भोपाल ब्यूरो
भोपाल में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 23,228 करोड़ रुपये की योजनाओं की निरंतरता को मंजूरी दी गई। वर्ष 2031 तक चलने वाली इन योजनाओं में अधोसंरचना निर्माण, सिंचाई, स्वास्थ्य और वन विभाग के प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं। बैठक में स्वदेशी अपनाने पर जोर, धान उपार्जन के लिए पंजीयन की तारीख 4 नवंबर तक बढ़ाने, 15 नए सैटेलाइट टाउन विकसित करने और बिरसा मुंडा जयंती को प्रदेशभर में भव्य रूप से मनाने का फैसला भी हुआ। अगली कैबिनेट बैठक 18 नवंबर को गांधीसागर में डेस्टिनेशन कैबिनेट के रूप में होगी।
बैठक में क्या-क्या तय हुआ
मध्यप्रदेश के मंत्रिमंडल की बैठक मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को भोपाल स्थित मंत्रालय में हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की। बैठक के बाद मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी एमएसएमई मंत्री चैतन्य कश्यप ने मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि यह बैठक दीपावली से पहले हुई, इसलिए बैठक की शुरुआत में प्रदेशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं दी गईं और त्योहार के मौके पर कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में कई योजनाओं की निरंतरता पर फैसला लिया गया। सरकार का कहना है कि जिन योजनाओं का काम चल रहा है, उन्हें बीच में रुकने नहीं दिया जाएगा और उनके लिए धन की व्यवस्था पहले से तय कर दी गई है। इसी सोच के तहत 2031 तक चलने वाली योजनाओं के लिए बड़ी राशि की स्वीकृति दी गई है। बैठक में यह भी तय हुआ कि विकास कार्यों की गति को बनाए रखने के लिए विभागों को समयबद्ध तरीके से काम करना होगा। मंत्रिमंडल की बैठक में स्वदेशी को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीदारी में अधिक से अधिक स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता दी जाए। यह अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के अनुरूप है, जिसमें लोगों से देश में बने सामान को अपनाने का आग्रह किया गया है। बैठक में मेक इन इंडिया पर भी जोर दिया गया, ताकि प्रदेश में उत्पादन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिले।
23,228 करोड़ रुपये कहां-कहां लगेंगे
बैठक में 23,228 करोड़ रुपये की योजनाओं की निरंतरता को मंजूरी दी गई। वर्ष 2031 तक संचालित होने वाली इन योजनाओं में मुख्यमंत्री अधोसंरचना निर्माण योजना, जल संसाधन विभाग की चार परियोजनाएं, स्वास्थ्य विभाग के अस्पताल और वन विभाग के प्रशिक्षण केंद्रों के लिए राशि उपलब्ध कराई गई है। सरकार का तर्क है कि एक साथ इतनी बड़ी राशि की स्वीकृति से योजनाओं के बीच में अटकने की आशंका खत्म होगी और काम लगातार आगे बढ़ेगा। आंकड़े को लेकर एक स्पष्टीकरण भी जरूरी है। दो जगहों पर यह राशि 23,228 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि एक अन्य जगह पर 23,288 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की निरंतरता की मंजूरी का उल्लेख है। इस खबर में 23,228 करोड़ रुपये का आंकड़ा इसलिए इस्तेमाल किया गया है, क्योंकि दो स्वतंत्र जगहों पर यही आंकड़ा दर्ज है। योजनाओं का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा आने के बाद आंकड़ों की अंतिम पुष्टि हो सकेगी। अधोसंरचना निर्माण योजना के तहत प्रदेश के शहरों और कस्बों में सड़कों, पुल-पुलियों और सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण को गति मिलेगी। सरकार का मानना है कि अच्छी सड़कें और बुनियादी सुविधाएं ही किसी क्षेत्र के विकास की पहली शर्त होती हैं। इसी तरह वन विभाग के प्रशिक्षण केंद्रों के लिए राशि मिलने से वन क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के प्रशिक्षण का काम भी आगे बढ़ेगा।

सिंचाई और अधोसंरचना को गति
जल संसाधन विभाग की चार परियोजनाओं को निरंतरता देने का फैसला किसानों और सिंचाई के लिहाज से सबसे अहम माना जा रहा है। बैठक में बताया गया कि जल संसाधन विभाग में चार जगहों के रुके हुए कार्य अब तेजी से पूरे किए जाएंगे। पन्ना, विदिशा जिले की लटेरी परियोजना और मऊगंज-सीधी-सिंगरौली क्षेत्र में सिंचाई सुविधा के लिए योजना को निरंतरता दी जाएगी। इन परियोजनाओं के पूरे होने से खेतों तक पानी पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी। सिंचाई सुविधा बढ़ने का सीधा फायदा किसानों को मिलेगा, क्योंकि फसलों के लिए समय पर पानी मिलना उत्पादन की सबसे बड़ी जरूरत है। सरकार का कहना है कि सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता देने से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठेगा। बैठक में सिंहस्थ को लेकर भी चर्चा हुई। चर्चा में यह बात सामने आई कि सिंहस्थ से पहले क्षिप्रा नदी में जल पूरी तरह से भरा रहे, इसके लिए जरूरी इंतजाम किए जाएं। सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन के दौरान नदी में जल की उपलब्धता श्रद्धालुओं और आयोजन की व्यवस्था दोनों के लिए अहम मानी जाती है, इसलिए इस विषय पर बैठक में विशेष ध्यान दिया गया।
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा
स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी बैठक में अहम फैसला हुआ। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नए अस्पताल की स्थापना के लिए 610 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ निरंतरता की स्वीकृति दी है। इसका मतलब है कि नए अस्पतालों के निर्माण का काम अब बिना रुकावट आगे बढ़ सकेगा। स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों के लिए राशि उपलब्ध कराने से प्रदेश में इलाज की सुविधाओं का विस्तार होगा। प्रदेश में अस्पतालों की संख्या और उनकी क्षमता बढ़ने से मरीजों को अपने जिले या संभाग में ही बेहतर इलाज मिल सकेगा। अभी कई मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। नए अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से यह दबाव कम होगा और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी राहत मिलेगी। स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा का विस्तार भी इससे जुड़ा हुआ है। नए अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की जरूरत होगी, जिससे चिकित्सा शिक्षा से जुड़े युवाओं के लिए भी अवसर बढ़ेंगे। सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता मजबूत होगी।
किसानों के लिए फैसले
किसानों से जुड़े दो फैसले बैठक में खास तौर पर सामने आए। पहला फैसला धान उपार्जन से जुड़ा है। कैबिनेट में बताया गया कि धान उपार्जन के लिए किसानों के पंजीयन की तारीख बढ़ाकर 4 नवंबर कर दी गई है। इससे वे किसान भी पंजीयन करा सकेंगे, जो किसी कारण से अब तक पंजीयन नहीं करा पाए थे। धान की खरीदी के लिए पंजीयन अनिवार्य होता है, इसलिए तारीख बढ़ने से किसानों को राहत मिलेगी। दूसरा फैसला नीलगाय और हिरण से फसलों को होने वाले नुकसान से जुड़ा है। किसानों की समस्या यह थी कि नीलगाय फसलों को नुकसान पहुंचाती हैं। इसे लेकर सरकार ने अफ्रीका से विशेषज्ञों को बुलाया। उन्होंने बोमा पद्धति से करीब 2 हजार हिरण और नीलगाय पकड़कर विभिन्न अभयारण्यों में छोड़ा है। पहले यह पद्धति अफ्रीका में ही होती थी, लेकिन अब इस पद्धति का इस्तेमाल प्रदेश में भी किया जा रहा है। बैठक में यह भी बताया गया कि इस पद्धति की ट्रेनिंग अफ्रीका के विशेषज्ञों ने दी है। नीलगाय और हिरण को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने से किसानों की फसलों को नुकसान कम होगा और वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। सरकार का कहना है कि किसान और वन्यजीव दोनों के हितों को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया गया है।
स्वदेशी और दीपावली का संदेश
बैठक में स्वदेशी अपनाने का संदेश सबसे प्रमुखता से सामने आया। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और लोगों से अपील की कि दीपावली की खरीदारी में स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता दें। सरकार का कहना है कि जब लोग देश में बने सामान खरीदते हैं, तो उसका फायदा स्थानीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों और उद्योगों को मिलता है। इससे प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। मेक इन इंडिया पर जोर देने का मतलब यह भी है कि प्रदेश में उत्पादन बढ़े और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों। सरकार का मानना है कि स्वदेशी की अपील सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम है। दीपावली जैसे त्योहार पर जब खरीदारी बढ़ती है, तब स्वदेशी वस्तुओं की मांग बढ़ने से स्थानीय बाजार को सीधा लाभ मिलता है। बैठक में प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को संपत्ति की रजिस्ट्री निशुल्क कराने की प्रगति पर भी चर्चा हुई। अब तक करीब 15 लाख रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। सरकार ने 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य रखा है। योजना के तहत करीब 60 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि जिन गांवों में 100 प्रतिशत रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं, वहां धनतेरस पर दीपावली मनाई जाए।
बिरसा मुंडा जयंती और सैटेलाइट टाउन
बैठक में 15 नवंबर को जननायक बिरसा मुंडा की जयंती को प्रदेशभर में भव्य रूप से मनाने का फैसला हुआ। इसके लिए प्रदेश में तीन स्थानों पर बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। तैयारियों को लेकर 5 नवंबर को मुख्यमंत्री निवास पर अहम बैठक होगी। बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है और प्रदेश में जनजातीय समुदाय की बड़ी आबादी है, इसलिए इस आयोजन को सरकार विशेष महत्व दे रही है। शहरी विकास से जुड़ा एक और बड़ा फैसला बैठक में सामने आया। प्रदेश में 15 नए सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इंदौर में आयोजित शहरी विकास कार्यक्रम में भी इसका उल्लेख किया था। सरकार का उद्देश्य शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करना और आसपास के क्षेत्रों में बेहतर शहरी सुविधाएं विकसित करना है। सैटेलाइट टाउन बनने से बड़े शहरों के आसपास नियोजित बसाहट विकसित होगी, जहां सड़क, पानी, बिजली और अन्य सुविधाएं पहले से तय योजना के अनुसार उपलब्ध होंगी। सैटेलाइट टाउन का विचार इसलिए भी अहम है, क्योंकि प्रदेश के बड़े शहरों में आबादी तेजी से बढ़ रही है। इससे आवास, यातायात और बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ता है। नए नियोजित शहरों के विकास से यह दबाव कम होगा और लोगों को शहरों के पास ही बेहतर सुविधाओं के साथ रहने का विकल्प मिलेगा।
अगली कैबिनेट गांधीसागर में और आगे क्या
बैठक में यह भी तय हुआ कि अगली कैबिनेट बैठक 18 नवंबर को गांधीसागर में प्रस्तावित है। यह डेस्टिनेशन कैबिनेट होगी। इससे पहले राजबाड़ा और भोपाल के पास जगदीशपुर में कैबिनेट की बैठकें हो चुकी हैं। डेस्टिनेशन कैबिनेट का मतलब है कि मंत्रिमंडल की बैठक किसी विशेष स्थान पर आयोजित की जाती है, ताकि उस क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर सीधे चर्चा हो सके। गांधीसागर में होने वाली बैठक में किसान कल्याण वर्ष और उद्योग वर्ष को ध्यान में रखते हुए कृषि और औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दों पर विशेष फोकस रहेगा। सरकार ने वर्ष 2026 को किसान वर्ष के रूप में मनाने की बात कही है और इस दौरान किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरे वर्ष विशेष कार्य किए गए हैं। गांधीसागर क्षेत्र कृषि और सिंचाई के लिहाज से अहम माना जाता है, इसलिए वहां बैठक का आयोजन इस दिशा में एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। बैठक में भोपाल में होने वाली एक रैली का भी उल्लेख हुआ। बताया गया कि भोपाल में होने वाली रैली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी इसमें मौजूद रहेंगे। रैली में प्रदेशभर से आम लोगों और महिलाओं की भागीदारी रहेगी। इस मौके पर भी लोगों से स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की अपील की गई है। कुल मिलाकर 3 नवंबर की कैबिनेट बैठक में विकास कार्यों की निरंतरता, किसानों की राहत, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, शहरी विकास और स्वदेशी के संदेश पर एक साथ फैसले हुए। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन फैसलों का अमल जमीन पर कितनी तेजी से होता है और 18 नवंबर को गांधीसागर में होने वाली बैठक में किन नए प्रस्तावों पर मुहर लगती है।
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