नई दिल्ली ब्यूरो
सार: दीपावली से दो दिन पहले दिल्ली-NCR की हवा और खराब हो गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 6 नवंबर को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का तीसरा चरण लागू कर दिया है। दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 382 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है, जबकि कई इलाकों में यह गंभीर स्तर को पार कर गया है। निर्माण कार्य बंद, पुरानी गाड़ियों पर पाबंदी और पांचवीं कक्षा तक हाइब्रिड पढ़ाई — जानें नए नियमों का पूरा असर।
दीपावली से दो दिन पहले क्यों लागू हुआ ग्रैप-3
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने शुक्रवार, 6 नवंबर को ग्रैप का तीसरा चरण लागू करने का फैसला किया। आयोग की ग्रैप उप-समिति ने यह निर्णय एहतियाती कदम के तौर पर लिया है, ताकि दीपावली के आसपास हवा की गुणवत्ता और ज्यादा खराब न हो। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। दीपावली इस साल 8 नवंबर को मनाई जा रही है, यानी त्योहार से ठीक दो दिन पहले राजधानी में सख्त पाबंदियां शुरू हो गई हैं। आयोग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया खाते के माध्यम से इस फैसले की जानकारी दी। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने भी राजधानी में ग्रैप-3 लागू होने की घोषणा की और कहा कि आने वाले दिनों में हवा की गति और कम होने का अनुमान है, जिससे प्रदूषक जमीन के पास ही फंसे रहेंगे और वायु गुणवत्ता सूचकांक और ऊपर जा सकता है। यही वजह है कि आयोग ने औसत सूचकांक के गंभीर श्रेणी में पहुंचने का इंतजार किए बिना ही तीसरा चरण लागू कर दिया।
AQI 382 का मतलब — कौन से इलाके सबसे ज्यादा प्रदूषित
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 6 नवंबर को शाम चार बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 382 दर्ज किया गया। यह आंकड़ा शहर भर के 57 निगरानी केंद्रों के 24 घंटे के औसत पर आधारित है। वायु गुणवत्ता सूचकांक के पैमाने पर 301 से 400 के बीच का स्तर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है, और दिल्ली का औसत इसी श्रेणी के ऊपरी हिस्से में पहुंच गया है। एक दिन पहले, 5 नवंबर को यह आंकड़ा 369 था, जबकि 2 नवंबर को यह 324 दर्ज किया गया था। चार दिनों में सूचकांक में 58 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। शहर का औसत भले ही ‘बहुत खराब’ श्रेणी में हो, लेकिन कई इलाकों में हवा पहले ही गंभीर श्रेणी में पहुंच चुकी है। आईआईटी दिल्ली और रोहिणी में सूचकांक 474-474 दर्ज किया गया, पंजाबी बाग में 465, आरके पुरम में 443, आईटीओ में 422, फिरोजशाह रोड पर 420 और इंडिया गेट के पास 403 दर्ज किया गया। इन इलाकों में प्रदूषण का स्तर 401 से 500 के बीच है, जिसे गंभीर श्रेणी माना जाता है। हवा में सबसे ज्यादा असर डालने वाला प्रदूषक पीएम 2.5 रहा, जो सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचने वाले बेहद महीन कणों का समूह है।

ग्रैप-3 के तहत क्या-क्या बंद रहेगा
ग्रैप के तीसरे चरण के साथ राजधानी क्षेत्र में नौ सूत्री कार्ययोजना लागू हो गई है, जिसमें निर्माण, परिवहन, उद्योग और स्कूलों से जुड़े नियम शामिल हैं। पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में धूल उड़ाने वाले सभी निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर रोक लगा दी गई है। सड़कों पर पुरानी गाड़ियों के चलने पर भी सख्त पाबंदी लगाई गई है — बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाले हल्के मोटर वाहन दिल्ली और गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद तथा गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) जिलों में नहीं चल सकेंगे। पुराने हल्के और मध्यम मालवाहक वाहनों पर भी नियम कड़े कर दिए गए हैं, और दिल्ली के बाहर पंजीकृत डीजल वाले वाणिज्यिक वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। औद्योगिक गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। इन पाबंदियों का मकसद दीपावली के दौरान होने वाले अतिरिक्त प्रदूषण को देखते हुए हवा को और खराब होने से रोकना है।
स्कूलों में पांचवीं कक्षा तक हाइब्रिड व्यवस्था
ग्रैप-3 के नियमों का सीधा असर स्कूलों पर भी पड़ा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद तथा गौतम बुद्ध नगर जिलों के स्कूलों को पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए हाइब्रिड व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। हाइब्रिड व्यवस्था का मतलब है कि जहां ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां बच्चे घर से भी पढ़ सकेंगे और स्कूल में भी आ सकेंगे। छोटे बच्चों को प्रदूषित हवा से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है, क्योंकि प्रदूषण का असर बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। स्कूलों को यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करनी है।
ग्रैप के चार चरण कैसे काम करते हैं
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान एक आपातकालीन प्रदूषण-नियंत्रण व्यवस्था है, जो दिल्ली-NCR में लागू होती है। इसके चार चरण हैं और हवा जितनी खराब होती जाती है, पाबंदियां उतनी ही सख्त होती जाती हैं। पहला चरण तब लागू होता है जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 201 से 300 के बीच यानी ‘खराब’ श्रेणी में पहुंचता है। दूसरा चरण 301 से 400 के बीच यानी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में लागू होता है। तीसरा चरण आम तौर पर 401 से 450 के बीच यानी ‘गंभीर’ श्रेणी में लागू किया जाता है, जबकि चौथा चरण तब आता है जब सूचकांक 450 से ऊपर चला जाता है, जिसे ‘गंभीर से भी बदतर’ श्रेणी कहा जाता है। इस बार तीसरा चरण औसत सूचकांक 382 पर ही लागू कर दिया गया है, जो सामान्य नियम से अलग है — आयोग ने मौसम और प्रदूषण के पूर्वानुमान के आधार पर एहतियात के तौर पर यह फैसला लिया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और क्षेत्रीय सरकारों के साथ मिलकर इस व्यवस्था का संचालन करता है।
2 नवंबर को ग्रैप-2 और अब तक का सफर
इस मौसम में प्रदूषण के खिलाफ कदमों की शुरुआत 2 नवंबर को हुई थी, जब दिल्ली का दैनिक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 324 तक पहुंचने पर ग्रैप का दूसरा चरण लागू किया गया था। उस समय भी हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में थी। चार दिनों के भीतर हालात और बिगड़ गए और सूचकांक 382 तक पहुंच गया, जिसके बाद आयोग को तीसरा चरण लागू करना पड़ा। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में भी दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में पहुंची थी और तब ग्रैप का पहला चरण लागू किया गया था। इस तरह करीब दो हफ्तों के भीतर राजधानी में प्रदूषण-नियंत्रण के तीनों चरण लागू हो चुके हैं। हर चरण के साथ पाबंदियां बढ़ती गई हैं — पहले चरण में धूल रोकने और कचरा जलाने पर रोक जैसे कदम थे, दूसरे चरण में वाहनों और निर्माण पर कुछ पाबंदियां लगीं, और अब तीसरे चरण में निर्माण पूरी तरह बंद और पुरानी गाड़ियों पर रोक जैसे सख्त कदम उठाए गए हैं।
दीपावली के आसपास हवा और खराब होने का अनुमान
मौसम और प्रदूषण के पूर्वानुमान से आने वाले दिनों की तस्वीर और चिंताजनक दिख रही है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के पूर्वानुमान के अनुसार, 7 से 9 नवंबर के बीच, यानी दीपावली के आसपास, दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में रह सकती है। शनिवार से हवा की गति और कम होने का अनुमान है, जिससे प्रदूषक जमीन के पास ही ठहरे रहेंगे और हवा में उनका घनत्व बढ़ेगा। दीपावली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं भी इसमें जुड़ सकता है, जिससे सूचकांक और ऊपर जा सकता है। यही वजह है कि आयोग ने त्योहार से पहले ही सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं। मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों की नजर अगले कुछ दिनों के आंकड़ों पर रहेगी, और उसी के आधार पर तय होगा कि पाबंदियां कब तक जारी रहेंगी या इन्हें और सख्त करना पड़ेगा।
आगे क्या होगा — लोगों के लिए क्या सलाह है
ग्रैप के हर चरण को वायु गुणवत्ता सूचकांक के घटने-बढ़ने के हिसाब से लागू या हटाया जाता है, इसलिए आने वाले दिनों में हालात के अनुसार पाबंदियों में बदलाव हो सकता है। अगर हवा में सुधार होता है तो चरण नीचे लाए जा सकते हैं, और अगर हालात और बिगड़ते हैं तो चौथे चरण तक भी बात जा सकती है। इस बीच लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे सुबह के समय बाहर टहलने और कसरत से बचें, क्योंकि सुबह के घंटों में प्रदूषण सबसे ज्यादा रहता है। घर से बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में कम समय बिताना फायदेमंद हो सकता है। बच्चे, बुजुर्ग और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोग खास तौर पर सावधानी बरतें। दीपावली के मौके पर भी लोगों से अपील की जा रही है कि वे प्रदूषण कम करने में सहयोग करें, ताकि त्योहार के बाद हवा की स्थिति और ज्यादा खराब न हो।
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