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मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: 3,378 करोड़ की सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी, 12 जिलों में कम बारिश पर किसानों को राहत की तैयारी

मोहन कैबिनेट बैठक: सांकेतिक चित्र — सिंचाई नहर और हरे खेत मोहन कैबिनेट बैठक: सांकेतिक चित्र — सिंचाई नहर और हरे खेत

भोपाल ब्यूरो

सार: मोहन कैबिनेट बैठक में मंगलवार को प्रदेश के किसानों और विकास से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए। 3,378 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, कम बारिश वाले 12 जिलों में किसानों को राहत देने की तैयारी पर चर्चा हुई, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के लिए आर्थिक अपराध अन्वेषण विभाग को 345 करोड़ रुपये दिए गए और सामाजिक न्याय की योजनाओं के लिए 651 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।

मध्यप्रदेश के मंत्रालय में मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक हुई। इस बैठक में सिंचाई, सामाजिक न्याय, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और किसानों की स्थिति सहित प्रदेश के विकास और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद मंत्री चैतन्य कश्यप ने सरकार की ओर से लिए गए फैसलों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में किसानों की बोवनी के रकबे का आकलन केंद्र सरकार के निर्धारित मानकों के आधार पर किया जा रहा है और जिन जिलों में बारिश कम हुई है, वहां की परिस्थितियों का अलग-अलग आकलन किया जाएगा। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि किसानों को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

मोहन कैबिनेट बैठक में लिए गए बड़े फैसले

मोहन कैबिनेट बैठक में इस बार किसानों, पारदर्शिता और कल्याणकारी योजनाओं पर खास जोर रहा। बैठक में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की योजनाओं सहित 3,378 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। आर्थिक अपराध अन्वेषण से जुड़े विभाग के लिए 345 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग की योजनाओं के लिए 651 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। इसके अलावा शिक्षा विभाग और किसान कल्याण विभाग के प्रस्तुतिकरण पर भी चर्चा हुई। इंदौर में आयोजित सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दौरान 5,800 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति मिलने का भी बैठक में उल्लेख किया गया। सेवा संकल्प अभियान के तहत पिछले एक महीने में किए गए कार्यों की समीक्षा भी की गई।

3,378 करोड़ की सिंचाई परियोजनाएं: किन जिलों को मिलेगा लाभ

बैठक का सबसे बड़ा फैसला सिंचाई से जुड़ा रहा। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की चार योजनाओं सहित कुल 3,378 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। विभिन्न योजनाओं को निरंतर जारी रखने के साथ छिंदवाड़ा, सागर, सिवनी और मुरैना से जुड़ी योजनाओं के लिए भी यह राशि मंजूर की गई है। इन परियोजनाओं से प्रदेश के उन इलाकों में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा, जहां अब तक पानी की कमी के कारण खेती बारिश पर निर्भर रही है। सिंचाई का रकबा बढ़ने से किसानों को एक से अधिक फसल लेने में मदद मिलेगी और उनकी आय बढ़ाने का रास्ता खुलेगा। प्रदेश सरकार ने सिंचाई का कुल रकबा बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है और नई परियोजनाएं उसी दिशा में एक और कदम हैं। हाल के दिनों में धार जिले में नर्मदा से जुड़ी माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना का लोकार्पण भी इसी क्रम में हुआ था, जिससे 260 गांवों के हजारों हेक्टेयर खेतों तक पानी पहुंचने का रास्ता बना है।

कम बारिश वाले 12 जिले: किसानों को राहत की तैयारी

बैठक में प्रदेश के 12 जिलों में अल्पवर्षा की स्थिति और उससे जुड़े मापदंडों पर विस्तार से चर्चा हुई। किसान कल्याण वर्ष के तहत अब तक किए गए कार्यों का प्रस्तुतिकरण भी बैठक में दिया गया। जिन जिलों में कम बारिश दर्ज की गई है, उनमें अलीराजपुर, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार, शाजापुर और पांढुर्ना के नाम सामने आए हैं। अलीराजपुर में सबसे अधिक कमी दर्ज की गई है, जहां सामान्य से करीब 52 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। सरकार ने कहा है कि इन जिलों की स्थिति का जिलेवार आकलन किया जाएगा और उसी आधार पर किसानों को सहयोग दिया जाएगा। कम बारिश वाले जिलों में पीने के पानी के साथ किसानों पर खास ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए कैबिनेट में विशेष सहायता का प्रस्ताव पारित किया गया है और सरकार इन जिलों को सूखा प्रभावित घोषित करने की तैयारी कर रही है। औपचारिक घोषणा से पहले हर जिले के आंकड़ों को केंद्र के मानकों से मिलाया जाएगा, ताकि राहत सही लोगों तक पहुंचे।

भ्रष्टाचार पर सख्ती: आर्थिक अपराध अन्वेषण विभाग को 345 करोड़

भ्रष्टाचार पर कार्रवाई को लेकर भी बैठक में कड़ा रुख दिखा। सरकार की ओर से बताया गया कि आर्थिक अपराध अन्वेषण से जुड़े विभाग के लिए 345 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को छोड़ा नहीं जाएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीक की मदद से गड़बड़ियों की पहचान की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जेम पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। नगरीय निकायों सहित विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली अनियमितताओं पर निगरानी रखी जा रही है। बैठक में जानकारी दी गई कि नगरीय प्रशासन से जुड़े मामलों में 392 लोगों पर कार्रवाई की गई है। मंत्री चैतन्य कश्यप ने ब्रीफिंग के दौरान कहा कि एक मामले में सरकार ने स्वयं कार्रवाई की पहल की है और संबंधित विषय पर सरकार का पक्ष साफ है। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में हर तरह की गड़बड़ी पर नजर रखें।

सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन कल्याण को 651 करोड़

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग की योजनाओं के लिए 651 करोड़ रुपये की स्वीकृति बैठक का एक और अहम फैसला है। इन योजनाओं का लाभ समाज के कमजोर वर्गों, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचता है। राशि की स्वीकृति से पेंशन, सहायता और कल्याण से जुड़ी योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि कल्याणकारी योजनाओं में कोई रुकावट नहीं आने दी जाएगी और लाभार्थियों तक मदद समय पर पहुंचाई जाएगी। शिक्षा विभाग और किसान कल्याण विभाग के प्रस्तुतिकरण में भी योजनाओं की प्रगति और आगे की तैयारी पर चर्चा हुई, ताकि योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचे।

दीपावली पर माटी कला को बढ़ावा, स्वदेशी की पहल

दीपावली के अवसर पर पारंपरिक माटी कला को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में पहल करने के निर्देश दिए हैं। लोगों से मिट्टी के दीये खरीदने और स्थानीय कुम्हारों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की मंशा के अनुरूप पारंपरिक कारीगरों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे। माटी कला से जुड़े कारीगरों को दीपावली के मौके पर सीधा बाजार मिलने से उनकी आमदनी बढ़ेगी और पारंपरिक कला को भी सहारा मिलेगा। मंत्रियों से कहा गया है कि वे अपने जिलों में मिट्टी के उत्पादों की बिक्री और प्रचार के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास करें।

स्थापना दिवस तीन दिन, सेमीकंडक्टर और अन्य फैसले

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस एक नवंबर से तीन दिन तक मनाया जाएगा। सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती और भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर भी प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्थापना दिवस के कार्यक्रमों में प्रदेश की संस्कृति, विकास और जनभागीदारी को दिखाने की तैयारी है। इसके साथ ही दिसंबर में प्रस्तावित कार्यक्रमों पर भी बैठक में चर्चा हुई। इंदौर में आयोजित सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दौरान 5,800 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति मिलने का उल्लेख बैठक में किया गया, जो प्रदेश में निवेश और रोजगार की दिशा में अहम माना जा रहा है। सेवा संकल्प अभियान के तहत पिछले एक महीने में किए गए कार्यों और पिछले दो सप्ताह में प्रदेश को मिले पुरस्कारों का भी बैठक में जिक्र हुआ।

आगे क्या होगा: किसानों के लिए अगला कदम

बैठक के फैसलों के बाद अब अगला कदम जिलों के आकलन और योजनाओं के क्रियान्वयन का होगा। कम बारिश वाले जिलों में बोवनी के रकबे और वर्षा के आंकड़ों का मिलान केंद्र के मानकों से किया जाएगा। इसके बाद सूखा प्रभावित घोषित करने और विशेष सहायता देने की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सिंचाई परियोजनाओं के लिए स्वीकृत राशि से जुड़े कामों की निगरानी भी की जाएगी, ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हों और किसानों को पानी का लाभ जल्द मिले। भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के लिए तकनीक आधारित निगरानी और जेम पोर्टल के उपयोग को और मजबूत किया जाएगा। सामाजिक न्याय की योजनाओं के लिए स्वीकृत राशि का उपयोग लाभार्थियों तक सीधी मदद पहुंचाने में होगा। दीपावली से पहले माटी कला को बढ़ावा देने के लिए मंत्रियों के जिलों में स्थानीय स्तर पर तैयारियां शुरू हो जाएंगी। कुल मिलाकर इस बैठक में किसानों की राहत, पारदर्शिता, कल्याण और विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश दिखी है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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