छतरपुर ब्यूरो।
“गिरने वाले को होती होगी तकलीफ, लेकिन ठोकर ही तो चलना सिखाती है।”
— पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह सुविचार असफलता को देखने का नजरिया बदल देता है। गिरना तकलीफ देता है, यह सच है — पर गिरने से ही पता चलता है कि संभलना कैसे है। बच्चा चलना गिरकर ही सीखता है, और जीवन में भी हर ठोकर हमें कुछ नया सिखाकर जाती है।
ठोकर से सीखने का अर्थ
इस संदेश का अर्थ यह नहीं है कि गलती जानबूझकर की जाए — बल्कि यह है कि गलती हो जाने पर हार न मानी जाए। जो व्यक्ति ठोकर से सबक लेकर फिर खड़ा होता है, वह पहले से ज्यादा मजबूत होता है। असफलता का डर अगर काम रोक दे, तो सीखने का रास्ता भी बंद हो जाता है। इसलिए आज का संदेश यही है — गिरने से डरें नहीं, ठोकर से सीखें और फिर आगे बढ़ें।
आज के जीवन में यह संदेश
पढ़ाई में कम अंक आना, काम में कोई योजना बिगड़ना, या किसी रिश्ते में गलतफहमी होना — ये सब ठोकरें ही हैं। इनसे भागने के बजाए इन पर शांति से विचार करना ही समझदारी है। जो व्यक्ति अपनी गलती मानकर सुधार करता है, वह दूसरों का भरोसा भी जीतता है। यही आज का बागेश्वर सुविचार है — ठोकर को अंत न समझें, उसे चलना सीखने का पहला कदम समझें।
