डेस्क रिपोर्ट
सार: दीपावली की अगली सुबह, सोमवार 9 नवंबर 2026 को साल की अंतिम सोमवती अमावस्या पड़ रही है — पीपल पूजा, 108 परिक्रमा, पितृ तर्पण और स्नान-दान के लिए यह दिन परंपरा में विशेष फलदायी माना जाता है, और पूजा व परिक्रमा का मुहूर्त सुबह 06:41 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा।
सोमवती अमावस्या कब है: तिथि और शुभ मुहूर्त
जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। साल 2026 में यह संयोग दो बार बना — पहली बार 15 जून को और दूसरी व अंतिम बार 9 नवंबर को। कार्तिक मास की यह अमावस्या उदया तिथि के आधार पर सोमवार 9 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026, रविवार की सुबह लगभग 11:27 बजे से शुरू होगी और 9 नवंबर, सोमवार को दोपहर लगभग 12:31 बजे तक रहेगी। सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि होने के कारण 9 नवंबर को ही व्रत, स्नान, दान और पूजा का मुख्य दिन माना गया है। पूजा और परिक्रमा का मुहूर्त सुबह 06:41 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय अवश्य मिला लें।
सोमवती अमावस्या का महत्व: पीपल, पितर और सौभाग्य का संयोग
धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवती अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की पूजा और पितरों के निमित्त तर्पण करने से त्रिदेवों की कृपा, अखंड सौभाग्य और पितृदोष से मुक्ति मिलती है। माना जाता है कि पीपल की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और ऊपरी भाग में शिव का वास होता है, इसलिए इस वृक्ष की पूजा को सभी देवताओं की पूजा के समान फलदायी माना गया है।
अमावस्या के स्वामी पितृ देव माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार इस दिन पितर सूक्ष्म रूप से पीपल पर निवास करते हैं, इसलिए उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान और अन्नदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और परिवार को आशीर्वाद प्राप्त होता है। विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना से पीपल की पूजा तथा परिक्रमा करती हैं।
इस बार का संयोग और भी विशेष है, क्योंकि दीपावली के ठीक बाद पड़ने वाली यह अमावस्या लक्ष्मी के आह्वान के तुरंत बाद पितृ आशीर्वाद और सौभाग्य सिद्धि का महासंयोग बनाती है। साल की अंतिम सोमवती अमावस्या होने के कारण भी श्रद्धालु इसे हाथ से नहीं जाने देना चाहते।

पीपल पूजा की विधि: 108 परिक्रमा का क्रम
सोमवती अमावस्या की पूजा सुबह स्नान-ध्यान के बाद इस क्रम से संपन्न की जाती है। संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अथवा घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
पीपल के वृक्ष के पास जाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल, कच्चा दूध और काले तिल मिश्रित अर्घ्य चढ़ाएं। हाथ में अक्षत, पुष्प और फल लेकर 108 परिक्रमा का संकल्प लें। प्रत्येक परिक्रमा के साथ पीपल के तने पर मौली या कच्चा सूत लपेटें। यदि 108 परिक्रमा संभव न हो, तो कम से कम 7 या 21 परिक्रमा अवश्य करें और बाकी संख्या के लिए मखाने, मूंगफली या फल अर्पित करें।
परिक्रमा के दौरान पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। पूजा में रोली, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। अंत में पीपल के वृक्ष के चारों ओर जल चढ़ाकर अपनी मनोकामना की प्रार्थना करें। मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत रखना भी फलदायी होता है — कई श्रद्धालु पवित्र स्नान पूरा होने तक मौन रहते हैं, ताकि मन एकाग्र रहे।
पितृ तर्पण और दान: इस दिन क्या-क्या करें
सोमवती अमावस्या को पितरों के स्मरण का दिन माना गया है। इस दिन श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करते हैं। तर्पण में जल में काले तिल मिलाकर पितरों को अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि इससे कुंडली का पितृदोष शांत होता है और परिवार में सुख-शांति आती है।
दान का भी इस दिन विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करने की परंपरा है। कच्चा दूध, रोली, अक्षत और काले तिल का दान शुभ माना जाता है। मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का भी विधान है — शिव को जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प तथा फल अर्पित किए जाते हैं।
इस दिन सात्विक भोजन करने की परंपरा है। कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और दिनभर भगवान के नाम का जप करते हैं। महामृत्युंजय मंत्र और ओम नमः शिवाय का जप इस दिन विशेष रूप से किया जाता है। शाम को तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।
सोमवती अमावस्या की व्रत कथा: सोना धोबिन की कहानी
सोमवती अमावस्या से जुड़ी लोककथा के अनुसार एक निर्धन धोबिन सोना अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए सोमवती अमावस्या का व्रत रखती थी। कथा के अनुसार उसने पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा की और पितरों के निमित्त दान-पुण्य किया। उसकी निष्ठा और सेवा भाव से प्रसन्न होकर उसे सौभाग्य और संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद मिला।
इसीलिए परंपरा में कहा जाता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से सोमवती अमावस्या पर पीपल पूजा और परिक्रमा करते हैं, उन्हें सोना धोबिन की तरह सौभाग्य और संकटों से मुक्ति मिलती है। यह कथा लोक मान्यता पर आधारित है, और इसका सार यही है कि सेवा, दान और श्रद्धा से किया गया व्रत ही फल देता है। कथा का पाठ पूजा के अंत में करना शुभ माना जाता है।
दीपोत्सव का क्रम: धनतेरस से भाई दूज तक
इस बार का दीपोत्सव छह दिनों का है। धनतेरस शुक्रवार 6 नवंबर को मनाई जाएगी, दीपावली और लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर को होगी, सोमवती अमावस्या सोमवार 9 नवंबर को पड़ेगी, गोवर्धन पूजा मंगलवार 10 नवंबर को और भाई दूज बुधवार 11 नवंबर को मनाई जाएगी। 10 नवंबर को कोई अन्य बड़ा पर्व नहीं है, इसलिए यह उत्सव पांच की जगह छह दिनों का हो गया है।
इस क्रम में सोमवती अमावस्या एक शांत और आत्मचिंतन भरा पड़ाव है — दीपावली की रौनक के बाद पितरों का स्मरण और पीपल पूजा के जरिए परिवार की खुशहाली की कामना। यही कारण है कि दीपोत्सव के इस हिस्से को भी उतनी ही श्रद्धा से मनाया जाता है, जितनी कि लक्ष्मी पूजन को।
क्या करें और क्या न करें: ध्यान रखने योग्य बातें
सोमवती अमावस्या पर कुछ बातों का ध्यान रखना परंपरा के अनुसार जरूरी माना जाता है। इस दिन पीपल के वृक्ष को नुकसान न पहुंचाएं और उसकी पूजा श्रद्धा से करें। तामसिक भोजन से बचें और दिनभर सात्विक आचरण रखें। किसी का अपमान न करें और जरूरतमंदों की मदद करें, क्योंकि दान को इस दिन विशेष पुण्यदायी माना गया है।
पीपल की परिक्रमा करते समय ध्यान रखें कि परिक्रमा की संख्या पूरी हो — यदि 108 संभव न हो तो 7 या 21 करें, लेकिन अधूरी परिक्रमा छोड़कर न जाएं। पूजा का समय दोपहर 12:31 बजे तक ही है, इसलिए पूजा सुबह ही संपन्न कर लें। बुजुर्गों और अस्वस्थ लोगों के लिए 108 परिक्रमा की बाध्यता नहीं है — वे श्रद्धा से कम परिक्रमा करके भी पूजा पूरी कर सकते हैं।
सबसे अहम बात यह है कि इस दिन की गई पूजा और दान का उद्देश्य मन की शुद्धि और परिवार की खुशहाली है। दिखावे से ज्यादा निष्ठा मायने रखती है। अपने शहर के पंचांग से तिथि और मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें, क्योंकि सूर्योदय के समय में अंतर के कारण कुछ मिनटों का फर्क हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
