोसा कभी अकेला नहीं छोड़ता।
